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Faith……!!!!

Shanky❤Salty

The Flowers of Faith
Who Grew on the Tree of Love,
Broke Several Times in Anger,
Lost Between Leaves of Issues,
Trample Down Under Misunderstandings.
Still…
Don’t Know How??
Habitually a New Flower Every Time Bloomed…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Dr. Kavita Ma’am
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स्त्री-मन……!!!!

स्त्री-मन

Shanky❤Salty

पुस्तक स्त्री-मन की समीक्षा।

स्त्रीमन एक कविता संग्रह है, जो स्त्रीयों के विचारों को दर्शा रही है। इसमें सभी उम्र और वर्ग की औरतों की सोच को ध्यान में रखा गया है।

इस किताब की यह बात अच्छी है की इसमें औरतों की सभी तरह की भावनाओं को प्रस्तुत करने की कोशिश की गयी है जैसे चिंता, बंधन, प्रेम, दुखः, महत्वकांक्षा, जोश और समाजिक सोच का उनपर असर। कुछ कविताएँ तो ऐसी भी हैं जिनको पढ़ कर सब दृश्य
चलचित्र की तरह आंखों के सामने चलता अनुभव होता है। ऐसी कुछ कविताओं में मेरी पसंदीदा हैं- स्त्री-मन, वैश्या और बोझ। पर इस पुस्तक में मुझे सबसे अच्छी वो कुछ कविताएँ लगीं जो किसी भी महिला को जोश से भर देने के लिए काफी हैं, जैसे- तू चलती रह, नारी हूँ आज की हूँ, वो योधा है। इस पुस्तक में माँ और बच्चे के रिश्ते पर भी कुछ एक कविताएँ हैं। और बहुत सारी ऐसी कविताएँ भी हैं औरतों के घुटन और सामाजिक और पारिवारिक बंधन को दर्शा रहीं हैं जैसे- कभी बेचारी, रूह मेरी, चमकता आकाश, असमानता। कुछ कविताएँ प्रेम विरह पर भी हैं जिनमें मुझे सबसे अच्छी लगी- मैं अजीज नहीं।

मेरी तरफ से यह एक बेहद असाधारण एंव बेहतरीन कविता संग्रह है जो अपने पुस्तक शीर्षक को बहुत अच्छे तरीके से सार्थक करती है।

इसलिए मैं अपनी रेटिंग इस पुस्तक के लिए 5 star देना चाहूँगा।

उम्मीद है मेरी तरह बाकी पाठकों को भी यह किताब पसंद आयेंगी और मेरी यह समीक्षा उन्हें सही मार्गदर्शन देंगीं।

और सभी से अनुरोध भी करता हूँ कि किताब को एक बार जरूर पढ़ें।

किताब पढ़ने के लिए click here
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Niswarth Prem / निस्वार्थ प्रेम

August 16, 2021

First of all, I bow my gratitude to God, who has inspired me to write, I thanks to my mother “Pramila Sharan” and father “Shatrughan Sharan“. Because without his grace I would not exist.

I am grateful to those writers-readers and critic bloggers, who helped me in my writing.

I also thank Radha Agarwal Ji and Nidhi Gupta “Jiddy”. I would like to thank those who helped me and did proof reading of it and made my words beautiful.

The help that Sachin Gururani did in making the cover page of my book I thanks them wholeheartedly.

Apart from this to all those who have helped me directly or indirectly.

This book is a Journey of Old Age Home to Orphanage Home in a poetic manner.

This book is written for the mature reader. It’s purpose is not to hurt anyone’s feelings. It is written in the favor of every person, society, gender, creed, nation or religion. These are the author’s own views. Hope that by reading this book, you will try to understand and appreciate the author’s point of view. It is merely an attempt to portray social reality. The aim of the book is to promote peace, non-violence, tolerance, friendship, unity, prosperity, happiness and integrity.

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आजादी…..!!!!

August 15, 2021

Shanky❤Salty

देश आजाद हुए तो सदियाँ बीत गयीं
पर क्या हम आजाद हो पाए हैं?

हाँ
हम की बात कर रहा हूँ मैं
हमें ये मिले तो हमें खुशी होगी
हमें वो मिले तो हमारा दुख मिट जाएगा

हमारी खुशियां तो उस चीज-वस्तु मैं कैद हैं

फिर भी हम स्वयं को आजाद कहते है ना?
कितने ही जन्म ले कर हम मिट गए
फिर भी सुख के पीछे हम भाग रहे हैं

और दुख हमारे पीछे भाग रहा है
ज़रा दो वक्त ठहर के तो देखो

मेरी बातें मान के देखो न
अपने आप को पहचान के देखो न

सीमित दायरे में स्वयं को ना बाँधों
एक दफा मुक्त कर के तो देखो
जो कभी बँधा नहीं है
उसे तुम चीज-वस्तु, राग-द्वेष, भय-क्रोध में बाँध रहे हो

जरा भीतर तो देखो
तुम्हें स्वयं कि आजादी का पता चल जाएगा

कुछ ज्यादा बोल गया ना मैं, खैर छोड़ों

देश के स्वंत्रता दिवस की आपको हार्दिक बधाई🎉🎊

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बिन बुलाए…….!!!!

July 20, 2021

Shanky❤Salty
बिन बुलाए आ ही जाती है वो
हमें पता नहीं उसके वक्त का
पर पता है उसे सही वक्त का
हजारों मिन्नतें कर लो
लाख जतन कर लो
वो आएगी
ना समेटने का वक्त देगी
ना पुछने का वक्त देगी
बस कर्मों का हिसाब देगी
क्यों ना तु धन लाख कमाया है
सुना है देश-विदेश का वैद्य तु बुलाया है
पर हकीकत में कुछ भी काम ना आया है
जब दरवाजे पर दस्तक उसका आया है
हाँ वही
सही समझे
मौत

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My All Books…..!!!!

July 11, 2021

Shanky❤Salty

1. Yaado K Panno Se: कुछ बाते कुछ किस्से मेरे यादों के पन्नों से

In this book I have written about some of my experiences. Some, such feelings have been written which are completely empty. Some past has also been written, some society’s character and face too. This is a hindi poetry book.

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2. Read Then Think: It’s not only a Book but it’s my Feeling

This is an English motivational quotes collection book. In this book I have written only as much as I have lived life and embraced death. That too by smiling and drinking the poison of pain.

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3. Unmanned Ground Vehicle Using a GSM Network

This book presents a Global System for
Mobile Telecommunication (GSM) network based system which can be used to remotely send streams of 4 bit data for control of USVs. Furthermore, this book describes the usage of the Dual Tone Multi-Frequency (DTMF) function of the phone, and builds a microcontroller based circuit to control the vehicle to demonstrate wireless data communication.

Paperback || Amazon Kindle

4. Sach Ya Sajish ? / सच या साजिश ?: संस्कृती पर प्रहार

This Hindi book is written for the mature reader. It’s purpose is not to hurt anyone’s feelings. Neither is it in favor or opposition of any person, society, gender, creed, nation or religion. These are the author’s own views. Hope that by reading this book, you will try to understand and appreciate the author’s point of view. It is merely an attempt to portray social reality. The aim of the book is to promote peace, non-violence, tolerance, friendship, unity, prosperity, happiness and integrity.

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5. Truth or Conspiracy: Untold Story by Indian Media

This book is a translation of Sach Ya Sajish? Book. In this book you may read about many untold story by Indian Media & what conspiracy is being hatched against Indian culture.

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6. Kaun Hai Ram / कौन हैं राम

Whenever you will read this book, you will feel a divine power.
Yes, the divinity and power of Lord Rama.
Your Soul will rejoice. You will feel energetic and enthusiastic. Your heart will be filled with extreme pleasure. There’s a possibility that you may shed tears. I am confident that you will have a serene experience, an experience indescribable in words.
Let’s see what is your experience.

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Request you, read this book & give your valuable review or feedback.
The eBooks of all the books are available at a minimum price. But If you think their price is high or if you want a free ebook copy of these book, please message me here. I’ll send you.

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क्यों इस्तेमाल करते हैं?

July 4, 2021

Shanky❤Salty
आँखें हमारी है
तो इसे हम
दुसरों की बुराई देखने के लिए
क्यों इस्तेमाल करते हैं?

जुबान हमारी है
तो इसे हम
दुसरों की चुगली करने के लिए
क्यों इस्तेमाल करते हैं?

कान हमारा है
तो इसे हम
दुसरों की निंदा करने के लिए
क्यों इस्तेमाल करते हैं?

दिमाग हमारा है
तो इसे हम
दुसरों का अहित करने के लिए
क्यों इस्तेमाल करते हैं?

ये जो अपने शरीर को तुम अपना मान बैठे हो ना
उसे तुम अपने स्वयं के लिए,
अपने राष्ट्र हित के लिए,
अपने समाज हित के लिए
क्यों नहीं इस्तेमाल करते हो?

कहा था कबीरा ने
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय

वक्त है संभल जाओ, नहीं तो अंत में रोना ही पड़ेगा

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Ziddy Nidhi

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भूख…..!!!!!

June 30, 2021

Shanky❤Salty

गरीब है जनाब
पेट के भूख की कीमत जानते हैं

इसलिए तो
रोटी के टुकड़े कर सब में बाँटते हैं

क्योंकि सुना है हमने
पेट भरते ही
इंसान अपनी औकात भूल जाते हैं


Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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नहीं मैं रहा…..नहीं तु रहा…..!!!!

June 24, 2021

Shanky❤Salty

कबीर दास या कबीर खान
हिंदू बोलो या मुसलमान

जात ना पूछो मेरे मालिक की जनाब
बस कबीर को जान लीजिए ना
फिर ना ही मैं रहा, ना ही तू रहा
का आत्मा दीप भीतर जलते देख लीजिए ना

वो कहते हैं ना
कोई नहीं है अपना
ये जग है तो एक सपना
जो भी जीवन में आएगा
कुछ-न-कुछ हुनर सिखा ही जाएगा
बस फर्क इतना है
कि हम क्या उनसे सीख जाएंगे
यक़ीनन ज़िंदगी है
तो चलना है बढ़ना है
पर भीड़ को लेकर
या भीड़ में रह कर
अपने आप का साक्षात्कार कर
ये फैसला हमको करना है।

चलती चाकी देखकर सो कबीरा दिया रोय
दुइ पाटन के बीच में आके साबुत बचा ना कोय

चलती चक्की देख के, हँसा कमाल ठठाय।
कीले से जो लग रहा, ताहि काल न खाय

ये दो दोहे है, एक कबीर के तो दुजे कमाल के। ज़िंदगी कि वास्तविकता है इन दोहे में अपनी आत्मचेतना को जगाने के लिए। इस कबीर जंयती पर मैं क्या श्रद्धांजलि अर्पित करूँ उन्हें। उनके दोहे और उनके विचारों से मैं तो उन्हें भावंजलि ही अर्पित कर सकता हूँ।


Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Dr. Sakshi Pal

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यात्रा…..वो भी अंतिम……!!!!

June 17, 2021

Shanky❤Salty

सही समझे
मृत्यु
हाँ मैं मृत्यु के बारे में ही लिख रहा हूँ
वो मृत्यु जो मुझे मार नहीं सकती है
पर हाँ आपको ज़रूर मार सकती है
ग़र आप स्वयं को जीवन समझते हैं तो
मृत्यु उसे ही स्वीकारता है
जो जन्म को स्वीकारता है

ना तो मेरा जन्म हुआ है
ना ही मेरी मृत्यु हो सकती है
ये शरीर का जन्म होता है
तो मृत्यु भी उसी की हो सकती है
हमारी नहीं, कभी नहीं

स्वयं नाथ जी भी हमें नहीं मार सकते हैं
यक़ीनन वो सर्वसमर्थ हैं
पर हमें मारने में कभी भी नहीं
अपनी उर्जा को पहचानों
वो कहते हैं ना अज्ञानता का जीवन किसी मृत्यु से कम नहीं है

महेंदी के पत्ते में ही उसकी लाली छिपी होती है
एक बीज में ही जन्म और मृत्यु छिपा है
मृत्यु एक वस्त्र बदलने की प्रक्रिया है
बस और कुछ नहीं

अर्थ स्पष्ट है मेरे शीर्षक का
इस जीवन की यात्रा
अंतिम होनी चाहिए
कोई कितना भी बुलाए
लौट के नहीं आना है
यह जीवन अनमोल है
व्यर्थ ना गवाओ

मोक्ष की उस स्थिति को जान लो
मर्जी तुम्हारी है
सुख-दुख कि चक्की में पिसना है
या उस चक्की के कील से लग कर
और अपनी यात्रा को अंतिम करना है

अब अलविदा कहता हूँ
कुछ पल के लिए
जो इस आत्मज्ञान से निकला वो तो डूब गया
और जो इस आत्मज्ञान में डूबा वो तो हो गया पार…!!


Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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ओ मेरे यारा…..!!!!

May 21, 2021

Shanky❤Salty

तुझे देखने के लिये ही
मंदिरों में भीड़ लगती है
हमनें तो तुझे
हृदय मंदिर में ही देख लिया है ।

तुझे पाने के लिए लोग काबा गये
हमनें तो तुझे इंसानों में ही देख लिया है ।

कहाँ खोजूं मैं तुझे कहाँ तू नहीं है
वो ज़गह ही नहीं है जहाँ तू नहीं है

खाने वाला भी तू खिलाने वाला भी तू
बरसाने वाला भी तू भीगनें वाला भी तू

सुनने वाला भी तू सुनाने वाला भी तू
जीवन देने वाला भी तू लेने वाला भी तू

ओ सुनने वाले ज़रा मुझ पर यूँ रहम अदा फ़रमा दो
इस काया को मिट्टी में मिला कर मुझे खुद में मिला दो…!!

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जिंदगी रेलगाड़ी सी…..!!!!

May 18, 2021

Shanky❤Salty

ये जिंदगी
कुछ रेलगाड़ी सी हो गई है
कि तुम अभी कुछ वक्त -साल
अपनी ही सीट पर बैठे रहो,

तुम बाहर तो देखो
पर तुम बाहर मत निकलो
क्योंकि बाहर करोना जो है,
तुम खाओ, सो, उठो
और फिर खा कर फिर से सो जाओ,

बस जिंदगी रेलगाड़ी सी हो गई है
सब बैठें हैं अपनी-अपनी सीटों पे,
पर एक दुजे से अनजान हैं,


तुम इंतज़ार करो रेल रूकने का
वरना चार जन भी नहीं मिलेंगे
तुम्हारे जनाजे को उठाने के लिए,


बिलख-बिलख रोएगी तुम्हारी जोड़ी
पर जंगल की लकड़ी भी नसीब नहीं होगी
तुम्हें पंच तत्व में विलीन करने को,


तुम घबराओ नहीं
जल्द ही रुक जाएगी ये रेलगाड़ी
ग़र सब्र के साथ तुम बैठोगे अपनी सीटों पे
हाँ टिकट लेना ना भुलना
राम नाम का
नहीं तो कटने में देर ना लगेगी

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गाँठ…….!!!!!

Shanky❤Salty

May 10, 2021

Shanky❤Salty

गाँठ
चाहे मन में हो
या तन में हो

हकीकत में वो जीने नहीं देते हैं
वक्त है खोल दो गांठ
और खुल कर जी लो

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डूबना……!!!!

May 8, 2021

कोई नहीं चाहता

डूबना

पर ध्यान से जो निकला
वो डूब गया

और जो डूबा
वो सब कुछ पा गया…!!

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ओ राम…….!!!!!

April 18, 2021

Shanky❤Salty

मुस्कुराने की कला सिखाते है राम
ग़म का ज़हर पीना सिखाते है राम
भूत और भविष्य कि गोद त्यागना सिखाते है राम
वर्तमान में बैठना सिखाते हैं राम
काया-माया छोड़ना सिखाते हैं राम

राम होकर राम में जीना सिखाते हैं राम
स्वाद ज़िन्दगी का चखना सिखाते हैं राम

सुनो ना राम
लिखूँ मैं कैसे तुझपे राम
समझते क्यूँ नहीं हो तुम राम
कैसे लिख दूँ मैं तुझपे राम

तुझ तक मेरी बुद्धि नहीं पहुँच पाएगी राम
वहां तक शब्द मैं कैसे पहुँचाऊ राम
तुम तो अबाधित हो मेरे राम
शब्दों से कैसे बाँधू मैं तुझको राम

ध्यान में लीन हैं मेरे राम
भूखा नहीं है प्यासा नहीं है मेरा राम
तृप्त है मेरा राम
क्या अर्पण करूँ मैं तुझको राम

कोई धाम नहीं है बिना तेरे मेरे राम
हर एक के अंतःकरण में बसता है मेरा राम
सौगंध तेरी खाता हूँ मैं राम
भर भर प्याला पीता हूँ नाम तेरा मेरे मैं राम

सच कहता हूँ ज़िन्दगी सुधरता है मेरा ओ प्यारे राम
पता नहीं ओ मेरे प्यारे राम
क्यों आँखों से पानी छलकता है राम
जब जब जिक़्र होता तेरा है राम
पावन सा तेरा है नाम राम

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कुछ तो बात है……!!!!

April 15, 2021
Shanky❤Salty

कुछ तो बात है
श्मशानों में इतनी भीड़ क्यों है?
जंगल की लकड़ियाँ क्यों कम पड़ रहीं हैं?

कुछ तो बात है
प्रकृति का ऐसा ही वास्तविक रूप है?
या फिर यह हमारे कर्मों का फलस्वरूप है?

कुछ तो बात है
कहीं पर चुनाव जीतने की होड़ है
तो कहीं पर ज़िंदगी हार रही है

कुछ तो बात है
एक वक्त था जब मन में फासलें थे
अब तो हकीकत में भी फासलें हो गयें हैं

कुछ तो बात है
धन हमनें लाखों – करोड़ों में कमाया
पर हमनें मन से छल – क्रोध को छोड़ नहीं पाया

कुछ तो बात है
खाने को दो रोटी नहीं है
पर अल्लाह के लिए बकरी तैयार रखें हैं

कुछ तो बात है
कुंभ के गंगा में भीड़ तो है
पर ज्ञान की गंगा खाली ही है

कुछ तो बात है
कितनी भयावह परिस्थिति है
कि चार जन भी नहीं मिल रहें
अपने को कंधा देने की खातिर

कुछ तो बात है
जंगल की लकड़ियाँ कम पड़ रहीं हैं
यह रौद्र रूप नहीं है प्रकृति का
है यह केवल चेतावनी
पिछले वर्ष कोरोना करूणा में थी
अबको-रोना ही है
वक्त है संभल जाओ
वरना इससे भी भयावह स्थिति
उतपन्न हो सकती है
खै़र
कुछ तो बात है…….!!!!!!

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Review by Nidhi Gupta……!!!!

April 09, 2021
Shanky❤Salty

इस किताब में हमारे आराध्य रामजी के विषय में विस्तृत रूप से बताया गया है, यह एक कवि और उसके आराध्य के बीच का वार्तालाप है, इसमें कवि का कोमल ह्रदय छलकता है, वह अपने राम जी को हर जगह हर वक़्त पाता है, उसे अपनी मृत्यु की भी चिंता नहीं है क्योंकि वह राम राम करते हुए ही मरना चाहता है, कवि का विश्वास है की राम राम करने से चौरासी योनि का जो चक्र है वह टूट जायेगा और उसे मोक्ष प्राप्त हो जायेगा, कवि ने अपने इस किताब में अपने आराध्य रामजी और खुद को दोस्ताने रिश्ते को भी बतलाया है और एक दास के रिश्ते को भी बताया है। इस किताब को पढ़ने के बाद हमे राम जी के संम्पूर्ण जीवन का ज्ञान हो जाता है, कवि राम मंदिर के कारण हुए राजनीति और दंगा फसाद के कारण बहुत दुखी है, वह राम मंदिर के नाम पर राजनीति करने वाले से बहुत नाराज है। कवि अपने मन की हर एक बात जो वह अपने राम जी से कहना चाहता है उसने अपने इस किताब में खुल कर लिखा है, आप इसे एक संवाद के रूप में जब पढेगें तब आपको यह समझ में आ जायेगा की कवि कितना मासूम है, वह अपनी हर एक बात अपने आराध्य रामजी से कैसे कहता है। कुछ पंक्तियाँ कवि ने कुछ इस तरह से लिखीं हैं जो बहुत ही गहरी हैं। आप सभी को यह किताब अवश्य पढ़ना चाहिए ताकि आपको रामजी के विषय में और भी जानकारी हो।

Book review by Ziddy Nidhi
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Book Review……!!!!!

April 04, 2021
Shanky❤Salty
Harina Pandya has given review of my book “सच या साजिश
👇
I will recommend this book to know about our culture and civilisation..it is not just about one or two concepts..it covers each and every aspect about our saints, religion, society in today’s era, history, lifestyle and much more..book provides detail information about our sanskriti amazingly.
To read my book click here
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वो खड़ी थी…….!!!!

March 19, 2021
Shanky❤Salty
मृत्यु दरवाजे पर आ खड़ी थी राम
पूछा उसने मुझसे राम
क्या किया तुने जीवन में राम
हैरान परेशान हो गया मैं राम
सोने में रात बिता दी थी मैंने राम
खाने में दिन भी गुजार दिया था राम
तेरे नाम का हिसाब दे नहीं पाया मैं राम
फ़िर क्या राम
खोल मुट्ठी मेरी उसने दी राम
चौरासी के चक्कर में उसने धकेल मुझको दिया राम
जीवन मेरा मैंने यूँ हीं गवां दिया राम
सोने का कटोरा रख कर मैंने राम
भीख ही माँगी राम
घाट श्मशान का हो राम
या मणिकर्णिका घाट हो राम
हिसाब तो होगा ही राम
चिड़िया भले ही चुग खेत क्यों ना गई राम
नुकसान तो मेरा ही होगा राम
निंदा करता रहा मैं राम
मुझसे बड़ा निंदक मिला नहीं मुझको राम…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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Truth Or Conspiracy……!!!!

February 24, 2021
Shanky ❤Salty

My fifth book has been published on February 16, 2021. I have written some of my experiences in this book. And some such untold story by our Indian media or paid media or fabricated media. This book is written for the mature reader. Its purpose is not to hurt anyone’s feelings. Neither is it in favor or opposition to any person, society, gender, creed, nation or religion. These are my own views.

In this book you read about:-

  • Some Cultures Of The World
  • Culture Of India
  • Indian Saint

  • What Is The Purpose Of The Saint?
  • Gautam Buddha
  • False Accusations On Gautam Buddha
  • Jayendra Saraswati Shankaracharya
  • False Accusations On Jayendra Saraswati Shankaracharya
  • Asaram Bapu
  • Parliament Of World Religion
  • Scientific Conclusion Of Asaram Bapu Aura
  • Women Empowerment
  • Divine Baby Rites
  • Stop Abortion Campaign
  • Cesarean Delivery
  • Spiritual Awakening Campaign
  • Prisoner Uplift Program
  • Vrinda Expedition
  • Tribal Welfare
  • Gurukul
  • Valentine’s Day
  • Protection Of Cows From Slaughterhouses
  • The Main Reason Why Asaram Was Targeted
  • False Accusations On Revered Bapuji
  • What Are People Saying
  • Attack On Hinduism

I offer my gratitude to God. Those who inspired my writing. I thank you to my mother Pramila Sharan. Without her blessings, the existence of this book was difficult. I’m grateful to the writers, readers & critic bloggers who helped to make my writing the best. I would also like to thank you to Radha Agarwal, who helped me and did a proof reader. I thank to Rekha Rani ma’am for helping me in this book. Who raised the respect of my creation with their thoughts. Also, my heartfelt thanks to those who helped to write this book.
Hope that by reading this book, you will try to understand and appreciate my point of view. And give your feedback.
My book is available on Amazon & Notionpress

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सिखा दो न…..!!!!

February 21, 2021
Shanky❤Salty
ग़म के आँसू भी तो हला-हल कि तरह है ना शिव जी
आप हमें भी पीना सिखा दो न शिव जी
हर परिस्थिति में हमें भी मुस्कुराना सिखा दो न शिव जी…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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अयोध्या वासियों से अनुरोध…….!!!!

February 10, 2021
Shanky ❤Salty
बड़ा व्याकुल है मन हमारा
कभी सम्मान ना मिला
हमारी माँ सीता जो को
आपकी अयोध्या जी में
ब्याह कर के आईं थीं हमारे राम जी से
षड्यंत्रों का शिकार हो वनवास को गई हमारी माँ
अग्नि परीक्षा तक देना पड़ा हमारी माँ को
फ़िर भी चैन ना मिला आपके अयोध्या वासियों को
क्या से क्या कह गए हमारे राम जी को
त्याग सीता को प्रजा का सम्मान रखा राजा रामचंद्र जी ने
है विनती मेरी आपके मोदी जी से
बनवावें रामलला का भव्य मंदिर
पर वो सम्मान लौटावे जो प्रेम किया था हमारे राम जी ने हमारी माँ सीता जी से…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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मेला है या खेला है……!!!!

January 18, 2020
Shanky❤Salty
सबको नंगा आना है
पावन गंगा के तट पर ही जाना है
वो चले गए हैं
मुझे जाना बाकी है
कुछ को अभी आना बाकी है
सच कहूँ तो
दो दिन का मेला है
ज़िंदगी का यही खेला है
बाँध मुठ्ठी आना है
कमा-कमा कर झोली भरना है
खोल मुठ्ठी तो सबको जाना है
जो कुछ भी खोया या पाया है
सब कुछ ही तो कर्मों का खेला है
सबको तू अपना मान बैठा है
पर चिता पर लेटना अकेला है
यारा कहा था ना
दो दिन का मेला है
ज़िंदगी का यही खेला है…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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हाथों में पतंग लेकर…….!!!!

January 14, 2021
Shanky❤Salty
खुशियाँ किसी चीज या वस्तु की मोहताज़ नहीं होती
खुशियों को तो बस बहाना चाहिए
हाथों में पतंग लेकर
आसमान को छूना है
हर ख़्वाब को एक दिन पूरा करना है
ज़िन्दगी कि डोर में प्यार का माँझा हम चढ़ाएँगे
ईर्ष्या की पतंग को काट हम गिराएगें
तिल गुड़ खा कर हर रिश्ते से कड़वाहट हम मिटाएंगे…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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सीख लो……!!!!

January 04, 2021
Shanky❤Salty
ज़िन्दगी जीने की कला सीख लो
मुस्कुरा कर ग़म का ज़हर पीना सीख लो
भूत और भविष्य कि गोद छोड़ वर्तमान में बैठना सीख लो
ज़िस्म को छोड़ रूह में जीना सीख लो
हर हाल में तुम ज़िन्दगी का स्वाद चखना सीख लो…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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ख़ुद ही खुदा…….!!!!

December 02, 2020
Shanky❤Salty
ख़ुदा का काम करते फिरते हो
लगता है इसलिए
दूसरों के कर्मों का
तुम हिसाब लिखते फिरते हो
जरा मेहरबान होकर के
ख़ुद के कर्मों का
भी ग़र तुम हिसाब कर लेते
तो तुम ख़ुद ही खुदा के रूप में पूजे जाते…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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अर्थहीन सी दुनिया…..!!!!

November 26, 2020
Shanky❤Salty
अर्थहीन दुनिया लगती है
ज़िन्दगी भी अब मुझको व्यर्थ सी लगती है
ख़ुद का अस्तित्व ढूंढनें में मुझको असमर्थता सी महसूस होती है
मेरी हर कोशिश ना जाने क्यों व्यर्थ सी होती है
हर पल लोग खफ़ा हो जाते हैं
हर ज़गह हम असफल हो जाते हैं
आँखे बंद करते हीं आँखों से आँसू बह जाते हैं
एक-दूजे से इंसान जलता ही जाता है
मुट्ठी में रेत की तरह समय बीतता जाता है
व्यर्थ की चिंता कर मनुष्य एक दिन अर्थी पर लेट ही जाता है

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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Break…..!!!!

August 16, 2020
Shanky❤Salty
ज़िंदगी का दरवाजा
अब मैं कुछ पल के लिए बंद करता हूँ
रिश्तों की उलझन से अब खुद को दूर करता हूँ
न वक्त बुरा है
न है लोग बुरे
हूं मैं वफा खुद से
और हूँ खफा भी खुद से
जब साथ ही न हो शरीर
और दिमाग खुद का
तो क्यों है उठाना उँगलियाँ किसी पर
न कोई बात है
और न ही कोई साथ है
बस मुझको बहुत कुछ याद है
और अब उन यादों के सहारे
खामोशी के गोद में कुछ पल के लिए
मौन हो कर लेटना है

Hello everyone, hope you all are very well. But I’m not.
I’ve decided to take a break from blogging and posting. I don’t know this break is long or short. But it’s not leaving forever.
I request you to everyone please drop your post link in my instagram or mail. Because you all are incredible. I don’t want to miss anyone post. So, please understand.
©Ashish Kumar
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युद्ध……!!!!

July 29, 2020
Shanky❤Salty
सिखा दिया है, ज़िंदगी नें मुझे
फिर से की…. कि
युद्ध जरूरी है, परन्तु अन्य से नहीं
बल्कि स्वयं से ही जरूरी है युद्ध
ज़िंदगी मुस्कुराने लगेगी
गर तुमनें कर लिया स्वयं से युद्ध तो,
तुम विजई रहो अथवा पराजित रहो इस स्वयं के युध्द में
किन्तु इतना तय है की तुम्हें वह सूकुन मिलेगा
जिसकी तुम्हें आवश्यकता है
जिसकी तुम्हें चाह है और जिसकी तुम्हें जरूरत है

Originally written by Ziddy Nidhi
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बताओ न मुझको…..!!!!

July 19, 2020
Shanky❤Salty
शीशे में ख़ुद को
निहारते हो
माना की बहुत ही बेहतरीन दिखते हो
पर क्यूँ ज़माने के सामने
मुखौटा लगाए फिरते हो…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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क्या है तु…..!!!!

July 16, 2020
Shanky❤Salty
ओए दोस्त सुन न,
प्यार, इश्क, मोहब्बत की तो बात होती है
पर जहां तु होता है न
वहां तो इन सब की बरसात होती है
मेरी खामोशी को तुम हर सुन ही लेते हो
चुप रहकर भी बहुत कुछ बोल देते हो
जब खुद को मैं अकेला छोड़ देता हूँ
तब तुम ही तो पीछे से आकर हाथ थाम लेते हो
वो चोंगे कि तरह तुम्हारा चिल्लाना
मेरा पैर पकड़ बिस्तर से गिरा देना
बाईक पर पीछे बैठा मुझे हर जगह ले जाना
परीक्षा के दिनों में बिना पढ़ें ही पास हो जाना
और अब इन सब बातों को याद कर
आँखों से आँसुओं का छलक जाना
मुझको तो पता नहीं क्या है ये
दोस्ती कहते है कुछ लोग इसे
तो कुछ लोग भाई कहते है इसे
पर हकीकत में मुझे अभी तक पता नहीं
जो भी है इन सबसे अलग
है जी कुछ खास है
मेरे ही दिल के पास है
जो अनसुलछी सी है मेरी ज़िंदगी
उसे तु पल भर में सुलझाए
हर किसी से मैंने रिश्ता बनाया है
वक्त-बे-वक्त मैंने उसमें दाग पाया है
एक तु ही है जिससे मैंनें न तो कोई रिश्ता बनाया है
न ही अभी तक क़तरा सा भी दाग पाया है
हर कोई जमाने की बात करता है
पीठ पीछे फसाने की बात करता है
तु तो ज़िंदगी कि बात करता है
हर पल निभा कर ही बात करता है
मैं चल न सका तो तु
मेरे एक बुलावे पे तु दौड़ा चला आया
गोद में ले सीढ़ियाँ चढ़ मुझे कमरे तक पहुँचाया
अब यह सुन तुम ये मत कहना कि
क्या भाई तु भी न
बता तु ही मुझको
क्या मैं भुल जाऊँ इन सब पल को
या दे दूं तुम्हें तुम्हारे जन्मदिन की हार्दिक बधाई

ह्रदय ये प्रणाम है उस माँ को जिसने तुझको जन्म है दिया।
है प्रणाम उस पिता को जिसने पालन है तेरा किया।
है धन्यवाद उसे नाथ को
अरे हाँ जी भोलेनाथ को
जिसनें मेरी ज़िंदगी में तुझको दिया

Written by:- Ashish Kumar
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ज़िंदगी के रंग…..!!!!!

July 10, 2020

Shanky❤Salty

कभी ज़ेहन में ख्याल आता था लिखना बहुत आसान है। बस चाहिये काग़ज़, क़लम, एक दिल, दिमाग़ और कुछ लफ़्ज़, बस लिखने का सिलसिला चल निकलता है। लेकिन जब लेखनी हाथों में लिया, तब समझ आया लफ़्ज़ों, नज़्मों, कविताओं के खेल निराले होते हैं। तूलिका पकड़, कल्पना के सहारे ज़िंदगी के सच्चे रंग नहीं उकेरे जा सकते। ऐसे रंग कभी बहुत गहरे, कभी हल्के और कभी बदरंग हो जातें हैं।
लिखने के लिये चाहिये जिंदगी के सच्चे सबक, सच्ची सीख, चोटें, अनुभव और उनसे निचोड़े लफ्ज़। इनसे बनती हैं सच्ची कविताएँ और नज़्म। सच है, दिल से निकली बातें हीं दिल तक जाती हैं। बहते पानी सी अनवरत चलती ज़िदगीं ने बहुत रंग दिखाये। जीवन में उतार-चढ़ाव और ठहराव दिखाये। ख़ुद आईना बनने की कोशिश में इन सब को शब्दों और लफ़्जों का जामा….लिबास पहना कविता का रुप दे दिया। ज़िंदगी को इन कविताओं में ढालने की यह कोशिश कैसी लगी? क्या ये कवितायें आपके दिल को छूती हैं? पढ़ कर देखिये न रेखा आंटी की किताब को।

Title: Zindagi Ke Rang
Product ID: 197911-1336776-NA-NED-T0-NIKI-REG-IND-DIY
ISBN: 9781649511652
Format: Paperback
Date of Publication: 06-07-2020
Year: 2020

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मेरे ह्रदयेश्वर…..!!!!

July 8, 2020
Shanky❤Salty
सुनो ना नाथ जी
कहते हैं मुझको ये लोग
लिखुं मैं तुझपे
समझते क्युं नहीं है मुझको ये लोग
कैसे लिख दूं मैं उनपे
जिन तक बुद्धि नहीं पहुँच सकती
वहां तक मैं शब्द कैसे पहुँचाऊं
जो अबाधित है हर चीज से
उन्हें मैं शब्दों से कैसे बाँध सकता हूँ
जो ध्यान में लीन हैं
उन्हें मैं कैसे ज्ञान में ला सकता हूँ
जिन्हें न भूख है न प्यास है
उन्हें मैं कैसे कुछ भी अर्पण कर सकता हूँ
जिनका न कोई नाम है न कोई धाम है
उन्हें मैं कैसे जान सकता हूँ
देखा है मैंने
भाँग पीने से
नशा चढ़ता है
ठीक उसी प्रकार
तेरा नाम मेरे अंतः में बसता है
पर तेरी सौगंध खा कहता हूँ मैं
भोले बाबा के नाम से ही सारी ज़िंदगी सुधरता है
पता नहीं मेरे ह्रदयेश्वर
तुने मुझको क्या पिलाया है
तेरे नाम के जिक्र से ही
मेरी आँखों से पानी छलकता है
है पावन ये सावन मेरे प्रभु
कहते है लोग मुझको ना जाने क्यों
सुनों जाओ बाबा के मंदिर तुम
पर कैसे बतलाऊं मैं उनको यह
कि तुम मन कि चौखट पर आ बैठते हो
होती है तकलीफ जमाने को
चढता है जब तुझपे दूध तो
कर मन मंदिर में अभिषेक तुम्हारा
हम धारा अश्रुओं से
हो जाते हैं पल-दो-पल के लिए मौन,
ओ मेरे देवा
सुनो ना,
हाँ हाँ महादेवा
अब खुश हो न
जरा बतलाओ ना उनको
ना तो जन्म उसका ना ही मरण है उसका
फिर यह आशीष शरणागत है उसका

A topic suggested by
Priyanshi Dubey, Golden Moon
And a few more.
Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Dr. Sakshi Pal
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कोरोना संक्रमण…….!!!!

June 25, 2020
Shanky❤Salty
ये जो फैली है हवा में जहर
खत्म हो ही जाएगा
एक-न-एक दिन
लेकिन मन में जो फैली है जहर
हम सबके
वो कब खत्म होगा?

Published by Anonymous on behalf of Shanky_Salty
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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Read Then Think…..!!!

June 9, 2020
Shanky❤Salty
Writing a book is harder than I thought and more rewarding than I could have ever imagined. None of this would have been possible without our society, who gave me multiple (multi-coloured) experiences of life. I’m eternally grateful to Mr. Sachin Gururani my friend-cum- brother who has designed the beautiful cover of the book and my parents as well, who encouraged me during the entire journey of my writing. Special thanks to Dr. Sakshi Pal and friends who suggested me to write a book and helped me in finalizing it within a limited time frame. Writing a book about the reality of life is a surreal process. I’m forever indebted to my incredible readers as this has become possible because of their efforts and encouragement. Finally, thanks to all those who have been a part of this beautiful journey.
I have written some of my experiences in this book. And some such feelings which are completely blank. Some letters have been written, also some have the character and the face of the society. I have written the life just as much as I have lived and have embraced death.
This book is dedicate To my friend-cum-boss Heena Chugh 99% motivation & 99% patience. No, it does not add upto 198% but she multitasks.
To read this book click here
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समझा दो न मुझको…..!!!!

June 4, 2020
Shanky❤Salty
हमें गिरना तो पसंद नहीं है
पर दूसरों को गिरा कर
खुद उठने में मजा बहुत आता है
पर एक बात समझ नहीं आती मुझे कि
फिर हमें गर्व किस बात पर होता है?

Published by Anonymous on behalf of Shanky_Salty
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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अफसाने तेरे पन्नों में…..!!!!

May 31, 2020
Shanky❤Salty
एक खुश-खबरी आप सभी के साथा साझा करना चाहता हूँ।
अफसाना तेरे पन्नों मेंमधुसूदन सिंह का पहला काव्य-संग्रह है। इस संग्रह में गीत एवं कविता का शानदार मिश्रण है।
“मधुसूदन सिंह के कविताओं एवं गीतों में भावनाओं एवं कल्पनाओं का अद्भुत प्रवाह है। जिसे पढ़कर ऐसा लगेगा जैसे उन पन्नो में दर्ज अफसाने अपने ही हैं।
मधुसूदन सिंह का जन्म 17 जनवरी 1973 को नाना के घर गाँव खुदरांव जिला रोहतास में हुआ था। उनका बचपन ननिहाल में ही गुजरा। उनका पैतृक गाँव डिहरी जो कि बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित है। उनके पिता श्री सुरेंद्र सिंह किसान एवं उनकी माता श्रीमती रेवती देवी गृहिणी हैं। वे चार भाई, बहनों में दूसरी संतान हैं। मधुसूदन सिंह की पत्नी का नाम नीलम सिंह है।
मधुसूदन सिंह अपनी प्रारम्भिक शिक्षा नाना जी के यहाँ प्राप्त करने के पश्चात सीता उच्च विद्यालय हरिहरगंज पलामू,झारखंड से दसवीं तथा मगध यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। चुकि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं होने के कारण शुरुआती दिनों में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जिसके कारण वे स्नातक की उपाधि हासिल करने के तुरन्त बाद पाँच वर्षों तक परिवार से दूर रोजगार की तलाश में दिल्ली में भटकते रहे और एक संस्थान में नौकरी करते हुए सम्पूर्ण उत्तर भारत का दौरा किया। वर्तमान में वे राँची स्थित एक निजी संस्थान में कार्यरत हैं। वे बचपन से ही नाट्यमंच से जुड़े रहे मगर जीवन की आपाधापी में वे साहित्य से दूर हो गए। कहते हैं जिसके नस नस में साहित्य समाया हो भला वह कबतक अपने आप को लेखनी से दूर रख पाता है। आखिरकार वे सन 2017 में वर्डप्रेस से जुड़े और वे आज करीब 500 सौ से ऊपर कविताएँ लिख चुके हैं। और आज उनकी पहली काव्य संग्रह ‘अफसाने तेरे पन्नों में’ प्रकाशित हुई है।

Title: Afsane Tere Panno Mei
Product ID: 195201-1335597-NA-NED-T0-NIKI-REG-IND-DIY
ISBN: 9781648995057
Format: Paperback
Date of Publication: 30-05-2020
Year: 2020
Page: 94
Price: ₹120

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कुछ ऐसा है……!!!!!

May 14, 2020
Shanky❤Salty
ओए पागल…..!!!!
सुनो न,
हाल-ए-दिल का समंदर अभी सूखा नहीं है
आँखों से पानी अभी बहा नहीं है
सुना है मैंने
हैरान हो जाते हो
मुझे चुप देखकर
मुझे हारता देखकर
समझाऊं तुझको कैसे मैं
अंदाज ही मेरा कुछ
ऐसा है

Published by Anonymous on behalf of Shanky_Salty
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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तो तुम मुझे याद रखना…..!!!!

April 6, 2020
Shanky❤Salty

Hi everyone! I’m so excited about this post!! Today I am doing a collab with my amazing friend Dr. Sakshi Pal.

बात तुम कहती हो याद रखने की
मैं चाहता हूँ तुझको साथ रखने की
सपनों की मंदाकिनी में जगमगाते रहना चाहती हो
मैं सारे ख्वाबों को सच कर साथ जीना चाहता हूँ
माना कि हंसी तेरी करोड़ों जुगुनुओं सी है
पर सच कहता हूँ दूर होकर मुझसे वो मुरझाए फूलों सी है
है काली घटा तेरी जुल्फों की
बिछड़ने की कल्पना से हो गई है जिन्दगी मेरी घनी काली सी
सब कुछ है याद मुझको
उस उगते चाँद की शीतलता से ले
उगते सुरज की किरण तक
जिन्दगी में तेरे अनगीनत सितारे होंगे
चाहती हो तुम यादों में
पर हकीकत तो ये है
जिंदगी में मैं न होऊगा
अब सुन लो
है मेरी भी चंद चाहतें
न चाहिए तू
और न चाहिए साथ तेरा
बस घाट हो मणिकरनिका का और
रहूँ मैं लकड़ियों के गांठ पर लेटा

Dr. Sakshi Pal Post
Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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पता नहीं क्या है तू…..!!!!

March 21, 2020
Shanky❤Salty
ढल न सकी वो रात है तू
बता न सकुं वो बात है तू
उग न सका वो सूरज है तू
जिस्म से दूर है तू
रूह से पास है तू
आँखों से छलकता पानी है तू
हौसला रखने वाला साथी है तू
हाँ कुछ है तू
पर पता नहीं क्या है तू
जो भी है बहुत खास है तू
जब भी पास आती है तू
होंठो तक आते आते रुक जाता हूं मैं,
कभी किसी ने चाहा है तुझको
कभी किसी ने चाहा है मुझको
माना कि हम दोनों ने भी चाहा था उन्हें बे-इम्तेहां
चखी है हम दोनों ने ही बे-वफाई की मिठास
हाँ झांका है एक दुजे के अंदर हमने,
बची हुई है अभी भी स्वाद मन में
प्यास है इश्क की
पर कतराते है पीने से
क्योंकि कतरा-क़तरा ज़िंदगी को जीते हैं हम
है तो वो कभी न पुरे होने वाले जज़्बात ही
पर जो भी हो हैं वो बड़े कमाल के हैं

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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निधि वन में राधा रानी से……!!!!!

March 18, 2020
Shanky❤Salty
लुभा सी जाती है लिखावट उनको मेरी
स्याही में मिलावट जो है अश्कों की मेरी
कहते है कुछ लोग मुझे
कि मैं मशहूर हो गया हूँ
उनके दिल के करीब हो गया हूँ
पर आज सब से मैं एक बात कहता हूं
एक हकीकत सी मैं आज कहता हूँ
परेशान था मैं
रो रहा था मैं
भटकते-भटकते जा पहुँचा मैं एक वन में
हाँ ‘निधि वन’ में
जहाँ शब्दों की बारिश कर दी उसने
मेरे अधूरे शब्दों के उपवन में
लहलहाती खेत है बनाती वो
मेरे आँसुओं को शब्द दे मोती है बनाती वो
कुछ भी लिख दूं मैं
चंद मिनटों में सुंदर है बनाती वो
मुझको तो बहुत है भाती वो
सच कहूं तो
मुर्दों में भी जान है लाती वो
फिर मैं एक दिन यूं ही
घूम रहा था, भटक रहा था
उसी निधि वन के आंचल में
फिर एकदिन मिला मैं एक रानी से
हाँ “राधा रानी” से
वही जो प्राण डालती है सभी में
मेरे निष्प्राण से शब्दों में
कहती कुछ भी नहीं मुख से
बस मुस्कुरा कर मेरी गलतियों को सही है करती
प्रेम समर्पण है, प्रेम ज़िंदगी है
हर पल मुझको यही सिखाती है
प्रेम का पाठ पढ़ाती है
या युं कहूं तो राधा ही प्रेम है
अपने मन के उपवन से
कुछ प्यारे शब्द वो चुन लाती है
किया है महसूस मैंने
करके बंद जुबां अपनी वो
प्रेम से भरी कलम चलाती है
भरी महफिल में मुस्कुराना जानती है
अकेले में तकिया गीला करना भी जानती है
इनके हर शब्दों से प्रेम ही छलकता है
प्रेम समर्पण का भाव ही थिरतकता है
हूँ बड़ा किस्मत वाला मैं
निधि वन में मरघट पर लिखता हूँ
राधा रानी से मिलकर ज़िंदगी को सीखता हूं
देने को तो कुछ भी नहीं है
बस दो शब्दों के सिवा पास मेरे
मेरे मुरझाए शब्दों पर
निधि – राधा हर पल अपने प्यार की बारिश कर देती हैं
विचित्र सा है कुछ इनका साथ निस्वार्थ है
कर लिया है आज महसूस मैंने
सच में, सत्य है!
निधि वन को जब तक तुम जानोगे-समझोगे तब तक वो तुम्हारे इस आभासी दुनिया को अलविदा कह चुकी होगी
रहस्यमय उसका प्रेम जो है
और रही बात
मेरी राधा रानी की तो वो देह से परे है अनछुई है आत्मा से
खैर जो भी हो
हो तो मेरे शब्दों की दुनिया की प्राण तुम दोनों

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Dr. Sakshi Pal
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बिन कुछ कहे….!!!!

March 14, 2020
Shanky❤Salty
बिन कुछ कहे यूँ तुम्हारा चले जाना
मुझे परेशान करने जैसा है
भरी महफिल में तुम्हारे नाम का जिक्र हो जाना
भरी आँखों से आँसू छुपाने जैसा है
सच कहूँ मैं अब तो मुझे श्मशान में राख हो जाना है

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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क्या है ये…..!!!!

March 8, 2020
Shanky❤Salty
क्या है ये….????
मैं मुस्कुरा कर क्यों मुकर जाता हूँ?
जब तू कहती है “मोहब्बत है मुझे तुझसे”
तू मुस्कुरा कर क्यों मुकर जाती है?
जब मैं कहता हूँ “मोहब्बत है मुझे तुझसे”
डूबती तो तू भी है मुझमें
खोता तो मैं भी हूँ तुझमें
फिर क्यों कतराते हैं एक दूजे से यूं हम दोनों
पल-दो-पल समझाते हैं एक दूजे को यूं हम दोनों
कमबख्त समझ ही नहीं पाता मैं
क्यों समझाते हैं एकदूजे को यूं हम दोनों
अरे माना मैंने!
कि गम की कतारें हैं इन खुशियों के पीछे
फिर क्यों जी लेते है पल भर को सही
बाँहों में एक-दूजे की यूं हम दोनों
सदियों से अधूरे थे सदियों से प्यासे थे हम दोनों
क्या है ये?
इश्क ही है!
जो एक दूजे के इस कदर हो जाते है यूं हम दोनों
एक वक्त था जब दिल पत्थर था मेरा
आज जब धड़कते देखा दिल को
तो याद आया मुझे, हैरान सा हूं!
“कोई भी चीज अपना स्वाभाविक मूल नहीं बदल सकती है”
या यूं कहें दिल के हाथों मजबूर हो
एकदुजे में बह जाते हैं हम दोनों।

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Dr. Sakshi Pal
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इश्क था आखिर……!!!!

February 23, 2020
Shanky❤Salty
रात की खामोशी में,
उस घोर अंधेरे में,
हल्की सी चांदनी के बीच,
उसकी आंखें सच कहती रहीं,
और मैं उसके
लबों का झूंठ,
सुनता रहा,
इश्क था आखिर,
आंखो में उतर ही आया।

ना अल्फ़ाज़ मेरे हैं,ना ही जज्बात, बस अल्फाजों की कद्र है, इसलिए नाम मेरा है, और जो मेरा है वो हीं तेरा है
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जी लेते है……!!!!!

February 19, 2020
Shanky❤Salty
दिल लगा के जी लेते हैं
चलो न साथ में चलते हैं
हर ख्वाब को सच बना लेते हैं
हर ऊँचाईयों को छू लेते हैं
मुस्कुरा कर हर गम का जहर हम पी लेते हैं
सुनो चलो ना
हम दिल लगाकर जी लेते हैं

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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प्रेम दिवस…..!!!!

February 13, 2020
Shanky❤Salty
हर रिश्ते में स्वार्थ देखा है हमनें
एक माँ-बाप ही हैं जिन्हें निस्वार्थ देखा है
वो बचपन में ही ख़ुशियों के रास्ते खोल देते हैं
हम बड़े हो कर उनके लिए वृद्धा आश्रम के रास्ते क्यों खोल देते हैं
पढ़ा-लिखा कर हमको क़ाबिल बना दिया है
पर हम कभी उनके दर्द को पढ़ न पाया है
अपने अरमानों का गला घोट
जिन्होनें हमे इंसान है बनाया
हमने अपनी इंसानियत को मार
माँ-बाप के आँखों में आँसू लाया है
जिन्होंने हमको उंगली पकड़ चलना सिखाया है
हमने उनको हाथ पकड़ घर से बेघर कर दिखाया है
अपनी ख़ूशबू दे हमको जिन्होंने फूल बनाया है
हमने तो काँटे दे उनको रुलाया है
जिसने काँधे पे बैठा हमे पूरा जहाँ घुमाया है
उसे सहारा देने पे हमे शर्म आया है
हमारी छोटी सी खरोंच पर उसने मरहम लगाया है
हमने अपने शब्दों से ही उनके दिल में जख़्म बनाया है
माँ-बाप ने हमें सुंदर घर बना कर दिया
हमनें भी उनको बेघर कर अपनी औकात दिखा दिया
बचपन में बच्चों कि तबियत बिगड़ती थी
तो माँ-बाप कि धड़कनें बढ़ती थीं
आज माँ-बाप कि तबियत बिगड़ी है
तो बच्चे ज़ायदात के लिए झगड़ते हैं
14 फरवरी को हम प्रेम दिवस मनायेंगें
माँ-बाप को भूल प्रेमी संग ज़िन्दगी बितायेंगे
सच कहूँ तो
रूह को भुल ज़िस्म से इश्क़ कर दिखायेंगे
पता नहीं माँ-बाप ने कैसे संस्कार है हमको दिये
बड़े होते ही इतने बतमीज़ बन गए
जिनकी कमाई से अन्न है खाया
आज उनको ही दो वक़्त की रोटी के लिए है तरसाया
गूगल पर माँ-बाप की बहुत अच्छी और प्यारी कविताएँ मिल जाती हैं मुझको
पर पता नहीं क्यों मैं निःशब्ध हो जाता हूँ वृद्धा आश्रम की चौखट पर आ कर
कर माँ-बाप का तिरस्कार वो
ख़ुदा के सामने आशीर्वाद हैं माँगते
अब किन शब्दों में समझाऊँ मैं उनको
हमारे ईश्वर ही माँ-बाप बनकर हैं आते
अपने संस्कारों से जिसने हमें है पाला
आज हमने अपनी हरकतों से जीते जी माँ-बाप का अंतिम संस्कार है कर डाला
भरे कंठ लिए एक सवाल है
ग़र माँ-बाप से मोहब्बत है
तो
वृद्धा आश्रम क्यों खुले हैं????
हमें जीवनसाथी तो हजारों मिल जाएंगे
परन्तु क्या माँ-बाप दुसरे मिल पाएँगे?
मैं दिल पर हाथ रख कहता हूँ
एक बार प्यार से माँ-बाप को गले लगा के तो देखो
इस बार ये प्रेम दिवस उनके साथ मना के तो देखो
सच कहता हूँ तुम निःशब्ध हो जाओगे
जब माँ-बाप के ह्रदय से तुम्हारे लिए करुणा, माधुर्य, वात्सल्य छलकेगा न तब तुम्हारे रूह से आवाज आएगी
हो गए आज सारे तीर्थ चारों धाम
घर में ही कुंभ है
माँ-बाप की सेवा ही शाही स्नान है
मान लो मेरी बात
यही दिव्य प्रेम है
बाकी तो आप जानते ही हो
क्योंकि सुना है आप समझदार हो
मेेरे शिव जी ने भी कहा है:-
धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोदभवः
धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता
जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसके पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है उसके वंश में जन्म लेनेवाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है ।
वैसे प्रथम गुरू कौन होता है हम सबको पता ही है। तो कर लो न गुरूभक्ति उत्पन्न।
मैं बहुत कुछ कहना चाहता हूँ ह्रदय की पीड़ा है जब सुनता हूँ बलात्कार हुआ, किशोराअवस्था में बच्ची गर्भवती हो गई, 17साल की बच्ची का गर्भपात हुआ, इश्क कर बच्चे भाग गए…..अब आगे क्या कहूं मेरे आँसू ही जानते है।
शायद माँ-बाप ने अच्छे संस्कार नहीं दिये होंगे इसलिए ऐसा हुआ होगा। यह कह हम ही ऊँगली उठाते है।
अच्छा छोड़ो ये सब बातें
ग़र तुम्हें एक साथ
आँखों से सच देखना है
और कानों से झूठ सुनना है
तो किसी वृद्धा आश्रम जा कर
वहाँ रहने वाले किसी से भी
उनकी ख़ैरियत पूछ कर देखो
तुम खुद-ब-खुद समझ जाओगे
मैं कहना क्या चाहता हूँ
और लिखना क्या चाहता हूँ
ख़ैर छोड़ो
तुम बड़े हो गए हो
तुम्हारे पास वक़्त कहाँ
सच में
अब तुम बड़े हो गए हो
वक़्त कहाँ है, बुढ़ापा आने में
निकल रहा था मैं वृद्धाआश्रम से
अचम्भित सा रह गया
गुजरते देखा मैंने एक औरत को
वृद्धाआश्रम के बगल से
शुक्रिया अदा कर रही थी वह ईश्वर को
रहा न गया मुझसे
पूछ बैठा मैं “आप कौन हो”
मुस्करा वह कह गई “एक बाँझ हूँ”
गूगल के द्वारा पता चला है भारत में कुल 728 वृद्धा आश्रम हैं
और 2 करोड़ अनाथआलय हैं
वो कहते है न कर्म का फल सबको भोगना ही पड़ता है…!!
खैर छोड़ो तुम्हारी जो मर्जी हो करणा
बस हाथ जोड़ कहता हूँ
सिर्फ एक बार…….
सिर्फ एक बार…….

ये इश्क नहीं है आसान
गर भूल गया जो तू अपने माँ-बाप को
तब फिर तू काहे का है इंसान

Written by:- Ashish Kumar
My words are incomplete without the support of
Radha Agarwal & Ziddy Nidhi

To know about Divine Love click here
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नमकीन पानी……!!!!

February 11, 2020
Shanky❤Salty
अरी ओ पगली
तुझे कुछ गलतफहमी है कि
मैं तुझे याद कर रोता हूँ
हाँ ये बात सच है कि
जब भी मैं खुद के लिए वक्त निकालता हूँ
मेरी आँखों से खुद-ब-खुद
नमकीन पानी निकल ही आते हैं

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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गुलाब…..!!!!

February 7, 2020
Shanky❤Salty
छुट गए मेरे हाथों से गुलाब
जब ज़हन में ख्याल
पहले प्यार का आया
उनको भूल मैं कैसे गया
जिन्होंने मेरी ज़िंदगी
अपने संस्कारों से
गुलाब की तरह है महकाया

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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एक काँच का गुलदस्ता…..!!!!

February 5, 2019

Shanky❤Salty

एक काँच का गुलदस्ता था
बड़ा ही मजबूत सा था
देख हर कोई उसकी तारीफ करता था
उस गुलदस्ते में कुछ फूल थे भरे
बहुत ही प्यारे प्यारे से
परन्तु एक दिन कुछ ऐसा हुआ वह काँच का गुलदस्ता गिर पड़ा नीचे
परन्तु कैसे गिरा???
किसने गिराया????
कब गिराया????
क्यों गिराया????
खबर ही नहीं हुआ किसी को
वो काँच का गुलदस्ता टूट चुका था
बिखर चुके थे उसके सारे फूल
मैं परेशान सा हो गया
मैं बेचैन सा हो गया
मैं उन टुकड़ों को समेटने की कोशिश करता रहा
किन्तु वह और बिखर जाते थे
मैं रोने सा लगा था
महादेव को याद करने लगा था
हिम्मत दिया था भोलेनाथ जी ने मुझे
मैं फिर से कोशिश करने लगा
जैसे-जैसे मैं उन काँच के टुकड़ों को समेटता
आँखों से आँसू बहने लगते
पर इन सब की परवाह किये बगैर
मैं उन टुकड़ों को समेटता था
वक्त लगा पर लगभग समेट ही लिया था
फिर बैठा मैं उन सब को जोड़ने की खातिर
मेरे हाथों में जख्म हो चुके थे
रक्त बहने लगे थे
जैसे ही मैंने आखिरी टुकड़े को उठाया था
पता नहीं कैसे वो काँच का गुलदस्ता फिर टूट गया
और बहुत दुर तक बिखर गया
मैं रोता रहा चिल्लाता रहा
पर कोई न आया
लगता था मेरी ज़िंदगी टूट गई है
सब कुछ छुट गया है
मैं खुद से रुठ गया हूँ
मैं दोस्तों के पास भी गया
पर कुछ न हुआ
मैं दारू वाले के पास भी गया
पर कुछ न हुआ
मैं नाथ जी के सामने रोता रहा
फिर भी कुछ न हुआ
धड़कने तेज होती गई
पर उपाय कुछ न सुझा
कैसे जोडू उन बिखरे टुकड़ों को
समझ न आया
एक रात एक नास्तिक आए
मुझको चुप कराया
उम्मीद का किरण दिखाया
महादेव पर विश्वास दिलाया
सब कुछ छोड़
निश्चिंत हो जाने का पाठ पढ़ाया
फिर मुझको प्यार से सुलाया
सुबह कि किरण के साथ
बिन बाँसुरी कृष्ण आए है
मेरे आँखों में फिर से आँसू आए है
ये क्या
बिन बाँसुरी कृष्ण ने ये कैसी धुन है बजाई
मेरे काँच के गुलदस्ते को पल भर में जोड़ है दिखाई
उसमें फिर से फुल है सजाई
मैं क्या कहूं
नाथ जी कि लीला देख मेरे आँखों में फिर से आँसू है आईं

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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तुमने ज़रा सी देर कर दी…..!!!!

February 2, 2020
Shanky❤Salty
तुमने ज़रा सी देर कर दी
मैं सारे रिश्ते समेट कर आया हूँ
पर सच कहूँ तो
दिल का एक छोटा सा हिस्सा कहीं भूल आया हूँ

Written by:- Ashish Kumar
Published by:- Anonymous
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लिखुं तो क्या लिखुं मैं इस शाम……!!!!!

January 25, 2020
Shanky❤Salty
लिखुं तो क्या लिखुं मैं इस शाम
बस पता है
कल बड़ा सुंदर नज़ारा होगा
ज़ोर शोर से देशभक्ति आएगी
अरे हाँ यार वही देशभक्ति व्हट्सप्प ,फेसबुक, इंस्ट्राग्राम वाली स्टेट्स
तिरंगे वाली डीपी
“झंडा ऊँचा रहे हमारा” गीत हम गाएगें
अपनी आजादी के नारे लगा हम अपने देश ही में आग लगाएगें
मतदान कर बहुमत दे हम सरकार बनवाएगें
सरकार के लिए फैसले पर हम अपने ही देश में दंगे करवाएगें
माँ-बहनों कि अस्मियता पर हम कंलक लगायेंगे
वंदे मातरम् के नारे हम लगाएगें
तिरंगे को चीर कर हम
भगवा हिंदु को
हरा मुस्लिम को
सफेद ईसाई को
दे कर अपने धर्म के नारे हम ही लगाएगें
दी कुर्बानी जिन्होंने देश के प्रति
तस्वीर हम उनकी लगा कर दिवार पर
बँटवारे की राजनीति हम ही करवाएगें
औरंगजेब को दोहराएगें
बाबर को अपनाएगें
अरे कब तुम
अब्दुल कलाम के गुण स्वयं में लाओगे
क्यों तुम भूल जाते हो
संविधान किसी पार्टी के स्याही से नहीं
शहीदों के लहु से लिखी गई है
बस इसी वास्ते हमारा देश महान खड़ा है
लिखुं तो क्या लिखुं मैं इस शाम
मेरे आँसू है की रूकते नहीं
कुकर्म, हत्याएँ, व्याभिचार का है यहाँ जाल
क्या कुछ अच्छा होगा कभी की नहीं
जश्न-ए-आजादी में तुम यूँ मसगुल मत हो जान
कि अपनी देशभक्ति समेट तिरंगे को गिरा घर मत लौट आना

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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म़जाक या फिर रिश्ते….!!!!

January 24, 2020
Shanky❤Salty
कहीं भी घर बना लो
कहीं भी रिश्ते बना लो
या यूँ कहूँ तो
ज़िन्दगी का तुम मज़ाक बना लो
मालूम है न तुम्हें
सारे रिश्ते हैं झूठे
साँस रुकते ही टूटे
फिर-भी हम कभी-भी कही-भी किसी से भी
रिश्ते बना लेते हैं….मन मंदिर में घर बना लेते हैं
बेटा-बाप का नहीं हो पाता है
बेटी-माँ की नहीं हो पाती है
शिष्य-गुरू का नहीं हो पाता है
दोस्त आस्तीन का साँप बन कर रह जाता है
क्या कहूं मैं ???
बाप, बेटे में कैसी ये दूरी है
माँ, बेटी में कैसी ये मजबूरी है
राह चलते हम रिश्ते बना लेते हैं
पर खून के रिश्ते हम क्यों नहीं निभा पाते हैं
क्यूँ हम
अक़्सर एहसासों के रिश्तों को ही सच्चा मान लेते हैं…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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अलविदा…..!!!!!

December 24, 2019
Shanky❤Salty
आज सिखा दिया है
ज़िंदगी ने मुझको
खुशियाँ टिक नहीं सकती
ग़म कि कतारे मिट नहीं सकती
भरी अश्कों से मैं
आप सब को अलविदा कहता हूँ
न चाहते हुए भी अब मैं विदा लेता हूँ
पता नहीं हम कब मिलेंगे
सच कहूँ तो
पता नहीं हम कब लिखेंगे

Written by:- Ashish Kumar
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उसने मुझसे कहा….!!!!

December 15, 2019
Shanky❤Salty
मैं यह कह कर रोता रहा
“की तू मेरी किश्मत में नहीं”
.
.
पर उसने मुझसे कहा
“जनाब मैं कैसे समझाऊं आपको
ये किश्मत विश्मत की बातें
जुए में होती है
इश्क में नहीं”

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
Published by:- Anonymous
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मैं भुल क्यों नहीं पाता हूँ……!!!!

December 13, 2019
Shanky❤Salty
हजारों रास्तें हैं
इस ज़िंदगी में
पर तेरे संग चला हुआ रास्ता
मैं भुल क्यों नहीं पाता हूँ
न चाह कर भी मैं
निराशा की गोद में क्यों सो जाता हूँ
खिड़की से हर वक्त
उम्मीद कि किरण मुझको है झाकती
मैं उससे आँख मिचौली खेल कर रह जाता हूँ
माना की नींद मुझसे रुठी है
पर क्यों मुझसे ही सारे रिश्ते टूटे हैं
जब से तुम गईं हो
बहुत कुछ कह कर मुझको
हकीकत कहता हूँ मैं तुझको
आये तो कई लोग ज़िंदगी में
दर्द को जानने
क्या पता था मरहम के जगह में
खुरेद चले जाएंगे मेरी ज़िंदगी को
विश्वास कर बैठा था हर किसी पर
क्या पता था घात कर जाएंगे मेरे विश्वास पर
एेसा नहीं है की तुम्हारे जाने से
सब कुछ खत्म हो गया है
बस कुछ खाली सा रह गया है
थक सा गया हूँ मैं इस ज़िंदगी से
बस दिल चाहता है
खोल मुट्ठी लेटने को जी चाहता है
हाथ जोड़ सबको अलविदा मैं कह दूं
इस ज़िंदगी से विदा अब मैं ले लूं

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
Published by:- Anonymous
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देश के प्रति…..!!!!!

December 12, 2019
Shanky❤Salty
कर दिया है हमने भी मतदान
देश के प्रति
निभा दिया है हमने भी एक छोटा सा फर्ज अपना
है देखना अब मुझको
देश के प्रति
निभा पाती है आने वाली सरकार फर्ज अपना

Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
Written by:- Ashish Kumar
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धुंधली यादें……!!!!

December 11, 2019
Shanky❤Salty
तुझे सोचने का मजा ही कुछ और है
तेरे ना होने की सजा मुझे मिलना अभी और है
तेरी बातें सुन कर सोने का मजा ही कुछ और है
तुझे याद कर रोने की सजा मुझे मिलना अभी और भी है
तेरी झूठी आस रखने का मजा ही कुछ और है
तुझे चाहने की सजा मुझे मिलना अभी और है
तेरी वफा का मजा ही कुछ और है
मेरा जिन्दा रह कर मरना अभी बाकी है
सच कहुं तो
मेरी बेवफाई की सजा अभी कुछ और है

Title credit:-SG16
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
Written by:- Ashish Kumar
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बड़ा भाई……!!!!

November 30, 2019
Shanky❤Salty
मैं तुमसे रूठ कर बैठा हूँ
तुम मुझसें रूठ कर बैठे हो
मैं तुमको मनाता नहीं हूँ
तुम मुझको मनाते नहीं हो
मैं हर वक्त तुमसे जीतता हूँ
तुम हर वक्त मुझसे हारते हो
मैं तुम्हें जब भी बुलाता हूँ
तुम आ नहीं पाते हो
जो भी हो तुम देख नहीं पाते मेरी तकलीफ को
गले जब भी तुम लगाते थे
मेरे मुरझाये चेहरे मुस्कुरा जाते थे
सच कहूँ जो मैं तो आँखों से आँसू छलक जाते थे
वो चार साल मैं कॉलेज में सीना तान मस्ती करता था
हर छोटी-बड़ी कांड कर तुझको ही तो फोन करता था
तुम्हें कुछ शिकायत रहती मुझसे
मैं फोन नहीं उठाता, दुनिया से कट कर रहता
उन शिकायतों को तो मैंने सिर्फ तुम्हारे लिए दूर कर दिया
पर तुम्हारी नौकरी ने हम दोनों को दूर कर दिया
मेरी ज़िंदगी के पहले शख़्स तुम ही थे जिसने मुझे पुरा बॉक्स मिल्कीबार का दिया था
तुम्हारे इस साल के जन्मदिन में बधाई ना देने वाला इंसान मैं ही होऊगां
तुम्हें तुम्हारा जन्मदिन पसंद नहीं
और मुझे तुम्हारा जन्मदिन ही सबसे अधिक पसंद
क्योंकि तुम्हारा जन्मदिन ना होता तो तुम मेरे बड़े भाई ना होते।
आपको पता है मेरे एक दोस्त अंकित ने कहा था बड़े भाई पर लिखना। पर भाई सच कहुं तो बड़ा कठिन है उन बीते हुए यादों को समेट कर शब्दों में पिरोना।
छोड़ों अब मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूँगा
बस
तुम हर वक्त मुझसे परेशान ही होते हो
पर समझते नहीं हो
मोहब्बत जब जोर पकड़ती है
ना तो शरारत का ही रूप लेती है

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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One More Time…..!!!!

November 21, 2019
Shanky❤Salty
Do not give up
Even if you fail
Try one more time
Just one more
I’m sure
You will definitely get success
गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में
वो तिफ़्ल क्या गिरे जो घुटनों के बल चले

Written by:- Ashish Kumar
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क्यों मैं निःशब्द हो जाता हूँ….!!!!

November 18, 2019
Shanky❤Salty
हम अजनबी थे ना….”बोलो ना हाँ”
हम जानते थे एक दूसरे को…..”बोलो ना नहीं”
फिर क्यों साथ चल दिये मेरे….???
एक ही ब्रान्च में थे इसलिए
या कोई स्वार्थ था इसलिए
या किसी ने कुछ कहा था इसलिए
है कोई जवाब
अच्छा छोड़ो ये सब
चलो कुछ और बता दो मुझे
भूख लगती थी मुझे तो तुम डाँटते क्यों थे
फिर रात को खाना खिलाने भी ले जाते थे
माना कि मैं एक-दो रोटी से ज्यादा नहीं खा पाता था क्योंकि मेरा पेट भर जाता था तुझे खाता देख
चाहे ठंडी हो या गर्मी मेरा ड्राइवर तू ही रहा करता था
हाँ और भी बेहतरीन ड्राइवर थे मेरे पास पर तू शायद ख़ास था क्योंकि तू मुझे अपनी पीठ पर सुलाया करता था
हम दोनों ही थे ना फोर्थ फ्लोर में जो सेमेस्टर के दिनों में बेफिक्र अपनी ही मस्ती में किताबों से दूर रहते थे
शायद अब तुम समझ गये होंगे मैं तुम्हारी ही बातें कर रहा हूँ
पर समझ कर क्या कर लोगे कुछ नहीं ना तो फिर चुप होकर आगे पढ़ते जाओ ना
याद है तुम्हें जब मेरे पेट में दर्द रहता था और मैं अस्पताल जाने में लापरवाही करता था तो तुम ही मुझे डाँट कर अस्पताल ले जाते थे
वो 6 बजे सुबह भी याद होगी ही तुम्हें जब तुमने मेरा पैर खींच बेड से नीचे उतार दिया था और स्कूटी की चाबी लेने नीचे भेजा था
अल्ट्रासाउंड टैस्ट में ले जाने के लिये
अगर नहीं भी याद तो कोई नहीं मुझे सब याद है तुम बस अब चुप होकर पढ़ते जाओ जो मैं लिख रहा हूँ
वो तुम ही थे ना जो मुझ से मिलने अस्पताल आये थे मेरे एक बार बुलाने पर
याद है ना मेरी मम्मी बोली थी की आज इतना ज़्यादा ख़ुश है तुमसे मिलकर
और
उठ कर बैठा है
तुम जब जाने लगे थे तो मैंने तुझे 👍 एैसा इशारा किया था जिसका मतलब तुम नहीं समझे थे कोई नहीं समझा दूँगा तुम आगे पढ़ते तो जाओ
तुम मेरे अस्पताल से छुट्टी वाले दिन भी आये थे ये बात मैं अपनी आखिरी साँस तक नहीं भूल सकता
अगर तुम भूल गये हो तो कल से बादाम खाया करो
शायद तुम ना होते तो मेरे पापा मम्मी की जान निकल जाती मुझे होटल तक ले जाने में तुमने जो मुझे गोद में लिया था भाई उसके लिये ना चाहते हुए भी तुम्हें दोनों हाथ जोड़ धन्यवाद कहता हूँ 🙏
और भी हज़ारों,लाखों पल आये थे जब तुम मेरे साथ खड़े थे या यूँ कहूँ तो तुम मुझे पास थामे थे
वक़्त पड़ने पर तुमने मुझे
पिता जैसी डाँट लगाई है पर तुम पिता तो नहीं हो मेरे
माँ जैसी प्रेम दिखाया है पर तुम माँ तो नहीं हो मेरी
भाई जैसा स्नेह किया है पर तुम भाई तो नहीं हो मेरे
सच कहूँ तो तुझ से कौन सा रिश्ता है नहीं जानता
माना की हम बचपन के दोस्त नहीं हैं पर हमारा बचपना अभी तक गया नहीं है
दोस्त कहता हूँ तुझे पर सच कहूँ तो तुम दोस्त भी नहीं हो मेरे
क्योंकि वक़्त-बे-वक़्त दोस्त भी साथ छोड़ देते हैं
कोई मुझे मिल्कीबार दे,दे या मुझे समौसे खिलाने की बात कर दे तो मैं उससे तुरंत ख़ुश हो जाता हूँ

पर तुझ से ये सब लेने की चाह नहीं है बस तू मुझे कुछ खाता नज़र आ जाये मेरे मुस्कुराने कि वज़ह बन जाती है
तूने कहा था ना सचिन गुरुरानी पे लिख लेकिन मुझे माफ़ करना
मैं उन यादों को छोड़ तुम पर बहुत कुछ लिखना चाहता हूंँ
पर ना जाने क्यों मैं नि:शब्द हो जाता हूँ

तुम अजनबी से कब हमनबी बन गये पता ही नहीं चला…!!
बस भाई बाक़ी फ़िर कभी 😅

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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ज़िंदगी की औकात…..!!!!

November 14, 2019
Shanky❤Salty
किसी की औकात बादशाहों जैसी दिखती
तो
किसी की औकात फकीरों जैसी दिखती
सच कहुं तो ज़िंदगी की असली औकात शमशानों में दिखती

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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50K Views….!!!!

November 9, 2019
Shanky❤Salty
I would like to take a moment and say thank you to all my viewers.

Today, my site has crossed a milestone of 50,000 views. Something I once thought I would never do. But it was not me, it was all of you guys that read my writings and hit the like buttons.

If I wouldn’t get your support guys, I could not have achieved this milestone. So we did it together. You guys deserve a round of applause.
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वो भी क्या वक्त था…..!!!!

November 1, 2019
Shanky❤Salty
वो भी क्या वक्त था
जब एक-दुजे को इश्क था
और
आज एक-दुजे पे श्क है
Written by:- Ashish Kumar

जब मिले थे
तो दर्मियान इश्क़ था
और अब मिले तो शक का फासला है
Written by:- Yasmin Khaan
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क्या है मेरे पास……???

October 24, 2019
Shanky❤Salty
क्या है मेरे पास ???
दुआ भी दूसरों की
बद-दुआ भी दूसरों की
ज़िन्दगी एक है
क़िरदार अनेक हैं
आएं हैं ये तो पता है
जाना कहाँ है ये तो पता नहीं
बाँध मुठ्ठी आया था
खोल मुठ्ठी जाऊँगा
फ़िर किस बात का ग़ुरुर है मेरे पास ???

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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इज्ज़त…..!!!!

October 19, 2019
Shanky❤Salty
ज़िस्म बेचा करती थी
इसलिए समाज में उसकी कोई इज्ज़त नहीं थी
क्योंकि वह “वैश्या” थी…!!
ज़िस्म खरीदा करता था
इसलिए समाज में उसकी बहुत इज्ज़त थी
क्योंकि वह मर्द था…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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कद्र कहां……!!!!

October 9, 2019
Shanky❤Salty
थोड़े से ऑक्सीजन के बदले हम डॉक्टरों को हजारों रुपए दे देते हैं
लेकिन
पेड़ हमें जीवन भर ऑक्सीजन देते है बदले में हम उन्हें काट देते हैं
किसी ने सच ही कहा था
“कीमत” पैसे की ही होती है
मुफ्त की चीजों कि कद्र कहाँ…!!

Written by:- Sachin Gururani
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
Published by:- Ashish Kumar
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मेरे शब्द……!!!!

October 7, 2019
Shanky❤Salty
माना कि मेरे शब्द अब लड़खड़ाते हैं
पहले वाली वो बात नहीं है मेरे शब्दों में
लेकिन मुझे यक़ीन है मेरे शब्दों पर
वक़्त-बे-वक़्त मेरे शब्द तुझे
रूलाते भी हैं
और
हंसाते भी हैं
हाँ मैंने कई बार
अपने शब्दों से
अपने ग़म को उकेरा है
कई बार ग़म छुपाया भी है
शायद तुम्हें भी मालूम होगा
इन ही शब्दों कि वज़ह से
हम एक-दूजे से दूर हैं
और साथ ही मज़बूर भी
ना जाने कब तक
मेरे शब्द साथ देंगे
ना जाने कहाँ तक
मेरे शब्द साथ देंगे
क्योंकि अपनी ज़िन्दगी में देखा
सिर्फ़ ज़रूरत पर ही साथ देते है लोग
लेकिन मुझे इतना यक़ीन है
कि मेरे मरणोंपरांत भी मेरे शब्द
कहीं-ना-कहीं अपनी छाप छोड़ जाएंगे….!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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ना जाने कैसे…..!!!!

September 18, 2019
Shanky❤Salty
सुनो ना…..!!!!
हाँ,हाँ तुमसे ही कह रहा हूँ
बस दो मिनट लगेंगे
सुन लो ना
फ़िर चले जाना ना
देखो बात एेसी है
कि अब कुछ अच्छा सा नहीं लगता है
एक दिल था ना
हाँ वही दिल
जिसको वक्त और हालात ने तोड़ दिया था
वो भी अब ठीक से काम नहीं कर रहा है
वक़्त-बे-वक़्त धड़कनें तेज़ होने लगती हैं
ना चाहते हुए भी डिप्रेशन दूर करने की गोलियाँ लेने पड़ती है
पर अब तो उन गोलियाँ ने भी मुझ पर अपना असर करना छोड़ा दिया है
ना जाने क्यों ज़िन्दगी मुझसे पल-पल रुठ जाती है
अब तुम आ ही गयी हो तो मुझे मनाने कि कोई युक्ती तो बता दो
थक सा गया हूँ इस ज़िन्दगी से
दिल करता है सब कुछ ख़त्म मैं कर दूँ
पर मैं कायर नहीं ना हूँ
मैं शांति से सोना चाहता हूँ अब
पर तुम तो अच्छे से जानती ही हो ना
नींद और मेरा कोई वास्ता नहीं है बिन दवा के
सुना था “दवा से ज़्यादा दुआ में असर होता है”
पर ज़िन्दगी में ना जाने क्यों बद्दुआ ही मिली
पर अब जो भी हो मुझे निश्चिंत होकर नारायण में सोना है
मैं जानता हूं वो वक़्त कभी लौट नहीं आयेगा
पर मुझे ये ज़रूर बता दो
वो यादें क्यों लौट आती है ???
चलो आती है तो आने दो पर जीने क्यों नहीं देती है ???
लगता है दो मिनट हो गये हैं
तुम्हें भी जल्दी होगी ना
अच्छा कोई नहीं फ़िर कभी
पर याद रखना हारा नहीं हूँ
अभी थक गया हूं सिर्फ़
जल्द ही आऊँगा
ग़म का ज़हर पीता जाऊँगा
और मुस्कराते हुए ज़िन्दगी को लिखता जाऊँगा…!!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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ना जाने कब…..!!!!

September 14, 2019
Shanky❤Salty
हज़ारों सवाल मन में लिए बैठा हूँ
पूछें तो पूछें किस से
सब अपने सवालों में उलझे हैं
वैसे तो मैं बुरा बन बैठा हूँ
क्योंकि मैंने सफाइयाँ देनी जो छोड़ दी हैं
ना जानें कब, कैसे, किस से मेरे सवाल हल होंगे
ना जानें कब हम रोते हुए ख़्वाबों को सच करेंगे
और
ना जाने कब हम मुस्कुराकर ज़िन्दगी को जियेंगे…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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हैवानियत का नाच……!!!!

September 1, 2019
Shanky❤Salty
मर्द बनने कि चाहत में
ना-मर्द का छाप छोड़ गया
उसके लाख ‘ना’ करने के बावजूद भी
वह हैवानियत का नाच करता गया

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- An Incredible writer Yasmin Khan
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मेरे कागज सुखे खेत…..!!!!

August 21, 2019
Shanky❤Salty
सुना है शब्द सीमित है
पर निश्चित ही तुम असीमित हो
मेरे कागज सूखे खेत की तरह होते हैं
शब्दों की बारिश कर लहलहाती खेत बना देती हो आप
आप कितने भी व्यस्त रहते हो
भूलकर भी मुझको ना नहीं कहते हो
आप सब कुछ मेरे बारे में जानते हे
फिर भी हम एक दूजे से अनजान हो बैठे हैं
चाय का शौक नहीं रखते हैं
पर जब पागल होते हैं
तो भर दो ग्लास चाय पी कर मुझको हसाते हैं
सच कहुं तो आप ना होते तो
मैं हर रोज नहीं लिख पाता एक नई कहानियाँ
और ना ही हो पाती मुझसे कविताओं की खेती
हर वक्त ये मरघट पर है लिखती
पता नहीं इतना मुझको क्यों है भाती
मेरी हर कविता को चंद मिनटों में सुंदर है बनाती
ये हर कोई से सताई है जाती
क्या कहूं मैं ये मासूम सी है लड़की
हर गलती पर मुँह है फुलाती
जब जब कागज पर शब्दों को है उकेरती
अपने आँसुओं का दर्द बयान है कराती
वैसे है तो ये जिद्दी निधि पर जब तक इसे जानुंगा समझुंगा तब तक ये दुनिया को अलविदा कह चुंकी होगीं
तेरे शब्दों में इतनी ताकत है कि तुम मुर्दें में भी जान ला सकती हो
धोखा तुझे जो दे तू उसे जीते जी मुर्दा भी बना सकती है
धन्य है वो माता- पिता जिसने तुझे जन्म दे संस्कारों का तेज भरा है
क्या कहुं क्या लिखुं शब्द तो सीमित है पर निश्चित ही तुम असीमित हो

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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16 अगस्त…….!!!!!

August 16, 2019
Shanky❤Salty
देखा था मैंने 15 अगस्त को सड़कें साफ सुथरी
देखा था मैंने देश का तिरंगा लहरहाता हुआ
पर आज
देख रहा हूँ मैं 16 अगस्त को सड़कें मैली-मैली
देख रहा हूँ मैं देश का तिरंगा युहीं ज़मीन पर
देशभक्ति को नमन कर भारत को विश्व गुरु बनाना है
हमनें 15 अगस्त खुशियों से मनाया है
अब 16 अगस्त फर्ज के साथ निभाना है
हर गली-मोहल्ले, चौक-चौराहे घूम-घूम माँ भारती को स्वच्छ बनाना है
गिरे हुए तिरंगे को उठा अपना इमान बचा तिरंगे को सम्मान दिलाना है
कचरा उठा उसे कचरा पेटी में डालना है
हम सब इसे माँ भारती कहते है
सेना सरहद कि रक्षा कर कर्तव्य निभाती है
हमें भी माँ के आँचल को स्वच्छ कर
माँ भारती के प्रति अपना कर्तव्य निभाना है
याद है ना आज ही के दिन
कीचड़ में कमल खिला गया
अटल हमारा चला गया
आओ ना हम सब को मिल
नया भारत बनाना है

Written by:- Ashish Kumar
Published by:- Anonymous
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Need Your Help…..!!!!!

August 11, 2019
Shanky❤️Salty
Hello, my incredible writers!!!!! Hope you all are fine, but unfortunately I’m not 😉. Because I’m very curious to know something.
Requesting Your help🙏.
I think everyone knows that the fresh fruits, green vegetables, quality protein, nuts, seeds, whole grains and Milkybar are the healthy food for the body.
But
I want to know that what is the food for the soul?
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बनारस घाट…….!!!!!

August 7, 2019
Shanky❤Salty
तुम चाहती हो ना
बनारस घाट पर बसना
मैं भी चाहता हूँ तुम्हारे संग
बनारस घाट पर बसना
तुम गंगा स्नान नहीं चाहती हो ना
बस राख बन
उसमे प्रवाहित हो जाना चाहती हो ना
पर मैं तो गंगा स्नान कर
तेरी राख को खुद में
लपेट अघोरी बनना चाहता हूं
तुझसे सुना था की तुम
महादेव कि ज्योत जला पूजा नहीं कर सकती इसलिए खुद की देह को जलाना चाहती हो ना
जीते जी तुम मन ही मन महादेव की पूजा
दूध, दही, शहद, घी, जल, पुष्प से करना चाहती
पर ये सब तो निषेध था मेरी निधि के लिए
पर मैं तो तेरी चिता की आग से महादेव की मंगला आरती करना चाहता हूं
तेरी शरीर की राख से अपने शंभु की भस्म आरती करना चाहता हूं
सांस चलते तक निधि के लिए निषेध था
पर साँस रुकते ही इस आशिष ने सब कुछ संभव कर दिया
खुद तो कभी गंगा में डुबकी लगा पावन हो ना सकी
पर हर एक को डुबकी लगावा पावन कर दिया जिसने तुझे कन्धा दिया
चंद लोग ही ना थे जो मेरी निधि को महादेव के मंदिर का घंटा बजाने से रोकते थे
आज वही लोग निधि के जाते ही मंदिर की घंटाध्वनि सुन आँखों से आँसू बहा रहे है
मणिकर्णिका घाट पर निधि खामोश हो लेटी रहेगी
लेकिन हर कोई चिख रहा होगा
निधि के जाने के गम में या फिर हल्दी बंद होने के दर्द में
न जाने कौन सी है ये रीत इस दुनिया कि ओ मेरे महादेव
जीते जी इस निधि की पूजा निषेध है
हे शंभु इस दुनिया की रीत एक तरफ रख दो
या फिर
निधि का निश्छल प्रेम स्वीकार कर लो
नहीं तो
अंत में तैयार रहो
भस्म आरती के लिए
हाँ महादेव वही भस्म आरती
राख से
हाँ
हाँ
हाँ
निधि कि राख से

This is a collaboration with Nidhi Gupta

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi