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निस्वार्थ प्रेम (16)…..!!!!

February 1, 2023

Shanky❤Salty

घर में सेवा माँ बाप कि कर के तो देखो
पीछे पीछे हरि फिरते दिखेंगे
वो माँ पुराने ख्यालातों कि लगती है
जिसने तुम्हें काबिल बनाने के लिए
अपने माँ बाप के दिए जेवर गिरवी रख दिये थे
क्यों अपने शब्दों से उनके सिने को छलनी करते हो
जड़ों को काटोगे तो फल कहां से होगे
पानी सींचों जड़ में
माँ बाप को गले लगा देखो
सारी अलाएं-बलाएं चलीं जाएगी
और हरि पीछे पीछे आ जाएगें
दवाओं में भी वो असर नहीं है
जो माँ बाप की दुआओं में है
जग की कितनी भी सवारी क्यों ना कर लो
बाप के घोड़े की सवारी कहीं नहीं मिलेगी
कितनी भी महंगे तकिये में क्यों ना सो लो
माँ के गोद जैसे सुख कहीं नहीं मिलेगा
सिखाते है माँ बाप मुझको
रखो ना गाँठ तुम मन में ना तन में
ग़र जीना है तुमको खुल के तो
ना मान दिया ना दिया कभी अपमान माँ-बाप ने
बस सिखाया है
जहर कि पुड़िया है ये मान-अपमान
हर हाल में मुस्कुराना सिखाया है


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निस्वार्थ प्रेम (15)…..!!!!

January 31, 2023

Shanky❤Salty

हे राम पता नहीं क्यों हम ऐसा करते जा रहे हैं
जिन्दगी जन्नत है उनकी
जिन्होंने माँ बाप के सिखाये रास्तों पे चला है
जिस तरह राम जी हमारा बुरा नहीं कर सकते है
ठीक उसी तरह माँ बाप हमारा बुरा नहीं कर सकते है
गुलाबों की तरह महक जाओगे
गर माँ बाप के संस्कारों को अपनाओगे
ये रिश्ता गजब है जनाब
तकलीफ तुम्हारे देह को होगी
पर दर्द माँ बाप को महसूस होगी
यार कृष्ण भी श्री कृष्ण तो माँ बाप से ही बने है
राम भी श्री राम माँ बाप से ही बने है।
तुम भी बन सकते हो
हम भी बन सकते हैं
महान
ग़र ख्याल रख लिया माँ बाप का तो
एहसानों वाला नहीं
प्यार वाला
माँ बाप के रहते
ना किसी ने परेशानी देखी
जब गुजरे माँ बाप तो
ना रहा चेहरे पर मुस्कान
ना देखा मुसीबतें
ना रहा……..
क्यों मंदिरों मस्जिदों में
ईश्वर, अल्लाह को खोजते हो


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निस्वार्थ प्रेम (14)…..!!!!

January 30, 2023

Shanky❤ Salty

ये हमारा
हंसना, गाना लिखना
खेलना, कूदना, सोना
सब उनसे ही तो है
माँ बाप साथ हो ना तो
बेफिक्री खुद-ब-खुद
साथ आ ही जाती है
वर्ना देखो उन्हें
जिनके सिर से माँ का आँचल हट जाता है
या पिता का साया हट जाता हो
क्या हाल हो जाती है उनकी
बस जिस्म रह जाता है
जरूरत पड़ने पर एक माँ भी
पिता का फर्ज निभाती है
और पिता भी माँ का
पता नहीं यह अलौकिक शक्ति कहाँ से आती है
बच्चे होते हुए हमें कद्र नहीं होती माँ बाप की
जब हम भी माँ बाप होते
तो बच्चे करते नहीं कद्र हमारी
ये सिलसिला चलता आ रहा है
सब कुछ मालूम होते भी
हम खुद को पतन के रास्ते ले जा रहे हैं


निस्वार्थ प्रेम (13)…..!!!!👉 यहाँ पढ़े


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निस्वार्थ प्रेम (13)…..!!!!

January 29, 2023

Shanky❤Salty

जामाने को कठोर कहते हो
माँ के कोमल हृदय को छोड़
उसे जमाने में फंसे रहते हो
माना की पिता की बात
नीम जैसी कड़वी है
पर यार सेहत के लिए तो वही अच्छी है
सिखाया था मेरे राम जी ने मुझको
हर चाहत के पीछे मिल दर्द बेहिसाब है
पर एक माँ बाप ही हैं
जो ग़र साथ हो ना तो वहाँ दर्द का नामो निशां नहीं है
ज़िन्दगी की जंग मौत से लड़ कर मैं पड़ा था बेड पे
गुरुग्राम कि अस्पताल में
जिंदा लाश बन के
वो पिता ही जो टूट चुके थे
लेकिन आँखों से आँसू छुटने नहीं दिया
हाल मेरा बेहाल देख मुझसे पूछा नहीं
डर था उन्हें, कहीं उनके आँसूओं को देख
मैं टूट ना जाऊँ
डाक्टर थक गए थे
मेरे हृदय की गति को सामान्य करने में
पर वो पिता ही थे
जिन्होंने मेरे हृदय पर हाथ रखते ही
उसे सामान्य कर दिया था
5 दिन से नींद मुझसे रूठी थी
माँ की थपकियों और लोरियों ने
मुझे सुकून का नींद दिलाया था
क्या कहूँ मैं जनाब
यार ये साँसे है तो उन्हीं की अमानत


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निस्वार्थ प्रेम (12)…..!!!!

January 28, 2023

Shanky❤Salty


कितनी आसानी से कह देते हैं हम
समझते नहीं है माँ बाप हमारे
पता नहीं हम ये बात समझ क्यों नहीं पाते हैं
बड़े क्या हो गए हम मानो पंख ही आ गए
चलना क्या सीख लिया
उनकी उंगली पकड़ कर उड़ना ही शुरू कर दिया हमनें
रास्ता दिखाया माँ बाप ने
और व्यवहार हमारा ऐसा
जैसे खुद ही बनाया रास्ता हमनें
किसी शख़्स ने बहुत खूब लिखा था
खुली आँखों से देखा सपना नहीं होता
माँ बाप से बढ़कर कोई अपना नहीं होता


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निस्वार्थ प्रेम (11)…..!!!!

January 27, 2023

Shanky❤Salty

वो बाप ही जनाब
जो भरे बाजार में अपनी पगड़ी उछलने ना देगा
पर अपने बच्चों की खुशी के खातिर ही
भरी महफ़िल में भी अपनी पगड़ी किसी के पैरों पे रख देगा
अपनी खुदगर्जी के लिए वो बच्चे
बाप को भी भरे बाजार में गलत कह देगा
जीवन के एक पड़ाव में
जरूरत होती है माँ-बाप को
हमारे एहसानों की नहीं हमारे प्यार की
जिसने हमें हर आभावों से दूर रख
काबिल बनाया
उन्हें ही हम आभावों में रख रहे हैं
अपने चार दिन के मोहब्बत के खातिर
हम तमाशा कर देते हैं उनका
जिसने हमारे जन्म से पहले ही
ताउम्र हमसे मोहब्बत की सौगंध खाई थी


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निस्वार्थ प्रेम (10)…..!!!!

January 26, 2023

Shanky❤Salty

जब माँ बाप साथ हो ना
तो किसी भी चीज कि परवाह नहीं होती
उनके होने से ही
हर दिन होली लगती है
हर रात दिपावली लगती है
और ना हो ग़र माँ बाप तो
पूछो उनसे
होली भी बेरंग सी लगती है
दिपावली भी अंधियारा सा लगता है
आँखों में आँसू
और मन भारी सा लगता है
क्या मंदिर मस्जिद भटका है वो
क्या स्वर्ग कि चाहत होगी राम जी उन्हें
माँ बाप मिले हैं जिन्हें
चरणों में ही माँ बाप के बैकुंठ होगी
पता नहीं राम जी
वो औलाद कैसी है
जो सफलता की शिखर पर पहुंच कर पूछता है
माँ बाप से तूने किया ही क्या है मेरे लिये
बस राम जी
यही कारण है उसके पतन का
कहता है वो औलाद जो भी किया वो तो
फ़र्ज़ था पर कैसे समझाऊँ मैं उनको यार कम से कम माँ बाप ने
फ़र्ज़ तो पूरा कर दिया
पर तुमने क्या किया यक़ीनन दुनिया में बहुत सी चीजें अच्छी है
पर सच कहता हूँत मैं
हमारे लिए तो हमारे माँ बाप ही सबसे अच्छे है


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निस्वार्थ प्रेम (9)…..!!!!

January 25, 2023

Shanky❤Salty

खुशियां ज़िन्दगी में कम होती जा रही है
दो रोटी के लिए हम माँ बाप से जो अलग होते जा रहे है
माँ बाप के प्यार जैसे प्यारा और कुछ नहीं लगता है
माँ बाप के चेहरे में खुशियां आसानी से दिख जाती हैं
पर ज़ख्मों का दाग दिख नहीं पाता है
अपने संस्कारों से
हमारी हिफाज़त करने का संकल्प जो लिया है उन्होंने
अपनी जान से भी ज्यादा हमको चाहा है
हम सबने सत्यवान और सावित्री कि कहानी सुनी ही होगी
की यमराज से भी अपने पति की प्रारण ले आती है
पर यह तो माँ बाप है जो मृत्यु तो बहुत दूर कि बात है
यह तो संकट को भी पास भटकने ना दें
ऐसा अद्भुत प्रेम है इनका
पिता हमारी खामोशियों को पहचानते हैं
माँ हमारे आँसूओं को आँचल में पिरोती हैं
बिन कहें ही हालातों को हमारे अनुकूल कर देते है


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निस्वार्थ प्रेम (8)…..!!!!

January 24, 2023

Shanky❤Salty

जरूरतें अपनी भुला कर
हसरतें मेरी पूरा करते थे
वो और कोई नहीं मेरे मेरे पिता थे
मेरी चीखों को मेरे आँसूओ को
वो मुस्कान में बदलती थी
आज जब वो बूढ़ी हो गई है
तो ना जाने क्यों
हमें उसके जरूरतें
कि चीख-पुकार कानों तक नहीं रेंगती है
यक़ीनन बेटा अब बड़ा हो गया है
पैरों पर खड़ा हो गया है जमाने की चकाचौंध में
वो अपने माँ बाप को भूल गया है
अरसा बीत गया होगा
माँ की गोद में सोए हुए
पर कोई बात नहीं
जब माँ सदा के लिए सोएगी ना
तब हमें उसके गोद की कमी खलेगी
एक अनुभव लिखता हूं मैं
करीब नौ-दस घंटे मैं जंग लड़ रहा था
हाँ वही मृत्यु से दुआओं का दौर चल रहा था मेरे अपनों का
जंग करीब करीब जीत चुका था
खबर भी फैल गई थी जंग में जीत हो गई है
लोग अपने अपने घर चल दिए थे
कुछ लोगों ने खाना खा लिया था
तो कुछ सो चुके थे
पर कुछ ही देर में बाजी पलट चुकीं थी
मृत्यु ने प्रहार शुरू कर दिया था
सफेद चादर से मैं लिपटा था
पल भर में ही खून के फव्वारों से वो लाल हो गया
हार चुका था मैं
शायद मर चुका था मैं
जिंदगी की जंग को चीखता रहा मैं चिल्लाता रहा मैं
पर मृत्यु ने अपनी पकड़ नहीं छोड़ी
मेरे शरीर से मेरे प्राणों को खींच कर
अलग करने ही वाली थी कि तभी
ईश्वर के दूत आए
हाँ माँ पापा आए
माँ मुझको देख हैरान तो हो गई थी
पर मृत्यु उन्हें देख परेशान हो गई थी
पापा ने तुरंत ज़िंदगी के कागज पर
दस्तखत कर जीत का आदेश लिखा
फिर क्या मृत्यु को इजाजत ही नहीं मिली
और खाली हाथ उसे वहाँ से लौटना पड़ा
कहाँ ना मैंने बहुत पहले
जिनके सिर पर माँ-बाप का हाथ होता है
वहाँ पर मृत्यु को भी इज्जात लेनी पड़ती है


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निस्वार्थ प्रेम (7)…..!!!!

January 23, 2023

Shanky❤Salty

देखा है मैंने

साँसे रुक जाती है ना उनकी
सुकून की नींद उड़ जाती है हमारी
पिता कि साया हटते ही
बच्चे खुद-ब-खुद बड़े हो जाते है
माँ के गुजरते ही
बच्चे तकिये में मुँह छुपा रोते रह जाते है
जमीन के टुकड़े के लिए
हम माँ बाप के दिल के
हाजारों टुकड़े कर देते है
गरीबी सताती जरूर थी
पर हमारा पेट भर
वो खुद भूखा रहती थी तो
वो और कोई नहीं हमारी माँ ही थी
हम कैसे खुश रहे
इस सोच में ही तो
माँ बाप सारी जिंदगी गुजारते हैं
धन लाख करोड़ कमाया है
माँ बाप को खुद से दूर कर तूने
असली पूंजी गवायाँ है
खाया है मैंने
माँ के एक हाथ से थप्पड़
तो दूजे से घी वाली रोटी
याद है मुझे वो रात भी
जब खुद की नींद उड़ा कर
गहरी नींद में सुलाती थी
खुद गीले में सो कर
मुझको सूखे में सुलाती थी


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निस्वार्थ प्रेम (6)…..!!!!

January 22, 2023

Shanky❤Salty

माँ की ममतामयी आँखों को,
भूलकर भी गीला ना करना
और
माँ की ममता का
पिता की क्षमता का
अंदाजा लगाना असंभव है
उंगली पकड़ कर
सर उठा कर चलाना सिखाया है
पिता ने
अदब से
नज़रें झुका कर चलना सिखाया है
माँ ने
सब सिखाया है
माँ ने
हौसला भरा है
पिता ने
यश और कीर्ति दिलाया है
पिता ने
माधुर्य और वात्सल्य दिलाया है
माँ ने
कर्ज लेना कभी नहीं सिखाया आपने
पर ना जाने क्यों
हमें आपने कर्जदार बना दिया है
जिसे इस जन्म में तो पूरा करना संभव ही नहीं है
जब तक साँसे है
तब तक कर ले ना
प्यार उनको


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निस्वार्थ प्रेम (5)…..!!!!

January 21, 2023

Shanky❤ Salty

निकल रहा था मैं वृद्धाआश्रम से
गुजरते देखा मैंने एक औरत को
वृद्धाआश्रम के बगल से
शुक्रिया अदा कर रही थी वह ईश्वर को
रहा न गया मुझसे पूछ बैठा मैं “आप कौन हो”
मुस्करा वह कह गई “एक बाँझ हैं”

गूगल के द्वारा पता चला है
भारत में कुल 728 वृद्धा आश्रम हैं
और 2 करोड़ अनाथआलय हैं

वो कहते हैं न
कर्म का फल सबको भोगना ही पड़ता है…!!
खैर छोड़ो तुम्हारी जो मर्जी हो
करना बस हाथ जोड़ कहता हूँ
सिर्फ एक बार
सिर्फ एक बार
हर दुआ में उसकी दुआ है
जिसके सिर पर माँ की छाया है
समझो ना वहीं पर खुदा का साया है
काँटों को फूल बनाया है
पिता ने हर मुश्किल राह को आसान जो बनाया है
सोकर स्वयं गीले में, सुलाया तुझको सूखे में


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निस्वार्थ प्रेम (4)…..!!!!

January 20, 2023

Shanky❤Salty

मैं बहुत कुछ कहना चाहता हूँ हृदय की पीड़ा है
जब सुनता हूँ बलात्कार हुआ,
किशोराअवस्था में बच्ची गर्भवती हो गई,
17 साल की बच्ची का गर्भपात हुआ,
इश्क कर बच्चे भाग गए….
अब आगे क्या कहूँ मेरे आँसू ही जानते हैं
शायद माँ-बाप ने अच्छे संस्कार नहीं दिये होंगे इसलिए
ऐसा हुआ होगा यह कह हम ही ऊँगली उठाते हैं

अच्छा छोड़ो ये सब बातें

ग़र तुम्हें एक साथ आँखों से सच देखना है
और कानों से झूठ सुनना है
तो किसी वृद्धा आश्रम जा कर वहाँ रहने वाले
किसी से भी उनकी ख़ैरियत पूछ कर देखो
तुम खुद-ब-खुद समझ जाओगे
मैं कहना क्या चाहता हूँ और लिखना क्या चाहता हूँ

खैर छोड़ो
तुम बड़े हो गए हो
तुम्हारे पास वक्त कहाँ
सच में
अब तुम बड़े हो गए हो
वक्त कहाँ है, बुढ़ापा आने में


निस्वार्थ प्रेम (3)…..!!!!👉 यहाँ पढ़े


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निस्वार्थ प्रेम (3)…..!!!!

January 19, 2023

Shanky❤Salty

मेरे इस सवाल का जवाब किसी के पास
नहीं होगा पर मेरी पंक्तियों को पढ़ हर किसी के

आँखों से आँसू छलक ही जाएगा
यार वो कितना भी पत्थर दिल क्यों ना हो
वो एक ना एक पल पिघल ही जाएगा
हमें जीवनसाथी तो हजारों मिल जाएंगे
परन्तु क्या माँ-बाप दुसरे मिल पाएँगे ???

अब बेसरमों कि तरह हाँ मत कह देना
हाथ दिल पल रख मैं कहता हूँ
एक बार प्यार से माँ-बाप को गले लगा के तो देखो
प्रेम दिवस उनके साथ मना के तो देखो
सच कहता हूँ तुम निःशब्ध हो जाओगे
जब माँ-बाप के हृदय से तुम्हारे लिए
करुणा, माधुर्य, वात्सल्य छलकेगा न
तब तुम्हारे रूह से आवाज आएगी

हो गए आज सारे तीर्थ चारों धाम
घर में ही कुंभ है माँ-बाप की सेवा ही शाही स्नान है

मान लो मेरी बात

बाकी तो आप जानते ही हो
क्योंकि सुना है आप समझदार हो

यही दिव्य प्रेम है
मेरे शिव जी ने भी कहा है:-
धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोदभवः
धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता

जिसके अंदर गुरुभक्ति हो
उसकी माता धन्य है, उसके पिता धन्य है,
उसका वंश धन्य है उसके वंश में जन्म लेनेवाले धन्य हैं,
समग्र धरती माता धन्य है

वैसे प्रथम गुरु कौन होता है हम सबको पता ही है
तो कर लो न गुरुभक्ति उत्पन्न


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निस्वार्थ प्रेम (2)…..!!!!

January 18, 2023

Shanky❤Salty

बचपन में बच्चों कि तबियत बिगड़ती थी
तो माँ-बाप कि धड़कनें बढ़ती थीं
आज माँ-बाप कि तबियत बिगड़ी है
तो बच्चे जायदात के लिए झगड़ते हैं
हम प्रेम दिवस मनायेंगें
माँ-बाप को भूल प्रेमी संग जिन्दगी बितायेंगे
सच कहूँ तो, रूह को भूल जिस्म से इश्क़ कर दिखायेंगे
पता नहीं माँ-बाप ने कैसे संस्कार हैं हमको दिये
बड़े होते ही इतने बतमीज़ बन गए जिनकी कमाई से अन्न है खाया
आज उनको ही दो वक्त की रोटी के लिए है तरसाया
गूगल पर माँ-बाप की बहुत अच्छी और प्यारी कविताएँ
मिल जाती हैं मुझको, पर पता नहीं क्यों मैं निःशब्ध हो जाता हूँ
वृद्धा आश्रम की चौखट पर आ कर
कर माँ-बाप का तिरस्कार वो मेरे राम जी के सामने आशीर्वाद हैं माँगते
अब किन शब्दों में समझाऊँ में उनको
ईश्वर ही हमारे माँ-बाप बनकर हैं आते
अपने संस्कारों से जिसने हमें है पाला आज हमने अपनी हरकतों से जीते जी माँ-बाप का अंतिम संस्कार है कर डाला
भरे कंठ लिए एक सवाल है गर माँ-बाप से मोहब्बत है
तो वृद्धा आश्रम क्यों खुले हैं ????


निस्वार्थ प्रेम (1)…..!!!!👉 यहाँ पढ़े


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निस्वार्थ प्रेम (1)….!!!!

January 17, 2023

Shanky❤Salty

हर रिश्ते में स्वार्थ देखा है हमनें
एक माँ-बाप ही हैं जिन्हें निस्वार्थ देखा है
वो बचपन में ही खुशियों के रास्ते खोल देते हैं
हम बड़े हो कर उनके लिए ना जाने क्यों
वृद्धा आश्रम के रास्ते खोल देते हैं
पढ़ा-लिखा कर हमको काबिल बना देते हैं
पर हम कभी उनके दर्द को पढ़ नहीं पाते हैं
अपने अरमानों का गला घोट
जिन्होनें हमे इंसान है बनाया
हमनें अपनी इंसानियत को मार
माँ-बाप की आँखों से आँसू बहाया है
जिन्होंने हमको उंगली पकड़ चलना सिखाया है
हमने उनको हाथ पकड़ घर से बेघर कर दिखाया
अपनी ख़ुशबू दे हमको जिन्होंने फूल बनाया है
हमने तो काँटे दे उनको रुलाया है
जिसने काँधे पे बैठा हमें पूरा जहाँ घुमाया है
उसे सहारा देने पे हमें शर्म आया है
हमारी छोटी सी खरोंच पर
उसने मरहम लगाया है
हमने अपने शब्दों से ही
उनके दिल में जख़्म बनाया है
माँ-बाप ने हमें सुंदर घर बना कर दिया
हमनें भी उनको बेघर कर अपनी औकात दिखा दिया….(आगे जारी है)


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आलस और संघर्ष…..!!!!

December 29, 2022

Shanky❤Salty

गद्देदार बिस्तर पर सो कर
रजाई और कंबल ओढ़ कर
ठंड हमारी जाती नहीं
हर रोज़ किस्मत को कोश कर
अपनी आलस छोड़़ते नहीं

सड़कों पर गत्ते पर सो कर
चादर सी शौल ओढ़ कर
वो ठंड से हार मानते नहीं
हर रोज़ ज़िंदगी से जुझ कर
संघर्ष छोड़ते नहीं


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जीवन का अंश….!!!!

December 21, 2022

Shanky❤Salty

मेरी एक और नई किताब जिसमें 400 से अधिक कविता और कोट्स का संग्रह है इस पुस्तक में जिसे एक छोटी सी बात और उसमें बड़ी सी बात के रूप में लिखने की कोशिश किया है। आशा है आपको पसंद आएगी।

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श्रीमद्भागवतगीता…..!!!!

December 1, 2022

Shanky❤Salty

गीता केवल एक ग्रंथ या पुस्तक नहीं है अपितु जीवन जीने की कला है।
गीता ऐसा अद्भुत ग्रंथ है की थके, हारे, गिरे हुए को उठाता है, बिछड़े को मिलाता है, भयभीत को निर्भय, निर्भय को नि:शंक, नि:शंक को निर्द्वन्द्व बनाकर उस एक से मिला के जीवन का उद्देश्य समझाता है।

गीता में अठारह अध्याय है जो हमारे जीवन के विकास के सर्वोपरी है।
1. अर्जुन का विषाद योग:- जब अर्जुन ने युद्ध के मैदान में अपने गुरु, मामा, पुत्र, पौत्र, ससुर, ताऊ, चाचा और मित्रो को देखा तो शोक करने लगे और मैं युद्ध नहीं करूँगा यह कह कर अपना धर्म का त्याग कर रथ के पीछले भाग में बैठ गए।

2. सांख्य योग:- श्री कृष्ण महाराज ने अर्जुन को ज्ञान योग के द्वारा समझाया की शोक करने योग्य मनुष्यों के लिए शोक करता है और वे
पण्डतों के जैसे वचनों से कहतें हैं कि “ना तो कभी ऐसा था कि मैं किसी काल में नहीं था, और ना ऐसा कभी था कि तू नहीं या फिर ये राजाजन नहीं थे और ना ऐसा है कि इससे आगे हम सब नहीं रहेंगे, तूझे भय नहीं करना चाहिए क्योंकि क्षत्रिय के लिए धर्मयुक्त युद्ध से बढ़कर दसूरा कोई कल्याणकार कतर्व्य नहीं है।”

3. कर्मयोग:- स्पष्ट शब्दों में ऋषिकेश महाराज ने समझाया है कौन से कर्म करने योग्य है और कौन से कर्म नहीं करने योग्य। और सबसे महत्वपूर्ण यह की कोई भी मनुष्य किसी काल में क्षण भर भी बिना काम किये नहीं रहता।
शास्त्रविहित कर्म कर, क्योंकि कर्म न करने की अपेक्षा कर्म करना श्रेठ है।

इसी तरह ज्ञानकर्मसंन्यासयोग, कर्मसंन्यासयोग’ आत्मसंयम योग, ज्ञान विज्ञान योग, अक्षरब्रह्म योग, राजविद्याराजगुह्ययोग, विभूतियोग, विश्वरूपदर्शन भक्तियोग, क्षेत्रक्षत्रविभागयोग, गुणत्रयविभागयोग, पुरूषोत्तमयोग, दैवासुरसंपद्विभागयोग, श्रद्धात्रयविभागयोग, मोक्षसंन्यासयोग में श्रीकृष्ण महाराज ने केवल और केवल जीवन को जीने की कला ही सिखाई।

विश्व की 578 भाषाओं में गीता का अनुवाद हो चुका है।
गीता किसी एक देश, जातियों, पंथों की नहीं है बल्कि तमाम मनुष्यों के कल्याण की अलौकिक सामग्री भरी हुई है।
भोग, मोक्ष, निर्लेपता, निर्भयता आदि तमाम दिव्य गुणों का विकास करनेवाला यह गीताग्रंथ विश्व में अद्वितीय है।
स्वामी विवेकानंद जी तो श्रीमद्भगवत गीता को “माँ” कहा करते थे।
मदनमोहन मालवीय जी श्रीमद्भगवत गीता को “आत्मा कि औषधि” कहा करते थे।
श्रीमद्भगवत गीता किसी धर्म, जाती, समुदाय, मजहब का पुस्तक नहीं है अपितु यह संपूर्ण मानव जाती के लिए है।

श्रीमद्भगवत गीता वह ग्रंथ है जो हमें सिखाती है “सुख टिक नहीं सकता और दुःख मिट नहीं सकता”
मुझे लगता है कि गीता को हाथ में रखकर कसमें खाने से कुछ नहीं होगा अपितु गीता को हाथ में रखकर पढ़ना होगा।

गीता हमें युद्ध सिखाती है अपने दुश्मनों से और प्रेम करना सिखाती है अपनों से। लेकिन हम ही अपने दुश्मन है और हम ही अपने मित्र है। कोई बाहरी हमें आकर नुकसान नहीं पहुंचा सकता है जितना हम स्वंय को अपने विचारों से और अपनी वासनाओं से पहुंचाते है।
इसलिए युद्ध तो जरूरी है लेकिन स्वयं से। जब तक खुद के रावण को नहीं जलाओगे तब तक राम से नहीं मिल पाओगे।

कहते हैं लोग नहीं है वक्त इसलिए पढ़ नहीं पाते हैं गीता को
सच कहता हूँ वक्त नहीं है इसलिए तुम पढ़ा करो गीता को

गीता जयंती दिसंबर 3, 2022


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गजब कि दुनिया है यार….!!!!

November 30, 2022

Shanky❤ Salty

गजब कि दुनिया है यार

इश्क नाम ले
जज्बातों से खेल कर वह
कितने ही मर्दों के साथ क्यों न सोए
वो अबला ही कहलाएगी
और
ईमान से
चंद रुपयों के खातिर वह
कितने ही मर्दों के साथ क्यों न सोए
वो वैश्या ही कहलाएगी

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हमें खुशियाँ चाहिए ना…..!!!!

November 28, 2022

Shanky❤Salty

हमें खुशियाँ चाहिए ना
घर में, ऑफिस में, दुकान में रोड पर हर जगह
हमें खुशियाँ चाहिए ना
बच्चों से, बड़ों से, पत्नी से, पति से, माँ-बाप से हर किसी से
हमें खुशियाँ चाहिए ना
हर पल, हर क्षण हम खुशियों के पीछे भाग रहे हैं
पर क्या खुशियाँ हमें मिल रही हैं?
शायद नहीं, क्योंकि पढ़ा हैं मैंनें और अनुभव किया हैं
हर खुशी के पीछे ग़म की कतारें हीं है
कमरे क्या है बन्द दीवारे ही है
हक़ीक़त में जिसे हम अपना समझ रहे हैं
और खुशियाँ चाह रहे हैं उनसे
वहीं हमारे दुखों का कारण बन रहें हैं
वास्तविकता में जो हमारे अपने हैं
उन्हें हमने मंदिरों तक सीमित कर दिया है
उनके कहे वचनों (भगवद्गीता) को घर में किसी ऊँचे स्थान पर रख दिया हैं
कभी कभार तो हम भीखमंगा बन कर उनसे खुशियाँ माँगते है
पर दरसल वह खुशियाँ हमारे दुखों का कारण बनती है
राम जी तो अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को तैयार है
लेकिन हमारी हालत कुछ ऐसी है
जैसे सुनार की दुकान पर जाकर कोई चप्पल माँगता हो


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बिटिया को भेजा था….!!!!

November 28, 2022

Shanky❤Salty

नर्क की आग से भी
बद्तर जुल्म हुए
उस मासूम के साथ
वैश्यावृत्ति कि आग में
धकेल दिया था
घर वालों ने कहा था
शहर कमाने के लिए
बिटिया को भेजा था
दरसल पैसे के लिए
बिटिया को बेच दिया था


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उम्मीद लगाए बैठती हूँ….!!!

November 26, 2022

Shanky❤Salty

बहुत कुछ कहना चाहती हूँ
खयालों की मोटरी बाँध चलती हूँ
ह्रदय में एक आस लिए जीती हूँ
यूँ हीं नहीं चलती हूँ
अक्सर थक कर
दिवारों का सहारा ले कर
बैठ जाती हूँ
रोना तो चाहती हूँ
पर घूंट कर रह जाती हूँ
साँसें तो चलती है
पर लगता है ज़िन्दगी थम सी गईं है
बस ह्रदय में एक आस है
पर हकीकत में कोई भी नहीं पास है
ग़म के आँसू सुख चुके हैं
मन की प्यास भी शायद बुझ चुकी हैं
मंज़िल तक तो जाना है
पर रास्ते कब खत्म होगें पता नहीं
थक तो गई हूँ
पर जताना नहीं चाहती
कोई समझने को तैयार नहीं
जब कहती हूँ कुछ
तो हर कोई कह जाता है
हाँ मालुम है मुझको सब कुछ
पर मालूम होना ही सबसे बड़ा ना मालुम होना है
कोमल सा दिल था
जिसकी कोमलता को खत्म कर
कठोर कर दिया गया
विशवास के डोर में बाँध कर
फाँसी का फंदा दिखा दिया
प्यार दिया या दिया दर्द पता नहीं
पर दिया कुछ तुने यह पता है
शायद वह है अनुभव
अब जादा फरमाइश नहीं है
बस जो होता है
शांति से सह जाती हूँ
ना तो हूँ मैं राधा
ना चाहत है मोहन की
हूँ मैं एक इंसान
बस हर किसी से इंसानियत की
उम्मीद लगाए बैठती हूँ


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हक़….!!!!

November 21, 2022

Shanky❤Salty

दुसरों का हक़ छिनने वालों का कभी पेट नहीं भरता
खुद के हक़ का बाँटने वाले का दिल कभी नहीं भरता


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आत्महत्या नहीं हत्या….!!!!

November 17, 2022

Shanky❤Salty

मर तो रोज ही रहें हैं हम
और एक दिन मरना भी तय ही है

ह्रदयाघात से तड़प कर मरेंगे हम?
या युंही सोए_सोए मर जाएंगे?

रोड के किनारे लावारिस मौत होगी?
या चिंता से चिता नसीब होगी?

ज़िन्दगी एैसी हो गई है
मानो लकड़ी को दीमक ने घेर रखा हो
बोलने से दिक्कत होती थी
अब मेरे मौन से दिक्कत है

लगता है दिक्कत का मूल कारण ही मैं हूँ,
भीड़ से थक कर अकेले बैठा था
वो भी हज़म ना हुआ उन्हें
तानों की बाढ़ सी ला दी जीवन में
भीड़ को खोया या ना खोया मैनें
पर खुद को जरूर खो दिया

सुरत अच्छी हो तो लोग जिस्म नोचते हैं
सिरत अच्छी हो तो लोग रूह नोचते हैं

सवालों में उलझा कर उत्पीड़न करते हैं
मेरे लिखने का भी मतलब निकलेगें

हकीकत में तड़प कर मुझको मौत ही मिलेगा
आत्महत्या नहीं अक्सर हत्या होती है
जो किसी काग़ज़ पर लिखी नहीं होती है
यातनाएं दी तो दीं

लेकिन “हमें क्या तुम्हें जो ठीक लगे वह करो” का तमाचा भी जड़ जाती है
नींद की गोलियाँ भी क्या असर करेगी भला
जब बद्दुआओं में मेरे नाम की गालियाँ का असर हो

मुझे सुनने के लिए मेरे शब्द नहीं
तुम्हारे वक्त कम पड़ जाएंगे
नसीहतों कि पोटली बहुत है मेरे पास
लेकिन साथ चलने वाली छड़ी नहीं है मेरे पास
आत्महत्या नहीं हत्या होती हैं
तनाव होता नहीं ,दिया जाता है

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एक दिन और गुज़र गया….!!!!

November 14, 2022

Shanky❤Salty

एक दिन और गुज़र गया
अपने घर जाने को मैं,

क्या खाया ? क्या कमाया? क्या जोड़ा?
इन्हीं चक्करों में मेरा
एक दिन और गुज़र गया,

मुट्ठी से रेत की तरह वक्त बित गया
अज्ञान की चादर ओढ़ मैंने ज्ञान की ख्वाबें सजाई

पल भर भी न मैंने जपा राम को ना रहिम को
यूंही करते करते मेरा
एक दिन और गुज़र गया

अपने घर जाने को मैं और करीब हुआ


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राम कालपनिक है….!!!!

November 02, 2022

Shanky❤Salty

हमारी ये हस्ती आपसे है राम,
आपके होने से ही
ज़िन्दगी हमारी मस्ती में है राम,
है वफ़ा मुझको आपसे राम
इसलिए तो आप हमारे हो राम
और हम आपके राम,
भला वो हमारा कैसे होगा राम
जिसने भरी महफ़िल में किया है बेवफाई आपसे राम


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इस दीपावली…..!!!!

October 22, 2022

Shanky❤Salty

दीपावली
सफाई का, उजाले का पर्व
खुशियां मनाने का ,अंधकार पर विजय का पर्व

घर-द्वार साफ करते हैं
लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए
ग़र इस दीपावली कर ले हम मन की सफाई
तो लक्ष्मी जी महालक्ष्मी जी के रूप में सदैव विराजमान रहेगी

हर दीपावली
वर्मा जी के घर से
एक किलो काजू कतली का तोहफा आता है
गुप्ता जी के घर से
एक किलो सोन पापड़ी का भी तोहफा आता है
बदले में हम भी वर्मा जी, गुप्ता जी को
उतने का ही कुछ-न-कुछ तोहफा दें ही आतें है
ताकि समाज में इज़्ज़त बनीं रहें
पर इस बीच वो चौराहे वाला अनाथ राजू बेचारा मायूस रहे जाता है
दीयें बनाने वाले की गुड़िया फुलझड़ी नहीं जला पाती है


विडंबना इतनी है की
त्यौहार केवल सम्पन्न व्यक्ति अपने आप तक ही सीमित रखता है
खुशियां बाँट तें तो हैं हम पर केवल अपने स्तर तक के लोगों तक ही
मान प्रतिष्ठा जहाँ मिलें वहीं जातें हैं
खुशियां मिलती जरूर होगी दीपावली की
पर आनंद नहीं मिल पाएंगा कभी


दीन-दुखियों के चेहरे पर मुस्कान ले आओ ना
दुसरों का हक़ छीनने से घटता है
खुद का हक़ बाँटने से दिन दुगनी रात चौगुनी बढ़ता है
हो सके तो इस बार
मिठाईयाँ उन्हें भी खिलाओ जिनके पास खाने को नहीं है
दो दीये उनके घर भी जलाओ जिनके घर के दीये बुझ रहें हैं
मन की थोड़ी बहुत भी सफाई कर लो ना
दरिद्र नारायण की सेवा कर लो ना
ह्रदय मंदिर में एक दीपक खुद के लिए भी जला लो ना
अहंकार को मिटा कर ज्ञान का दीप जला लो
हर पल हर क्षण दीपावली मनाने की ये तरकीब अपना लो


October 22, 2022

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Kaun Hai Ram….!!!!

October 9, 2022

Shanky❤Salty

Thank you for reading my KAUN HAI RAM book. Your support and trust always make me happy. 290 eBooks was read by Ram Bhakts & 80+ physically copy was sold.
Thanks a ton again all of you for kind support.

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पीछे-पीछे……!!!!

May 29, 2022

Shanky❤Salty

सभी को खुशीयां ही चाहिए
चाहिए ना किसी को भी ग़म
हम भागत फिरे है खुशीयों के पीछे
ग़म भी भागत फिरे है हमरे पीछे

दुनिया में एैसा कोई नहीं होगा जिसे दुख चाहिए
पर हक़ीक़त यहा है कि
दुनिया में एैसा कोई नहीं होगा जो सुखी होगा


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पैसा…..!!!!

May 17, 2022

Shanky❤Salty

लोग समझते है कि
ग़र पास पैसा हो तो सबकुछ पास होता है
पर वास्तविकता यह नहीं है
जब तक पास पैसा होगा आपके पास कुछ नहीं होगा

आपके हाथों से पैसे जाएगें
तब ही चीज़, वस्तुएँ पास आएंगीं
पैसे देकर ही हम कुछ हासिल कर सकते है
पैसे पास रखकर हमें सिर्फ ग़म कि कतारें ही मिलेगी
बिना पैसे दिये विद्या नहीं मिल सकती स्कूलों में
बिना पैसे दिये अन्न नहीं मिल सकता है

फिर भी लोग सोचते है
पैसे होंगे तब हम सुखी होगें

दरसल हालात ऐसे है
कि रोशनी होते हुए भी हम आँखें बंद कर लेते है
और कहते है अंधियारा है


Published by ‘Anonymous’ on behalf of Shanky

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Poem on Friends

Shanky❤Salty

मेरी एक दोस्त है,
नाम है उसका रिया
है तो मेरी सबसे अच्छी दोस्त
लेकिन Attitude है उसके
अंदर बहोत।
फिर भी जैसी भी है,
अच्छी है मेरी दोस्त।
चलो चलते है दुसरे दोस्त पर
नाम है उसका Samar
वो है मेरे क्लास का मोनीटर
सब पर रोब जमाता है,
आता है कुछ भी नहीं फिर भी,
अपने आप को smart समझता है
जब क्लास में टीजर नहीं हो
वो भी Attitude दीखता है।
लेकिन फिर भी,
मेरा सच्च दोस्त कहलाता है।
अब आता है तीसरा मित्र
उसका नाम है Shanky
मैं उसे चिढ़ाती हूँ snaky-snaky-snaky
जब भी उससे बातें करू
मुझे परेशान करता है,
है मेरा सबसे प्यारा दोस्त।
दीदी दीदी बुलाता है।
~ Imrana!

Thanks For Reading

A Lovely poem written by my Cute-cum-Funny Imrana Didi✨❤
Please give your views in the comment box about this poem.

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क्या वो भीड़ साथ निभाएगी?

March 9, 2022

Shanky❤Salty

बैठा हूँ भीड़ में ही
पर रूठी है भीड़ मुझसे
किरदार हज़ारों हैं
पर ख़ामोशी नहीं मुझमें
बस मौन हूँ मैं
हस हस कर ज़िन्दगी काट रहे हैं वो
आखिर कब तक हम
भीड़ में जियेगें

यात्रा तो अकेले ही करनी है
बेशक अंतिम यात्रा में भीड़ तो होगी
पर केवल शमशान तक ही
उसके आगे की यात्रा में
क्या वो भीड़ साथ निभाएगी???


Modified by:- Ziddy Nidhi

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धन्यवाद सदाशिव शंभू…..!!!!

March 02, 2022

Shanky❤Salty

धन्यवाद सदाशिव शंभू

रूपये, पैसे, धन, दौलत, दिमाग खर्च कर के वो नहीं मिल सकता है जो आपने महाशिवरात्रि की रात्रि में दिया है। धन्यवाद सदाशिव शंभू धन्यवाद🙏💕

चारों प्रहर में पुजा हुई आपकी
दुध से, दही से, धी से, मधु से
विल्वप्रत्र से, जल से, चंदन से
पर शंभो यह चिज, वस्तु
आपके शिवलिंग स्वरूप में टिक न सकी
पुष्प मुरझा गए, दुध, दही, जल तो बह गए
जो भी अर्पण की सब उतर गया शंभू
बस आप थे, हैं और सदा रहेंगे
ठीक वैसे ही हम भी है शंभू
गाड़ी में बैठ गए तो खुद को गाड़ी नहीं मानते हैं
घर में रहते हैं तो खुद को घर नहीं मानते हैं
जग को देखा था अब तक शंभो
पर आपने तो उसे ही दिखा दिया जिससे सारा जग है
सुख-दुख सपना है केवल शंभू ही अपना है
ना तो अन्न लिया ना लिया जल
पर शंभू ने जो दिया है उसे शब्दों में बयां करना संभव नहीं है
तृप्त कर अनहद नाद दिया है

✨धन्यवाद सदाशिव शंभू धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद सदाशिव शंभू✨

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अमृत…….!!!!

February 20, 2022

Shanky❤Salty

अमृत

है तलाश सबको अमृत की
ऐसी चीज़ जिसे खा-पीकर
अमर हो जाना है

पर कमबख़्त उन्हें कैसे समझाऊँ मैं
कि दुनिया में ऐसी कोई चीज़ ही नहीं
जो तुम्हें मार सके
तुम तो सदा ही अमर-चैतन्य हो

बस ज़रूरत है तो तुम्हें उस आत्मज्ञान रूपी अमृत की


शुरू करो जश्न कि तैयारी…..आ रही है महाशिवरात्रि


Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal

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वृद्धा आश्रम से अनाथ आश्रम तक…..!!!!

February 14, 2022

Shanky❤Salty

यह पुस्तक काव्यात्मक ढंग से
वृद्धाश्रम से अनाथालय तक की
यात्रा है
हर रिश्ते में
स्वार्थ देखा है हमनें
एक माँ – बाप ही हैं
जिन्हें निस्वार्थ देखा है
वो बचपन में ही
खुशियों के रास्ते
खोल देते हैं
हम बड़े हो कर
उनके लिए
ना जाने क्यों
वृद्धा आश्रम के रास्ते
खोल देते हैं
पढ़ा – लिखा कर
हमको क़ाबिल बना देते हैं
पर हम कभी
उनके दर्द को पढ़
नहीं पाते हैं
अपने अरमानों का
गला घोट
जिन्होनें हमे इंसान है बनाया
हमनें अपनी इंसानियत को मार
माँ – बाप की आँखों से
आँसू बहवाया है
जिन्होंने हमको
उंगली पकड़
चलना सिखाया है
हमने उनको हाथ पकड़
घर से बेघर कर दिखाया है
अपनी खूशबू दे हमको
जिन्होंने फूल बनाया है
हमने तो काँटे दे
उनको रुलाया है
जिसने काँधे पे बैठा हमें
पूरा जहाँ घुमाया है
उसे सहारा देने पे
हमें शर्म आया है
हमारी छोटी सी खरोंच पर
उसने मरहम लगाया है
हमने अपने शब्दों से ही
उनके दिल में जख्म बनाया है
बचपन में बच्चों कि
तबियत बिगड़ती थी तो
माँ – बाप कि धडकनें बढ़ती थीं
आज माँ – बाप कि
तबियत बिगड़ी है तो
बच्चे जायदात के लिए झगड़ते हैं
हम प्रेम दिवस मनायेंगें
माँ – बाप को भूल
प्रेमी संग ज़िन्दगी बितायेंगे
सच कहूँ तो
रूह को भूल
ज़िस्म से इश्क़ कर दिखायेंगे
पता नहीं
माँ – बाप ने कैसे संस्कार हैं
हमको दिये
बड़े होते ही
इतने बतमीज़ बन गए
जिनकी कमाई से
अन्न है खाया
आज उनको ही
दो वक्त की रोटी के लिए
है तरसाया
गूगल पर
माँ – बाप की
बहुत अच्छी और प्यारी
कविताएँ मिल जाती हैं मुझको
पर पता नहीं क्यों
मैं निःशब्ध हो जाता हूँ
वृद्धा आश्रम की चौखट पर आ कर
माँ – बाप का तिरस्कार वो कर
मेरे राम जी के सामने
आशीर्वाद हैं माँगते
अब किन शब्दों में
समझाऊँ मैं उनको
ईश्वर ही हमारे
माँ बाप बनकर हैं आते
अपने संस्कारों से
जिसने हमें है पाला
आज हमने अपनी हरकतों से
जीते जी माँ – बाप का
अंतिम संस्कार है कर डाला
भरे कंठ लिए
एक सवाल है
गर माँ – बाप से मोहब्बत है
तो वृद्धा आश्रम क्यों खुले हैं ?
एक सवाल है
गर माँ – बाप से मोहब्बत है
तो वृद्धा आश्रम क्यों खुले हैं ?

मेरे इस सवाल का जवाब
किसी के पास नहीं होगा
पर मेरी पंक्तियों को पढ़ हर
किसी के आँखों से
आँसू छलक ही जाएगा
यार वो कितना भी
पत्थर दिल क्यों ना हो
वो एक ना एक पल
पिघल ही जाएगा
हमें जीवनसाथी तो
हजारों मिल जाएंगे
परन्तु क्या माँ – बाप
दुसरे मिल पाएँगे ???
अब बेसरमों कि तरह
हाँ मत कह देना
हाथ दिल पल रख
मैं कहता हूँ
एक बार प्यार से
माँ – बाप को
गले लगा के तो देखो
प्रेम दिवस उनके साथ
मना के तो देखो
सच कहता हूँ
तुम निःशब्ध हो जाओगे
जब माँ बाप के हृदय से
तुम्हारे लिए
करुणा, माधुर्य, वात्सल्य
छलकेगा न
तब तुम्हारे रूह से
आवाज आएगी
“हो गए आज सारे तीर्थ चारों धाम”
“घर में ही कुंभ है”
“माँ – बाप की सेवा ही शाही स्नान है”
मान लो मेरी बात
यही दिव्य प्रेम है
बाकी तो आप जानते ही हो
क्योंकि सुना है
आप समझदार हो
मेरे शिव जी ने भी कहा है
“धन्या माता पिता धन्यो”
“गोत्रं धन्यं कुलोदभवः”
“धन्या च वसुधा देवि”
“यत्र स्याद् गुरुभक्तता”
जिसके अंदर
गुरुभक्ति हो
उसकी माता धन्य है,
उसके पिता धन्य है,
उसका वंश धन्य है
उसके वंश में
जन्म लेने वाले धन्य हैं,
समग्र धरती माता धन्य है
वैसे प्रथम गुरु कौन होता है
हम सबको पता ही है
तो कर लो न
गुरुभक्ति उत्पन्न
मैं बहुत कुछ कहना चाहता हूँ
हृदय की पीड़ा है
जब सुनता हूँ
बलात्कार हुआ,
किशोराअवस्था में
बच्ची गर्भवती हो गई,
17 साल की बच्ची का
गर्भपात हुआ,
इश्क कर बच्चे भाग गए
अब आगे क्या कहूँ
मेरे आँसू ही जानते हैं
शायद माँ – बाप ने
अच्छे संस्कार नहीं दिये होंगे
इसलिए एैसा हुआ होगा
यह कह हम ही ऊँगली उठाते है
अच्छा छोड़ो ये सब बातें
गर तुम्हें एक साथ
आँखों से सच देखना है
और कानों से झूठ सुनना है
तो किसी वृद्धा आश्रम जा कर
वहाँ रहने वाले
किसी से भी
उनकी ख़ैरियत पूछ कर देखो
तुम खुद – ब – खुद समझ जाओगे
मैं कहना क्या चाहता हूँ
और लिखना क्या चाहता हूँ
तुम्हारे पास वक़्त कहाँ
सच में
अब तुम बड़े हो गए हो
वक़्त कहाँ है
बुढ़ापा आने में
निकल रहा था मैं
वृद्धाआश्रम से
अचम्भित सा रह गया
गुजरते देखा मैंने
एक औरत को
वृद्धाआश्रम के बगल से
शुक्रिया अदा कर रही थी
वह ईश्वर को
रहा न गया मुझसे
पूछ बैठा मैं
“आप कौन हो”
मुस्करा वह कह गई
“एक बाँझ हूँ”
गूगल के द्वारा पता चला है
भारत में कुल 728 वृद्धा आश्रम हैं
और 2 करोड़ अनाथआलय हैं
वो कहते है न
कर्म का फल सबको
भोगना ही पड़ता है….!!!
खैर छोड़ो
तुम्हारी जो मर्जी हो करना
हाथ जोड़ कहता हूँ
बस सिर्फ एक बार
सिर्फ एक बार
हर दुआ में उसकी दुआ है
जिसके सिर पर
माँ की छाया है
समझो ना वहीं पर
खुदा का साया है
काँटों को फूल बनाया है
पिता ने
हर मुश्किल राह को
आसान जो बनाया है
सोकर स्वयं गीले में,
सुलाया तुझको सूखे में
माँ की
ममतामयी आँखों को,
भूलकर भी
गीला ना करना
माँ की
ममता का
और
पिता की
क्षमता का
अंदाजा लगाना
असंभव है
उंगली पकड़ कर
सर उठा कर
चलाना सिखाया है
पिता ने
अदब से
नज़रें झुका कर
चलना सिखाया है
माँ ने
सब सिखाया है
माँ ने
हौसला भरा है
पिता ने
यश और कीर्ति
दिलाया है
पिता ने
माधुर्य और वात्सल्य
दिलाया है
माँ ने
कर्ज लेना कभी नहीं
सिखाया है
आपने ना जाने क्यों
हमें अपने कर्जदार बना दिया है
जिसे इस जन्म में
तो पूरा करना
संभव ही नहीं है
जब तक साँसे है
तब तक
कर लो
ना प्यार उनको
देखा है मैंने
साँसे रुक जाती
है ना उनकी
तो सुकून की नींद
उड़ जाती है हमारी
पिता कि साया
हटते ही
खुद-ब-खुद
बड़े हो जाते है
माँ के गुजरते ही
बच्चे तकिये में
मुँह छुपा
रोते रह जाते है
जमीन के टुकड़े
के लिए बच्चे
माँ बाप के दिल के
हाजारो टुकड़े
कर देते है
गरीबी सताती जरूर थी
पर हमारा पेट भर
वो खुद भूखा रहती थी
वो और कोई नहीं
हमारी माँ ही थी
हम कैसे खुश रहे
इस सोच में ही
तो माँ बाप
सारी जिंदगी
गुजारते है
धन लाख करोड़
कमाया है
माँ बाप को
खुद से दूर कर
तूने असली पूंजी
गवायाँ है
खाया है मैंने
माँ के एक हाथों से
थप्पड़ तो
दूजे से घी वाली
रोटी याद है
मुझे वो रात भी
जब खुद की
नींद उड़ा कर
गहरी नींद में
सुलाती थी
खुद गीले में
सो कर मुझको
सूखे में सुलाती थी
जरूरतें अपनी भुला कर
हसरतें मेरी पूरा करते थे
वो और कोई नहीं
मेरे मेरे पिता थे
मेरे आँसूओं को
मेरी चीखों को
वो मुस्कान में
बदलती थी
आज जब वो
बूढ़ी हो गई है
तो ना जाने क्यों
हमें उसके जरूरतों
कि चीख – पुकार
कानों तक नहीं रेंगती है
यक़ीनन बेटा अब
बड़ा हो गया है
पैरों पर
खड़ा हो गया है
जमाने की चकाचौंध में
वो अपने माँ बाप को
भूल गया है
अरसा बीत गया होगा
माँ की गोद में सोए हुए
पर कोई बात नहीं
जब माँ सदा के लिए
सोएगी ना
तब हमें उसके गोद की
कमी खलेगी
एक अनुभव लिखता हूं
मैं करीब नौ दस घंटे
जंग लड़ रहा था
हाँ वही मृत्यु से
दुआओं का
दौर चल रहा था
मेरे अपनों का
जंग करीब करीब
जीत चुका था
खबर भी
फैल गई थी
जंग में जीत हो गई है…..
….लोग अपने अपने
घर चल दिए थे
कुछ लोगों ने
खाना खा लिया था
तो कुछ
सो चुके थे
पर…..
…कुछ ही देर में
बाजी पलट चुकी थी
मृत्यु ने
प्रहार शुरू कर दिया था
सफेद चादर से
मैं लिपटा था
पल भर में ही
खून के फव्वारों से
वो लाल हो गया
हार चुका था मैं
जिंदगी की जंग को
चीखता रहा मैं
चिल्लाता रहा मैं
पर मृत्यु ने
अपनी पकड़ नहीं छोड़ी
मेरे शरीर से
मेरे प्राणों को
खींच कर अलग
करने ही वाली थी
कि
तभी ईश्वर के दूत आए
हाँ माँ पापा आए
माँ मुझको देख
हैरान तो हो गई थी
पर मृत्यु उन्हें देख
परेशान हो गई थी
पापा ने
तुरंत जिंदगी के कागज पर
दस्तखत कर
जीत का आदेश लिखा
फिर क्या
मृत्यु को
इजाजत ही नहीं मिली
और खाली हाथ
उसे वहाँ से लौटना पड़ा
कहाँ था ना मैंने
बहुत पहले
जिनके सिर पर
महादेव का हाथ होता है
वहाँ पर
मृत्यु को भी
इज्जात लेनी पड़ती है
और स्पष्ट रूप से
देख भी लिया मैने
खुशियां ज़िन्दगी में
कम होती जा रही है
दो रोटी के लिए
हम माँ बाप से
जो अलग होते
जा रहे है
माँ बाप के
प्यार जैसे प्यारा
और कुछ नहीं
लगता है
माँ बाप के
चेहरे में
खुशियां आसानी से
दिख जाती हैं
पर जख्मों का दाग
दिख नहीं पाता है
अपने संस्कारों से
हमारी हिफाज़त
करने का संकल्प
जो लिया है उन्होंने
अपनी जान से
भी ज्यादा
हमको चाहा है
हम सबने
सत्यवान और सावित्री
कि कहानी सुनी ही होगी
की यमराज से भी
अपने पति की प्रारण
ले आती है
पर
यह तो माँ बाप है
जो मृत्यु तो
बहुत दूर कि बात है
यह तो संकट को भी
पास भटकने ना दे

ऐसा अद्भुत प्रेम है इनका
पिता हमारी
खामोशियों को
पहचानते हैं
माँ हमारे
आँसूओं को
आँचल में पिरोती है
बिन कहे ही
हालातों को
हमारे अनुकूल कर देते है
जब माँ बाप साथ हो ना
तो किसी भी चीज कि
परवाह नहीं होती
उनके होने से ही
हर दिन होली लगती है
हर रात दिपावली लगती है
और ना हो ग़र माँ बाप तो
पूछो उनसे
होली भी बेरंग सी लगती है
दिपावली भी
अंधियारा सा लगता है
आँखों में आँसू
और मन भारी सा लगता है
क्या मंदिर-मस्जिद
भटका है वो
क्या स्वर्ग कि
चाहत होगी राम जी उन्हें
माँ बाप मिले हैं जिन्हें
चरणों में ही माँ बाप के
बैकुंठ होगी
पता नहीं राम जी
वो औलाद कैसी है
जो सफलता की
शिखर पर पहुंच कर
पूछता है माँ बाप से
तूने किया ही क्या है मेरे लिये
बस राम जी
यही कारण है
उसके पतन का
कहता है
वो औलाद
जो भी किया
वो तो फ़र्ज़ था
पर कैसे समझाऊँ
मैं उनको
यार कम से कम
माँ बाप ने
फ़र्ज़ तो पूरा कर दिया
पर तुमने क्या किया
यकीनन दुनिया में
बहुत सी चीजें
अच्छी है
पर सच कहता हूँ मैं
हमारे लिए तो
हमारे माँ बाप ही
सबसे अच्छे है
वो बाप ही जनाब
जो भरें बाजार में
अपनी पगड़ी
उछलने ना देगा
पर अपने बच्चों की
खुशी के खातिर ही
भरी महफ़िल में भी
अपनी पगड़ी
किसी के पैरों पे
रख देगा
अपनी खुदगर्जी के लिए
वो बच्चे बाप को भी
भरे बाजार में गलत
कह देगा
जीवन के
एक पड़ाव में
जरूरत होती है
माँ – बाप को
हमारे एहसानों की नहीं
हमारे प्यार की
जिसने हमें
हर आभावों से
दूर रख
काबिल बनाया
उन्हें ही
हम आभावों में
रख रहे हैं
अपने चार दिन के
मोहब्बत के खातिर
हम तमाशा कर देते हैं उनका
जिसने हमारे
जन्म से पहले ही
ताउम्र हमसे
मोहब्बत की सौगंध खाई थी
कितनी आसानी से
कह देते हैं हम
समझते नहीं है
माँ बाप हमारे
पता नहीं हम
ये बात समझ
क्यों नहीं पाते हैं
बड़े क्या हो गए हम
मानों पंख ही आ गए
चलना क्या सीख लिया
उनकी उंगली पकड़ कर
उड़ना ही शुरू कर दिया
हमें रास्ता दिखाया
माँ बाप ने
और व्यवहार हमारा ऐसा
जैसे खुद ही बनाया रास्ता हमनें
किसी शख़्स ने
बहुत खूब लिखा था
खुली आँखों से
देखा सपना नहीं होता
माँ बाप से बढ़कर
कोई अपना नहीं होता
जामाने को
कठोर कहते हो
माँ के कोमल हृदय को
छोड़ उसे जमाने में
फंसे रहते हो
माना की
पिता की बात
नीम जैसी
कड़वी है
पर यार
सेहत के लिए तो
वही अच्छी है
सिखाया था
मेरे राम जी ने मुझको
हर चाहत के पीछे
मिला दर्द बेहिसाब है
पर एक माँ बाप ही है
जो ग़र साथ हो ना
तो वहाँ दर्द का
नामो निशां नहीं है
ये हमारा
हंसना,
गाना,
लिखना,
खेलना,
कूदना,
सोना
सब उनसे ही तो है
माँ बाप साथ हो ना तो
बेफिक्री खुद-ब-खुद
साथ आ ही जाती है
वर्ना देखो उन्हें
जिनके सिर से
माँ का आँचल
हट जाता है
या पिता का साया
हट जाता है
क्या हाल हो
जाती है उनकी
बस जिस्म रह जाता है
जरूरत पड़ने पर
एक माँ भी
पिता का फर्ज निभाती है
और
पिता भी माँ का
पता नहीं
यह अलौकिक शक्ति
कहाँ से आती है
बच्चे होते हुए
हमें कद्र नहीं होती
माँ बाप की
जब हम भी
माँ बाप होते तो
बच्चे करते नहीं
कद्र हमारी
ये सिलसिला चलता आ रहा है
सब कुछ मालूम होते हुए भी
हम खुद को
पतन के रास्ते
ले जा रहे हैं
हे राम
पता नहीं क्यों
हम ऐसा
करते जा रहे हैं
ज़िन्दगी जन्नत है उनकी
जिन्होंने माँ बाप के
सिखाये रास्तों पे चला है
जिस तरह
राम जी हमारा
बुरा नहीं कर सकते है
ठीक उसी तरह
माँ बाप हमारा
बुरा नहीं कर सकते है
गुलाबों की तरह
महक जाओगे
ग़र माँ बाप के
संस्कारों को
अपनाओगे
ये रिश्ता
गजब है जनाब
तकलीफ तुम्हारे
देह को होगी
पर दर्द माँ बाप को
महसूस होगी
यार कृष्ण भी
श्री कृष्ण तो
माँ बाप से ही
बने है
राम भी
श्री राम
माँ बाप से ही
बने है
तुम भी
बन सकते हो
हम भी
बन सकते हैं
महान
ग़र ख्याल रख लिया
माँ बाप का तो
एहसानों वाला नहीं
प्यार वाला
माँ बाप के रहते
ना किसी ने
परेशानी देखी
ना देखा मुसीबतें
जब गुजरें
माँ बाप तो
ना रहा
चेहरे पर मुस्कान
क्यों मंदिरों मस्जिदों में ईश्वर,
अल्लाह को खोजते हो
घर में सेवा
माँ बाप कि कर के
तो देखो
पीछे पीछे
हरि फिरते दिखेंगे
वो माँ
पुराने ख्यालातों
कि लगती है
जिसने तुम्हें
काबिल बनाने के लिए
अपने माँ बाप के
दिए जेवर गिरवी
रख दिये थे
क्यों अपने शब्दों से
उनके सिने को
छलनी करते हो
जड़ों को काटोगे
तो फल कहां से होगें
पानी सींचों जड़ में
माँ बाप को
गले लगा देखो
सारी अलाएं – बलाएं
चलीं जाएगी
और हरि पीछे पीछे
आ जाएगे
दवाओं में भी
वो असर नहीं है
जो माँ बाप की
दुआओं में है
जग की
कितनी भी
सवारी क्यों ना कर लो
बाप के
घोड़े की
सवारी कहीं नहीं मिलेगी
कितनी भी
महंगे तकिये में
क्यों ना सो लो
माँ के गोद जैसे
सुख कहीं नहीं मिलेगा
सिखाते है
माँ बाप मुझको
रखो ना गाँठ
तुम मन में
ना तन में
ग़र जीना है
तुमको खुल के
तो ना मान दिया
ना दिया कभी अपमान
माँ – बाप ने
बस सिखाया
है जहर कि पुड़िया
ये मान – अपमान
हर हाल में
मुस्कुराना सिखाया है
हर हाल में
जीना सिखाया है
कभी बोझ नहीं
समझा है
हमें माँ – बाप ने

पर ना जाने क्यों
हमें माँ – बाप
बोझ लगते हैं
बच्चे माँ – बाप के साथ
अब नहीं रहतें
बल्कि अब माँ – बाप
बच्चों के साथ रहते हैं
अपनी चाहतों को
राख बनातें हैं
इच्छाओं को
खाक करते हैं
वो और कोई नहीं
हमारे अपने
माँ – बाप होते हैं
ज़रा – जरा सी
बात पर वो
साथ छोड़ देते हैं वो
मतलब रिश्तेदार, दोस्त, साथी
पर एक माँ – बाप ही हैं
जो शरीर छोड़ने के बाद भी
साथ नहीं छोड़तें
धन लाख करोड़
तूने क्यों ना कमाया हो
पर माँ – बाप को भुला
तूने सब कुछ गवाया है
ज़रा सोचो ना
वो घर कैसा होगा ?
जिसकी आँगन सुनी होगी
रसोई में बरतन टकराने की
आवाज तक नहीं आएगी
देर से उठने पर
डॉट नहीं पड़ेगी
आँचार बाजार से
खरीद खाना होगा
यार बेजान – सी लगेगीं
वो घर
कल्पना मात्र से
रूह काँप उठती है
शौक तो बाप की
कमाई से पूरी होती है
खुद के पैसे से तो
बस जरूरतें ही
पूरी हो सकती हैं
ताउम्र बचपन
रह जाएगा
ग़र तू माँ – बाप संग
ज़िन्दगी बिताएगा
वो कहते हैं ना
उमर का फासला है
या कहूँ तो
उमर का फैसला है
हर किसी ने अपनों पर
अपना अधिकार जमाया है
बड़े होकर
हर चिड़िया ने
अपना रास्ता बनाया है
अरे ओ जनाब
यह कोई
सपना नहीं है
माँ बाप सा
कोई अपना नहीं है
महादेव जी की पइयाँ
पड़ी थी तेरी माँ ने
पाने को तुझको
पर तूने…….
यार
लगा के देखो ना गले
तुम एक बार
खुशियाँ मिलेगीं तुझको
अपरम्पार
मैं कैसे करूँ ना
भरोसा उनका
जिन्होंने पाला तुमको है
और तूने उसे ही
निकाला घर से है
यक़ीनन तुम
जमाने के नजरों में
अच्छे रहो या
ना रहो
पर अपने
माँ – बाप के नजरों में
कभी बुरा
बन के ना रहो
हजारों जिम्मेदारियों
को त्याग देना
पर माँ – बाप को
छोड़ शहर के तरफ
पाँव मत बढ़ा देना
एक उमर तो
बितने दो जनाब
खुद – ब – खुद
एहसास हो जाएगा
अकड़ना कभी
सिखाया नहीं इन्होंने
ना झुकना
सिखाया कभी
सिखाया तो सिर्फ
अपनी मौज में रहना
एक वाक्या
याद आ रहा है
रात को वो
आ ही गई थी
मुझको साथ
ले जाने वाली ही थी
दवा ने भी
अपना असर है छोड़ा था
दर्द ने जो
साथ पकड़ा था
काफी दिनों के बाद
मेरे दिल में दर्द उठा था
बाहर पेड़ – पौधे बारिश में
भीग रहे थे
इधर मैं पसीने से
भीगा हुआ था
नींद तो ऐसी रुठी थी
दवा लेने के बाद भी
मुझसे दूर बैठी थी
हर कोई श्री कृष्ण के
जन्म की तैयारियाँ कर रहा था
मैं लेट अपनी धड़कनों को
गिन रहा था
पर माँ वो तुम ही थी ना
जिसने श्रीकृष्ण के मूर्ति की
पूजा छोड़
“वासुदेवम् स्त्रं इति “
( वासुदेव तो हर जगह है )
मुझे गोद में सुलाया था
मेरे दिल पर हाथ रख
“गोविंद हरे गोपाल हरे”
“जय जय प्रभु दिन दयाल हरे”
गाकर मेरे दर्द को दूर कर रहीं थीं
माँ तेरे थपकियों ने ही
मुझको सुलाया था
कल तक चलना तो दूर
मुँह से आवाज तक नहीं ले पा रहा था
पर माँ
तेरे प्रेम और वात्सल्य में जादू था जादू
अगले ही दिन
मैं बैठ ये चार पंक्तियाँ लिख रहा था
वो कहते है ना
ये कैसा है जादू
समझ में ना आया
तेरे प्यार ने हमको
जीना सिखाया

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Divine Love

Rose Day

Think About Valentine Day

Prem Diwas

Gulab

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गिरने ना दो……!!!!

December 25, 2021

Shanky❤Salty

चीज़, वस्तु, रुपए, पैसे गिर जाए तो हम उसे दुबारा उठा सकते है
लेकिन अगर हमारा चरित्र गिर जाए तो उसे हम कभी दुबारा उठा नहीं पाएँगे


अटल जी के चरणों में ये पंक्तियाँ समर्पित है

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यह तो माँ है, माँ….!!!!

December 14, 2021

Shanky❤Salty

गीता
यह तो माँ है, माँ!
शरीर रूपी माँ नहीं
आत्म रूपी माँ है
ज्ञान रूपी माँ है


थके, हारे, गिरे हुए को उठाती है
बिछड़ों को मिलाती है
भयभीत को निर्भय,
निर्भय को नि:शंक
नि:शंक को निर्द्वन्द्व
बनाकर
नारायण से मिला के
जीते जी मुक्ति का साक्षात्कार कराती है
मेरी माँ “गीता”

ऐसा पढ़ा है मैंने,,
श्री कृष्ण के मुख से निकली है “गीता”
श्री विष्णु का ह्रदय है “गीता”


परन्तु, वास्तव में
“गीता” तो किसी मजहब, पंथ, समुदाय, जाती, धर्म, विषेश का नहीं है
बल्कि यह तो जीवन जीने की कला है
जिस तरह रोता हुआ बच्चा
माँ की गोद में आकर चुप हो जाता है
वैसे ही “गीता” माँ को पढ़ कर
हर बच्चा, बुढ़ा, जावन अपने आप को निश्चित कर सकता है


578 भाषाओं में “गीता” का अनुवाद को चुका है जिसका भी मन है पढ़ने को वो
किसी भी भाषा में “गीता” को पढ़ सकता है
मैं आज “गीता जयंती” पर शुभकामनाएं क्या दुंगा आप सब को…….बस करबद्ध प्रार्थना है 24 घंटे में से मात्र 24 ससेकेंड “गीता” रूपी माँ के गोद में बिताए। मैं तो इतना विश्वास से कह सकता हूँ कि विश्व में “गीता” के समान कोई दूसरा ग्रंथ नहीं है

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Ziddy Nidhi

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हाँ मैं लड़की हूँ…..!!!!!

December 11, 2021

Shanky❤Salty

हाँ मैं लड़की हूँ!

मेरे चरित्र पर उँगली उठाए जाते हैं
आँखों से मेरे कपड़े भी उतारे जाते हैं
मैं जंगल में जितना जानवरों से नहीं डरती
उतना तो रोड़ पर घुमते मानव रूपी दरिन्दों से हूँ डरती


मेरे सीने को देख
कभी किसी ने आम कहा,
तो किसी ने संतरा कहा,
किसी ने उसे छुना चाहा,
तो किसी ने उसे नोचना चाहा,
सड़ जाते मेरे ये दो फल
तो अच्छा होता
हर किसी को चाहिए होता है यह फल


सोशल मीडिया में अपने मेसेजस चेक करो
तो जितने भी अंजान मेसेज हैं
उन सब को उतसुकता है
मेरे जिस्म का नाप जानने की
कितने बड़े है मेरे फल?
उम्र क्या है मेरी?
साथ चलोगी तुम मेरे?
मेरे साथ सोउगी?
मैं तुम्हें खुश कर दूंगा
कितना लोगी?
कितने यार है तेरे?
हर पल चिंतित रहती हूँ मैं


हाँ मैं लड़की हूँ!


किसे अपनी व्यथा सुनाऊँ?
अपने दोस्तों से कहती हूँ
तो उन्हें मुझसे ज्यादा
इस तरह के मेसेजस और कमेंटस आतें हैं


चौदह साल का लड़का भी पीछे पड़ा है
साठ साल का बुढ़ा भी साथ सोने के लिए मर रहा है
साथ काम करने वाला बंदा भी मौके के फिराक में बैठा पड़ा है


हाँ मैं लड़की हूँ!


माना कि गलती मेरी थी
छोटे कपड़े मैंने पहने थे
पर उनका क्या
जिन्होंने हिजाब पहनना था?
तुमने तो अपनी आग में नवजातों को भी नहीं छोड़ा था


कहूँ तो क्या कहूँ मैं
लिखूँ तो क्या लिखूँ मैं
स्तन ही तो था
जिससे दुध निकलता था
ऐसा दुध
जिसे न तो गरम करना पड़े और न ठंडा
जैसा है वैसा ही अमृत तुल्य है
उस स्तन से निकल दुध को पीकर तुम बड़े हुए थे
और आज उस स्तन को ही नोचने पर आदम हुए हो?


हाँ मैं लड़की हूँ!


नहीं, नहीं
मैं तो खिलौना हूँ
मेरे जिस्म को नोचना दरिंदो का काम
मेरी आत्मा के मसलना अपनों का काम


एक महिला को स्तन कैंसर हुआ था
उन्होंने राम जी को धन्यवाद देते हुए
शर्म के दो पहाड़” कविता लिख दी थी
कहा था उन्होनें “अब तुम पहाड़ पर उंगलियाँ नहीं चढ़ा पाओगे,
जिस पहाड़ से दूध की धार बहती थी
अब वहाँ से मवाद बहतें हैं,
अब पहाड़ के जगह समतल मैदान बचें हैं।”


दरिंदों ने दर्द इतना दिया की अब वे दर्द में भी खुश है।


हाँ मैं लड़की हूँ!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Ziddy Nidhi

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स्त्री-मन……!!!!

स्त्री-मन

Shanky❤Salty

पुस्तक स्त्री-मन की समीक्षा।

स्त्रीमन एक कविता संग्रह है, जो स्त्रीयों के विचारों को दर्शा रही है। इसमें सभी उम्र और वर्ग की औरतों की सोच को ध्यान में रखा गया है।

इस किताब की यह बात अच्छी है की इसमें औरतों की सभी तरह की भावनाओं को प्रस्तुत करने की कोशिश की गयी है जैसे चिंता, बंधन, प्रेम, दुखः, महत्वकांक्षा, जोश और समाजिक सोच का उनपर असर। कुछ कविताएँ तो ऐसी भी हैं जिनको पढ़ कर सब दृश्य
चलचित्र की तरह आंखों के सामने चलता अनुभव होता है। ऐसी कुछ कविताओं में मेरी पसंदीदा हैं- स्त्री-मन, वैश्या और बोझ। पर इस पुस्तक में मुझे सबसे अच्छी वो कुछ कविताएँ लगीं जो किसी भी महिला को जोश से भर देने के लिए काफी हैं, जैसे- तू चलती रह, नारी हूँ आज की हूँ, वो योधा है। इस पुस्तक में माँ और बच्चे के रिश्ते पर भी कुछ एक कविताएँ हैं। और बहुत सारी ऐसी कविताएँ भी हैं औरतों के घुटन और सामाजिक और पारिवारिक बंधन को दर्शा रहीं हैं जैसे- कभी बेचारी, रूह मेरी, चमकता आकाश, असमानता। कुछ कविताएँ प्रेम विरह पर भी हैं जिनमें मुझे सबसे अच्छी लगी- मैं अजीज नहीं।

मेरी तरफ से यह एक बेहद असाधारण एंव बेहतरीन कविता संग्रह है जो अपने पुस्तक शीर्षक को बहुत अच्छे तरीके से सार्थक करती है।

इसलिए मैं अपनी रेटिंग इस पुस्तक के लिए 5 star देना चाहूँगा।

उम्मीद है मेरी तरह बाकी पाठकों को भी यह किताब पसंद आयेंगी और मेरी यह समीक्षा उन्हें सही मार्गदर्शन देंगीं।

और सभी से अनुरोध भी करता हूँ कि किताब को एक बार जरूर पढ़ें।

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Niswarth Prem / निस्वार्थ प्रेम

August 16, 2021

First of all, I bow my gratitude to God, who has inspired me to write, I thanks to my mother “Pramila Sharan” and father “Shatrughan Sharan“. Because without his grace I would not exist.

I am grateful to those writers-readers and critic bloggers, who helped me in my writing.

I also thank Radha Agarwal Ji and Nidhi Gupta “Jiddy”. I would like to thank those who helped me and did proof reading of it and made my words beautiful.

The help that Sachin Gururani did in making the cover page of my book I thanks them wholeheartedly.

Apart from this to all those who have helped me directly or indirectly.

This book is a Journey of Old Age Home to Orphanage Home in a poetic manner.

This book is written for the mature reader. It’s purpose is not to hurt anyone’s feelings. It is written in the favor of every person, society, gender, creed, nation or religion. These are the author’s own views. Hope that by reading this book, you will try to understand and appreciate the author’s point of view. It is merely an attempt to portray social reality. The aim of the book is to promote peace, non-violence, tolerance, friendship, unity, prosperity, happiness and integrity.

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आजादी…..!!!!

August 15, 2021

Shanky❤Salty

देश आजाद हुए तो सदियाँ बीत गयीं
पर क्या हम आजाद हो पाए हैं?

हाँ
हम की बात कर रहा हूँ मैं
हमें ये मिले तो हमें खुशी होगी
हमें वो मिले तो हमारा दुख मिट जाएगा

हमारी खुशियां तो उस चीज-वस्तु मैं कैद हैं

फिर भी हम स्वयं को आजाद कहते है ना?
कितने ही जन्म ले कर हम मिट गए
फिर भी सुख के पीछे हम भाग रहे हैं

और दुख हमारे पीछे भाग रहा है
ज़रा दो वक्त ठहर के तो देखो

मेरी बातें मान के देखो न
अपने आप को पहचान के देखो न

सीमित दायरे में स्वयं को ना बाँधों
एक दफा मुक्त कर के तो देखो
जो कभी बँधा नहीं है
उसे तुम चीज-वस्तु, राग-द्वेष, भय-क्रोध में बाँध रहे हो

जरा भीतर तो देखो
तुम्हें स्वयं कि आजादी का पता चल जाएगा

कुछ ज्यादा बोल गया ना मैं, खैर छोड़ों

देश के स्वंत्रता दिवस की आपको हार्दिक बधाई🎉🎊

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Biological Clock of Human Body

August 01, 2021

Shanky❤Salty

Biological Clock of Human Body

The internal mechanisms that schedule periodic bodily functions and activities is know as Biological clock or Circadian Rhythm.

3am to 5am-(The life force is especially in the lungs)

Those who wants their body is healthy and active then This is the best time for drinking some lukewarm water, walking in the open air and doing pranayama. People who get up in Brahmamuhurta are intelligent and enthusiastic and those who stay asleep, life becomes dull.

5am to 7am – (The life force is in the large intestine)

This is the time for defecation and the bath should be done. Those who defecate after 7 o’clock in the morning have many diseases.

7am to 9am – (The life force is in the stomach)

At this time we can take only milk or fruit juice or any beverage items

9am to 11am – (The life force is in the pancreas and spleen) 

This time is suitable for food. Drink lukewarm water (according to convenience) sips in between meals.

11am to 1pm – (The life force is in the Heart)

There is a law in our culture to do mid-evening around 12 noon from 11 to 1 pm. During this time Food forbidden. This time is known as Sandhya Kaal. This time is best for reading, writing, singing or doing spiritual things.

1pm to 3pm– (The life force is in the small intestine)

About 2 hours after the meal should drink water according to thirst. Eating or sleeping at this time hinders the absorption of nutritious food and juices and the body becomes sick and weak.

3pm to 5pm – (The life force is in the bladder)

If you drink water 2-4 hours before this time, there will be a tendency to pass urine at this time. And you’ll never suffer from kidney or urine disease.

5pm to 7pm – (The life force is in the kidney)

Light food should be taken at this time. Do not eat for 10 minutes before sunset to 10 minutes after (in the evening). Milk can be drunk three hours after meals in the evening

7pm to 9pm – (The life force is in the brain)

At this time the brain is especially active. Therefore, except in the morning, the lesson read in this period is remembered quickly.

9pm to 11pm – (The life force is in the spinal cord)

This time provides maximum relaxation. The awakening of this time exhausts the body and the intellect.

11pm to 1am – (The life force is in the gall bladder)

The awakening of this time produces bile disorders, insomnia, eye diseases and brings early old age. New cells are formed during this time.

1am to 3am – (The life force is in the liver)

The awakening of this time spoils the liver (liver) and the digestive system.

Rishis and Ayurvedacharyas have said that it is forbidden to eat food without feeling hungry. Therefore, keep the quantity of food in the morning and evening in such a way that during the time mentioned above, one feels hungry freely.

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बिन बुलाए…….!!!!

July 20, 2021

Shanky❤Salty
बिन बुलाए आ ही जाती है वो
हमें पता नहीं उसके वक्त का
पर पता है उसे सही वक्त का
हजारों मिन्नतें कर लो
लाख जतन कर लो
वो आएगी
ना समेटने का वक्त देगी
ना पुछने का वक्त देगी
बस कर्मों का हिसाब देगी
क्यों ना तु धन लाख कमाया है
सुना है देश-विदेश का वैद्य तु बुलाया है
पर हकीकत में कुछ भी काम ना आया है
जब दरवाजे पर दस्तक उसका आया है
हाँ वही
सही समझे
मौत

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My All Books…..!!!!

July 11, 2021

Shanky❤Salty

1. Yaado K Panno Se: कुछ बाते कुछ किस्से मेरे यादों के पन्नों से

In this book I have written about some of my experiences. Some, such feelings have been written which are completely empty. Some past has also been written, some society’s character and face too. This is a hindi poetry book.

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2. Read Then Think: It’s not only a Book but it’s my Feeling

This is an English motivational quotes collection book. In this book I have written only as much as I have lived life and embraced death. That too by smiling and drinking the poison of pain.

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3. Unmanned Ground Vehicle Using a GSM Network

This book presents a Global System for
Mobile Telecommunication (GSM) network based system which can be used to remotely send streams of 4 bit data for control of USVs. Furthermore, this book describes the usage of the Dual Tone Multi-Frequency (DTMF) function of the phone, and builds a microcontroller based circuit to control the vehicle to demonstrate wireless data communication.

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4. Sach Ya Sajish ? / सच या साजिश ?: संस्कृती पर प्रहार

This Hindi book is written for the mature reader. It’s purpose is not to hurt anyone’s feelings. Neither is it in favor or opposition of any person, society, gender, creed, nation or religion. These are the author’s own views. Hope that by reading this book, you will try to understand and appreciate the author’s point of view. It is merely an attempt to portray social reality. The aim of the book is to promote peace, non-violence, tolerance, friendship, unity, prosperity, happiness and integrity.

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5. Truth or Conspiracy: Untold Story by Indian Media

This book is a translation of Sach Ya Sajish? Book. In this book you may read about many untold story by Indian Media & what conspiracy is being hatched against Indian culture.

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6. Kaun Hai Ram / कौन हैं राम

Whenever you will read this book, you will feel a divine power.
Yes, the divinity and power of Lord Rama.
Your Soul will rejoice. You will feel energetic and enthusiastic. Your heart will be filled with extreme pleasure. There’s a possibility that you may shed tears. I am confident that you will have a serene experience, an experience indescribable in words.
Let’s see what is your experience.

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क्यों इस्तेमाल करते हैं?

July 4, 2021

Shanky❤Salty
आँखें हमारी है
तो इसे हम
दुसरों की बुराई देखने के लिए
क्यों इस्तेमाल करते हैं?

जुबान हमारी है
तो इसे हम
दुसरों की चुगली करने के लिए
क्यों इस्तेमाल करते हैं?

कान हमारा है
तो इसे हम
दुसरों की निंदा करने के लिए
क्यों इस्तेमाल करते हैं?

दिमाग हमारा है
तो इसे हम
दुसरों का अहित करने के लिए
क्यों इस्तेमाल करते हैं?

ये जो अपने शरीर को तुम अपना मान बैठे हो ना
उसे तुम अपने स्वयं के लिए,
अपने राष्ट्र हित के लिए,
अपने समाज हित के लिए
क्यों नहीं इस्तेमाल करते हो?

कहा था कबीरा ने
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय

वक्त है संभल जाओ, नहीं तो अंत में रोना ही पड़ेगा

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Ziddy Nidhi

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भूख…..!!!!!

June 30, 2021

Shanky❤Salty

गरीब है जनाब
पेट के भूख की कीमत जानते हैं

इसलिए तो
रोटी के टुकड़े कर सब में बाँटते हैं

क्योंकि सुना है हमने
पेट भरते ही
इंसान अपनी औकात भूल जाते हैं


Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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नहीं मैं रहा…..नहीं तु रहा…..!!!!

June 24, 2021

Shanky❤Salty

कबीर दास या कबीर खान
हिंदू बोलो या मुसलमान

जात ना पूछो मेरे मालिक की जनाब
बस कबीर को जान लीजिए ना
फिर ना ही मैं रहा, ना ही तू रहा
का आत्मा दीप भीतर जलते देख लीजिए ना

वो कहते हैं ना
कोई नहीं है अपना
ये जग है तो एक सपना
जो भी जीवन में आएगा
कुछ-न-कुछ हुनर सिखा ही जाएगा
बस फर्क इतना है
कि हम क्या उनसे सीख जाएंगे
यक़ीनन ज़िंदगी है
तो चलना है बढ़ना है
पर भीड़ को लेकर
या भीड़ में रह कर
अपने आप का साक्षात्कार कर
ये फैसला हमको करना है।

चलती चाकी देखकर सो कबीरा दिया रोय
दुइ पाटन के बीच में आके साबुत बचा ना कोय

चलती चक्की देख के, हँसा कमाल ठठाय।
कीले से जो लग रहा, ताहि काल न खाय

ये दो दोहे है, एक कबीर के तो दुजे कमाल के। ज़िंदगी कि वास्तविकता है इन दोहे में अपनी आत्मचेतना को जगाने के लिए। इस कबीर जंयती पर मैं क्या श्रद्धांजलि अर्पित करूँ उन्हें। उनके दोहे और उनके विचारों से मैं तो उन्हें भावंजलि ही अर्पित कर सकता हूँ।


Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Dr. Sakshi Pal

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यात्रा…..वो भी अंतिम……!!!!

June 17, 2021

Shanky❤Salty

सही समझे
मृत्यु
हाँ मैं मृत्यु के बारे में ही लिख रहा हूँ
वो मृत्यु जो मुझे मार नहीं सकती है
पर हाँ आपको ज़रूर मार सकती है
ग़र आप स्वयं को जीवन समझते हैं तो
मृत्यु उसे ही स्वीकारता है
जो जन्म को स्वीकारता है

ना तो मेरा जन्म हुआ है
ना ही मेरी मृत्यु हो सकती है
ये शरीर का जन्म होता है
तो मृत्यु भी उसी की हो सकती है
हमारी नहीं, कभी नहीं

स्वयं नाथ जी भी हमें नहीं मार सकते हैं
यक़ीनन वो सर्वसमर्थ हैं
पर हमें मारने में कभी भी नहीं
अपनी उर्जा को पहचानों
वो कहते हैं ना अज्ञानता का जीवन किसी मृत्यु से कम नहीं है

महेंदी के पत्ते में ही उसकी लाली छिपी होती है
एक बीज में ही जन्म और मृत्यु छिपा है
मृत्यु एक वस्त्र बदलने की प्रक्रिया है
बस और कुछ नहीं

अर्थ स्पष्ट है मेरे शीर्षक का
इस जीवन की यात्रा
अंतिम होनी चाहिए
कोई कितना भी बुलाए
लौट के नहीं आना है
यह जीवन अनमोल है
व्यर्थ ना गवाओ

मोक्ष की उस स्थिति को जान लो
मर्जी तुम्हारी है
सुख-दुख कि चक्की में पिसना है
या उस चक्की के कील से लग कर
और अपनी यात्रा को अंतिम करना है

अब अलविदा कहता हूँ
कुछ पल के लिए
जो इस आत्मज्ञान से निकला वो तो डूब गया
और जो इस आत्मज्ञान में डूबा वो तो हो गया पार…!!


Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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मजबूत रिश्ते…….!!!!

May 14, 2021

Shanky❤Salty

ये रिश्ता बड़ा मजबूत है
बेश़क हमने ही चुना है
जमाने ने जड़ें जरूर काट दी हैं
पर मजबूती से दोस्तों ने थामा ही है

कुछ नए मिलें हैं
तो कुछ पुराने बाकी हैं
शब्दों का मेल है
दोस्त मेरे सच में अनमोल हैं

बारिश का मौसम आ चुका है
तुम भीगना ज्यादा मत इसमें
पर गलतफहमियों की धुल ग़र जमीं हो
तो उसे धो जरूर देना मेरे यार

वो कहतें है ना
यादें बहुत आती है
पर वो वक्त नहीं आ पता है
यकीनन हम झगड़ते बहुत थे
पर दुआओं में भी हम ही थे

वक्त की धुंध में बहुत कुछ छुप जाता है
पर आँखों से ओझल नहीं हो पता है
नासमझ जरूर हूँ
पर समझाना सिर्फ तुम्हीं को आता है

सुख हो या दुख हो
कुछ ने सीढ़ीयों सा इस्तेमाल किया
पर कुछ अभी भी दोस्ती का फ़र्ज़ निभा रहें
हर परेशानीयों का उपाए है उनके पास

दोस्त हैं तो ज़िन्दगी मकबुल है
ना जिस्म की बात होती है
ना ही रूह की होती है
बस ज़िन्दगी को खुल कर जीने की इबादत होती है

ना खुदा ने बनाया है
ना खुद हमने बनाया है
दरसल ये रिश्ता खुद-ब-खुद बन आया है

भावनाओं का जो मेल हो पाया है
निस्वार्थ ही ये रिश्ते निभ रहे हैं
और निभते रहेगें

चाहत कुछ भी नहीं है
बस जहाँ भी रहें
अपनी मौज में रहें

यही दुआ है उनकी
चार धाम की यात्रा
साथ कर पाय या ना कर पाए
पर हमारी अंतिम यात्रा में
वो शामिल हो जाएं
ये ही आखिर ख्वाहिश है हमारी

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कुछ तो बात है……!!!!

April 15, 2021
Shanky❤Salty

कुछ तो बात है
श्मशानों में इतनी भीड़ क्यों है?
जंगल की लकड़ियाँ क्यों कम पड़ रहीं हैं?

कुछ तो बात है
प्रकृति का ऐसा ही वास्तविक रूप है?
या फिर यह हमारे कर्मों का फलस्वरूप है?

कुछ तो बात है
कहीं पर चुनाव जीतने की होड़ है
तो कहीं पर ज़िंदगी हार रही है

कुछ तो बात है
एक वक्त था जब मन में फासलें थे
अब तो हकीकत में भी फासलें हो गयें हैं

कुछ तो बात है
धन हमनें लाखों – करोड़ों में कमाया
पर हमनें मन से छल – क्रोध को छोड़ नहीं पाया

कुछ तो बात है
खाने को दो रोटी नहीं है
पर अल्लाह के लिए बकरी तैयार रखें हैं

कुछ तो बात है
कुंभ के गंगा में भीड़ तो है
पर ज्ञान की गंगा खाली ही है

कुछ तो बात है
कितनी भयावह परिस्थिति है
कि चार जन भी नहीं मिल रहें
अपने को कंधा देने की खातिर

कुछ तो बात है
जंगल की लकड़ियाँ कम पड़ रहीं हैं
यह रौद्र रूप नहीं है प्रकृति का
है यह केवल चेतावनी
पिछले वर्ष कोरोना करूणा में थी
अबको-रोना ही है
वक्त है संभल जाओ
वरना इससे भी भयावह स्थिति
उतपन्न हो सकती है
खै़र
कुछ तो बात है…….!!!!!!

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Review by Nidhi Gupta……!!!!

April 09, 2021
Shanky❤Salty

इस किताब में हमारे आराध्य रामजी के विषय में विस्तृत रूप से बताया गया है, यह एक कवि और उसके आराध्य के बीच का वार्तालाप है, इसमें कवि का कोमल ह्रदय छलकता है, वह अपने राम जी को हर जगह हर वक़्त पाता है, उसे अपनी मृत्यु की भी चिंता नहीं है क्योंकि वह राम राम करते हुए ही मरना चाहता है, कवि का विश्वास है की राम राम करने से चौरासी योनि का जो चक्र है वह टूट जायेगा और उसे मोक्ष प्राप्त हो जायेगा, कवि ने अपने इस किताब में अपने आराध्य रामजी और खुद को दोस्ताने रिश्ते को भी बतलाया है और एक दास के रिश्ते को भी बताया है। इस किताब को पढ़ने के बाद हमे राम जी के संम्पूर्ण जीवन का ज्ञान हो जाता है, कवि राम मंदिर के कारण हुए राजनीति और दंगा फसाद के कारण बहुत दुखी है, वह राम मंदिर के नाम पर राजनीति करने वाले से बहुत नाराज है। कवि अपने मन की हर एक बात जो वह अपने राम जी से कहना चाहता है उसने अपने इस किताब में खुल कर लिखा है, आप इसे एक संवाद के रूप में जब पढेगें तब आपको यह समझ में आ जायेगा की कवि कितना मासूम है, वह अपनी हर एक बात अपने आराध्य रामजी से कैसे कहता है। कुछ पंक्तियाँ कवि ने कुछ इस तरह से लिखीं हैं जो बहुत ही गहरी हैं। आप सभी को यह किताब अवश्य पढ़ना चाहिए ताकि आपको रामजी के विषय में और भी जानकारी हो।

Book review by Ziddy Nidhi
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Book Review……!!!!!

April 04, 2021
Shanky❤Salty
Harina Pandya has given review of my book “सच या साजिश
👇
I will recommend this book to know about our culture and civilisation..it is not just about one or two concepts..it covers each and every aspect about our saints, religion, society in today’s era, history, lifestyle and much more..book provides detail information about our sanskriti amazingly.
To read my book click here
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कौन हैं राम…….!!!!

March 26, 2021
Shanky❤Salty
मैंने एक किताब लिखी है जिसे आप देख महसूस करेंगे की यह किसी विशेष धर्म, संप्रदाय, जाति, मज़हब के लिए है लेकिन ये सत्य नहीं है, यह किताब पूरी मानव जाति के लिए है। इस किताब में राम शब्द का प्रयोग एक उर्जा के तौर पर किया गया है जो हर ज़गह विद्यमान हैं। वह उर्जा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह में भी है और शिवजी में भी है,
जिसे आजकल की साईंस ने भी माना है
“गौड पार्टीकल” के रूप में।
मेरा किताब लिखने का एक ही मकसद है की जाति, मजहब, धर्म, रंग, भेद,…आदि को ख़त्म कर उस एक पर ध्यान देना।
दिखते तो यहाँ पर सब अलग अलग हैं पर हैं तो सब एक ही ना।
फ़िर यह ईर्ष्या राघ द्वेष क्यों और किससे..!!!
राजा हो या रंक असली औकात तो श्मशान में दिख ही जाती है
फ़िर जीते जी यह बाहरी दिखावा क्यों।
कुछ वास्तविकता को मैंने लिखा है जिसे लोग जान कर भी अनजान बनें हैं।
जिस्म और रूह की सत्यता को मैंने स्पष्ट रूप से लिखा है।
राम होकर राम को भजना है।
इस किताब का उद्देश्य अपने भीतर छुपी आत्मचेतना को जगाना है।
किसी भी चीज़ का नशा एक-न-एक दिन उतरना ही उतरना है।
रात को पियो तो सुबह
सुबह को पियो तो रात
उतर ही जाता है।
राम नाम का प्याला पी कर के तो देखो।
राम नाम का नशा कर के तो देखो वचन है मेरा आपको इससे सारी ज़िन्दगी सुधर जाती है
राम जी ही तो सरस्वती जी के रूप में मेरी जिह्वा पर विराजमान हैं
और मेरी कलम को एक नई सोच देते हैं।
मैं उन्ही राम जी के अंश राधा अग्रवाल जी और निधि गुप्ता “जिद्दी” जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिन्होंने मेरे लिखे इस लेख को जो राम जी को समर्पित है
को सही किया है इसे सुंदर बनाया है।
हरिणा पंडया जी और निधि गुप्ता “जिद्दी” ने इस किताब को लिखने में मुझे सहयोग दिया है।
राधा अग्रवाल जी ने मेरी इस किताब का शुद्धिकरण किया है।
सचिन गुरुरानी ने मेरी किताब के लिये डिजाइन तैयार किया है।
मैं इन सभी को तहेदिल से धन्यवाद करता हूँ।

मेरी किताब पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
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Truth Or Conspiracy……!!!!

February 24, 2021
Shanky ❤Salty

My fifth book has been published on February 16, 2021. I have written some of my experiences in this book. And some such untold story by our Indian media or paid media or fabricated media. This book is written for the mature reader. Its purpose is not to hurt anyone’s feelings. Neither is it in favor or opposition to any person, society, gender, creed, nation or religion. These are my own views.

In this book you read about:-

  • Some Cultures Of The World
  • Culture Of India
  • Indian Saint

  • What Is The Purpose Of The Saint?
  • Gautam Buddha
  • False Accusations On Gautam Buddha
  • Jayendra Saraswati Shankaracharya
  • False Accusations On Jayendra Saraswati Shankaracharya
  • Asaram Bapu
  • Parliament Of World Religion
  • Scientific Conclusion Of Asaram Bapu Aura
  • Women Empowerment
  • Divine Baby Rites
  • Stop Abortion Campaign
  • Cesarean Delivery
  • Spiritual Awakening Campaign
  • Prisoner Uplift Program
  • Vrinda Expedition
  • Tribal Welfare
  • Gurukul
  • Valentine’s Day
  • Protection Of Cows From Slaughterhouses
  • The Main Reason Why Asaram Was Targeted
  • False Accusations On Revered Bapuji
  • What Are People Saying
  • Attack On Hinduism

I offer my gratitude to God. Those who inspired my writing. I thank you to my mother Pramila Sharan. Without her blessings, the existence of this book was difficult. I’m grateful to the writers, readers & critic bloggers who helped to make my writing the best. I would also like to thank you to Radha Agarwal, who helped me and did a proof reader. I thank to Rekha Rani ma’am for helping me in this book. Who raised the respect of my creation with their thoughts. Also, my heartfelt thanks to those who helped to write this book.
Hope that by reading this book, you will try to understand and appreciate my point of view. And give your feedback.
My book is available on Amazon & Notionpress

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सिखा दो न…..!!!!

February 21, 2021
Shanky❤Salty
ग़म के आँसू भी तो हला-हल कि तरह है ना शिव जी
आप हमें भी पीना सिखा दो न शिव जी
हर परिस्थिति में हमें भी मुस्कुराना सिखा दो न शिव जी…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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अयोध्या वासियों से अनुरोध…….!!!!

February 10, 2021
Shanky ❤Salty
बड़ा व्याकुल है मन हमारा
कभी सम्मान ना मिला
हमारी माँ सीता जो को
आपकी अयोध्या जी में
ब्याह कर के आईं थीं हमारे राम जी से
षड्यंत्रों का शिकार हो वनवास को गई हमारी माँ
अग्नि परीक्षा तक देना पड़ा हमारी माँ को
फ़िर भी चैन ना मिला आपके अयोध्या वासियों को
क्या से क्या कह गए हमारे राम जी को
त्याग सीता को प्रजा का सम्मान रखा राजा रामचंद्र जी ने
है विनती मेरी आपके मोदी जी से
बनवावें रामलला का भव्य मंदिर
पर वो सम्मान लौटावे जो प्रेम किया था हमारे राम जी ने हमारी माँ सीता जी से…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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हाथों में पतंग लेकर…….!!!!

January 14, 2021
Shanky❤Salty
खुशियाँ किसी चीज या वस्तु की मोहताज़ नहीं होती
खुशियों को तो बस बहाना चाहिए
हाथों में पतंग लेकर
आसमान को छूना है
हर ख़्वाब को एक दिन पूरा करना है
ज़िन्दगी कि डोर में प्यार का माँझा हम चढ़ाएँगे
ईर्ष्या की पतंग को काट हम गिराएगें
तिल गुड़ खा कर हर रिश्ते से कड़वाहट हम मिटाएंगे…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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ख़ुद ही खुदा…….!!!!

December 02, 2020
Shanky❤Salty
ख़ुदा का काम करते फिरते हो
लगता है इसलिए
दूसरों के कर्मों का
तुम हिसाब लिखते फिरते हो
जरा मेहरबान होकर के
ख़ुद के कर्मों का
भी ग़र तुम हिसाब कर लेते
तो तुम ख़ुद ही खुदा के रूप में पूजे जाते…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
Published by Anonymous
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अर्थहीन सी दुनिया…..!!!!

November 26, 2020
Shanky❤Salty
अर्थहीन दुनिया लगती है
ज़िन्दगी भी अब मुझको व्यर्थ सी लगती है
ख़ुद का अस्तित्व ढूंढनें में मुझको असमर्थता सी महसूस होती है
मेरी हर कोशिश ना जाने क्यों व्यर्थ सी होती है
हर पल लोग खफ़ा हो जाते हैं
हर ज़गह हम असफल हो जाते हैं
आँखे बंद करते हीं आँखों से आँसू बह जाते हैं
एक-दूजे से इंसान जलता ही जाता है
मुट्ठी में रेत की तरह समय बीतता जाता है
व्यर्थ की चिंता कर मनुष्य एक दिन अर्थी पर लेट ही जाता है

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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Break…..!!!!

August 16, 2020
Shanky❤Salty
ज़िंदगी का दरवाजा
अब मैं कुछ पल के लिए बंद करता हूँ
रिश्तों की उलझन से अब खुद को दूर करता हूँ
न वक्त बुरा है
न है लोग बुरे
हूं मैं वफा खुद से
और हूँ खफा भी खुद से
जब साथ ही न हो शरीर
और दिमाग खुद का
तो क्यों है उठाना उँगलियाँ किसी पर
न कोई बात है
और न ही कोई साथ है
बस मुझको बहुत कुछ याद है
और अब उन यादों के सहारे
खामोशी के गोद में कुछ पल के लिए
मौन हो कर लेटना है

Hello everyone, hope you all are very well. But I’m not.
I’ve decided to take a break from blogging and posting. I don’t know this break is long or short. But it’s not leaving forever.
I request you to everyone please drop your post link in my instagram or mail. Because you all are incredible. I don’t want to miss anyone post. So, please understand.
©Ashish Kumar
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ज़िंदगी के रंग…..!!!!!

July 10, 2020

Shanky❤Salty

कभी ज़ेहन में ख्याल आता था लिखना बहुत आसान है। बस चाहिये काग़ज़, क़लम, एक दिल, दिमाग़ और कुछ लफ़्ज़, बस लिखने का सिलसिला चल निकलता है। लेकिन जब लेखनी हाथों में लिया, तब समझ आया लफ़्ज़ों, नज़्मों, कविताओं के खेल निराले होते हैं। तूलिका पकड़, कल्पना के सहारे ज़िंदगी के सच्चे रंग नहीं उकेरे जा सकते। ऐसे रंग कभी बहुत गहरे, कभी हल्के और कभी बदरंग हो जातें हैं।
लिखने के लिये चाहिये जिंदगी के सच्चे सबक, सच्ची सीख, चोटें, अनुभव और उनसे निचोड़े लफ्ज़। इनसे बनती हैं सच्ची कविताएँ और नज़्म। सच है, दिल से निकली बातें हीं दिल तक जाती हैं। बहते पानी सी अनवरत चलती ज़िदगीं ने बहुत रंग दिखाये। जीवन में उतार-चढ़ाव और ठहराव दिखाये। ख़ुद आईना बनने की कोशिश में इन सब को शब्दों और लफ़्जों का जामा….लिबास पहना कविता का रुप दे दिया। ज़िंदगी को इन कविताओं में ढालने की यह कोशिश कैसी लगी? क्या ये कवितायें आपके दिल को छूती हैं? पढ़ कर देखिये न रेखा आंटी की किताब को।

Title: Zindagi Ke Rang
Product ID: 197911-1336776-NA-NED-T0-NIKI-REG-IND-DIY
ISBN: 9781649511652
Format: Paperback
Date of Publication: 06-07-2020
Year: 2020

Click here to read this book.

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दर्द के हर अल्फाज……!!!!

May 27, 2020
Shanky❤Salty
बात है मई 18 की। ऐसा बहुत कम ही होता था कि मुझे जल्दी नींद आ जाए पर उस रात मुझे 9 बजे से ही नींद आ रही थी। पर अफसोस सो नहीं पा रहा था। पता नहीं क्यों???
करीब 12बजे होंगे मेरा मोबाईल वाईबरेट करता है और मैं जैसे ही मोबाईल हाथ में लेता हूँ तो स्तब्ध रह जाता हूँ।
हड़बड़ा कर फोन उठाया
“हैलो….!!!!”
आवाज आती है
“कैसे हो…???”
मैं उससे पूछता हूँ
“सब ठीक तो है”
उधर से आवाज आती है
“मुझे क्या हुआ है”
मैंने कहा उससे
“तो आज अचानक से मुझे कैसे याद किया”
वो कहती है
“मेरी मर्जी, मेरा फोन है”
इतना कह वह जोर से हँसने लगी
मैंने कहा
“वाह जी, मेरा डासलॉग मुझे ही सुना रही हो”
तब वह बहुत ही प्यार से कहती है
“मैं भी तो तुम्हारी ही हुआ करती थी ना कभी, हाँ अब बात नहीं होती है तो इसका मतलब ये नहीं ना कि कोई मेरी जगह ले ले।”
मैं यह शब्द सुन खामोश हो गया।
और काफी देर के लिए चुप हो गया और उसकी साँसों को सुनने लगा।
वह भी चुप थी फिर अचानक से कहती है
“अब बस भी करो मेरी साँसों को सुनना इत्ते दिनों बाद फोन किया है। कर लो न आज पुरी रात मुझसे बात”
मैंने कहा
“तुम्हें कैसे पता मैं साँसें सुन रहा हूँ”
हंसते हुए कहा उसने
“तुम भी ना पागल भुलक्कड़ हो गए हो
जब हम पास होते थे तो मैं तुम्हारे सीने पर सर रख तुम्हारी धड़कन सुना करती थी और जब दूर रह फोन पर बातें किया करते थे तो तुम चुप रह मेरे साँसें सुना करते थे न। बस महसूस किया अब भी तुम वही कर रहे हो। तुम्हें कुछ याद ही नहीं रहता है अब सब भुल गए हो। बादाम खाया करो समझे मोटु। लेकिन अब ये मत कहना की मम्मी मुझे नहीं देती है। यह सब तुम्हारी बहानेबाजी है”
मैंनें कहा
“नहीं कहुंगा यार, पर मुझे बादाम अच्छा ही नहीं लगता है तुम्हें भी पता है खैर छोड़ो ये सब। तुम्हें सब याद है बस मुझे ही भुल बैठी थी”
वह चिल्ला कर कहती है
“कुछ नहीं भुली थी बस वक्त सही नहीं था और तुम्हारी आदत छुड़वानी थी। जो तुम्हें मेरी हो गई थी। अब बताओ भी यार कैसे हो? कहाँ हो? तुम्हारा समोसा खाना कम हुआ या नहीं? मिल्किबार तो छुटी होगी नहीं ये तो दावे के साथ कह सकती हूँ। मुझसे ज्यादा प्यार तुम मिल्किबार से करते थे और आज भी करते होगे ही। हुह😏
तुम्हारी तबीयत कैसी है??? दिल की धड़कन कैसी है? सही हुई या पहले जैसी ही तेज रहती है? देर से अब भी सोते होगे या नींद की दवा ले कर ही सोते हो? तुम्हारा इन्हेलर छुटा या नहीं? खाने में भी वहीं पछत्तर नखड़े होंगे? पानी पीना भूल ही जाते होंगे? यार तुम चुप क्यों हो? कुछ बोलो न मेरा शैंकी? इत्ते दिनों बाद फोन किया है और तुम हो की बोलते ही नहीं।”
मैं कहता हूँ
“क्या कहूं पगली बस खुद को यकीन दिला रहा हूँ कि तुम ही हो फोन पर, पर कैसे? और क्युं? मैं तुम्हारे सवालों का जवाब दूं या अपने सवालों का जवाब माँगुं?
मुझे बीच में ही रोकेते हुए
“मेरा बच्चा तुम चुप रहो, मैं सब कुछ कहती हूँ। बस शांति से सुनो जो तुम्हें सबसे अच्छा लगता है।
मैंने बहुत पहले तुम्हारी लिखी किताब ‘यादों के पन्नों से‘ मंगवाई थी पर कभी हिम्मत नहीं हुई उसे पढ़ने की। क्योंकि पता था मुझे मैं जब भी पढ़ुगी खुद को रोक नहीं पाऊंगी तुम्हारे प्रति मेरा प्रेम फिर बाहर आएगा और मैं फिर कमजोर हो जाऊंगी। और हुआ भी एैसा ही। आज सुबह कमरे की सफाई कर रही थी तभी मुझे तुम्हारी किताब नजर आई। और रोक नहीं पाई पढ़ने से खुद को। फिर क्या पढ़ते ही आँखों से आँसू बहने लगे। पहले बहुत गुस्सा आता था जब तुम मरने की बाते करते थे लेकिन आज जब मैंने तुम्हारी लिखी ‘मेरी अंतिम यात्रा‘ को पढ़ा तो खुद पर अफसोस हुआ की मैं बे-वजह तुम पर गुस्सा करती थी। हर एक शब्द सत्य है और अटल सत्य है। जिसे कभी कोई झूठला नहीं सकता। हमें आज नहीं तो कल इसे स्वीकार करना ही होगा तो आज क्यों नहीं? हर एक लाईन तुम्हारी किताब का जबरदस्त है। तुम्हारी किताब मेरी पनीर चिल्ली की तरह है। हर लाईन में कुछ नया है। “
बीच में रोकते हुए
“चुप रहोगी पागल। ये सब मत बोला करो मुझे पसंद नहीं है। गर कोई कमी है तो बोलो उसे सुधारूगा।”
वह कहती है
“नहीं मेरा बच्चा कोई कमी नहीं है। हर चीज पूरी है चाहे वो रोटी हो, या गरीबी हो, या दोस्ती हो या एक कहानी हो। सब सही है। तुम खुद अंदाजा लगा लो मेरे पागल बच्चा मैं पढ़ तुम्हारी किताब को रोक नहीं पाई। अब चलो मुझे जल्दी से बताओ। अपनी तबीयत के बारे में।”
मैंने कहा
“यार तबीयत का क्या है। कभी ठीक रहती है तो कभी नहीं रहती, लेकिन मैं ज्यादा सोचता नहीं हूँ। शरीर है ये सब तो होता ही रहेगा। मेरी लापरवाही जो है। हाँ आज भी मिल्किबार रखता हूँ पर खाता नहीं हूँ क्योंकि डरता हूँ कि कहीं खत्म न हो जाए। रही बात समोसे की तो वो अब भी खाता हूँ लेकिन घर का बाहर का खाना तो छोड़ ही दिया हूँ। घर के खाने से प्यार करने लगा हूँ इसलिए किसी भी चीज को ना कहना ही छोड़ दिया हूँ। और बात धड़कन की तो वो बस की नहीं मेरे। कंट्रोल में ही नहीं रहती मेरे। और इन्हेलर तो छुट ही गया था लेकिन वक्त बे वक्त लेना ही पड़ता है उसे, बाकी सब सही है कोई तकलीफ नहीं है खुश हूँ जो है उसी में। तुम अपना बताओ। खाना खाया या नहीं?”
वह बड़े प्यार से कहती है
“आज सुबह से नहीं खाई हूँ। दिन भर तेरा ही ख्याल आया है। और बिल्कुल भी भूख नहीं लगी और न पानी पीने कि इच्छा हुई है। बस शाम को मैं पापा से मिल्किबार और लिटिल हर्ट मंगवा। सोचा तुमसे बात कर खाऊंगी। पर अफसोस मिल्किबार नहीं मिला। वैसे मेरा भी सब सही ही है। तुम्हारी बातों मे ही जीती हूँ और जो-जो सिखाया था तुमने वो सब पूरी करने की कोशिश में लगी रहती हूँ। सिर्फ अपने करियर पर ही फोकस है।”
मैंने अचानक से उसको रोका
“सुनो न….एक बात कहनी है”
बहुत ही प्यार से उसने कहा
” बोलो न मेरी जान क्या हुआ”
मैंने कहा
“यार सुसु आई है…..तुम फोन मत रखना मैं तुरंत आता हूँ”
उसने जोर से हँसते हुए कहा
“ठीक है मेरा बच्चा जाओ वैसे भी एक घंटा होने को है फोन खुद ब खुद कट ही जाएगा। तुम जल्दी आओ तब तक मैं पानी भर आती हूँ किचन से और कुछ खाने का भी ले आती हूँ। फिर हम पूरी रात बात करेंगे”
मैंने कहा
“ठीक है जी” कह मैं फोन कट कर टॉयलेट चला गया।
मन में सवालों का बवंडर सा आन पड़ा। क्युं फोन की, क्या काम है उसे, क्या फिर से वह मेरे साथ रिश्ता रखना चाहती है, वगैरा-वगैरह।
अचानक धड़कन तेज हो गईं। कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। मैं चुप होकर डाईंनिग हॉल में ही बैठ गया। ग्लास में पानी ले हजारों सवालों से झूझ रहा था। तभी मन में खयाल आता है “जो होता है होने दो, तुम अपनी ओर से कुछ न करो। गलत तुम करोगे नहीं गलत तुम्हारे साथ होगा नहीं। अपनी मौज में रहो।” ग्लास का पानी खत्म कर कमरे की तरफ बढ़ा और बंद कमरा कर फोन देखा तो 7मिसड कॉल नजर आए। तब तक फिर कॉल आ गया।
जैसे ही फोन उठा “हैलो” बोला।
उधर से गुस्से का बाँध टूट पड़ा।
लगातार 15मिनट तक डाँटना। और कहना
“अब कुछ बोलोगे भी या मुंह ही बंद रखोगे।”
हंसते हुए मैंने कहा “बस हो गया, सबर का बाँध टूट गया तुम्हारा। सुसु कर 2मिनट बैठ पानी क्या पीने लगा तुम से तो रहा ही नहीं गया”
यह बात उसके दिल को मानो जख्मी कर गया हो।
फिर क्या पसर गया एक सन्नाटा, हर वक्त की तरह मैं भी खामोश वह भी खामोश हो एक दूसरे के साँसें सुन रहे थे, हम काफी देर तक ऐसे ही थे।
फिर अचानक से वह कहती है
“सुनो न”
मैंने कहा
“कहो न जी”
वह हँसते हुए कहती है
“चलो न चाँद को देखते है”
कहा मैंने
“जरा ठहरो जी, खिड़की खोल टेबल से सारा सामान हटाने दो। फिर इत्मिनान से बैठेगें।”
वह कहती है
“ठीक है, लेकिन जल्दी”
मैंने कहा
“जल्दी क्या ,कौन सा चाँद भागे जा रहा है”
तब वह मुँह बना कहती है
“अरे नहीं,लेकिन फिर भी तुम्हें तो पता है न मुझमें सबर कितना है।
मैं गुस्से में कहता हूँ
“हाँ- हाँ इसलिए तो मुझे छोड़ गई”
उसने दबी आवज में बोला
“फिर वही बात यार, मैं भुखी हूँ मुझे खिलाओ न अपने हाथो से ताकि मैं तुम्हारी ऊंगलीयों को काट सकुं”
मैंने चिल्लाते हुए उससे कहा
“खिलौनों से खेला करो,इंसानो से नहीं,मैं इन सब से आगे बढ़ चुका हूँ”
वह भी झुंझलाते हुए बोली
“अब बस भी कर झूठा, आगे बढ़ गया है इसलिए तो यादों के पन्नों को सजाए फिरता है, न खुद चैन से जीता है न मुझे जीने देता है, लाख बार कहीं हूँ शैंकि बड़ा हो जा बड़ा हो जा, लेकिन सुनना ही नहीं है, अब चलो जल्दी से खिला दो न अपनी जान को, भूखी है तेरी किताब कि वजह से, तेरी अंतिम यात्रा पढ़ तेरे पास आई है बस एक रात के लिए वो भी चाँद के साथा………”
कहते कहते उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी। और उसकी आँखों कि बारिश ने मेरे दिल को भीगो दिया।
मैं चुप करा उसे उसके दिल को तसल्ली देते हुए खिलाया। और वही उसकी पुरानी आदत पुरा मुँह भर के खाना और खाते हुए बोलना, और सच्ची पहले की ही तरह इस बार भी मुझे कुछ समझ नहीं आया वो बोल रही है, बस उस पागल की खुशी के लिए हाँ हाँ करता गया।
खाने के बाद पता नहीं क्या हुआ। उसने मुझे गोद में सुलाया और अपनी बातों में मसहुल कर दिया। चाँद देखता रहा और उसकी बातें चुप हो सुनता रहा, ज़िंदगी को जीने का तरीका सीखा रही थी।
अचानक उसने मुझसे पूछा “चाँद दिख रहा है या नहीं?” मैंने कहा “नहीं वो तो थोड़ी देर पहले ही गायब हो गया नहीं दिख रहा है”
गुस्से में वो बोली
“तो बोला क्युं नहीं मुझे, अब उठो टेबल से और छत पे जाओ और देखो चाँद को, तभी बातें करूँगी”
उसकी ये बात सुन के अजीब लगा और कहा मैंने
“अबे पागल औरत, दिमाग सही है न ,मेरी मम्मी टाँग तोड़ देगी और तो और मुझे डर लगता है इसलिए मैं नहीं जाऊंगा”
इतना सुन वो फिर जोर-जोर से हँसने लगी
और कहती है “ठीक है मेरा बच्चा”
फिर हम दोनों भविष्य की बातों में खो गए और पता ही नहीं चला कब सुबह हो गई और चिड़िया की चहचहाहट सुनाई देने लगी दोनों को।
और यह आवाज कानों को तो अच्छा लग रहा था पर दिल को मानो कचोटते जा रहा था। क्योंकि यह आवाज विदाई की बेला पास ला रही थी।
सुबह के सूरज के साथ हम दोनों ही जुदा होने वाले थे।
तभी वह कहती है “चलो न शैंकि, साथ में सूरज देखते हैं “मैंने कहा “कौन सा सूरज, डुबता हुआ सूरज” उसने कहा “नहीं जी उगता हुआ” मैंने कहा “हाँ वही यार डुबता हुआ ही”
इतना सुनते ही उसकी आँखों से आँसू बहने लगे और आवज में फिर से लड़खड़ाहट सुनाई देने लगी।
और कहा उसने
“मेरी जान रोना बंद करो और दर्द के हर अल्फाज को जिंदा रखो
अपनी डायरी मे उन तारीखों के साथ। माना की वो काली कलम तुम्हारे पास नहीं पर फिर भी जो है उसी के सहारे उसे उकेरा करो, चलो चलती हूँ”
और रोते हुए उसने फोन काट कर दिया।
और मैं बे-सुध सा वही टेबल पर पड़ा रहा।

Written by:- Ashish Kumar
My words are incomplete without support of Ziddy Nidhi
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Dear……!!!!

May 6, 2020
Shanky❤Salty
Dear……..!!!!!
Hi!
How are you?
I hope, you are doing great. It’s been three years and you haven’t contacted me once. I know, leaving me, was totally your decision, a decision taken carefully, but like a fool (that I am), I waited for you just in a hope that one day, you would think about me and all those lovely memories, we created. Guess, I was wrong.
Anyway, I am sorry, I didn’t want to disturb you like this, but, I got to know about your wedding and was dying of curiosity.
I just want to know about you and him? How is he? Is he a good looking guy or a cute one? Or the muscular one?
Is he taller than me or the one who suits your height? Is he an IIT engineer or a UPSC aspirant or Doctor?
Apologies in advance, but, I want to know everything. How have you exactly felt, when you deleted my name like a corrupted file from your life and accepted him as your life partner? Were the both names written the same way on the wedding card as we had thought of ours? Were you happy when he held your hands around the fire, taking vows to stay together? Did your tears tell our incomplete story or were you happy for a new beginning?
Does he kiss you on the forehead to make your day or do you still miss our morning hug? Does he prepare morning tea for you or do you still miss my breakfast in bed?
Is he a good boy, who puts the things in proper place or just messes with things like me? Does he bite your fingers when you feed him with your hand or make faces when you add extra salt in? Does he like when you wear a western outfit or force you to wear only Indian attires? Does he go out with you and carry your shopping bags or only pay for it?
I want to know, is he able to handle your mood swings or gets irritated easily? Does he like to move his hands between your silky hair or find it boring? Does he pamper you during menstruation period or feel bothered? Does he make ugly faces in your selfies or give perfect pose? Does he put your mobile on charging when you play late night games or just leave it with you?
Does his love and care make you happy or you miss my care? Do you enjoy his car rides or miss my bike rides? Have you really fallen in love with him or still have feelings for me?
Who am I for you- a sweet memory or the worst nightmare? Honestly, it doesn’t matter, whatever I am to you. You are still the same for me. The one, whom I loved with all my heart and will always love till the last breath. Maybe we were never meant to be together yet the days we have spent together hold the greatest memories.
Heartiest congratulations on your new life.
Don’t worry, I am happy in my life. My family is there to shower their love and never- ending blessings.
Enclosing with love and warm wishes.

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Heena Chugh
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Bible…..!!!!!

May 2, 2020
Shanky❤Salty
Jesus said to them, “Very truly I tell you, unless you eat the flesh of the Son of Man and drink his blood, you have no life in you.
I’m reading bible from this source Bible Hub
Is it true that we don’t have life if we are not eating the flesh of the son of man and drink his blood?
Is this humanity ?
Kindly clear my doubts about this phrase in the comments below.
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ए ज़िंदगी तु ही बता…..!!!!

April 30, 2020
Shanky❤Salty
अब मुझे जीने को क्या चाहिए
बस तेरे इश्क़ का ख्याल हो
और मेरे अश्क़ की स्याही हो
बस अब इतनी सी जरूरत रह गई है
मेरे जीने की

Written by:- Ashish Kumar
My words are incomplete without support of Ziddy Nidhi
Posted in #parents, Challenge, Old Age Home

अपनी कुटिया…..!!!!

March 11, 2020
Shanky❤Salty
दूर एकांत में कहीं
चलो चलते हैं
अपनी कुटिया ,अपनी दुनिया
बुढ़ापे की हमारी छोटी सी दुनिया
चलो ना चलते हैं
दूर एकांत में कहीं
सहारे सारे छूट गए
अपने सारे रूठ गए
कौन रहा है कौन रहेगा
अपनी तो अब फटी बिछनिया
बुढ़ापे की हमारी छोटी सी दुनिया
वही तपती धूप में तुम
कांपते हाथो से पंखा झल देना
जो जाड़े की सर्द रातें हो
तो अटकती सांसो की गर्मी दे देना
वो यौवन का प्रेम अब
चला है होने को अमर
तुम संग मेरे यही अपनी
देह त्याग देना
चलो ना चलते हैं
अपनी कुटिया,अपनी दुनिया
बुढ़ापे की हमारी छोटी सी दुनिया
वो महक तेरे केसुओ की
झंकार तेरी पायल की
मैं खोता चला जाता हूं
डूबता चला जाता हूं
जब भी तुझको देखता हूं
तुझ सी खूबसूरत तेरी आभा की झुर्रियां
खन खन करती तेरी चूड़ियां
मैं प्राण त्याग दूंगा तुझमें
तुम मुझमें सम्मिलित हो लेना
जब सांसे अटकती हुई जा रही हो
तुम हाथ दिल पर रख देना
चलो ना चलते हैं
दूर एकांत में कहीं
अपनी कुटिया ,अपनी दुनिया
बुढ़ापे की हमारी छोटी सी दुनिया

This is an Imagination Challenge post given by Sohanpreet Kaur
And thank you soooo much Dr. Sakshi Pal for kind support.
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आत्मशिव…..!!!!

February 21, 2020
Shanky❤Salty
महाशिवरात्री जागने का पर्व है
अपने अंदर के आत्मशिव को जागने का पर्व है
जीव शिव है
शव भी शिव है
सब कुछ शिव है
बिन शिव कुछ भी नहीं है
मेरे शिव जी समर्थ तो हैं
पर हमें मारने में असमर्थ हैं
हाँ-हाँ शिव जी ने ही ज्ञान दिया है
मृत्यु आएगी पर हमारी मृत्यु हो नहीं सकती
यह परम सत्य है
मृत्यु तो कपड़े बदलने की तरह है
इस ज़िन्दगी को छोड़ दूसरी ज़िन्दगी को अपनाना है
फ़िर किस बात का डर है
रोना क्यूँ है
क्या कहूँ नाथ जी आपसे
सुनते सब कुछ हैं
पर कहते कुछ भी नहीं
बस झोलियाँ भर-भर देते हैं
लीला कर हर वक़्त अपनी ओर खींचते हैं
भर-भर प्याली मुझको आप ही तो पिलाते है
बिन कहे अन्हद नाद आप सुनाते हैं
च़िता कि राख़ हो
या चंदन का लेप हो
हर कुछ मुझको प्यारा लगता है
हर कुछ मुझको अपना लगता है
माना की वो राखी टूट गई मुझसे
पर वह रिश़्ता अब भी बरक़रार है
हाँ नाथ जी वो रूद्राक्ष भी बिख़र चुका था
पर आपने मुझको समेट रखा था
मेरे शिव ने मेरी शक्ति से कहा था
नास्ति ध्यानं सम तीर्थं
नास्ति ध्यानं सम यज्ञं
नास्ति ध्यानं सम दानं
तस्मात् ध्यानं समाचरेत
ध्यान के समान न तीर्थ है न ही यज्ञ है न ही दान। ध्यान ही सब कुछ है।
सब कोई रूठ जाएगा
सब कुछ छूट जाएगा
तो जगा लो इस रात्रि
हाँ इसी महाशिवरात्रि
मिल लो उस शिव से
जो न रूठेगा
जो न छूटेगा
जो मेरा था…..जो मेरा है….और…जो मेरा ही रहेगा
तुम कुछ भी न करो
बस बैठे रहो उसके ध्यान में
मेरा वादा है
वो आएगा
वो आएगा
वो आएगा
ज़रूर आएगा

तुम बस बैठे रहो
महफिल का रंग बदल जाएगा
मेरा शिवशंभु जब भी आएगा
तेरा जीवन भी चम चमा जाएगा…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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स्वार्थ…..!!!!!

January 28, 2019
Shanky❤Salty
हैरान हो जाता हूँ
थोड़ा परेशान हो जाता हूँ
फिर समझ में आता है
जहाँ स्वार्थ की खेती होती है
वहाँ खुदा के रहमत की बरसात नहीं हो पाती है

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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अनकही बातें…..!!!

January 18, 2019
Shanky❤Salty

अपनी नाकामी छुपाते हो
हर बात को किस्मत का नाम देते हो
सच कहूँ तो
ये किस्मत-विस्मत कुछ नहीं होता
सब तुम्हारे कर्मों का ही नतीजा है
और रही बात किस्मत की तो
वो किसी चोर, डाकू या भूत ने नहीं लिखी है
बल्क़ि मेरे ईश्वर मेरे अल्लाह नें लिखी है…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal