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यात्रा…..वो भी अंतिम……!!!!

June 17, 2021

Shanky❤Salty

सही समझे
मृत्यु
हाँ मैं मृत्यु के बारे में ही लिख रहा हूँ
वो मृत्यु जो मुझे मार नहीं सकती है
पर हाँ आपको ज़रूर मार सकती है
ग़र आप स्वयं को जीवन समझते हैं तो
मृत्यु उसे ही स्वीकारता है
जो जन्म को स्वीकारता है

ना तो मेरा जन्म हुआ है
ना ही मेरी मृत्यु हो सकती है
ये शरीर का जन्म होता है
तो मृत्यु भी उसी की हो सकती है
हमारी नहीं, कभी नहीं

स्वयं नाथ जी भी हमें नहीं मार सकते हैं
यक़ीनन वो सर्वसमर्थ हैं
पर हमें मारने में कभी भी नहीं
अपनी उर्जा को पहचानों
वो कहते हैं ना अज्ञानता का जीवन किसी मृत्यु से कम नहीं है

महेंदी के पत्ते में ही उसकी लाली छिपी होती है
एक बीज में ही जन्म और मृत्यु छिपा है
मृत्यु एक वस्त्र बदलने की प्रक्रिया है
बस और कुछ नहीं

अर्थ स्पष्ट है मेरे शीर्षक का
इस जीवन की यात्रा
अंतिम होनी चाहिए
कोई कितना भी बुलाए
लौट के नहीं आना है
यह जीवन अनमोल है
व्यर्थ ना गवाओ

मोक्ष की उस स्थिति को जान लो
मर्जी तुम्हारी है
सुख-दुख कि चक्की में पिसना है
या उस चक्की के कील से लग कर
और अपनी यात्रा को अंतिम करना है

अब अलविदा कहता हूँ
कुछ पल के लिए
जो इस आत्मज्ञान से निकला वो तो डूब गया
और जो इस आत्मज्ञान में डूबा वो तो हो गया पार…!!


Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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मजबूत रिश्ते…….!!!!

May 14, 2021

Shanky❤Salty

ये रिश्ता बड़ा मजबूत है
बेश़क हमने ही चुना है
जमाने ने जड़ें जरूर काट दी हैं
पर मजबूती से दोस्तों ने थामा ही है

कुछ नए मिलें हैं
तो कुछ पुराने बाकी हैं
शब्दों का मेल है
दोस्त मेरे सच में अनमोल हैं

बारिश का मौसम आ चुका है
तुम भीगना ज्यादा मत इसमें
पर गलतफहमियों की धुल ग़र जमीं हो
तो उसे धो जरूर देना मेरे यार

वो कहतें है ना
यादें बहुत आती है
पर वो वक्त नहीं आ पता है
यकीनन हम झगड़ते बहुत थे
पर दुआओं में भी हम ही थे

वक्त की धुंध में बहुत कुछ छुप जाता है
पर आँखों से ओझल नहीं हो पता है
नासमझ जरूर हूँ
पर समझाना सिर्फ तुम्हीं को आता है

सुख हो या दुख हो
कुछ ने सीढ़ीयों सा इस्तेमाल किया
पर कुछ अभी भी दोस्ती का फ़र्ज़ निभा रहें
हर परेशानीयों का उपाए है उनके पास

दोस्त हैं तो ज़िन्दगी मकबुल है
ना जिस्म की बात होती है
ना ही रूह की होती है
बस ज़िन्दगी को खुल कर जीने की इबादत होती है

ना खुदा ने बनाया है
ना खुद हमने बनाया है
दरसल ये रिश्ता खुद-ब-खुद बन आया है

भावनाओं का जो मेल हो पाया है
निस्वार्थ ही ये रिश्ते निभ रहे हैं
और निभते रहेगें

चाहत कुछ भी नहीं है
बस जहाँ भी रहें
अपनी मौज में रहें

यही दुआ है उनकी
चार धाम की यात्रा
साथ कर पाय या ना कर पाए
पर हमारी अंतिम यात्रा में
वो शामिल हो जाएं
ये ही आखिर ख्वाहिश है हमारी

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तुम मुझे नहीं समझते…….!!!!

May 25, 2021

Shanky❤Salty

“तुम मुझे नहीं समझते”
वो अक़्सर मुझसे कहती थी

ग़र ये बात वो समझ जाते
तो हर दफ़ा यह मुझे नहीं समझाते

कैसे कहूँ मैं
यह समझने की च़ीज है
समझाने की नहीं

यार समझता सब कुछ हूँ
पर समझा नहीं पाता
और रही बात समझने की
तो वो जख्म लगने पर
खुद-ब-खुद समझ आ जाती है…

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अकेलापन……!!!!

May 23, 2021

Shanky❤Salty

अकेलापन जैसा कुछ भी नहीं होता है
ग़र अकेलेपन को तुम महसूस करतें हो तो
यकीनन तुमनें खुद का भी साथ छोड़ा ही दिया होगा

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ओ मेरे यारा…..!!!!

May 21, 2021

Shanky❤Salty

तुझे देखने के लिये ही
मंदिरों में भीड़ लगती है
हमनें तो तुझे
हृदय मंदिर में ही देख लिया है ।

तुझे पाने के लिए लोग काबा गये
हमनें तो तुझे इंसानों में ही देख लिया है ।

कहाँ खोजूं मैं तुझे कहाँ तू नहीं है
वो ज़गह ही नहीं है जहाँ तू नहीं है

खाने वाला भी तू खिलाने वाला भी तू
बरसाने वाला भी तू भीगनें वाला भी तू

सुनने वाला भी तू सुनाने वाला भी तू
जीवन देने वाला भी तू लेने वाला भी तू

ओ सुनने वाले ज़रा मुझ पर यूँ रहम अदा फ़रमा दो
इस काया को मिट्टी में मिला कर मुझे खुद में मिला दो…!!

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जिंदगी रेलगाड़ी सी…..!!!!

May 18, 2021

Shanky❤Salty

ये जिंदगी
कुछ रेलगाड़ी सी हो गई है
कि तुम अभी कुछ वक्त -साल
अपनी ही सीट पर बैठे रहो,

तुम बाहर तो देखो
पर तुम बाहर मत निकलो
क्योंकि बाहर करोना जो है,
तुम खाओ, सो, उठो
और फिर खा कर फिर से सो जाओ,

बस जिंदगी रेलगाड़ी सी हो गई है
सब बैठें हैं अपनी-अपनी सीटों पे,
पर एक दुजे से अनजान हैं,


तुम इंतज़ार करो रेल रूकने का
वरना चार जन भी नहीं मिलेंगे
तुम्हारे जनाजे को उठाने के लिए,


बिलख-बिलख रोएगी तुम्हारी जोड़ी
पर जंगल की लकड़ी भी नसीब नहीं होगी
तुम्हें पंच तत्व में विलीन करने को,


तुम घबराओ नहीं
जल्द ही रुक जाएगी ये रेलगाड़ी
ग़र सब्र के साथ तुम बैठोगे अपनी सीटों पे
हाँ टिकट लेना ना भुलना
राम नाम का
नहीं तो कटने में देर ना लगेगी

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गाँठ…….!!!!!

Shanky❤Salty

May 10, 2021

Shanky❤Salty

गाँठ
चाहे मन में हो
या तन में हो

हकीकत में वो जीने नहीं देते हैं
वक्त है खोल दो गांठ
और खुल कर जी लो

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डूबना……!!!!

May 8, 2021

कोई नहीं चाहता

डूबना

पर ध्यान से जो निकला
वो डूब गया

और जो डूबा
वो सब कुछ पा गया…!!

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मान-अपमान…….!!!!

May 6, 2021

Shanky❤Salty

दुनिया अच्छी नहीं लगेगी
ग़र पीछा छुड़ा अपमान से
भागोगे
पीछे मान के

तो हक़ीक़त में
दुनिया अच्छी नहीं लगेगी
मिला ग़र मान थोड़ा कम तो
मन में उदासी छा जाएगी

मिला ग़र अपमान थोड़ा भी तो
मन में क्रोध की जवाला भड़क जाएगी
यार कैसे समझाऊँ मैं
ये मान-अपमान जह़र की पुड़िया है

ग़र इतना समझ जाओगे तो
दुनिया अच्छी लगेगी

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ख़्वाब लिखा है……!!!!

YourQuote.in

April 24, 2021

Shanky❤Salty

हर पन्ने पर ख़्वाब लिखा है
ज़ख़्मों की स्याही से हमनें
एक किताब लिखी है

ज़ालिम ये दुनिया, ज़ालिम ये ज़हान है
सुना था हमनें हर ज़गह

कितने रहमदिल हैं ये पता किया नहीं हमनें
कपड़े मैले ज़रूर हैं
पर दाग़ नहीं है इसमें…!!

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राम……!!!!!

कौन हैं राम

April 21, 2021

Shanky❤Salty

पाया उसे जाता है राम
जो कहीं खोया है राम
ढूंढा उसे जाता है राम
जो भुलाया है राम
आप कहाँ से आओगे राम
आसमान से टपकोगे राम
या धरती फाड़ आओगे राम
कहीं से नहीं न राम
क्योंकि आप तो हर ज़गह विद्यमान हो राम
चींटी की पुकार हो राम
या मस्जिद कि अज़ान हो राम
आप सब सुनते हो राम
आप तो उर्जा रूप में राम
हर ज़गह हो राम

मैं मर भी नहीं सकता राम
न मैं जी सकता हूँ राम
बस आप में बस सकता हूँ मैं राम
शिव भी मैं ही हूँ राम
शक्ति भी मुझमें ही राम
भक्ति भी मुझमें ही है राम
रावण भी मुझमें ही है राम
मंदिर मूर्ति मस्जिद अज़ान राम
ये सब तो प्रतीक हैं मात्र हैं राम

परछाईं को कोई वास्तविक समझ ले राम
तो यह ना समझी है राम
फ़ोटो को अगर जीवित समझ ले राम
तो क्या करूँ मैं राम
हर किसी की आस्था का प्रणाम है राम
पर आगे भी तो बढ़ना होगा न राम
कब तक तस्वीरों में अटकेगें हम राम
यह संभव नहीं है राम

कि एक ही वक़्त पर हर कोई राम
मंदिर में आपकी पूजा कर सके राम
मस्जिद में बैठ आपको पुकार सके राम
पर यह तो संभव है राम
कि मन मंदिर में बैठ मानस पूजा कर सके राम
शिव रुप में हम शिव की पूजा करेंगे राम
राम रुप में हम राम रस पियेंगे राम
अल्लाह रुप में हम अल्लाह से मिलेंगे राम
हे चिदानंद रुप राम
क्या चढ़ाऊँ मैं तुमको राम

जो सास्वत है राम
उसे कैसे नश्वर अर्पण करूँ मैं राम
चार दीवार के अंदर बैठता हूँ मैं राम
तो चार दीवार ही दिखती है मुझको राम
बाजार में बैठता हूँ मैं राम
तो बाज़ार ही दिखता है मुझको राम
जब राम रुप में बैठता हूँ मैं राम
तो सब राम राम राम ही दिखता है मुझको राम
हद में तुझको ध्याया है राम
तो मानव ही रह गया हूँ मैं राम

बेहद जब तुझको ध्याया है राम
तो तेरा दूत बन कर ही रह गया हूँ मैं राम
अनहद हो कर जब तुझको ध्याया है राम
तो राम रूप में ही ख़ुद को पाया हूँ मैं राम
सब अपने हैं राम
सबके अपने हैं राम
देने में तो आप कंजूसी नहीं करते हो राम
फ़िर हम क्यूँ आपको जपने में कंजूसी कर देते हैं राम
मन नहीं लगता है आपमें हमारा राम
आपको हम ख़ुद से अलग समझते हैं राम

हे राम
अब इच्छा नहीं होती है राम
कि आपको मैं मानव रूप में पूजा करूँ राम
आपको तो आप रूप में ही हो कर पूजना है राम
अब आपको दूध, दही, जल नहीं चढ़ना है राम
आपको तो मन और बुद्धि चढ़ाना है राम
आपको पुष्प और विल्वपत्र क्या चढ़ाऊँ मैं राम
आपको तो सत्व, रज और तम चढ़ाना है राम

आपको क्या भोग लगाऊँ मैं राम
आपको तो प्यार से गले लगाना है राम
क्या दीपक जलाऊँ मैं राम
अब तो आँखों में वो उजाला लाना है राम
जिससे सब कुछ और सबमें राम ही राम दिखे राम
अब क्या कहूँ मैं राम
अब मुझे इससे अधिक कुछ भी नहीं आता है राम
अब मुझे आपको भजना भी नहीं है राम
ना मुख से जपना है राम
ना हाथों से जपना है राम
अब आप हमें भजो न राम
अब हम पायेंगे आपमें ही विश्रा-राम

राम-राम-राम-राम-राम-राम-राम-राम-राम-राम

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ओ राम…….!!!!!

April 18, 2021

Shanky❤Salty

मुस्कुराने की कला सिखाते है राम
ग़म का ज़हर पीना सिखाते है राम
भूत और भविष्य कि गोद त्यागना सिखाते है राम
वर्तमान में बैठना सिखाते हैं राम
काया-माया छोड़ना सिखाते हैं राम

राम होकर राम में जीना सिखाते हैं राम
स्वाद ज़िन्दगी का चखना सिखाते हैं राम

सुनो ना राम
लिखूँ मैं कैसे तुझपे राम
समझते क्यूँ नहीं हो तुम राम
कैसे लिख दूँ मैं तुझपे राम

तुझ तक मेरी बुद्धि नहीं पहुँच पाएगी राम
वहां तक शब्द मैं कैसे पहुँचाऊ राम
तुम तो अबाधित हो मेरे राम
शब्दों से कैसे बाँधू मैं तुझको राम

ध्यान में लीन हैं मेरे राम
भूखा नहीं है प्यासा नहीं है मेरा राम
तृप्त है मेरा राम
क्या अर्पण करूँ मैं तुझको राम

कोई धाम नहीं है बिना तेरे मेरे राम
हर एक के अंतःकरण में बसता है मेरा राम
सौगंध तेरी खाता हूँ मैं राम
भर भर प्याला पीता हूँ नाम तेरा मेरे मैं राम

सच कहता हूँ ज़िन्दगी सुधरता है मेरा ओ प्यारे राम
पता नहीं ओ मेरे प्यारे राम
क्यों आँखों से पानी छलकता है राम
जब जब जिक़्र होता तेरा है राम
पावन सा तेरा है नाम राम

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कुछ तो बात है……!!!!

April 15, 2021
Shanky❤Salty

कुछ तो बात है
श्मशानों में इतनी भीड़ क्यों है?
जंगल की लकड़ियाँ क्यों कम पड़ रहीं हैं?

कुछ तो बात है
प्रकृति का ऐसा ही वास्तविक रूप है?
या फिर यह हमारे कर्मों का फलस्वरूप है?

कुछ तो बात है
कहीं पर चुनाव जीतने की होड़ है
तो कहीं पर ज़िंदगी हार रही है

कुछ तो बात है
एक वक्त था जब मन में फासलें थे
अब तो हकीकत में भी फासलें हो गयें हैं

कुछ तो बात है
धन हमनें लाखों – करोड़ों में कमाया
पर हमनें मन से छल – क्रोध को छोड़ नहीं पाया

कुछ तो बात है
खाने को दो रोटी नहीं है
पर अल्लाह के लिए बकरी तैयार रखें हैं

कुछ तो बात है
कुंभ के गंगा में भीड़ तो है
पर ज्ञान की गंगा खाली ही है

कुछ तो बात है
कितनी भयावह परिस्थिति है
कि चार जन भी नहीं मिल रहें
अपने को कंधा देने की खातिर

कुछ तो बात है
जंगल की लकड़ियाँ कम पड़ रहीं हैं
यह रौद्र रूप नहीं है प्रकृति का
है यह केवल चेतावनी
पिछले वर्ष कोरोना करूणा में थी
अबको-रोना ही है
वक्त है संभल जाओ
वरना इससे भी भयावह स्थिति
उतपन्न हो सकती है
खै़र
कुछ तो बात है…….!!!!!!

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Review by Nidhi Gupta……!!!!

April 09, 2021
Shanky❤Salty

इस किताब में हमारे आराध्य रामजी के विषय में विस्तृत रूप से बताया गया है, यह एक कवि और उसके आराध्य के बीच का वार्तालाप है, इसमें कवि का कोमल ह्रदय छलकता है, वह अपने राम जी को हर जगह हर वक़्त पाता है, उसे अपनी मृत्यु की भी चिंता नहीं है क्योंकि वह राम राम करते हुए ही मरना चाहता है, कवि का विश्वास है की राम राम करने से चौरासी योनि का जो चक्र है वह टूट जायेगा और उसे मोक्ष प्राप्त हो जायेगा, कवि ने अपने इस किताब में अपने आराध्य रामजी और खुद को दोस्ताने रिश्ते को भी बतलाया है और एक दास के रिश्ते को भी बताया है। इस किताब को पढ़ने के बाद हमे राम जी के संम्पूर्ण जीवन का ज्ञान हो जाता है, कवि राम मंदिर के कारण हुए राजनीति और दंगा फसाद के कारण बहुत दुखी है, वह राम मंदिर के नाम पर राजनीति करने वाले से बहुत नाराज है। कवि अपने मन की हर एक बात जो वह अपने राम जी से कहना चाहता है उसने अपने इस किताब में खुल कर लिखा है, आप इसे एक संवाद के रूप में जब पढेगें तब आपको यह समझ में आ जायेगा की कवि कितना मासूम है, वह अपनी हर एक बात अपने आराध्य रामजी से कैसे कहता है। कुछ पंक्तियाँ कवि ने कुछ इस तरह से लिखीं हैं जो बहुत ही गहरी हैं। आप सभी को यह किताब अवश्य पढ़ना चाहिए ताकि आपको रामजी के विषय में और भी जानकारी हो।

Book review by Ziddy Nidhi
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Book Review……!!!!!

April 04, 2021
Shanky❤Salty
Harina Pandya has given review of my book “सच या साजिश
👇
I will recommend this book to know about our culture and civilisation..it is not just about one or two concepts..it covers each and every aspect about our saints, religion, society in today’s era, history, lifestyle and much more..book provides detail information about our sanskriti amazingly.
To read my book click here
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होली…….!!!!!

March 28, 2021
Shanky❤Salty
होली हुई या हो गई है
या होनी बाकी है अभी
या हो रही है
ज़रा बतलाओ मुझको,
लकड़ियों के ढ़ेर को जलाया
या होलिका को जलाया
ज़रा बतलाओ मुझको,
पापिन, अविद्या को जलाया
या राघ, द्वेष को जलाया
ज़रा बतलाओ मुझको,
सीमित रह कर होली मनाया
या उस असीमित को पार कर होली मनाया
ज़रा बतलाओ मुझको,
जहाँ आशा जली नहीं
तृष्णा मिटी नहीं
ईष्या की आग मन में लगी
कैसे मनाई फिर होली
ज़रा बतलाओ मुझको,
वक्त बीता और मुख में अग्नि पड़ी
यार कैसे मनी होली
वो रंग ही क्या जो चढ़ कर उतर जाए
लाल से रंगा
पीले से भी रंगा
और हरे से भी रंग लिया
पर वह तो पानी से धुल गया
फिर कैसे मनी होली
ज़रा बतलाओ मुझको,
सुनो ना राम
अरे हाँ श्याम
तुम मुझे अपने ही रंग में रंग दो ना
ज्ञान के रंगों से
माधुर्य के रंगों से
वात्सल्य के रंगों से
चढ़ा दो मुझ पर श्याम ऐसा रंग
जो कभी ना उतरे
अज्ञान मिटा ज्ञान का रंग लगा दो ना
मोहन मुझे अपने ही रंग में रंग दो ना
ये रंग और कहीं नहीं मिलेगा,
जैसे मेहंदी के हरे पत्ते में ही लाली छुपी है
वैसे ही हमारे भीतर ही सब कुछ है
बस यह होली खुद से खेलों
फिर तो हर क्षण होली है

Written by:- Ashish Kumar
My words are incomplete without support of Ziddy Nidhi
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कौन हैं राम…….!!!!

March 26, 2021
Shanky❤Salty
मैंने एक किताब लिखी है जिसे आप देख महसूस करेंगे की यह किसी विशेष धर्म, संप्रदाय, जाति, मज़हब के लिए है लेकिन ये सत्य नहीं है, यह किताब पूरी मानव जाति के लिए है। इस किताब में राम शब्द का प्रयोग एक उर्जा के तौर पर किया गया है जो हर ज़गह विद्यमान हैं। वह उर्जा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह में भी है और शिवजी में भी है,
जिसे आजकल की साईंस ने भी माना है
“गौड पार्टीकल” के रूप में।
मेरा किताब लिखने का एक ही मकसद है की जाति, मजहब, धर्म, रंग, भेद,…आदि को ख़त्म कर उस एक पर ध्यान देना।
दिखते तो यहाँ पर सब अलग अलग हैं पर हैं तो सब एक ही ना।
फ़िर यह ईर्ष्या राघ द्वेष क्यों और किससे..!!!
राजा हो या रंक असली औकात तो श्मशान में दिख ही जाती है
फ़िर जीते जी यह बाहरी दिखावा क्यों।
कुछ वास्तविकता को मैंने लिखा है जिसे लोग जान कर भी अनजान बनें हैं।
जिस्म और रूह की सत्यता को मैंने स्पष्ट रूप से लिखा है।
राम होकर राम को भजना है।
इस किताब का उद्देश्य अपने भीतर छुपी आत्मचेतना को जगाना है।
किसी भी चीज़ का नशा एक-न-एक दिन उतरना ही उतरना है।
रात को पियो तो सुबह
सुबह को पियो तो रात
उतर ही जाता है।
राम नाम का प्याला पी कर के तो देखो।
राम नाम का नशा कर के तो देखो वचन है मेरा आपको इससे सारी ज़िन्दगी सुधर जाती है
राम जी ही तो सरस्वती जी के रूप में मेरी जिह्वा पर विराजमान हैं
और मेरी कलम को एक नई सोच देते हैं।
मैं उन्ही राम जी के अंश राधा अग्रवाल जी और निधि गुप्ता “जिद्दी” जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिन्होंने मेरे लिखे इस लेख को जो राम जी को समर्पित है
को सही किया है इसे सुंदर बनाया है।
हरिणा पंडया जी और निधि गुप्ता “जिद्दी” ने इस किताब को लिखने में मुझे सहयोग दिया है।
राधा अग्रवाल जी ने मेरी इस किताब का शुद्धिकरण किया है।
सचिन गुरुरानी ने मेरी किताब के लिये डिजाइन तैयार किया है।
मैं इन सभी को तहेदिल से धन्यवाद करता हूँ।

मेरी किताब पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
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वो खड़ी थी…….!!!!

March 19, 2021
Shanky❤Salty
मृत्यु दरवाजे पर आ खड़ी थी राम
पूछा उसने मुझसे राम
क्या किया तुने जीवन में राम
हैरान परेशान हो गया मैं राम
सोने में रात बिता दी थी मैंने राम
खाने में दिन भी गुजार दिया था राम
तेरे नाम का हिसाब दे नहीं पाया मैं राम
फ़िर क्या राम
खोल मुट्ठी मेरी उसने दी राम
चौरासी के चक्कर में उसने धकेल मुझको दिया राम
जीवन मेरा मैंने यूँ हीं गवां दिया राम
सोने का कटोरा रख कर मैंने राम
भीख ही माँगी राम
घाट श्मशान का हो राम
या मणिकर्णिका घाट हो राम
हिसाब तो होगा ही राम
चिड़िया भले ही चुग खेत क्यों ना गई राम
नुकसान तो मेरा ही होगा राम
निंदा करता रहा मैं राम
मुझसे बड़ा निंदक मिला नहीं मुझको राम…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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Truth Or Conspiracy……!!!!

February 24, 2021
Shanky ❤Salty

My fifth book has been published on February 16, 2021. I have written some of my experiences in this book. And some such untold story by our Indian media or paid media or fabricated media. This book is written for the mature reader. Its purpose is not to hurt anyone’s feelings. Neither is it in favor or opposition to any person, society, gender, creed, nation or religion. These are my own views.

In this book you read about:-

  • Some Cultures Of The World
  • Culture Of India
  • Indian Saint

  • What Is The Purpose Of The Saint?
  • Gautam Buddha
  • False Accusations On Gautam Buddha
  • Jayendra Saraswati Shankaracharya
  • False Accusations On Jayendra Saraswati Shankaracharya
  • Asaram Bapu
  • Parliament Of World Religion
  • Scientific Conclusion Of Asaram Bapu Aura
  • Women Empowerment
  • Divine Baby Rites
  • Stop Abortion Campaign
  • Cesarean Delivery
  • Spiritual Awakening Campaign
  • Prisoner Uplift Program
  • Vrinda Expedition
  • Tribal Welfare
  • Gurukul
  • Valentine’s Day
  • Protection Of Cows From Slaughterhouses
  • The Main Reason Why Asaram Was Targeted
  • False Accusations On Revered Bapuji
  • What Are People Saying
  • Attack On Hinduism

I offer my gratitude to God. Those who inspired my writing. I thank you to my mother Pramila Sharan. Without her blessings, the existence of this book was difficult. I’m grateful to the writers, readers & critic bloggers who helped to make my writing the best. I would also like to thank you to Radha Agarwal, who helped me and did a proof reader. I thank to Rekha Rani ma’am for helping me in this book. Who raised the respect of my creation with their thoughts. Also, my heartfelt thanks to those who helped to write this book.
Hope that by reading this book, you will try to understand and appreciate my point of view. And give your feedback.
My book is available on Amazon & Notionpress

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सिखा दो न…..!!!!

February 21, 2021
Shanky❤Salty
ग़म के आँसू भी तो हला-हल कि तरह है ना शिव जी
आप हमें भी पीना सिखा दो न शिव जी
हर परिस्थिति में हमें भी मुस्कुराना सिखा दो न शिव जी…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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Think About Valentine Day….!!!!

February 11, 2021
Shanky❤Salty
Love is innocent, love unites us with Ram, love unites us with God, love unites with Allah. Love is the name of supreme power. The true feeling of love will do well not only India but the entire humanity. Why should not we develop real love? I think every person/young boys/young girls should greet, respect and worship their true love that is parents. Everyone celebrates day of love or week of love. Then why should we not celebrate this week or day with parents & their children. I think this is true & divine love. Passion and lust give a bad name of love. This is a big difference between love and lust. Lust gives rise to sexual excitement and thoughtless gratification of desires. And love always gives eternal joy. It helps one behold oneself in all creatures. Parents have spent longer time in this world, so they are more experienced than us. We easily get the benefit of experience of the three simply by respecting them. So, whosoever wants to progress in life must obey, respect and worship our parents. When I read some article regarding bad effect of the valentines’ day. I think No Hindu, No Christian, No Muslim, No Sikh parents wants his or her child to be spineless due to premarital relationship. No parents want his or her child to disobey his or her and violate social norms and succumb to a profligate lifestyle, becomes mean by leading a selfish life, moan and groan in the old age. If the children respect their parents, they will receive auspicious blessings from their hearts which will save these future leaders of the nation from the evils of lust day.
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To read about Divine Love click here
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अयोध्या वासियों से अनुरोध…….!!!!

February 10, 2021
Shanky ❤Salty
बड़ा व्याकुल है मन हमारा
कभी सम्मान ना मिला
हमारी माँ सीता जो को
आपकी अयोध्या जी में
ब्याह कर के आईं थीं हमारे राम जी से
षड्यंत्रों का शिकार हो वनवास को गई हमारी माँ
अग्नि परीक्षा तक देना पड़ा हमारी माँ को
फ़िर भी चैन ना मिला आपके अयोध्या वासियों को
क्या से क्या कह गए हमारे राम जी को
त्याग सीता को प्रजा का सम्मान रखा राजा रामचंद्र जी ने
है विनती मेरी आपके मोदी जी से
बनवावें रामलला का भव्य मंदिर
पर वो सम्मान लौटावे जो प्रेम किया था हमारे राम जी ने हमारी माँ सीता जी से…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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मेला है या खेला है……!!!!

January 18, 2020
Shanky❤Salty
सबको नंगा आना है
पावन गंगा के तट पर ही जाना है
वो चले गए हैं
मुझे जाना बाकी है
कुछ को अभी आना बाकी है
सच कहूँ तो
दो दिन का मेला है
ज़िंदगी का यही खेला है
बाँध मुठ्ठी आना है
कमा-कमा कर झोली भरना है
खोल मुठ्ठी तो सबको जाना है
जो कुछ भी खोया या पाया है
सब कुछ ही तो कर्मों का खेला है
सबको तू अपना मान बैठा है
पर चिता पर लेटना अकेला है
यारा कहा था ना
दो दिन का मेला है
ज़िंदगी का यही खेला है…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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हाथों में पतंग लेकर…….!!!!

January 14, 2021
Shanky❤Salty
खुशियाँ किसी चीज या वस्तु की मोहताज़ नहीं होती
खुशियों को तो बस बहाना चाहिए
हाथों में पतंग लेकर
आसमान को छूना है
हर ख़्वाब को एक दिन पूरा करना है
ज़िन्दगी कि डोर में प्यार का माँझा हम चढ़ाएँगे
ईर्ष्या की पतंग को काट हम गिराएगें
तिल गुड़ खा कर हर रिश्ते से कड़वाहट हम मिटाएंगे…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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सीख लो……!!!!

January 04, 2021
Shanky❤Salty
ज़िन्दगी जीने की कला सीख लो
मुस्कुरा कर ग़म का ज़हर पीना सीख लो
भूत और भविष्य कि गोद छोड़ वर्तमान में बैठना सीख लो
ज़िस्म को छोड़ रूह में जीना सीख लो
हर हाल में तुम ज़िन्दगी का स्वाद चखना सीख लो…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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ख़ुद ही खुदा…….!!!!

December 02, 2020
Shanky❤Salty
ख़ुदा का काम करते फिरते हो
लगता है इसलिए
दूसरों के कर्मों का
तुम हिसाब लिखते फिरते हो
जरा मेहरबान होकर के
ख़ुद के कर्मों का
भी ग़र तुम हिसाब कर लेते
तो तुम ख़ुद ही खुदा के रूप में पूजे जाते…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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अर्थहीन सी दुनिया…..!!!!

November 26, 2020
Shanky❤Salty
अर्थहीन दुनिया लगती है
ज़िन्दगी भी अब मुझको व्यर्थ सी लगती है
ख़ुद का अस्तित्व ढूंढनें में मुझको असमर्थता सी महसूस होती है
मेरी हर कोशिश ना जाने क्यों व्यर्थ सी होती है
हर पल लोग खफ़ा हो जाते हैं
हर ज़गह हम असफल हो जाते हैं
आँखे बंद करते हीं आँखों से आँसू बह जाते हैं
एक-दूजे से इंसान जलता ही जाता है
मुट्ठी में रेत की तरह समय बीतता जाता है
व्यर्थ की चिंता कर मनुष्य एक दिन अर्थी पर लेट ही जाता है

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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हे माँ…….!!!!!

October 23, 2020
Shanky❤Salty
हे माँ
सुना है मैंने, सैकड़ों अपराध करने के बाद भी जो इंसान तुम्हारी शरण आकर तुम्हें माँ कह कर पुकारता है तुम उसे क्षमा कर देती हो।
माँ तुम तो करूणा का सागर हो, ममता कि मूरत हो तुम माँ।
पर देवी शुरेश्वरि यह बालक तुम्हारा बहुत ही परेशान है, थोड़ी कृपा कर दो जगदम्बिका।
जो भी तुम्हें पुकारता है तो तुम दौड़ी चली आती हो और उसके सारे कष्ट हर उसे निसंकोच मन-वांक्षित फ़ल देती हो।
अच्छा है माँ बहुत ही अच्छा है।
लेकिन माँ परिस्तिथि अनुकूल नहीं है।
लोग सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारी उस मूरत को पुजते हैं। माँ आएगी शेर पर सवार होकर सभी भुजाओं में अस्त्र लेकर पर हक़ीक़त में तो वे सत्य से विमुख हैं माँ
मेरा यह विश्वास है दुर्गे की तुम नहीं आओगी।
जगदमबिके जब तुम सर्वव्यापक हो, कण-कण में बसी हो तो कैसे आओगी और कहां से आओगी माँ???
पता नहीं माँ लोग क्यों तुम्हें फोटो और पत्थर तक ही सीमित मानते है। तुम तो हर जीव में शिव रूप में विराजमान हो।
फिर क्यों लोग दूसरों के प्रति क्रोध, लोभ, छल, कपट, हिंसा का भाव रखते है। या यूँ कहूं तो लोग तुम्हारे जीव पर ही बैर रखते है या आसान शब्दों में कहूं तो तुमसे बैर रखते है????
देवी सुनो ना
लोग कहते है ना “नवरात्र में नौ दिन देवी को पूजते हो और बाकि दिनों में स्त्री कि अस्मिता को नोचते हो”
यह सुन कर मैं कुछ पल के लिए मौन हो जाता हूँ। दिल बड़ा दुखती होता उन्हें कैसे समझाऊं की “जो देवी कि पूजा करता है वह एैसा घिनैना कृत कभी नहीं करता। करता वही है और बोलता भी वही है जो कभी देवी कि पूजा नहीं करता है।”
ओ माँ,
है निवेदन इस बालक का तुझसे आज
किसी भी व्यक्ति को रुपया, पैसा, धन, दौलत, सम्पत्ति, यश, क्रृति, ना दो माँ। तुम सिर्फ़ और सिर्फ़ ज्ञान दो माँ।
क्योकिं माँ ज्ञान से व्यक्ति हर चीज़ पा सकता है। और रही बात माँ मुफ्त के चिजों कि लोगों को क्रद नहीं होती। तुम तो सबकी झोलियाँ भरती हो माँ। पर लोग इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
देवी तुम प्रसन्न हो जाओ कह कर लोग जीव कि बलि दे देते है। पर भवानी वह जीव जिसकी भाषा मनुष्य समझ नहीं सकता वह तुम्हारा ही तो बालक है और तुम उसकी माँ। फिर तुम कैसे खुश हो सकती हो? यह मुझको स्पष्ट करो?
मेरा तो दिल यही कहता है माँ कि लोग अपने सुख के लिए मासूम से जीव की हत्या करते है तुम्हारा सहारा ले कर। चाहे वह किसी भी धर्म के क्यों ना हो। अल्लाह भी तुम्ही हो देवी जगतजननी भी तुम्हीं।
माँ श्रीमद् भगवद् गीता में तुमने ही ना श्री कृष्ण रूप में कहा है “नाहं वसामि वैकुण्ठे योगिनां हृदये न च ।
मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद ॥”
मैं न तो बैकुंठ में ही रहता हूँ और न योगियों के हृदय में ही रहता हूँ। मैं तो वहीं रहता हूँ, जहाँ प्रेमाकुल होकर मेरे भक्त मेरे नाम लिया करते हैं। मैं सर्वदा लोगों के अन्तःकरण में विद्यमान रहता हूं !
तो फिर माँ क्यों नहीं समझते है लोग कि हमें ही एक दुसरे कि मदद करनी होगी। सबका साथ देना होगा। हमें खुद ही खुद के लिए खड़ा होना होगा।
बहुत कमी है माँ सब में ज्ञान कि। तुम दे दोना। फिर कुछ देने कि जरूरत ही नहीं है।
लोगों को जिस्म का और रूह के बीच के ज्ञान का बोध करा दो। फिर तुम खुद ही देखना माँ हत्या, बलात्कार, ईर्ष्या जैसे घिनैने कृत खुद-ब-खुद रूक जाएंगे। क्योंकि शरीर को स्वयं राम और कृष्ण भी नहीं रख पाए
और आत्मा को तो स्वयं भोलेनाथ भी नहीं मार पाए
बस इतनी सी तो बात है माँ, दे दो ना।
और कुछ भी नहीं मुझे अपने लिए
क्योंकि पता है माँ मुझे यह खेल जरूर खत्म होगा और मेरा आपसे सदा के लिए मेल ज़रूर होगा…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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चंद सवाल…..!!!!!

October 5, 2020
Shanky❤Salty
हज़ारों सवाल मन में लिए
क़तरा-क़तरा ज़िन्दगी को जी रहा हूँ
उन्हीं सवालों में से एक सवाल मैं आपसे पूछ रहा हूँ
ना जाने क्यों हम
किसी की चंद गलतियों की वज़ह से
उनकी सारी अच्छाईयाँ भूल कर
सदा के लिए उनसे मुँह मोड़ लेते हैं
और इंसान कि यह फ़ितरत है कह कर
अपनी नाक़ामी छुपाने का बंदोबस्त कर देते हैं…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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इंसान…..!!!!!

October 2, 2020
Shanky❤Salty
हर इंसान
ये बनूँ
वो बनूँ
एैसा बनूँ
वैसा बनूँ
उसके जैसा बनूँ
के चक्कर में
न जाने क्यूँ
इंसान बनना ही भूल जाता है
और हैवानियत का नंगा नाच कर
पल-दो-पल इंसानियत को शर्मसार करता है

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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मेरी एक और किताब….!!!!

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September 25, 2020
Shanky❤Salty
एक खुश-खबरी….!!!!
सबसे पहले मै महादेव को नमन करते हुए कृतज्ञता ज्ञापन करता हूँ। जिन्हों ने मुझें लेखन की प्ररणा दी। मैं अपनी माँ श्रीमती प्रमीला शरण को आभार देता हूँ। उनके आशीर्वाद के बिना इस पुस्तक का अस्तित्व कठिन था। मैं कृतज्ञ हूँ उन लेखक-पाठकों और आलोचक ब्लॉगरों का, जिन्होंने मेरे लेखन को श्रेष्ठ बनाने मे मदद की। मैं राधा अग्रवाल जी को भी धन्यवाद देना चाहूंगा। जिन्होंने मेरी मदद की और इसका प्रूफ रीडिंग किया। मेरी पुस्तक में मदद करने के लिये मैं रेखा रानी मैम को आभार व्यक्त करता हूँ। जिन्होंने अपने विचारों से मेरी रचना का सम्मान बढ़ाया। इसके अलावा, जिन लोगों ने भी इस पुस्तक को लिखने में मदद मिलीं, उन्हें दिल से धन्यवाद।
मेरी चौथी किताब “सच या साजिश” आज प्रकाशित हो गईं है। इस पुस्तक में भारतीय संस्कृति, भारत कि जड़ें, भारतीय संतों के बारें में, भारतीय संस्कृति पे षड्यंत्र, संतों पर प्रहार के बारे में पढ़ेंगें। इस किताब का उद्देश्य सामाजिक यथार्थ को चित्रित करना, शांति, अहिंसा, सहिष्णुता, दोस्ती, एकता, समृद्धि, खुशी और अखंडता को बढ़ावा देना है। पाठकों को बतलाना है कि भारतीय संस्कृति पर कितनी बड़ी साजिश है और सनातन संस्कृति की वास्तविकता से अवगत कराना है। मैं बहुत ही जल्द अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित करूंगा। आशा है, आपको मेरी पुस्तक पसंद आएगी।
किताब पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
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क्या जतलाना चाहते हो……!!!!

August 3, 2020
Shanky❤Salty
जब तुम खुद से नफरत नहीं कर सकते,
खुद पर गुस्सा नहीं कर सकते,
फिर तुम दूसरों से कैसे गुस्सा कर लेते हो?
कैसे उनसे नफ़रत कर लेते हो?
भूल क्यों जाते हो
तुम हर पल की
जिसने उसे बनाया उसी ने तुम्हें भी बनाया
नफरत कर उनसे तुम,
कहीं यह तो नहीं जतलाना चाहते
की खुदा के बनाये हुए पर
तुम ऊँगली उठाना चाहते हो

Written by:- Ashish Kumar
My words are incomplete without support of Ziddy Nidhi
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युद्ध……!!!!

July 29, 2020
Shanky❤Salty
सिखा दिया है, ज़िंदगी नें मुझे
फिर से की…. कि
युद्ध जरूरी है, परन्तु अन्य से नहीं
बल्कि स्वयं से ही जरूरी है युद्ध
ज़िंदगी मुस्कुराने लगेगी
गर तुमनें कर लिया स्वयं से युद्ध तो,
तुम विजई रहो अथवा पराजित रहो इस स्वयं के युध्द में
किन्तु इतना तय है की तुम्हें वह सूकुन मिलेगा
जिसकी तुम्हें आवश्यकता है
जिसकी तुम्हें चाह है और जिसकी तुम्हें जरूरत है

Originally written by Ziddy Nidhi
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बताओ न मुझको…..!!!!

July 19, 2020
Shanky❤Salty
शीशे में ख़ुद को
निहारते हो
माना की बहुत ही बेहतरीन दिखते हो
पर क्यूँ ज़माने के सामने
मुखौटा लगाए फिरते हो…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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क्या है तु…..!!!!

July 16, 2020
Shanky❤Salty
ओए दोस्त सुन न,
प्यार, इश्क, मोहब्बत की तो बात होती है
पर जहां तु होता है न
वहां तो इन सब की बरसात होती है
मेरी खामोशी को तुम हर सुन ही लेते हो
चुप रहकर भी बहुत कुछ बोल देते हो
जब खुद को मैं अकेला छोड़ देता हूँ
तब तुम ही तो पीछे से आकर हाथ थाम लेते हो
वो चोंगे कि तरह तुम्हारा चिल्लाना
मेरा पैर पकड़ बिस्तर से गिरा देना
बाईक पर पीछे बैठा मुझे हर जगह ले जाना
परीक्षा के दिनों में बिना पढ़ें ही पास हो जाना
और अब इन सब बातों को याद कर
आँखों से आँसुओं का छलक जाना
मुझको तो पता नहीं क्या है ये
दोस्ती कहते है कुछ लोग इसे
तो कुछ लोग भाई कहते है इसे
पर हकीकत में मुझे अभी तक पता नहीं
जो भी है इन सबसे अलग
है जी कुछ खास है
मेरे ही दिल के पास है
जो अनसुलछी सी है मेरी ज़िंदगी
उसे तु पल भर में सुलझाए
हर किसी से मैंने रिश्ता बनाया है
वक्त-बे-वक्त मैंने उसमें दाग पाया है
एक तु ही है जिससे मैंनें न तो कोई रिश्ता बनाया है
न ही अभी तक क़तरा सा भी दाग पाया है
हर कोई जमाने की बात करता है
पीठ पीछे फसाने की बात करता है
तु तो ज़िंदगी कि बात करता है
हर पल निभा कर ही बात करता है
मैं चल न सका तो तु
मेरे एक बुलावे पे तु दौड़ा चला आया
गोद में ले सीढ़ियाँ चढ़ मुझे कमरे तक पहुँचाया
अब यह सुन तुम ये मत कहना कि
क्या भाई तु भी न
बता तु ही मुझको
क्या मैं भुल जाऊँ इन सब पल को
या दे दूं तुम्हें तुम्हारे जन्मदिन की हार्दिक बधाई

ह्रदय ये प्रणाम है उस माँ को जिसने तुझको जन्म है दिया।
है प्रणाम उस पिता को जिसने पालन है तेरा किया।
है धन्यवाद उसे नाथ को
अरे हाँ जी भोलेनाथ को
जिसनें मेरी ज़िंदगी में तुझको दिया

Written by:- Ashish Kumar
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मेरे ह्रदयेश्वर…..!!!!

July 8, 2020
Shanky❤Salty
सुनो ना नाथ जी
कहते हैं मुझको ये लोग
लिखुं मैं तुझपे
समझते क्युं नहीं है मुझको ये लोग
कैसे लिख दूं मैं उनपे
जिन तक बुद्धि नहीं पहुँच सकती
वहां तक मैं शब्द कैसे पहुँचाऊं
जो अबाधित है हर चीज से
उन्हें मैं शब्दों से कैसे बाँध सकता हूँ
जो ध्यान में लीन हैं
उन्हें मैं कैसे ज्ञान में ला सकता हूँ
जिन्हें न भूख है न प्यास है
उन्हें मैं कैसे कुछ भी अर्पण कर सकता हूँ
जिनका न कोई नाम है न कोई धाम है
उन्हें मैं कैसे जान सकता हूँ
देखा है मैंने
भाँग पीने से
नशा चढ़ता है
ठीक उसी प्रकार
तेरा नाम मेरे अंतः में बसता है
पर तेरी सौगंध खा कहता हूँ मैं
भोले बाबा के नाम से ही सारी ज़िंदगी सुधरता है
पता नहीं मेरे ह्रदयेश्वर
तुने मुझको क्या पिलाया है
तेरे नाम के जिक्र से ही
मेरी आँखों से पानी छलकता है
है पावन ये सावन मेरे प्रभु
कहते है लोग मुझको ना जाने क्यों
सुनों जाओ बाबा के मंदिर तुम
पर कैसे बतलाऊं मैं उनको यह
कि तुम मन कि चौखट पर आ बैठते हो
होती है तकलीफ जमाने को
चढता है जब तुझपे दूध तो
कर मन मंदिर में अभिषेक तुम्हारा
हम धारा अश्रुओं से
हो जाते हैं पल-दो-पल के लिए मौन,
ओ मेरे देवा
सुनो ना,
हाँ हाँ महादेवा
अब खुश हो न
जरा बतलाओ ना उनको
ना तो जन्म उसका ना ही मरण है उसका
फिर यह आशीष शरणागत है उसका

A topic suggested by
Priyanshi Dubey, Golden Moon
And a few more.
Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Dr. Sakshi Pal
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तुम खुद को मर्द कहते हो….!!!!

June 30, 2020
Shanky❤Salty
सुना है
तुम खुद को मर्द कहते हो?
औरतों के जिस्म का धंधा भी करते हो
छोटे कपड़े न पहनने की नसीहत देते हो
और बुरखे वाली को भी नजरों से नंगा कर देते हो
खुद को खुद्दार कहते हो
फिर दहेज माँग खुद नामर्द क्यों बना देते हो
है जन्मते वे औरत के जिस्म से
फिर होकर बड़े वे फेरते हैं हाथ औरत के जिस्मो पे
और खुद को मर्द कहतें हैं वो…..!!!!
वो बाँझ कहतें हैं औरत को
न होते बच्चे उनके तो
करतें हैं ब्याह एक के बाद एक वो
फिर भी न हुआ बच्चा जो
तो क्यों न कहतें हैं खुद को नामर्द वो?
जब जब उनकी नजरें उठती है
तब तब सामने वाली स्त्री की नजरें झूकती हैं
और वो खुद को मर्द कहते हैं
किया था इन्हीं वक्षस्थल से कभी दुग्धपान
आज घुरते हैं उसके स्तनों को
तुम क्या यह बतलाना चाहते हो
कुत्तों की तरह माँस का टुकड़ा चाहते हो
दो पैरों के बीच को ताड़ कर
वासना की भूख मिटाना चाहते हो
और खुद को मर्द कहते है….!!!!
एक औरत ने तुझको अपनी योनी से जन्म दे, वक्षस्थल से दुध पिला मर्द है बनाया।
आज तूने उसी योनी-वक्ष को देख अपनी काम वासना जागृत कर खुद को सबकी नजरों में ना-मर्द है बनाया।

Published by Anonymous on behalf of Shanky_Salty
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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कोरोना संक्रमण…….!!!!

June 25, 2020
Shanky❤Salty
ये जो फैली है हवा में जहर
खत्म हो ही जाएगा
एक-न-एक दिन
लेकिन मन में जो फैली है जहर
हम सबके
वो कब खत्म होगा?

Published by Anonymous on behalf of Shanky_Salty
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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अफसाने तेरे पन्नों में…..!!!!

May 31, 2020
Shanky❤Salty
एक खुश-खबरी आप सभी के साथा साझा करना चाहता हूँ।
अफसाना तेरे पन्नों मेंमधुसूदन सिंह का पहला काव्य-संग्रह है। इस संग्रह में गीत एवं कविता का शानदार मिश्रण है।
“मधुसूदन सिंह के कविताओं एवं गीतों में भावनाओं एवं कल्पनाओं का अद्भुत प्रवाह है। जिसे पढ़कर ऐसा लगेगा जैसे उन पन्नो में दर्ज अफसाने अपने ही हैं।
मधुसूदन सिंह का जन्म 17 जनवरी 1973 को नाना के घर गाँव खुदरांव जिला रोहतास में हुआ था। उनका बचपन ननिहाल में ही गुजरा। उनका पैतृक गाँव डिहरी जो कि बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित है। उनके पिता श्री सुरेंद्र सिंह किसान एवं उनकी माता श्रीमती रेवती देवी गृहिणी हैं। वे चार भाई, बहनों में दूसरी संतान हैं। मधुसूदन सिंह की पत्नी का नाम नीलम सिंह है।
मधुसूदन सिंह अपनी प्रारम्भिक शिक्षा नाना जी के यहाँ प्राप्त करने के पश्चात सीता उच्च विद्यालय हरिहरगंज पलामू,झारखंड से दसवीं तथा मगध यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। चुकि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं होने के कारण शुरुआती दिनों में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जिसके कारण वे स्नातक की उपाधि हासिल करने के तुरन्त बाद पाँच वर्षों तक परिवार से दूर रोजगार की तलाश में दिल्ली में भटकते रहे और एक संस्थान में नौकरी करते हुए सम्पूर्ण उत्तर भारत का दौरा किया। वर्तमान में वे राँची स्थित एक निजी संस्थान में कार्यरत हैं। वे बचपन से ही नाट्यमंच से जुड़े रहे मगर जीवन की आपाधापी में वे साहित्य से दूर हो गए। कहते हैं जिसके नस नस में साहित्य समाया हो भला वह कबतक अपने आप को लेखनी से दूर रख पाता है। आखिरकार वे सन 2017 में वर्डप्रेस से जुड़े और वे आज करीब 500 सौ से ऊपर कविताएँ लिख चुके हैं। और आज उनकी पहली काव्य संग्रह ‘अफसाने तेरे पन्नों में’ प्रकाशित हुई है।

Title: Afsane Tere Panno Mei
Product ID: 195201-1335597-NA-NED-T0-NIKI-REG-IND-DIY
ISBN: 9781648995057
Format: Paperback
Date of Publication: 30-05-2020
Year: 2020
Page: 94
Price: ₹120

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दर्द के हर अल्फाज……!!!!

May 27, 2020
Shanky❤Salty
बात है मई 18 की। ऐसा बहुत कम ही होता था कि मुझे जल्दी नींद आ जाए पर उस रात मुझे 9 बजे से ही नींद आ रही थी। पर अफसोस सो नहीं पा रहा था। पता नहीं क्यों???
करीब 12बजे होंगे मेरा मोबाईल वाईबरेट करता है और मैं जैसे ही मोबाईल हाथ में लेता हूँ तो स्तब्ध रह जाता हूँ।
हड़बड़ा कर फोन उठाया
“हैलो….!!!!”
आवाज आती है
“कैसे हो…???”
मैं उससे पूछता हूँ
“सब ठीक तो है”
उधर से आवाज आती है
“मुझे क्या हुआ है”
मैंने कहा उससे
“तो आज अचानक से मुझे कैसे याद किया”
वो कहती है
“मेरी मर्जी, मेरा फोन है”
इतना कह वह जोर से हँसने लगी
मैंने कहा
“वाह जी, मेरा डासलॉग मुझे ही सुना रही हो”
तब वह बहुत ही प्यार से कहती है
“मैं भी तो तुम्हारी ही हुआ करती थी ना कभी, हाँ अब बात नहीं होती है तो इसका मतलब ये नहीं ना कि कोई मेरी जगह ले ले।”
मैं यह शब्द सुन खामोश हो गया।
और काफी देर के लिए चुप हो गया और उसकी साँसों को सुनने लगा।
वह भी चुप थी फिर अचानक से कहती है
“अब बस भी करो मेरी साँसों को सुनना इत्ते दिनों बाद फोन किया है। कर लो न आज पुरी रात मुझसे बात”
मैंने कहा
“तुम्हें कैसे पता मैं साँसें सुन रहा हूँ”
हंसते हुए कहा उसने
“तुम भी ना पागल भुलक्कड़ हो गए हो
जब हम पास होते थे तो मैं तुम्हारे सीने पर सर रख तुम्हारी धड़कन सुना करती थी और जब दूर रह फोन पर बातें किया करते थे तो तुम चुप रह मेरे साँसें सुना करते थे न। बस महसूस किया अब भी तुम वही कर रहे हो। तुम्हें कुछ याद ही नहीं रहता है अब सब भुल गए हो। बादाम खाया करो समझे मोटु। लेकिन अब ये मत कहना की मम्मी मुझे नहीं देती है। यह सब तुम्हारी बहानेबाजी है”
मैंनें कहा
“नहीं कहुंगा यार, पर मुझे बादाम अच्छा ही नहीं लगता है तुम्हें भी पता है खैर छोड़ो ये सब। तुम्हें सब याद है बस मुझे ही भुल बैठी थी”
वह चिल्ला कर कहती है
“कुछ नहीं भुली थी बस वक्त सही नहीं था और तुम्हारी आदत छुड़वानी थी। जो तुम्हें मेरी हो गई थी। अब बताओ भी यार कैसे हो? कहाँ हो? तुम्हारा समोसा खाना कम हुआ या नहीं? मिल्किबार तो छुटी होगी नहीं ये तो दावे के साथ कह सकती हूँ। मुझसे ज्यादा प्यार तुम मिल्किबार से करते थे और आज भी करते होगे ही। हुह😏
तुम्हारी तबीयत कैसी है??? दिल की धड़कन कैसी है? सही हुई या पहले जैसी ही तेज रहती है? देर से अब भी सोते होगे या नींद की दवा ले कर ही सोते हो? तुम्हारा इन्हेलर छुटा या नहीं? खाने में भी वहीं पछत्तर नखड़े होंगे? पानी पीना भूल ही जाते होंगे? यार तुम चुप क्यों हो? कुछ बोलो न मेरा शैंकी? इत्ते दिनों बाद फोन किया है और तुम हो की बोलते ही नहीं।”
मैं कहता हूँ
“क्या कहूं पगली बस खुद को यकीन दिला रहा हूँ कि तुम ही हो फोन पर, पर कैसे? और क्युं? मैं तुम्हारे सवालों का जवाब दूं या अपने सवालों का जवाब माँगुं?
मुझे बीच में ही रोकेते हुए
“मेरा बच्चा तुम चुप रहो, मैं सब कुछ कहती हूँ। बस शांति से सुनो जो तुम्हें सबसे अच्छा लगता है।
मैंने बहुत पहले तुम्हारी लिखी किताब ‘यादों के पन्नों से‘ मंगवाई थी पर कभी हिम्मत नहीं हुई उसे पढ़ने की। क्योंकि पता था मुझे मैं जब भी पढ़ुगी खुद को रोक नहीं पाऊंगी तुम्हारे प्रति मेरा प्रेम फिर बाहर आएगा और मैं फिर कमजोर हो जाऊंगी। और हुआ भी एैसा ही। आज सुबह कमरे की सफाई कर रही थी तभी मुझे तुम्हारी किताब नजर आई। और रोक नहीं पाई पढ़ने से खुद को। फिर क्या पढ़ते ही आँखों से आँसू बहने लगे। पहले बहुत गुस्सा आता था जब तुम मरने की बाते करते थे लेकिन आज जब मैंने तुम्हारी लिखी ‘मेरी अंतिम यात्रा‘ को पढ़ा तो खुद पर अफसोस हुआ की मैं बे-वजह तुम पर गुस्सा करती थी। हर एक शब्द सत्य है और अटल सत्य है। जिसे कभी कोई झूठला नहीं सकता। हमें आज नहीं तो कल इसे स्वीकार करना ही होगा तो आज क्यों नहीं? हर एक लाईन तुम्हारी किताब का जबरदस्त है। तुम्हारी किताब मेरी पनीर चिल्ली की तरह है। हर लाईन में कुछ नया है। “
बीच में रोकते हुए
“चुप रहोगी पागल। ये सब मत बोला करो मुझे पसंद नहीं है। गर कोई कमी है तो बोलो उसे सुधारूगा।”
वह कहती है
“नहीं मेरा बच्चा कोई कमी नहीं है। हर चीज पूरी है चाहे वो रोटी हो, या गरीबी हो, या दोस्ती हो या एक कहानी हो। सब सही है। तुम खुद अंदाजा लगा लो मेरे पागल बच्चा मैं पढ़ तुम्हारी किताब को रोक नहीं पाई। अब चलो मुझे जल्दी से बताओ। अपनी तबीयत के बारे में।”
मैंने कहा
“यार तबीयत का क्या है। कभी ठीक रहती है तो कभी नहीं रहती, लेकिन मैं ज्यादा सोचता नहीं हूँ। शरीर है ये सब तो होता ही रहेगा। मेरी लापरवाही जो है। हाँ आज भी मिल्किबार रखता हूँ पर खाता नहीं हूँ क्योंकि डरता हूँ कि कहीं खत्म न हो जाए। रही बात समोसे की तो वो अब भी खाता हूँ लेकिन घर का बाहर का खाना तो छोड़ ही दिया हूँ। घर के खाने से प्यार करने लगा हूँ इसलिए किसी भी चीज को ना कहना ही छोड़ दिया हूँ। और बात धड़कन की तो वो बस की नहीं मेरे। कंट्रोल में ही नहीं रहती मेरे। और इन्हेलर तो छुट ही गया था लेकिन वक्त बे वक्त लेना ही पड़ता है उसे, बाकी सब सही है कोई तकलीफ नहीं है खुश हूँ जो है उसी में। तुम अपना बताओ। खाना खाया या नहीं?”
वह बड़े प्यार से कहती है
“आज सुबह से नहीं खाई हूँ। दिन भर तेरा ही ख्याल आया है। और बिल्कुल भी भूख नहीं लगी और न पानी पीने कि इच्छा हुई है। बस शाम को मैं पापा से मिल्किबार और लिटिल हर्ट मंगवा। सोचा तुमसे बात कर खाऊंगी। पर अफसोस मिल्किबार नहीं मिला। वैसे मेरा भी सब सही ही है। तुम्हारी बातों मे ही जीती हूँ और जो-जो सिखाया था तुमने वो सब पूरी करने की कोशिश में लगी रहती हूँ। सिर्फ अपने करियर पर ही फोकस है।”
मैंने अचानक से उसको रोका
“सुनो न….एक बात कहनी है”
बहुत ही प्यार से उसने कहा
” बोलो न मेरी जान क्या हुआ”
मैंने कहा
“यार सुसु आई है…..तुम फोन मत रखना मैं तुरंत आता हूँ”
उसने जोर से हँसते हुए कहा
“ठीक है मेरा बच्चा जाओ वैसे भी एक घंटा होने को है फोन खुद ब खुद कट ही जाएगा। तुम जल्दी आओ तब तक मैं पानी भर आती हूँ किचन से और कुछ खाने का भी ले आती हूँ। फिर हम पूरी रात बात करेंगे”
मैंने कहा
“ठीक है जी” कह मैं फोन कट कर टॉयलेट चला गया।
मन में सवालों का बवंडर सा आन पड़ा। क्युं फोन की, क्या काम है उसे, क्या फिर से वह मेरे साथ रिश्ता रखना चाहती है, वगैरा-वगैरह।
अचानक धड़कन तेज हो गईं। कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। मैं चुप होकर डाईंनिग हॉल में ही बैठ गया। ग्लास में पानी ले हजारों सवालों से झूझ रहा था। तभी मन में खयाल आता है “जो होता है होने दो, तुम अपनी ओर से कुछ न करो। गलत तुम करोगे नहीं गलत तुम्हारे साथ होगा नहीं। अपनी मौज में रहो।” ग्लास का पानी खत्म कर कमरे की तरफ बढ़ा और बंद कमरा कर फोन देखा तो 7मिसड कॉल नजर आए। तब तक फिर कॉल आ गया।
जैसे ही फोन उठा “हैलो” बोला।
उधर से गुस्से का बाँध टूट पड़ा।
लगातार 15मिनट तक डाँटना। और कहना
“अब कुछ बोलोगे भी या मुंह ही बंद रखोगे।”
हंसते हुए मैंने कहा “बस हो गया, सबर का बाँध टूट गया तुम्हारा। सुसु कर 2मिनट बैठ पानी क्या पीने लगा तुम से तो रहा ही नहीं गया”
यह बात उसके दिल को मानो जख्मी कर गया हो।
फिर क्या पसर गया एक सन्नाटा, हर वक्त की तरह मैं भी खामोश वह भी खामोश हो एक दूसरे के साँसें सुन रहे थे, हम काफी देर तक ऐसे ही थे।
फिर अचानक से वह कहती है
“सुनो न”
मैंने कहा
“कहो न जी”
वह हँसते हुए कहती है
“चलो न चाँद को देखते है”
कहा मैंने
“जरा ठहरो जी, खिड़की खोल टेबल से सारा सामान हटाने दो। फिर इत्मिनान से बैठेगें।”
वह कहती है
“ठीक है, लेकिन जल्दी”
मैंने कहा
“जल्दी क्या ,कौन सा चाँद भागे जा रहा है”
तब वह मुँह बना कहती है
“अरे नहीं,लेकिन फिर भी तुम्हें तो पता है न मुझमें सबर कितना है।
मैं गुस्से में कहता हूँ
“हाँ- हाँ इसलिए तो मुझे छोड़ गई”
उसने दबी आवज में बोला
“फिर वही बात यार, मैं भुखी हूँ मुझे खिलाओ न अपने हाथो से ताकि मैं तुम्हारी ऊंगलीयों को काट सकुं”
मैंने चिल्लाते हुए उससे कहा
“खिलौनों से खेला करो,इंसानो से नहीं,मैं इन सब से आगे बढ़ चुका हूँ”
वह भी झुंझलाते हुए बोली
“अब बस भी कर झूठा, आगे बढ़ गया है इसलिए तो यादों के पन्नों को सजाए फिरता है, न खुद चैन से जीता है न मुझे जीने देता है, लाख बार कहीं हूँ शैंकि बड़ा हो जा बड़ा हो जा, लेकिन सुनना ही नहीं है, अब चलो जल्दी से खिला दो न अपनी जान को, भूखी है तेरी किताब कि वजह से, तेरी अंतिम यात्रा पढ़ तेरे पास आई है बस एक रात के लिए वो भी चाँद के साथा………”
कहते कहते उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी। और उसकी आँखों कि बारिश ने मेरे दिल को भीगो दिया।
मैं चुप करा उसे उसके दिल को तसल्ली देते हुए खिलाया। और वही उसकी पुरानी आदत पुरा मुँह भर के खाना और खाते हुए बोलना, और सच्ची पहले की ही तरह इस बार भी मुझे कुछ समझ नहीं आया वो बोल रही है, बस उस पागल की खुशी के लिए हाँ हाँ करता गया।
खाने के बाद पता नहीं क्या हुआ। उसने मुझे गोद में सुलाया और अपनी बातों में मसहुल कर दिया। चाँद देखता रहा और उसकी बातें चुप हो सुनता रहा, ज़िंदगी को जीने का तरीका सीखा रही थी।
अचानक उसने मुझसे पूछा “चाँद दिख रहा है या नहीं?” मैंने कहा “नहीं वो तो थोड़ी देर पहले ही गायब हो गया नहीं दिख रहा है”
गुस्से में वो बोली
“तो बोला क्युं नहीं मुझे, अब उठो टेबल से और छत पे जाओ और देखो चाँद को, तभी बातें करूँगी”
उसकी ये बात सुन के अजीब लगा और कहा मैंने
“अबे पागल औरत, दिमाग सही है न ,मेरी मम्मी टाँग तोड़ देगी और तो और मुझे डर लगता है इसलिए मैं नहीं जाऊंगा”
इतना सुन वो फिर जोर-जोर से हँसने लगी
और कहती है “ठीक है मेरा बच्चा”
फिर हम दोनों भविष्य की बातों में खो गए और पता ही नहीं चला कब सुबह हो गई और चिड़िया की चहचहाहट सुनाई देने लगी दोनों को।
और यह आवाज कानों को तो अच्छा लग रहा था पर दिल को मानो कचोटते जा रहा था। क्योंकि यह आवाज विदाई की बेला पास ला रही थी।
सुबह के सूरज के साथ हम दोनों ही जुदा होने वाले थे।
तभी वह कहती है “चलो न शैंकि, साथ में सूरज देखते हैं “मैंने कहा “कौन सा सूरज, डुबता हुआ सूरज” उसने कहा “नहीं जी उगता हुआ” मैंने कहा “हाँ वही यार डुबता हुआ ही”
इतना सुनते ही उसकी आँखों से आँसू बहने लगे और आवज में फिर से लड़खड़ाहट सुनाई देने लगी।
और कहा उसने
“मेरी जान रोना बंद करो और दर्द के हर अल्फाज को जिंदा रखो
अपनी डायरी मे उन तारीखों के साथ। माना की वो काली कलम तुम्हारे पास नहीं पर फिर भी जो है उसी के सहारे उसे उकेरा करो, चलो चलती हूँ”
और रोते हुए उसने फोन काट कर दिया।
और मैं बे-सुध सा वही टेबल पर पड़ा रहा।

Written by:- Ashish Kumar
My words are incomplete without support of Ziddy Nidhi
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ज़िंदगी की सीख……!!!!!

May 20, 2020
Shanky❤Salty
जिन्दगी ने सिखाया है मुझको
भुल कर भी न पालों ख्वाहिशों को इतना
कि रूठ बैठो तुम खुद से
जितनी ख्वाहिशें अपने भीतर पालोगे उतना ही सूकुन खोते जाओगे

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Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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कुछ ऐसा है……!!!!!

May 14, 2020
Shanky❤Salty
ओए पागल…..!!!!
सुनो न,
हाल-ए-दिल का समंदर अभी सूखा नहीं है
आँखों से पानी अभी बहा नहीं है
सुना है मैंने
हैरान हो जाते हो
मुझे चुप देखकर
मुझे हारता देखकर
समझाऊं तुझको कैसे मैं
अंदाज ही मेरा कुछ
ऐसा है

Published by Anonymous on behalf of Shanky_Salty
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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Bible…..!!!!!

May 2, 2020
Shanky❤Salty
Jesus said to them, “Very truly I tell you, unless you eat the flesh of the Son of Man and drink his blood, you have no life in you.
I’m reading bible from this source Bible Hub
Is it true that we don’t have life if we are not eating the flesh of the son of man and drink his blood?
Is this humanity ?
Kindly clear my doubts about this phrase in the comments below.
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ए ज़िंदगी तु ही बता…..!!!!

April 30, 2020
Shanky❤Salty
अब मुझे जीने को क्या चाहिए
बस तेरे इश्क़ का ख्याल हो
और मेरे अश्क़ की स्याही हो
बस अब इतनी सी जरूरत रह गई है
मेरे जीने की

Written by:- Ashish Kumar
My words are incomplete without support of Ziddy Nidhi
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तो तुम मुझे याद रखना…..!!!!

April 6, 2020
Shanky❤Salty

Hi everyone! I’m so excited about this post!! Today I am doing a collab with my amazing friend Dr. Sakshi Pal.

बात तुम कहती हो याद रखने की
मैं चाहता हूँ तुझको साथ रखने की
सपनों की मंदाकिनी में जगमगाते रहना चाहती हो
मैं सारे ख्वाबों को सच कर साथ जीना चाहता हूँ
माना कि हंसी तेरी करोड़ों जुगुनुओं सी है
पर सच कहता हूँ दूर होकर मुझसे वो मुरझाए फूलों सी है
है काली घटा तेरी जुल्फों की
बिछड़ने की कल्पना से हो गई है जिन्दगी मेरी घनी काली सी
सब कुछ है याद मुझको
उस उगते चाँद की शीतलता से ले
उगते सुरज की किरण तक
जिन्दगी में तेरे अनगीनत सितारे होंगे
चाहती हो तुम यादों में
पर हकीकत तो ये है
जिंदगी में मैं न होऊगा
अब सुन लो
है मेरी भी चंद चाहतें
न चाहिए तू
और न चाहिए साथ तेरा
बस घाट हो मणिकरनिका का और
रहूँ मैं लकड़ियों के गांठ पर लेटा

Dr. Sakshi Pal Post
Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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पता नहीं क्या है तू…..!!!!

March 21, 2020
Shanky❤Salty
ढल न सकी वो रात है तू
बता न सकुं वो बात है तू
उग न सका वो सूरज है तू
जिस्म से दूर है तू
रूह से पास है तू
आँखों से छलकता पानी है तू
हौसला रखने वाला साथी है तू
हाँ कुछ है तू
पर पता नहीं क्या है तू
जो भी है बहुत खास है तू
जब भी पास आती है तू
होंठो तक आते आते रुक जाता हूं मैं,
कभी किसी ने चाहा है तुझको
कभी किसी ने चाहा है मुझको
माना कि हम दोनों ने भी चाहा था उन्हें बे-इम्तेहां
चखी है हम दोनों ने ही बे-वफाई की मिठास
हाँ झांका है एक दुजे के अंदर हमने,
बची हुई है अभी भी स्वाद मन में
प्यास है इश्क की
पर कतराते है पीने से
क्योंकि कतरा-क़तरा ज़िंदगी को जीते हैं हम
है तो वो कभी न पुरे होने वाले जज़्बात ही
पर जो भी हो हैं वो बड़े कमाल के हैं

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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निधि वन में राधा रानी से……!!!!!

March 18, 2020
Shanky❤Salty
लुभा सी जाती है लिखावट उनको मेरी
स्याही में मिलावट जो है अश्कों की मेरी
कहते है कुछ लोग मुझे
कि मैं मशहूर हो गया हूँ
उनके दिल के करीब हो गया हूँ
पर आज सब से मैं एक बात कहता हूं
एक हकीकत सी मैं आज कहता हूँ
परेशान था मैं
रो रहा था मैं
भटकते-भटकते जा पहुँचा मैं एक वन में
हाँ ‘निधि वन’ में
जहाँ शब्दों की बारिश कर दी उसने
मेरे अधूरे शब्दों के उपवन में
लहलहाती खेत है बनाती वो
मेरे आँसुओं को शब्द दे मोती है बनाती वो
कुछ भी लिख दूं मैं
चंद मिनटों में सुंदर है बनाती वो
मुझको तो बहुत है भाती वो
सच कहूं तो
मुर्दों में भी जान है लाती वो
फिर मैं एक दिन यूं ही
घूम रहा था, भटक रहा था
उसी निधि वन के आंचल में
फिर एकदिन मिला मैं एक रानी से
हाँ “राधा रानी” से
वही जो प्राण डालती है सभी में
मेरे निष्प्राण से शब्दों में
कहती कुछ भी नहीं मुख से
बस मुस्कुरा कर मेरी गलतियों को सही है करती
प्रेम समर्पण है, प्रेम ज़िंदगी है
हर पल मुझको यही सिखाती है
प्रेम का पाठ पढ़ाती है
या युं कहूं तो राधा ही प्रेम है
अपने मन के उपवन से
कुछ प्यारे शब्द वो चुन लाती है
किया है महसूस मैंने
करके बंद जुबां अपनी वो
प्रेम से भरी कलम चलाती है
भरी महफिल में मुस्कुराना जानती है
अकेले में तकिया गीला करना भी जानती है
इनके हर शब्दों से प्रेम ही छलकता है
प्रेम समर्पण का भाव ही थिरतकता है
हूँ बड़ा किस्मत वाला मैं
निधि वन में मरघट पर लिखता हूँ
राधा रानी से मिलकर ज़िंदगी को सीखता हूं
देने को तो कुछ भी नहीं है
बस दो शब्दों के सिवा पास मेरे
मेरे मुरझाए शब्दों पर
निधि – राधा हर पल अपने प्यार की बारिश कर देती हैं
विचित्र सा है कुछ इनका साथ निस्वार्थ है
कर लिया है आज महसूस मैंने
सच में, सत्य है!
निधि वन को जब तक तुम जानोगे-समझोगे तब तक वो तुम्हारे इस आभासी दुनिया को अलविदा कह चुकी होगी
रहस्यमय उसका प्रेम जो है
और रही बात
मेरी राधा रानी की तो वो देह से परे है अनछुई है आत्मा से
खैर जो भी हो
हो तो मेरे शब्दों की दुनिया की प्राण तुम दोनों

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Dr. Sakshi Pal
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अपनी कुटिया…..!!!!

March 11, 2020
Shanky❤Salty
दूर एकांत में कहीं
चलो चलते हैं
अपनी कुटिया ,अपनी दुनिया
बुढ़ापे की हमारी छोटी सी दुनिया
चलो ना चलते हैं
दूर एकांत में कहीं
सहारे सारे छूट गए
अपने सारे रूठ गए
कौन रहा है कौन रहेगा
अपनी तो अब फटी बिछनिया
बुढ़ापे की हमारी छोटी सी दुनिया
वही तपती धूप में तुम
कांपते हाथो से पंखा झल देना
जो जाड़े की सर्द रातें हो
तो अटकती सांसो की गर्मी दे देना
वो यौवन का प्रेम अब
चला है होने को अमर
तुम संग मेरे यही अपनी
देह त्याग देना
चलो ना चलते हैं
अपनी कुटिया,अपनी दुनिया
बुढ़ापे की हमारी छोटी सी दुनिया
वो महक तेरे केसुओ की
झंकार तेरी पायल की
मैं खोता चला जाता हूं
डूबता चला जाता हूं
जब भी तुझको देखता हूं
तुझ सी खूबसूरत तेरी आभा की झुर्रियां
खन खन करती तेरी चूड़ियां
मैं प्राण त्याग दूंगा तुझमें
तुम मुझमें सम्मिलित हो लेना
जब सांसे अटकती हुई जा रही हो
तुम हाथ दिल पर रख देना
चलो ना चलते हैं
दूर एकांत में कहीं
अपनी कुटिया ,अपनी दुनिया
बुढ़ापे की हमारी छोटी सी दुनिया

This is an Imagination Challenge post given by Sohanpreet Kaur
And thank you soooo much Dr. Sakshi Pal for kind support.
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क्या है ये…..!!!!

March 8, 2020
Shanky❤Salty
क्या है ये….????
मैं मुस्कुरा कर क्यों मुकर जाता हूँ?
जब तू कहती है “मोहब्बत है मुझे तुझसे”
तू मुस्कुरा कर क्यों मुकर जाती है?
जब मैं कहता हूँ “मोहब्बत है मुझे तुझसे”
डूबती तो तू भी है मुझमें
खोता तो मैं भी हूँ तुझमें
फिर क्यों कतराते हैं एक दूजे से यूं हम दोनों
पल-दो-पल समझाते हैं एक दूजे को यूं हम दोनों
कमबख्त समझ ही नहीं पाता मैं
क्यों समझाते हैं एकदूजे को यूं हम दोनों
अरे माना मैंने!
कि गम की कतारें हैं इन खुशियों के पीछे
फिर क्यों जी लेते है पल भर को सही
बाँहों में एक-दूजे की यूं हम दोनों
सदियों से अधूरे थे सदियों से प्यासे थे हम दोनों
क्या है ये?
इश्क ही है!
जो एक दूजे के इस कदर हो जाते है यूं हम दोनों
एक वक्त था जब दिल पत्थर था मेरा
आज जब धड़कते देखा दिल को
तो याद आया मुझे, हैरान सा हूं!
“कोई भी चीज अपना स्वाभाविक मूल नहीं बदल सकती है”
या यूं कहें दिल के हाथों मजबूर हो
एकदुजे में बह जाते हैं हम दोनों।

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Dr. Sakshi Pal
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इश्क था आखिर……!!!!

February 23, 2020
Shanky❤Salty
रात की खामोशी में,
उस घोर अंधेरे में,
हल्की सी चांदनी के बीच,
उसकी आंखें सच कहती रहीं,
और मैं उसके
लबों का झूंठ,
सुनता रहा,
इश्क था आखिर,
आंखो में उतर ही आया।

ना अल्फ़ाज़ मेरे हैं,ना ही जज्बात, बस अल्फाजों की कद्र है, इसलिए नाम मेरा है, और जो मेरा है वो हीं तेरा है
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आत्मशिव…..!!!!

February 21, 2020
Shanky❤Salty
महाशिवरात्री जागने का पर्व है
अपने अंदर के आत्मशिव को जागने का पर्व है
जीव शिव है
शव भी शिव है
सब कुछ शिव है
बिन शिव कुछ भी नहीं है
मेरे शिव जी समर्थ तो हैं
पर हमें मारने में असमर्थ हैं
हाँ-हाँ शिव जी ने ही ज्ञान दिया है
मृत्यु आएगी पर हमारी मृत्यु हो नहीं सकती
यह परम सत्य है
मृत्यु तो कपड़े बदलने की तरह है
इस ज़िन्दगी को छोड़ दूसरी ज़िन्दगी को अपनाना है
फ़िर किस बात का डर है
रोना क्यूँ है
क्या कहूँ नाथ जी आपसे
सुनते सब कुछ हैं
पर कहते कुछ भी नहीं
बस झोलियाँ भर-भर देते हैं
लीला कर हर वक़्त अपनी ओर खींचते हैं
भर-भर प्याली मुझको आप ही तो पिलाते है
बिन कहे अन्हद नाद आप सुनाते हैं
च़िता कि राख़ हो
या चंदन का लेप हो
हर कुछ मुझको प्यारा लगता है
हर कुछ मुझको अपना लगता है
माना की वो राखी टूट गई मुझसे
पर वह रिश़्ता अब भी बरक़रार है
हाँ नाथ जी वो रूद्राक्ष भी बिख़र चुका था
पर आपने मुझको समेट रखा था
मेरे शिव ने मेरी शक्ति से कहा था
नास्ति ध्यानं सम तीर्थं
नास्ति ध्यानं सम यज्ञं
नास्ति ध्यानं सम दानं
तस्मात् ध्यानं समाचरेत
ध्यान के समान न तीर्थ है न ही यज्ञ है न ही दान। ध्यान ही सब कुछ है।
सब कोई रूठ जाएगा
सब कुछ छूट जाएगा
तो जगा लो इस रात्रि
हाँ इसी महाशिवरात्रि
मिल लो उस शिव से
जो न रूठेगा
जो न छूटेगा
जो मेरा था…..जो मेरा है….और…जो मेरा ही रहेगा
तुम कुछ भी न करो
बस बैठे रहो उसके ध्यान में
मेरा वादा है
वो आएगा
वो आएगा
वो आएगा
ज़रूर आएगा

तुम बस बैठे रहो
महफिल का रंग बदल जाएगा
मेरा शिवशंभु जब भी आएगा
तेरा जीवन भी चम चमा जाएगा…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal