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यात्रा…..वो भी अंतिम……!!!!

June 17, 2021

Shanky❤Salty

सही समझे
मृत्यु
हाँ मैं मृत्यु के बारे में ही लिख रहा हूँ
वो मृत्यु जो मुझे मार नहीं सकती है
पर हाँ आपको ज़रूर मार सकती है
ग़र आप स्वयं को जीवन समझते हैं तो
मृत्यु उसे ही स्वीकारता है
जो जन्म को स्वीकारता है

ना तो मेरा जन्म हुआ है
ना ही मेरी मृत्यु हो सकती है
ये शरीर का जन्म होता है
तो मृत्यु भी उसी की हो सकती है
हमारी नहीं, कभी नहीं

स्वयं नाथ जी भी हमें नहीं मार सकते हैं
यक़ीनन वो सर्वसमर्थ हैं
पर हमें मारने में कभी भी नहीं
अपनी उर्जा को पहचानों
वो कहते हैं ना अज्ञानता का जीवन किसी मृत्यु से कम नहीं है

महेंदी के पत्ते में ही उसकी लाली छिपी होती है
एक बीज में ही जन्म और मृत्यु छिपा है
मृत्यु एक वस्त्र बदलने की प्रक्रिया है
बस और कुछ नहीं

अर्थ स्पष्ट है मेरे शीर्षक का
इस जीवन की यात्रा
अंतिम होनी चाहिए
कोई कितना भी बुलाए
लौट के नहीं आना है
यह जीवन अनमोल है
व्यर्थ ना गवाओ

मोक्ष की उस स्थिति को जान लो
मर्जी तुम्हारी है
सुख-दुख कि चक्की में पिसना है
या उस चक्की के कील से लग कर
और अपनी यात्रा को अंतिम करना है

अब अलविदा कहता हूँ
कुछ पल के लिए
जो इस आत्मज्ञान से निकला वो तो डूब गया
और जो इस आत्मज्ञान में डूबा वो तो हो गया पार…!!


Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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मजबूत रिश्ते…….!!!!

May 14, 2021

Shanky❤Salty

ये रिश्ता बड़ा मजबूत है
बेश़क हमने ही चुना है
जमाने ने जड़ें जरूर काट दी हैं
पर मजबूती से दोस्तों ने थामा ही है

कुछ नए मिलें हैं
तो कुछ पुराने बाकी हैं
शब्दों का मेल है
दोस्त मेरे सच में अनमोल हैं

बारिश का मौसम आ चुका है
तुम भीगना ज्यादा मत इसमें
पर गलतफहमियों की धुल ग़र जमीं हो
तो उसे धो जरूर देना मेरे यार

वो कहतें है ना
यादें बहुत आती है
पर वो वक्त नहीं आ पता है
यकीनन हम झगड़ते बहुत थे
पर दुआओं में भी हम ही थे

वक्त की धुंध में बहुत कुछ छुप जाता है
पर आँखों से ओझल नहीं हो पता है
नासमझ जरूर हूँ
पर समझाना सिर्फ तुम्हीं को आता है

सुख हो या दुख हो
कुछ ने सीढ़ीयों सा इस्तेमाल किया
पर कुछ अभी भी दोस्ती का फ़र्ज़ निभा रहें
हर परेशानीयों का उपाए है उनके पास

दोस्त हैं तो ज़िन्दगी मकबुल है
ना जिस्म की बात होती है
ना ही रूह की होती है
बस ज़िन्दगी को खुल कर जीने की इबादत होती है

ना खुदा ने बनाया है
ना खुद हमने बनाया है
दरसल ये रिश्ता खुद-ब-खुद बन आया है

भावनाओं का जो मेल हो पाया है
निस्वार्थ ही ये रिश्ते निभ रहे हैं
और निभते रहेगें

चाहत कुछ भी नहीं है
बस जहाँ भी रहें
अपनी मौज में रहें

यही दुआ है उनकी
चार धाम की यात्रा
साथ कर पाय या ना कर पाए
पर हमारी अंतिम यात्रा में
वो शामिल हो जाएं
ये ही आखिर ख्वाहिश है हमारी

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तुम मुझे नहीं समझते…….!!!!

May 25, 2021

Shanky❤Salty

“तुम मुझे नहीं समझते”
वो अक़्सर मुझसे कहती थी

ग़र ये बात वो समझ जाते
तो हर दफ़ा यह मुझे नहीं समझाते

कैसे कहूँ मैं
यह समझने की च़ीज है
समझाने की नहीं

यार समझता सब कुछ हूँ
पर समझा नहीं पाता
और रही बात समझने की
तो वो जख्म लगने पर
खुद-ब-खुद समझ आ जाती है…

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अकेलापन……!!!!

May 23, 2021

Shanky❤Salty

अकेलापन जैसा कुछ भी नहीं होता है
ग़र अकेलेपन को तुम महसूस करतें हो तो
यकीनन तुमनें खुद का भी साथ छोड़ा ही दिया होगा

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ओ मेरे यारा…..!!!!

May 21, 2021

Shanky❤Salty

तुझे देखने के लिये ही
मंदिरों में भीड़ लगती है
हमनें तो तुझे
हृदय मंदिर में ही देख लिया है ।

तुझे पाने के लिए लोग काबा गये
हमनें तो तुझे इंसानों में ही देख लिया है ।

कहाँ खोजूं मैं तुझे कहाँ तू नहीं है
वो ज़गह ही नहीं है जहाँ तू नहीं है

खाने वाला भी तू खिलाने वाला भी तू
बरसाने वाला भी तू भीगनें वाला भी तू

सुनने वाला भी तू सुनाने वाला भी तू
जीवन देने वाला भी तू लेने वाला भी तू

ओ सुनने वाले ज़रा मुझ पर यूँ रहम अदा फ़रमा दो
इस काया को मिट्टी में मिला कर मुझे खुद में मिला दो…!!

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जिंदगी रेलगाड़ी सी…..!!!!

May 18, 2021

Shanky❤Salty

ये जिंदगी
कुछ रेलगाड़ी सी हो गई है
कि तुम अभी कुछ वक्त -साल
अपनी ही सीट पर बैठे रहो,

तुम बाहर तो देखो
पर तुम बाहर मत निकलो
क्योंकि बाहर करोना जो है,
तुम खाओ, सो, उठो
और फिर खा कर फिर से सो जाओ,

बस जिंदगी रेलगाड़ी सी हो गई है
सब बैठें हैं अपनी-अपनी सीटों पे,
पर एक दुजे से अनजान हैं,


तुम इंतज़ार करो रेल रूकने का
वरना चार जन भी नहीं मिलेंगे
तुम्हारे जनाजे को उठाने के लिए,


बिलख-बिलख रोएगी तुम्हारी जोड़ी
पर जंगल की लकड़ी भी नसीब नहीं होगी
तुम्हें पंच तत्व में विलीन करने को,


तुम घबराओ नहीं
जल्द ही रुक जाएगी ये रेलगाड़ी
ग़र सब्र के साथ तुम बैठोगे अपनी सीटों पे
हाँ टिकट लेना ना भुलना
राम नाम का
नहीं तो कटने में देर ना लगेगी

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गाँठ…….!!!!!

Shanky❤Salty

May 10, 2021

Shanky❤Salty

गाँठ
चाहे मन में हो
या तन में हो

हकीकत में वो जीने नहीं देते हैं
वक्त है खोल दो गांठ
और खुल कर जी लो

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डूबना……!!!!

May 8, 2021

कोई नहीं चाहता

डूबना

पर ध्यान से जो निकला
वो डूब गया

और जो डूबा
वो सब कुछ पा गया…!!

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मान-अपमान…….!!!!

May 6, 2021

Shanky❤Salty

दुनिया अच्छी नहीं लगेगी
ग़र पीछा छुड़ा अपमान से
भागोगे
पीछे मान के

तो हक़ीक़त में
दुनिया अच्छी नहीं लगेगी
मिला ग़र मान थोड़ा कम तो
मन में उदासी छा जाएगी

मिला ग़र अपमान थोड़ा भी तो
मन में क्रोध की जवाला भड़क जाएगी
यार कैसे समझाऊँ मैं
ये मान-अपमान जह़र की पुड़िया है

ग़र इतना समझ जाओगे तो
दुनिया अच्छी लगेगी

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ख़्वाब लिखा है……!!!!

YourQuote.in

April 24, 2021

Shanky❤Salty

हर पन्ने पर ख़्वाब लिखा है
ज़ख़्मों की स्याही से हमनें
एक किताब लिखी है

ज़ालिम ये दुनिया, ज़ालिम ये ज़हान है
सुना था हमनें हर ज़गह

कितने रहमदिल हैं ये पता किया नहीं हमनें
कपड़े मैले ज़रूर हैं
पर दाग़ नहीं है इसमें…!!

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राम……!!!!!

कौन हैं राम

April 21, 2021

Shanky❤Salty

पाया उसे जाता है राम
जो कहीं खोया है राम
ढूंढा उसे जाता है राम
जो भुलाया है राम
आप कहाँ से आओगे राम
आसमान से टपकोगे राम
या धरती फाड़ आओगे राम
कहीं से नहीं न राम
क्योंकि आप तो हर ज़गह विद्यमान हो राम
चींटी की पुकार हो राम
या मस्जिद कि अज़ान हो राम
आप सब सुनते हो राम
आप तो उर्जा रूप में राम
हर ज़गह हो राम

मैं मर भी नहीं सकता राम
न मैं जी सकता हूँ राम
बस आप में बस सकता हूँ मैं राम
शिव भी मैं ही हूँ राम
शक्ति भी मुझमें ही राम
भक्ति भी मुझमें ही है राम
रावण भी मुझमें ही है राम
मंदिर मूर्ति मस्जिद अज़ान राम
ये सब तो प्रतीक हैं मात्र हैं राम

परछाईं को कोई वास्तविक समझ ले राम
तो यह ना समझी है राम
फ़ोटो को अगर जीवित समझ ले राम
तो क्या करूँ मैं राम
हर किसी की आस्था का प्रणाम है राम
पर आगे भी तो बढ़ना होगा न राम
कब तक तस्वीरों में अटकेगें हम राम
यह संभव नहीं है राम

कि एक ही वक़्त पर हर कोई राम
मंदिर में आपकी पूजा कर सके राम
मस्जिद में बैठ आपको पुकार सके राम
पर यह तो संभव है राम
कि मन मंदिर में बैठ मानस पूजा कर सके राम
शिव रुप में हम शिव की पूजा करेंगे राम
राम रुप में हम राम रस पियेंगे राम
अल्लाह रुप में हम अल्लाह से मिलेंगे राम
हे चिदानंद रुप राम
क्या चढ़ाऊँ मैं तुमको राम

जो सास्वत है राम
उसे कैसे नश्वर अर्पण करूँ मैं राम
चार दीवार के अंदर बैठता हूँ मैं राम
तो चार दीवार ही दिखती है मुझको राम
बाजार में बैठता हूँ मैं राम
तो बाज़ार ही दिखता है मुझको राम
जब राम रुप में बैठता हूँ मैं राम
तो सब राम राम राम ही दिखता है मुझको राम
हद में तुझको ध्याया है राम
तो मानव ही रह गया हूँ मैं राम

बेहद जब तुझको ध्याया है राम
तो तेरा दूत बन कर ही रह गया हूँ मैं राम
अनहद हो कर जब तुझको ध्याया है राम
तो राम रूप में ही ख़ुद को पाया हूँ मैं राम
सब अपने हैं राम
सबके अपने हैं राम
देने में तो आप कंजूसी नहीं करते हो राम
फ़िर हम क्यूँ आपको जपने में कंजूसी कर देते हैं राम
मन नहीं लगता है आपमें हमारा राम
आपको हम ख़ुद से अलग समझते हैं राम

हे राम
अब इच्छा नहीं होती है राम
कि आपको मैं मानव रूप में पूजा करूँ राम
आपको तो आप रूप में ही हो कर पूजना है राम
अब आपको दूध, दही, जल नहीं चढ़ना है राम
आपको तो मन और बुद्धि चढ़ाना है राम
आपको पुष्प और विल्वपत्र क्या चढ़ाऊँ मैं राम
आपको तो सत्व, रज और तम चढ़ाना है राम

आपको क्या भोग लगाऊँ मैं राम
आपको तो प्यार से गले लगाना है राम
क्या दीपक जलाऊँ मैं राम
अब तो आँखों में वो उजाला लाना है राम
जिससे सब कुछ और सबमें राम ही राम दिखे राम
अब क्या कहूँ मैं राम
अब मुझे इससे अधिक कुछ भी नहीं आता है राम
अब मुझे आपको भजना भी नहीं है राम
ना मुख से जपना है राम
ना हाथों से जपना है राम
अब आप हमें भजो न राम
अब हम पायेंगे आपमें ही विश्रा-राम

राम-राम-राम-राम-राम-राम-राम-राम-राम-राम

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ओ राम…….!!!!!

April 18, 2021

Shanky❤Salty

मुस्कुराने की कला सिखाते है राम
ग़म का ज़हर पीना सिखाते है राम
भूत और भविष्य कि गोद त्यागना सिखाते है राम
वर्तमान में बैठना सिखाते हैं राम
काया-माया छोड़ना सिखाते हैं राम

राम होकर राम में जीना सिखाते हैं राम
स्वाद ज़िन्दगी का चखना सिखाते हैं राम

सुनो ना राम
लिखूँ मैं कैसे तुझपे राम
समझते क्यूँ नहीं हो तुम राम
कैसे लिख दूँ मैं तुझपे राम

तुझ तक मेरी बुद्धि नहीं पहुँच पाएगी राम
वहां तक शब्द मैं कैसे पहुँचाऊ राम
तुम तो अबाधित हो मेरे राम
शब्दों से कैसे बाँधू मैं तुझको राम

ध्यान में लीन हैं मेरे राम
भूखा नहीं है प्यासा नहीं है मेरा राम
तृप्त है मेरा राम
क्या अर्पण करूँ मैं तुझको राम

कोई धाम नहीं है बिना तेरे मेरे राम
हर एक के अंतःकरण में बसता है मेरा राम
सौगंध तेरी खाता हूँ मैं राम
भर भर प्याला पीता हूँ नाम तेरा मेरे मैं राम

सच कहता हूँ ज़िन्दगी सुधरता है मेरा ओ प्यारे राम
पता नहीं ओ मेरे प्यारे राम
क्यों आँखों से पानी छलकता है राम
जब जब जिक़्र होता तेरा है राम
पावन सा तेरा है नाम राम

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कुछ तो बात है……!!!!

April 15, 2021
Shanky❤Salty

कुछ तो बात है
श्मशानों में इतनी भीड़ क्यों है?
जंगल की लकड़ियाँ क्यों कम पड़ रहीं हैं?

कुछ तो बात है
प्रकृति का ऐसा ही वास्तविक रूप है?
या फिर यह हमारे कर्मों का फलस्वरूप है?

कुछ तो बात है
कहीं पर चुनाव जीतने की होड़ है
तो कहीं पर ज़िंदगी हार रही है

कुछ तो बात है
एक वक्त था जब मन में फासलें थे
अब तो हकीकत में भी फासलें हो गयें हैं

कुछ तो बात है
धन हमनें लाखों – करोड़ों में कमाया
पर हमनें मन से छल – क्रोध को छोड़ नहीं पाया

कुछ तो बात है
खाने को दो रोटी नहीं है
पर अल्लाह के लिए बकरी तैयार रखें हैं

कुछ तो बात है
कुंभ के गंगा में भीड़ तो है
पर ज्ञान की गंगा खाली ही है

कुछ तो बात है
कितनी भयावह परिस्थिति है
कि चार जन भी नहीं मिल रहें
अपने को कंधा देने की खातिर

कुछ तो बात है
जंगल की लकड़ियाँ कम पड़ रहीं हैं
यह रौद्र रूप नहीं है प्रकृति का
है यह केवल चेतावनी
पिछले वर्ष कोरोना करूणा में थी
अबको-रोना ही है
वक्त है संभल जाओ
वरना इससे भी भयावह स्थिति
उतपन्न हो सकती है
खै़र
कुछ तो बात है…….!!!!!!

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Review by Nidhi Gupta……!!!!

April 09, 2021
Shanky❤Salty

इस किताब में हमारे आराध्य रामजी के विषय में विस्तृत रूप से बताया गया है, यह एक कवि और उसके आराध्य के बीच का वार्तालाप है, इसमें कवि का कोमल ह्रदय छलकता है, वह अपने राम जी को हर जगह हर वक़्त पाता है, उसे अपनी मृत्यु की भी चिंता नहीं है क्योंकि वह राम राम करते हुए ही मरना चाहता है, कवि का विश्वास है की राम राम करने से चौरासी योनि का जो चक्र है वह टूट जायेगा और उसे मोक्ष प्राप्त हो जायेगा, कवि ने अपने इस किताब में अपने आराध्य रामजी और खुद को दोस्ताने रिश्ते को भी बतलाया है और एक दास के रिश्ते को भी बताया है। इस किताब को पढ़ने के बाद हमे राम जी के संम्पूर्ण जीवन का ज्ञान हो जाता है, कवि राम मंदिर के कारण हुए राजनीति और दंगा फसाद के कारण बहुत दुखी है, वह राम मंदिर के नाम पर राजनीति करने वाले से बहुत नाराज है। कवि अपने मन की हर एक बात जो वह अपने राम जी से कहना चाहता है उसने अपने इस किताब में खुल कर लिखा है, आप इसे एक संवाद के रूप में जब पढेगें तब आपको यह समझ में आ जायेगा की कवि कितना मासूम है, वह अपनी हर एक बात अपने आराध्य रामजी से कैसे कहता है। कुछ पंक्तियाँ कवि ने कुछ इस तरह से लिखीं हैं जो बहुत ही गहरी हैं। आप सभी को यह किताब अवश्य पढ़ना चाहिए ताकि आपको रामजी के विषय में और भी जानकारी हो।

Book review by Ziddy Nidhi
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Book Review……!!!!!

April 04, 2021
Shanky❤Salty
Harina Pandya has given review of my book “सच या साजिश
👇
I will recommend this book to know about our culture and civilisation..it is not just about one or two concepts..it covers each and every aspect about our saints, religion, society in today’s era, history, lifestyle and much more..book provides detail information about our sanskriti amazingly.
To read my book click here
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होली…….!!!!!

March 28, 2021
Shanky❤Salty
होली हुई या हो गई है
या होनी बाकी है अभी
या हो रही है
ज़रा बतलाओ मुझको,
लकड़ियों के ढ़ेर को जलाया
या होलिका को जलाया
ज़रा बतलाओ मुझको,
पापिन, अविद्या को जलाया
या राघ, द्वेष को जलाया
ज़रा बतलाओ मुझको,
सीमित रह कर होली मनाया
या उस असीमित को पार कर होली मनाया
ज़रा बतलाओ मुझको,
जहाँ आशा जली नहीं
तृष्णा मिटी नहीं
ईष्या की आग मन में लगी
कैसे मनाई फिर होली
ज़रा बतलाओ मुझको,
वक्त बीता और मुख में अग्नि पड़ी
यार कैसे मनी होली
वो रंग ही क्या जो चढ़ कर उतर जाए
लाल से रंगा
पीले से भी रंगा
और हरे से भी रंग लिया
पर वह तो पानी से धुल गया
फिर कैसे मनी होली
ज़रा बतलाओ मुझको,
सुनो ना राम
अरे हाँ श्याम
तुम मुझे अपने ही रंग में रंग दो ना
ज्ञान के रंगों से
माधुर्य के रंगों से
वात्सल्य के रंगों से
चढ़ा दो मुझ पर श्याम ऐसा रंग
जो कभी ना उतरे
अज्ञान मिटा ज्ञान का रंग लगा दो ना
मोहन मुझे अपने ही रंग में रंग दो ना
ये रंग और कहीं नहीं मिलेगा,
जैसे मेहंदी के हरे पत्ते में ही लाली छुपी है
वैसे ही हमारे भीतर ही सब कुछ है
बस यह होली खुद से खेलों
फिर तो हर क्षण होली है

Written by:- Ashish Kumar
My words are incomplete without support of Ziddy Nidhi
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कौन हैं राम…….!!!!

March 26, 2021
Shanky❤Salty
मैंने एक किताब लिखी है जिसे आप देख महसूस करेंगे की यह किसी विशेष धर्म, संप्रदाय, जाति, मज़हब के लिए है लेकिन ये सत्य नहीं है, यह किताब पूरी मानव जाति के लिए है। इस किताब में राम शब्द का प्रयोग एक उर्जा के तौर पर किया गया है जो हर ज़गह विद्यमान हैं। वह उर्जा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह में भी है और शिवजी में भी है,
जिसे आजकल की साईंस ने भी माना है
“गौड पार्टीकल” के रूप में।
मेरा किताब लिखने का एक ही मकसद है की जाति, मजहब, धर्म, रंग, भेद,…आदि को ख़त्म कर उस एक पर ध्यान देना।
दिखते तो यहाँ पर सब अलग अलग हैं पर हैं तो सब एक ही ना।
फ़िर यह ईर्ष्या राघ द्वेष क्यों और किससे..!!!
राजा हो या रंक असली औकात तो श्मशान में दिख ही जाती है
फ़िर जीते जी यह बाहरी दिखावा क्यों।
कुछ वास्तविकता को मैंने लिखा है जिसे लोग जान कर भी अनजान बनें हैं।
जिस्म और रूह की सत्यता को मैंने स्पष्ट रूप से लिखा है।
राम होकर राम को भजना है।
इस किताब का उद्देश्य अपने भीतर छुपी आत्मचेतना को जगाना है।
किसी भी चीज़ का नशा एक-न-एक दिन उतरना ही उतरना है।
रात को पियो तो सुबह
सुबह को पियो तो रात
उतर ही जाता है।
राम नाम का प्याला पी कर के तो देखो।
राम नाम का नशा कर के तो देखो वचन है मेरा आपको इससे सारी ज़िन्दगी सुधर जाती है
राम जी ही तो सरस्वती जी के रूप में मेरी जिह्वा पर विराजमान हैं
और मेरी कलम को एक नई सोच देते हैं।
मैं उन्ही राम जी के अंश राधा अग्रवाल जी और निधि गुप्ता “जिद्दी” जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिन्होंने मेरे लिखे इस लेख को जो राम जी को समर्पित है
को सही किया है इसे सुंदर बनाया है।
हरिणा पंडया जी और निधि गुप्ता “जिद्दी” ने इस किताब को लिखने में मुझे सहयोग दिया है।
राधा अग्रवाल जी ने मेरी इस किताब का शुद्धिकरण किया है।
सचिन गुरुरानी ने मेरी किताब के लिये डिजाइन तैयार किया है।
मैं इन सभी को तहेदिल से धन्यवाद करता हूँ।

मेरी किताब पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
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वो खड़ी थी…….!!!!

March 19, 2021
Shanky❤Salty
मृत्यु दरवाजे पर आ खड़ी थी राम
पूछा उसने मुझसे राम
क्या किया तुने जीवन में राम
हैरान परेशान हो गया मैं राम
सोने में रात बिता दी थी मैंने राम
खाने में दिन भी गुजार दिया था राम
तेरे नाम का हिसाब दे नहीं पाया मैं राम
फ़िर क्या राम
खोल मुट्ठी मेरी उसने दी राम
चौरासी के चक्कर में उसने धकेल मुझको दिया राम
जीवन मेरा मैंने यूँ हीं गवां दिया राम
सोने का कटोरा रख कर मैंने राम
भीख ही माँगी राम
घाट श्मशान का हो राम
या मणिकर्णिका घाट हो राम
हिसाब तो होगा ही राम
चिड़िया भले ही चुग खेत क्यों ना गई राम
नुकसान तो मेरा ही होगा राम
निंदा करता रहा मैं राम
मुझसे बड़ा निंदक मिला नहीं मुझको राम…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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Truth Or Conspiracy……!!!!

February 24, 2021
Shanky ❤Salty

My fifth book has been published on February 16, 2021. I have written some of my experiences in this book. And some such untold story by our Indian media or paid media or fabricated media. This book is written for the mature reader. Its purpose is not to hurt anyone’s feelings. Neither is it in favor or opposition to any person, society, gender, creed, nation or religion. These are my own views.

In this book you read about:-

  • Some Cultures Of The World
  • Culture Of India
  • Indian Saint

  • What Is The Purpose Of The Saint?
  • Gautam Buddha
  • False Accusations On Gautam Buddha
  • Jayendra Saraswati Shankaracharya
  • False Accusations On Jayendra Saraswati Shankaracharya
  • Asaram Bapu
  • Parliament Of World Religion
  • Scientific Conclusion Of Asaram Bapu Aura
  • Women Empowerment
  • Divine Baby Rites
  • Stop Abortion Campaign
  • Cesarean Delivery
  • Spiritual Awakening Campaign
  • Prisoner Uplift Program
  • Vrinda Expedition
  • Tribal Welfare
  • Gurukul
  • Valentine’s Day
  • Protection Of Cows From Slaughterhouses
  • The Main Reason Why Asaram Was Targeted
  • False Accusations On Revered Bapuji
  • What Are People Saying
  • Attack On Hinduism

I offer my gratitude to God. Those who inspired my writing. I thank you to my mother Pramila Sharan. Without her blessings, the existence of this book was difficult. I’m grateful to the writers, readers & critic bloggers who helped to make my writing the best. I would also like to thank you to Radha Agarwal, who helped me and did a proof reader. I thank to Rekha Rani ma’am for helping me in this book. Who raised the respect of my creation with their thoughts. Also, my heartfelt thanks to those who helped to write this book.
Hope that by reading this book, you will try to understand and appreciate my point of view. And give your feedback.
My book is available on Amazon & Notionpress

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सिखा दो न…..!!!!

February 21, 2021
Shanky❤Salty
ग़म के आँसू भी तो हला-हल कि तरह है ना शिव जी
आप हमें भी पीना सिखा दो न शिव जी
हर परिस्थिति में हमें भी मुस्कुराना सिखा दो न शिव जी…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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अयोध्या वासियों से अनुरोध…….!!!!

February 10, 2021
Shanky ❤Salty
बड़ा व्याकुल है मन हमारा
कभी सम्मान ना मिला
हमारी माँ सीता जो को
आपकी अयोध्या जी में
ब्याह कर के आईं थीं हमारे राम जी से
षड्यंत्रों का शिकार हो वनवास को गई हमारी माँ
अग्नि परीक्षा तक देना पड़ा हमारी माँ को
फ़िर भी चैन ना मिला आपके अयोध्या वासियों को
क्या से क्या कह गए हमारे राम जी को
त्याग सीता को प्रजा का सम्मान रखा राजा रामचंद्र जी ने
है विनती मेरी आपके मोदी जी से
बनवावें रामलला का भव्य मंदिर
पर वो सम्मान लौटावे जो प्रेम किया था हमारे राम जी ने हमारी माँ सीता जी से…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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मेला है या खेला है……!!!!

January 18, 2020
Shanky❤Salty
सबको नंगा आना है
पावन गंगा के तट पर ही जाना है
वो चले गए हैं
मुझे जाना बाकी है
कुछ को अभी आना बाकी है
सच कहूँ तो
दो दिन का मेला है
ज़िंदगी का यही खेला है
बाँध मुठ्ठी आना है
कमा-कमा कर झोली भरना है
खोल मुठ्ठी तो सबको जाना है
जो कुछ भी खोया या पाया है
सब कुछ ही तो कर्मों का खेला है
सबको तू अपना मान बैठा है
पर चिता पर लेटना अकेला है
यारा कहा था ना
दो दिन का मेला है
ज़िंदगी का यही खेला है…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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हाथों में पतंग लेकर…….!!!!

January 14, 2021
Shanky❤Salty
खुशियाँ किसी चीज या वस्तु की मोहताज़ नहीं होती
खुशियों को तो बस बहाना चाहिए
हाथों में पतंग लेकर
आसमान को छूना है
हर ख़्वाब को एक दिन पूरा करना है
ज़िन्दगी कि डोर में प्यार का माँझा हम चढ़ाएँगे
ईर्ष्या की पतंग को काट हम गिराएगें
तिल गुड़ खा कर हर रिश्ते से कड़वाहट हम मिटाएंगे…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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सीख लो……!!!!

January 04, 2021
Shanky❤Salty
ज़िन्दगी जीने की कला सीख लो
मुस्कुरा कर ग़म का ज़हर पीना सीख लो
भूत और भविष्य कि गोद छोड़ वर्तमान में बैठना सीख लो
ज़िस्म को छोड़ रूह में जीना सीख लो
हर हाल में तुम ज़िन्दगी का स्वाद चखना सीख लो…

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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ख़ुद ही खुदा…….!!!!

December 02, 2020
Shanky❤Salty
ख़ुदा का काम करते फिरते हो
लगता है इसलिए
दूसरों के कर्मों का
तुम हिसाब लिखते फिरते हो
जरा मेहरबान होकर के
ख़ुद के कर्मों का
भी ग़र तुम हिसाब कर लेते
तो तुम ख़ुद ही खुदा के रूप में पूजे जाते…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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अर्थहीन सी दुनिया…..!!!!

November 26, 2020
Shanky❤Salty
अर्थहीन दुनिया लगती है
ज़िन्दगी भी अब मुझको व्यर्थ सी लगती है
ख़ुद का अस्तित्व ढूंढनें में मुझको असमर्थता सी महसूस होती है
मेरी हर कोशिश ना जाने क्यों व्यर्थ सी होती है
हर पल लोग खफ़ा हो जाते हैं
हर ज़गह हम असफल हो जाते हैं
आँखे बंद करते हीं आँखों से आँसू बह जाते हैं
एक-दूजे से इंसान जलता ही जाता है
मुट्ठी में रेत की तरह समय बीतता जाता है
व्यर्थ की चिंता कर मनुष्य एक दिन अर्थी पर लेट ही जाता है

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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इंसान…..!!!!!

October 2, 2020
Shanky❤Salty
हर इंसान
ये बनूँ
वो बनूँ
एैसा बनूँ
वैसा बनूँ
उसके जैसा बनूँ
के चक्कर में
न जाने क्यूँ
इंसान बनना ही भूल जाता है
और हैवानियत का नंगा नाच कर
पल-दो-पल इंसानियत को शर्मसार करता है

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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मेरी एक और किताब….!!!!

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September 25, 2020
Shanky❤Salty
एक खुश-खबरी….!!!!
सबसे पहले मै महादेव को नमन करते हुए कृतज्ञता ज्ञापन करता हूँ। जिन्हों ने मुझें लेखन की प्ररणा दी। मैं अपनी माँ श्रीमती प्रमीला शरण को आभार देता हूँ। उनके आशीर्वाद के बिना इस पुस्तक का अस्तित्व कठिन था। मैं कृतज्ञ हूँ उन लेखक-पाठकों और आलोचक ब्लॉगरों का, जिन्होंने मेरे लेखन को श्रेष्ठ बनाने मे मदद की। मैं राधा अग्रवाल जी को भी धन्यवाद देना चाहूंगा। जिन्होंने मेरी मदद की और इसका प्रूफ रीडिंग किया। मेरी पुस्तक में मदद करने के लिये मैं रेखा रानी मैम को आभार व्यक्त करता हूँ। जिन्होंने अपने विचारों से मेरी रचना का सम्मान बढ़ाया। इसके अलावा, जिन लोगों ने भी इस पुस्तक को लिखने में मदद मिलीं, उन्हें दिल से धन्यवाद।
मेरी चौथी किताब “सच या साजिश” आज प्रकाशित हो गईं है। इस पुस्तक में भारतीय संस्कृति, भारत कि जड़ें, भारतीय संतों के बारें में, भारतीय संस्कृति पे षड्यंत्र, संतों पर प्रहार के बारे में पढ़ेंगें। इस किताब का उद्देश्य सामाजिक यथार्थ को चित्रित करना, शांति, अहिंसा, सहिष्णुता, दोस्ती, एकता, समृद्धि, खुशी और अखंडता को बढ़ावा देना है। पाठकों को बतलाना है कि भारतीय संस्कृति पर कितनी बड़ी साजिश है और सनातन संस्कृति की वास्तविकता से अवगत कराना है। मैं बहुत ही जल्द अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित करूंगा। आशा है, आपको मेरी पुस्तक पसंद आएगी।
किताब पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
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क्या जतलाना चाहते हो……!!!!

August 3, 2020
Shanky❤Salty
जब तुम खुद से नफरत नहीं कर सकते,
खुद पर गुस्सा नहीं कर सकते,
फिर तुम दूसरों से कैसे गुस्सा कर लेते हो?
कैसे उनसे नफ़रत कर लेते हो?
भूल क्यों जाते हो
तुम हर पल की
जिसने उसे बनाया उसी ने तुम्हें भी बनाया
नफरत कर उनसे तुम,
कहीं यह तो नहीं जतलाना चाहते
की खुदा के बनाये हुए पर
तुम ऊँगली उठाना चाहते हो

Written by:- Ashish Kumar
My words are incomplete without support of Ziddy Nidhi
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मेरे ह्रदयेश्वर…..!!!!

July 8, 2020
Shanky❤Salty
सुनो ना नाथ जी
कहते हैं मुझको ये लोग
लिखुं मैं तुझपे
समझते क्युं नहीं है मुझको ये लोग
कैसे लिख दूं मैं उनपे
जिन तक बुद्धि नहीं पहुँच सकती
वहां तक मैं शब्द कैसे पहुँचाऊं
जो अबाधित है हर चीज से
उन्हें मैं शब्दों से कैसे बाँध सकता हूँ
जो ध्यान में लीन हैं
उन्हें मैं कैसे ज्ञान में ला सकता हूँ
जिन्हें न भूख है न प्यास है
उन्हें मैं कैसे कुछ भी अर्पण कर सकता हूँ
जिनका न कोई नाम है न कोई धाम है
उन्हें मैं कैसे जान सकता हूँ
देखा है मैंने
भाँग पीने से
नशा चढ़ता है
ठीक उसी प्रकार
तेरा नाम मेरे अंतः में बसता है
पर तेरी सौगंध खा कहता हूँ मैं
भोले बाबा के नाम से ही सारी ज़िंदगी सुधरता है
पता नहीं मेरे ह्रदयेश्वर
तुने मुझको क्या पिलाया है
तेरे नाम के जिक्र से ही
मेरी आँखों से पानी छलकता है
है पावन ये सावन मेरे प्रभु
कहते है लोग मुझको ना जाने क्यों
सुनों जाओ बाबा के मंदिर तुम
पर कैसे बतलाऊं मैं उनको यह
कि तुम मन कि चौखट पर आ बैठते हो
होती है तकलीफ जमाने को
चढता है जब तुझपे दूध तो
कर मन मंदिर में अभिषेक तुम्हारा
हम धारा अश्रुओं से
हो जाते हैं पल-दो-पल के लिए मौन,
ओ मेरे देवा
सुनो ना,
हाँ हाँ महादेवा
अब खुश हो न
जरा बतलाओ ना उनको
ना तो जन्म उसका ना ही मरण है उसका
फिर यह आशीष शरणागत है उसका

A topic suggested by
Priyanshi Dubey, Golden Moon
And a few more.
Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Dr. Sakshi Pal
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समझा दो न मुझको…..!!!!

June 4, 2020
Shanky❤Salty
हमें गिरना तो पसंद नहीं है
पर दूसरों को गिरा कर
खुद उठने में मजा बहुत आता है
पर एक बात समझ नहीं आती मुझे कि
फिर हमें गर्व किस बात पर होता है?

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Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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ज़िंदगी जी कर जाना मैंने….!!!!

April 15, 2020
Shanky❤Salty
जिन्दगी जी कर जाना मैंने
क्या कमाल के हैं कुछ लोग
ज़िंदगी बदलने का वादा कर
खुद ही बदल जाते हैं

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
Published by:- Anonymous
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इश्क था आखिर……!!!!

February 23, 2020
Shanky❤Salty
रात की खामोशी में,
उस घोर अंधेरे में,
हल्की सी चांदनी के बीच,
उसकी आंखें सच कहती रहीं,
और मैं उसके
लबों का झूंठ,
सुनता रहा,
इश्क था आखिर,
आंखो में उतर ही आया।

ना अल्फ़ाज़ मेरे हैं,ना ही जज्बात, बस अल्फाजों की कद्र है, इसलिए नाम मेरा है, और जो मेरा है वो हीं तेरा है
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म़जाक या फिर रिश्ते….!!!!

January 24, 2020
Shanky❤Salty
कहीं भी घर बना लो
कहीं भी रिश्ते बना लो
या यूँ कहूँ तो
ज़िन्दगी का तुम मज़ाक बना लो
मालूम है न तुम्हें
सारे रिश्ते हैं झूठे
साँस रुकते ही टूटे
फिर-भी हम कभी-भी कही-भी किसी से भी
रिश्ते बना लेते हैं….मन मंदिर में घर बना लेते हैं
बेटा-बाप का नहीं हो पाता है
बेटी-माँ की नहीं हो पाती है
शिष्य-गुरू का नहीं हो पाता है
दोस्त आस्तीन का साँप बन कर रह जाता है
क्या कहूं मैं ???
बाप, बेटे में कैसी ये दूरी है
माँ, बेटी में कैसी ये मजबूरी है
राह चलते हम रिश्ते बना लेते हैं
पर खून के रिश्ते हम क्यों नहीं निभा पाते हैं
क्यूँ हम
अक़्सर एहसासों के रिश्तों को ही सच्चा मान लेते हैं…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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अरी ओ लाडो…..!!!!!

January 7, 2020
Shanky❤Salty
अरी ओ लाडो
सुन ना
जल्दी से तैयार हो जा ना
लड़के वाले तुझे देखने आने वाले हैं
दिल से कहूँ तो लाडो
लड़के वाले तुम्हारी बोली लगाने आने वाले हैं
बिकते देखा है बज़ारों में समानों को
आज देखूंगा एक बाप की अमानत को
ज़िन्दगी भर की मेहनत से संजोयी पूंजी लड़की का बाप
सर झुका कर लड़के के बाप के सामने
दहेज के थाल में परोसेगा
चंद दिनों बाद वो अग्नि के फेरे लगायेगी
चंद महीनों बाद वो अग्नि में ख़ुद को जलायेगी
सुना है ना
चिड़िया होती है लडकियाँ
मगर पंख नहीं होते लडकियों के
मायके भी होते है ससूराल भी होते है
मगर घर नहीं होते लड़कियों के
मायका कहता है, ये बेटियाँ तो पराई है ससुराल कहता है, ये पराये घर से आई है
ये ख़ुदा अब तू ही बता
आखिर ये बेटियाँ किस घर के लिये बनाई
सच कहूँ तो धन के लालच ने उन्हें पराया बनाया है
क्योंकि बेटियों से बड़ा धन कुछ भी नहीं होता है
हजारों भिखारी देखे होंगे
पर दहेज माँगता भिखारी देखा है कभी….????

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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अलविदा…..!!!!!

December 24, 2019
Shanky❤Salty
आज सिखा दिया है
ज़िंदगी ने मुझको
खुशियाँ टिक नहीं सकती
ग़म कि कतारे मिट नहीं सकती
भरी अश्कों से मैं
आप सब को अलविदा कहता हूँ
न चाहते हुए भी अब मैं विदा लेता हूँ
पता नहीं हम कब मिलेंगे
सच कहूँ तो
पता नहीं हम कब लिखेंगे

Written by:- Ashish Kumar
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इतना तो तय है……!!!!

December 22, 2019
Shanky❤Salty
इतना तो तय है
जब भी मेरी मौत आएगी
अपने के आँखों में आँसू दे कर ही जाएगी
माना की वो कुछ पल के लिए उदास हो जाएंगें
मेरी भोज में आ कर वो जी भर के खाएंगे
मैं कहता था
ना जाने क्यों ज़िंदगी मुझे से रूठी है
पर सच कहुं तो
मैं ही ज़िंदगी से रूठ बैठा हूँ
चंद सपने जो मेरे पूरे ना हो पाये
मैं अपनी ही प्यारी ज़िंदगी से युं ही हठ कर बैठा हूँ
खुद के सपने मैं पूरे करने
ना मैं आया था
खुशी के आँसू मैं बाँटने
ना मैं आया था
पर क्या मैं करूँ
एक ही तो दिल
जो तोड़ उसने दिया था
रोता-रोता मैं उसे जोड़ने अकेला बैठा हूँ

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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मैं भुल क्यों नहीं पाता हूँ……!!!!

December 13, 2019
Shanky❤Salty
हजारों रास्तें हैं
इस ज़िंदगी में
पर तेरे संग चला हुआ रास्ता
मैं भुल क्यों नहीं पाता हूँ
न चाह कर भी मैं
निराशा की गोद में क्यों सो जाता हूँ
खिड़की से हर वक्त
उम्मीद कि किरण मुझको है झाकती
मैं उससे आँख मिचौली खेल कर रह जाता हूँ
माना की नींद मुझसे रुठी है
पर क्यों मुझसे ही सारे रिश्ते टूटे हैं
जब से तुम गईं हो
बहुत कुछ कह कर मुझको
हकीकत कहता हूँ मैं तुझको
आये तो कई लोग ज़िंदगी में
दर्द को जानने
क्या पता था मरहम के जगह में
खुरेद चले जाएंगे मेरी ज़िंदगी को
विश्वास कर बैठा था हर किसी पर
क्या पता था घात कर जाएंगे मेरे विश्वास पर
एेसा नहीं है की तुम्हारे जाने से
सब कुछ खत्म हो गया है
बस कुछ खाली सा रह गया है
थक सा गया हूँ मैं इस ज़िंदगी से
बस दिल चाहता है
खोल मुट्ठी लेटने को जी चाहता है
हाथ जोड़ सबको अलविदा मैं कह दूं
इस ज़िंदगी से विदा अब मैं ले लूं

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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धुंधली यादें……!!!!

December 11, 2019
Shanky❤Salty
तुझे सोचने का मजा ही कुछ और है
तेरे ना होने की सजा मुझे मिलना अभी और है
तेरी बातें सुन कर सोने का मजा ही कुछ और है
तुझे याद कर रोने की सजा मुझे मिलना अभी और भी है
तेरी झूठी आस रखने का मजा ही कुछ और है
तुझे चाहने की सजा मुझे मिलना अभी और है
तेरी वफा का मजा ही कुछ और है
मेरा जिन्दा रह कर मरना अभी बाकी है
सच कहुं तो
मेरी बेवफाई की सजा अभी कुछ और है

Title credit:-SG16
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
Written by:- Ashish Kumar
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श्रीमद्भागवत गीता…..!!!!

December 8, 2019
Shanky❤Salty
शरीर कि मलिनता दूर करने के लिए
नित-प्रतिदिन नहाना जरूरी है
वैसी हि
ह्रदय कि मलिनता दूर करने के लिए
नित-प्रतिदिन “गीता” के ज्ञानरूपी
सागर में डुबकि लगाना जरूरी है
  • गीता केवल एक ग्रंथ या पुस्तक नहीं है अपितु जीवन जीने कि कला है।
  • गीता ऐसा अद्भुत ग्रंथ है कि थके, हारे, गिरे हुए को उठाता है, बिछड़े को मिलाता ह, भयभीत को निर्भय, निर्भय को नि:शंक, नि:शंक को निर्द्वन्द्व बनाकर नारायण से मिला के जीवन का उद्देश्य समझाता है।
  • विश्व की 578 भाषाओं में गीता का अनुवाद हो चुका है।
  • हर भाषा में कई चिन्तकों, विद्वानों और भक्तों ने मीमांसाएँ की हैं और अभी भी हो रहीं हैं, होती रहेंगी।
  • इस ग्रंथ में सब देशों, जातियों, पंथों के तमाम मनुष्यों के कल्याण की अलौकिक सामग्री भरी हुई है।
  • भोग, मोक्ष, निर्लेपता, निर्भयता आदि तमाम दिव्य गुणों का विकास करनेवाला यह गीताग्रंथ विश्व में अद्वितीय है।
  • स्वामी विवेकानंद जी तो श्रीमद्भगवत गीता को “माँ” कहा करते थे।
  • मदनमोहन मालवीय जी श्रीमद्भगवत गीता को “आत्मा कि औषधि” कहा करते थे।
  • श्रीमद्भगवत गीता किसी धर्म, जाती, समुदाय, मजहब का पुस्तक नहीं है अपितु यह संपूर्ण मानव जाती के लिए है।
  • श्रीमद्भगवत गीता वह ग्रंथ है जिसने युद्ध के मैदान में अर्जुन को योग कि कला सिखा थी।
  • श्रीमद्भगवत गीता वह ग्रंथ है जो हमें सिखाती है “सुख टिक नहीं सकता और दुःख मिट नहीं सकता”
  • मुझे लगता है कि गीता को हाथ में रखकर कसमें खाने से कुछ नहीं होगा अपितु गीता को हाथ में रखकर पढ़ना होगा।
  • ज़िंदगी कि एैसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान श्रीमद्भगवत गीता में ना हो एैसा मेरे विश्वास है।
हम सब ईश्वर से प्रार्थना तो करते है

 

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।

 

 

सर्वे सन्तु निरामयाः।

 

 

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।

 

 

मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥

 

 

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

 

हिन्दी भावार्थ:

 

सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी का जीवन मंगलमय बनें और कोई भी दुःख का भागी न बने।

 

 

हे भगवन हमें ऐसा वर दो!

 

पर यह संभव तभी है जब श्रीमद्भगवत गीता को जीवन में अपनायेगें।
बस जीवन में एक बार पढ़कर देखो “मोहब्बत कि बरसात ना हो गईं तो कहना”

Written by:- Ashish Kumar
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बड़ा भाई……!!!!

November 30, 2019
Shanky❤Salty
मैं तुमसे रूठ कर बैठा हूँ
तुम मुझसें रूठ कर बैठे हो
मैं तुमको मनाता नहीं हूँ
तुम मुझको मनाते नहीं हो
मैं हर वक्त तुमसे जीतता हूँ
तुम हर वक्त मुझसे हारते हो
मैं तुम्हें जब भी बुलाता हूँ
तुम आ नहीं पाते हो
जो भी हो तुम देख नहीं पाते मेरी तकलीफ को
गले जब भी तुम लगाते थे
मेरे मुरझाये चेहरे मुस्कुरा जाते थे
सच कहूँ जो मैं तो आँखों से आँसू छलक जाते थे
वो चार साल मैं कॉलेज में सीना तान मस्ती करता था
हर छोटी-बड़ी कांड कर तुझको ही तो फोन करता था
तुम्हें कुछ शिकायत रहती मुझसे
मैं फोन नहीं उठाता, दुनिया से कट कर रहता
उन शिकायतों को तो मैंने सिर्फ तुम्हारे लिए दूर कर दिया
पर तुम्हारी नौकरी ने हम दोनों को दूर कर दिया
मेरी ज़िंदगी के पहले शख़्स तुम ही थे जिसने मुझे पुरा बॉक्स मिल्कीबार का दिया था
तुम्हारे इस साल के जन्मदिन में बधाई ना देने वाला इंसान मैं ही होऊगां
तुम्हें तुम्हारा जन्मदिन पसंद नहीं
और मुझे तुम्हारा जन्मदिन ही सबसे अधिक पसंद
क्योंकि तुम्हारा जन्मदिन ना होता तो तुम मेरे बड़े भाई ना होते।
आपको पता है मेरे एक दोस्त अंकित ने कहा था बड़े भाई पर लिखना। पर भाई सच कहुं तो बड़ा कठिन है उन बीते हुए यादों को समेट कर शब्दों में पिरोना।
छोड़ों अब मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूँगा
बस
तुम हर वक्त मुझसे परेशान ही होते हो
पर समझते नहीं हो
मोहब्बत जब जोर पकड़ती है
ना तो शरारत का ही रूप लेती है

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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One More Time…..!!!!

November 21, 2019
Shanky❤Salty
Do not give up
Even if you fail
Try one more time
Just one more
I’m sure
You will definitely get success
गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में
वो तिफ़्ल क्या गिरे जो घुटनों के बल चले

Written by:- Ashish Kumar
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क्यों मैं निःशब्द हो जाता हूँ….!!!!

November 18, 2019
Shanky❤Salty
हम अजनबी थे ना….”बोलो ना हाँ”
हम जानते थे एक दूसरे को…..”बोलो ना नहीं”
फिर क्यों साथ चल दिये मेरे….???
एक ही ब्रान्च में थे इसलिए
या कोई स्वार्थ था इसलिए
या किसी ने कुछ कहा था इसलिए
है कोई जवाब
अच्छा छोड़ो ये सब
चलो कुछ और बता दो मुझे
भूख लगती थी मुझे तो तुम डाँटते क्यों थे
फिर रात को खाना खिलाने भी ले जाते थे
माना कि मैं एक-दो रोटी से ज्यादा नहीं खा पाता था क्योंकि मेरा पेट भर जाता था तुझे खाता देख
चाहे ठंडी हो या गर्मी मेरा ड्राइवर तू ही रहा करता था
हाँ और भी बेहतरीन ड्राइवर थे मेरे पास पर तू शायद ख़ास था क्योंकि तू मुझे अपनी पीठ पर सुलाया करता था
हम दोनों ही थे ना फोर्थ फ्लोर में जो सेमेस्टर के दिनों में बेफिक्र अपनी ही मस्ती में किताबों से दूर रहते थे
शायद अब तुम समझ गये होंगे मैं तुम्हारी ही बातें कर रहा हूँ
पर समझ कर क्या कर लोगे कुछ नहीं ना तो फिर चुप होकर आगे पढ़ते जाओ ना
याद है तुम्हें जब मेरे पेट में दर्द रहता था और मैं अस्पताल जाने में लापरवाही करता था तो तुम ही मुझे डाँट कर अस्पताल ले जाते थे
वो 6 बजे सुबह भी याद होगी ही तुम्हें जब तुमने मेरा पैर खींच बेड से नीचे उतार दिया था और स्कूटी की चाबी लेने नीचे भेजा था
अल्ट्रासाउंड टैस्ट में ले जाने के लिये
अगर नहीं भी याद तो कोई नहीं मुझे सब याद है तुम बस अब चुप होकर पढ़ते जाओ जो मैं लिख रहा हूँ
वो तुम ही थे ना जो मुझ से मिलने अस्पताल आये थे मेरे एक बार बुलाने पर
याद है ना मेरी मम्मी बोली थी की आज इतना ज़्यादा ख़ुश है तुमसे मिलकर
और
उठ कर बैठा है
तुम जब जाने लगे थे तो मैंने तुझे 👍 एैसा इशारा किया था जिसका मतलब तुम नहीं समझे थे कोई नहीं समझा दूँगा तुम आगे पढ़ते तो जाओ
तुम मेरे अस्पताल से छुट्टी वाले दिन भी आये थे ये बात मैं अपनी आखिरी साँस तक नहीं भूल सकता
अगर तुम भूल गये हो तो कल से बादाम खाया करो
शायद तुम ना होते तो मेरे पापा मम्मी की जान निकल जाती मुझे होटल तक ले जाने में तुमने जो मुझे गोद में लिया था भाई उसके लिये ना चाहते हुए भी तुम्हें दोनों हाथ जोड़ धन्यवाद कहता हूँ 🙏
और भी हज़ारों,लाखों पल आये थे जब तुम मेरे साथ खड़े थे या यूँ कहूँ तो तुम मुझे पास थामे थे
वक़्त पड़ने पर तुमने मुझे
पिता जैसी डाँट लगाई है पर तुम पिता तो नहीं हो मेरे
माँ जैसी प्रेम दिखाया है पर तुम माँ तो नहीं हो मेरी
भाई जैसा स्नेह किया है पर तुम भाई तो नहीं हो मेरे
सच कहूँ तो तुझ से कौन सा रिश्ता है नहीं जानता
माना की हम बचपन के दोस्त नहीं हैं पर हमारा बचपना अभी तक गया नहीं है
दोस्त कहता हूँ तुझे पर सच कहूँ तो तुम दोस्त भी नहीं हो मेरे
क्योंकि वक़्त-बे-वक़्त दोस्त भी साथ छोड़ देते हैं
कोई मुझे मिल्कीबार दे,दे या मुझे समौसे खिलाने की बात कर दे तो मैं उससे तुरंत ख़ुश हो जाता हूँ

पर तुझ से ये सब लेने की चाह नहीं है बस तू मुझे कुछ खाता नज़र आ जाये मेरे मुस्कुराने कि वज़ह बन जाती है
तूने कहा था ना सचिन गुरुरानी पे लिख लेकिन मुझे माफ़ करना
मैं उन यादों को छोड़ तुम पर बहुत कुछ लिखना चाहता हूंँ
पर ना जाने क्यों मैं नि:शब्द हो जाता हूँ

तुम अजनबी से कब हमनबी बन गये पता ही नहीं चला…!!
बस भाई बाक़ी फ़िर कभी 😅

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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ज़िंदगी की औकात…..!!!!

November 14, 2019
Shanky❤Salty
किसी की औकात बादशाहों जैसी दिखती
तो
किसी की औकात फकीरों जैसी दिखती
सच कहुं तो ज़िंदगी की असली औकात शमशानों में दिखती

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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50K Views….!!!!

November 9, 2019
Shanky❤Salty
I would like to take a moment and say thank you to all my viewers.

Today, my site has crossed a milestone of 50,000 views. Something I once thought I would never do. But it was not me, it was all of you guys that read my writings and hit the like buttons.

If I wouldn’t get your support guys, I could not have achieved this milestone. So we did it together. You guys deserve a round of applause.
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वो भी क्या वक्त था…..!!!!

November 1, 2019
Shanky❤Salty
वो भी क्या वक्त था
जब एक-दुजे को इश्क था
और
आज एक-दुजे पे श्क है
Written by:- Ashish Kumar

जब मिले थे
तो दर्मियान इश्क़ था
और अब मिले तो शक का फासला है
Written by:- Yasmin Khaan
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कुछ नया करते है….!!!!

October 27, 2019
Shanky❤Salty
घर और मन की साफ-सफाई हो गईं हो तो
चलो ना इस दीपावली कुछ नया करते हैं
रौशन गली-मोहल्ले, चौक-चौराहे तो होंगे ही
वक्त है अब दिल के दीप जलाए रखने का
ज़िंदगी कि कशमकस से थोड़ा वक्त निकालना होगा
अपनों के साथ वक्त बिताना होगा
लक्ष्मी की पूजा कर धन तो कमाना होगा
साथ ही सरस्वती की भी पूजा कर
धन को बुद्धिमता से सदुपयोग करना होगा
बुझ रही हो गर किसी के जीवनदीप तो
लौ खुशी की, बन ज्योति, आनंद की,
चलो उस लौ को अपने हथेलियां बढ़ाकर प्रज्वलित रखना होगा
हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई धर्म से उपर उठ
मानव धर्म को अपनाना होगा
चलो इस दीपावाली कुछ नया करते हैं

Written by:- Ashish Kumar
Thank you so much SG16 for supporting.
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क्या है मेरे पास……???

October 24, 2019
Shanky❤Salty
क्या है मेरे पास ???
दुआ भी दूसरों की
बद-दुआ भी दूसरों की
ज़िन्दगी एक है
क़िरदार अनेक हैं
आएं हैं ये तो पता है
जाना कहाँ है ये तो पता नहीं
बाँध मुठ्ठी आया था
खोल मुठ्ठी जाऊँगा
फ़िर किस बात का ग़ुरुर है मेरे पास ???

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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इज्ज़त…..!!!!

October 19, 2019
Shanky❤Salty
ज़िस्म बेचा करती थी
इसलिए समाज में उसकी कोई इज्ज़त नहीं थी
क्योंकि वह “वैश्या” थी…!!
ज़िस्म खरीदा करता था
इसलिए समाज में उसकी बहुत इज्ज़त थी
क्योंकि वह मर्द था…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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कद्र कहां……!!!!

October 9, 2019
Shanky❤Salty
थोड़े से ऑक्सीजन के बदले हम डॉक्टरों को हजारों रुपए दे देते हैं
लेकिन
पेड़ हमें जीवन भर ऑक्सीजन देते है बदले में हम उन्हें काट देते हैं
किसी ने सच ही कहा था
“कीमत” पैसे की ही होती है
मुफ्त की चीजों कि कद्र कहाँ…!!

Written by:- Sachin Gururani
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
Published by:- Ashish Kumar
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दोस्त और दोस्ती……!!!!

September 26, 2019
Shanky❤Salty

ये दोस्ती भी बड़ी गज़ब की है
ना रंग देखती है, ना ढ़ंग
ना जात देखती है, ना पात
ना उम्र देखती है, ना रूप
जब से मेरे दोस्त मेरी ज़िन्दगी में आये हैं
ग़म मुझे मुड़ कर नहीं देखती हैं…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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ना जाने कब…..!!!!

September 14, 2019
Shanky❤Salty
हज़ारों सवाल मन में लिए बैठा हूँ
पूछें तो पूछें किस से
सब अपने सवालों में उलझे हैं
वैसे तो मैं बुरा बन बैठा हूँ
क्योंकि मैंने सफाइयाँ देनी जो छोड़ दी हैं
ना जानें कब, कैसे, किस से मेरे सवाल हल होंगे
ना जानें कब हम रोते हुए ख़्वाबों को सच करेंगे
और
ना जाने कब हम मुस्कुराकर ज़िन्दगी को जियेंगे…!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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हैवानियत का नाच……!!!!

September 1, 2019
Shanky❤Salty
मर्द बनने कि चाहत में
ना-मर्द का छाप छोड़ गया
उसके लाख ‘ना’ करने के बावजूद भी
वह हैवानियत का नाच करता गया

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- An Incredible writer Yasmin Khan
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समझ में ना आया…..!!!!

August 25, 2019
Shanky❤Salty
कल रात वो आ ही गईं थी
मुझको साथ ले जाने वाली ही थी
दवा ने भी अपना असर है छोड़ा था
दर्द ने जो साथ पकड़ा था
काफी दिनों के बाद मेरे दिल में दर्द उठा था
बाहर पेड़-पौधे बारिश में भीग रहे थे
इधर मैं पसीने से भीगा हुआ था
नींद तो एैसी रुठी थी
दवा लेने के बाद भी मुझसे दुर बैठी थी
हर कोई श्री कृष्ण के जन्म की तैयारियाँ कर रहा था
मैं लेट अपनी धड़कनों को गीन रहा था
पर माँ वो तुम ही थी ना
जिसने श्रीकृष्ण की पूजा छोड़
मुझे गोद में सुलाया था
मेरे दिल पर हाथ रख
“गोविंद हरे गोपाल हरे जय-जय प्रभु दिन दयाल हरे”
गाकर मेरे दर्द को दूर कर रही थी
माँ तेरे थपकियों ने ही मुझको सुलाया था
कल तक चलना तो दूर मुँह से आवाज तक नहीं ले पा रहा था
पर माँ तेरे प्रेम और वात्सल्य में जादू है जादू
देखो ना आज बैठ ये चार पंक्तियाँ लिख रहा हूँ।
ये कैसा है जादू समझ में ना आया
तेरे प्यार ने हमको जीना सिखाया

Written by:- Ashish Kumar
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काश……!!!!!

July 20, 2019
Shanky❤Salty
ये “काश” ही है
जो ज़िंदगी की खुशियों को थामें रखती है
सुनो ना……
हर हाल में खुश होना सीख लो
गम को खुद से दुर रखने कि कला सीख लो

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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1000 Followers……!!!!!

July 17, 2019
Shanky❤Salty
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है कोई…….!!!!!

July 13, 2019
Shanky❤Salty
लोग अल्फाज चुरा लेते हैं
तुम नींद चुरा लेती हो
ऐ खुदा बता मुझे
इस जहां में कौन है जो मेरा दर्द चुरा ले जाये

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
Published by:- Anonymous
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वो आएँगी…….!!!!!

June 5, 2019
Shanky❤Salty
वो आएँगी
पर पता नहीं
कब आएँगी
पर पता है
जरूर आएँगी
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जब भी आएँगी
मुझे खुशियों से भर देगी
जब भी आएँगी
अपनों के आँखें भर देगी
जब भी आएँगी
मुझे नई ज़िंदगी देगी
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उसके आते ही
वादा है सब कुछ छोड़ दूँगा
उसके आते ही
वादा है उसे अपना बना लूंगा
उसके आते ही
वादा है मैं मुस्करा दूँगा
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कब आएँगी
कैसे आएँगी
क्या पहन आएँगी
क्या लेकर आएँगी
किस रूप में आएँगी
पर जरूर आएँगी
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चुपके से आएँगी
या दस्तक दे आएँगी
पर सुनो ना………
वो आएँगी
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पता है ना कौन??????
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अरे वही यार
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मेरी मौत

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
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फर्क…….!!!!

May 20, 2019
Shanky❤Salty
जब होती हो तुम उदास
तब खेलती हो तुम एक खेल
जब होता मैं उदास
तब खेलता मैं भी एक खेल
बस फर्क इतना है की
तुम खेलती हो खेल जज़्बातों से
और मैं खेलता खेल शब्दों से

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi
Published by:- Anonymous
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There was a girl….!!!!

March 8, 2018
Shanky❤Salty
For himself
Bigger problem were
Standing up & standing
There was a girl,
Girl was a daughter, daughter was a sister, sister was a girlfriend.
Mother was a wife, wife was a daughter-in-law.
And do not even know what as.
But she was not just she
By making the folds of cloths like that
She shut himself down
Inside the door
Like cleaning the house
She’ll broom my houses
Like a cooker sheet
Answer my silence
Like stolen money that
Mocking she
That the whole house of mine is mine
But her own privacy closed in an angle
Not seen anywhere on the ground
When-when she tired
Find herself…..she found………she have been
Bad daughter, bad sister, bad girlfriend.
Bad wife, bad mother, bad daughter-in-law.
Do not know even know what
What are all doors closed
Who is stoping her
Inwardly
Is her privacy so expensive
That she can not buy
Own freedom
By herself
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एक कहानी एैसी भी….!!!!

October 11, 2018
Shanky❤Salty

एक कहानी एैसी भी

जहाँ चंद सिक्कों के लिए

जिस्म बेचा जा रहा है

बात तो हम समलैंगिता कि करते है

पर दोस्ती के पवित्र रिश्ते पे सवाल उठाते है

वैश्यावृति पे बात करते है

पर कोठे पे जा सौदेबाजी करते है

घर पे चुल्हे कि आग जलाने के लिए

रात भर जिस्म को हवस कि आग में वो खुद को जलाती रही

बारिस कि बुंदों में

उसकी आँखों में आँसू देखा है

बच्चों के पेट भरने के लिए

खुद को बजार में बेचते देखा है

उसके शरीर पे चंद खरोचे हि थी

असली जख्म तो दरिंदों ने आत्मा में दि थी

जात-पात कि दुनिया में

वैश्यालयों पे रहती महिलाओं के जात कोई नहीं पूछता

ईश्वर के घर को भी दरिंदों ने नहीं छोड़ा

हवस कि आग में बच्चीयों को जलाकर

दरिंदगीं का छाप है छोड़ा

कच्ची उम्र में वो धंधे पे आईं

हालात कि मार है वो खाईं

हर रात अपनी एक नईं कीमत वो पाईं

उसकी चीख और आँसू भी काम है आते

लोग मुस्कराते हुए पैसे दे जाते

लोगों ने तुम्हें “तोल दिया”

“तुम कहीं भाग गईं” घर वालों नें झूठ है बोल दिया

पर हकिक्त में अपनें नें तुम्हें है बेच दिया

मर्दों में हवस कि आग ना होती

तो घर के बाहर हर बच्चीयाँ महफुज होती

और वह औरत आज तवायफ ना होती

बस इतनी सी ही है लाल बत्ती कि कहानी

Image credit SG16
Special thanks to Shilpa from Meergunj, Allahabad