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यात्रा…..वो भी अंतिम……!!!!

June 17, 2021

Shanky❤Salty

सही समझे
मृत्यु
हाँ मैं मृत्यु के बारे में ही लिख रहा हूँ
वो मृत्यु जो मुझे मार नहीं सकती है
पर हाँ आपको ज़रूर मार सकती है
ग़र आप स्वयं को जीवन समझते हैं तो
मृत्यु उसे ही स्वीकारता है
जो जन्म को स्वीकारता है

ना तो मेरा जन्म हुआ है
ना ही मेरी मृत्यु हो सकती है
ये शरीर का जन्म होता है
तो मृत्यु भी उसी की हो सकती है
हमारी नहीं, कभी नहीं

स्वयं नाथ जी भी हमें नहीं मार सकते हैं
यक़ीनन वो सर्वसमर्थ हैं
पर हमें मारने में कभी भी नहीं
अपनी उर्जा को पहचानों
वो कहते हैं ना अज्ञानता का जीवन किसी मृत्यु से कम नहीं है

महेंदी के पत्ते में ही उसकी लाली छिपी होती है
एक बीज में ही जन्म और मृत्यु छिपा है
मृत्यु एक वस्त्र बदलने की प्रक्रिया है
बस और कुछ नहीं

अर्थ स्पष्ट है मेरे शीर्षक का
इस जीवन की यात्रा
अंतिम होनी चाहिए
कोई कितना भी बुलाए
लौट के नहीं आना है
यह जीवन अनमोल है
व्यर्थ ना गवाओ

मोक्ष की उस स्थिति को जान लो
मर्जी तुम्हारी है
सुख-दुख कि चक्की में पिसना है
या उस चक्की के कील से लग कर
और अपनी यात्रा को अंतिम करना है

अब अलविदा कहता हूँ
कुछ पल के लिए
जो इस आत्मज्ञान से निकला वो तो डूब गया
और जो इस आत्मज्ञान में डूबा वो तो हो गया पार…!!


Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal
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मजबूत रिश्ते…….!!!!

May 14, 2021

Shanky❤Salty

ये रिश्ता बड़ा मजबूत है
बेश़क हमने ही चुना है
जमाने ने जड़ें जरूर काट दी हैं
पर मजबूती से दोस्तों ने थामा ही है

कुछ नए मिलें हैं
तो कुछ पुराने बाकी हैं
शब्दों का मेल है
दोस्त मेरे सच में अनमोल हैं

बारिश का मौसम आ चुका है
तुम भीगना ज्यादा मत इसमें
पर गलतफहमियों की धुल ग़र जमीं हो
तो उसे धो जरूर देना मेरे यार

वो कहतें है ना
यादें बहुत आती है
पर वो वक्त नहीं आ पता है
यकीनन हम झगड़ते बहुत थे
पर दुआओं में भी हम ही थे

वक्त की धुंध में बहुत कुछ छुप जाता है
पर आँखों से ओझल नहीं हो पता है
नासमझ जरूर हूँ
पर समझाना सिर्फ तुम्हीं को आता है

सुख हो या दुख हो
कुछ ने सीढ़ीयों सा इस्तेमाल किया
पर कुछ अभी भी दोस्ती का फ़र्ज़ निभा रहें
हर परेशानीयों का उपाए है उनके पास

दोस्त हैं तो ज़िन्दगी मकबुल है
ना जिस्म की बात होती है
ना ही रूह की होती है
बस ज़िन्दगी को खुल कर जीने की इबादत होती है

ना खुदा ने बनाया है
ना खुद हमने बनाया है
दरसल ये रिश्ता खुद-ब-खुद बन आया है

भावनाओं का जो मेल हो पाया है
निस्वार्थ ही ये रिश्ते निभ रहे हैं
और निभते रहेगें

चाहत कुछ भी नहीं है
बस जहाँ भी रहें
अपनी मौज में रहें

यही दुआ है उनकी
चार धाम की यात्रा
साथ कर पाय या ना कर पाए
पर हमारी अंतिम यात्रा में
वो शामिल हो जाएं
ये ही आखिर ख्वाहिश है हमारी

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तुम मुझे नहीं समझते…….!!!!

May 25, 2021

Shanky❤Salty

“तुम मुझे नहीं समझते”
वो अक़्सर मुझसे कहती थी

ग़र ये बात वो समझ जाते
तो हर दफ़ा यह मुझे नहीं समझाते

कैसे कहूँ मैं
यह समझने की च़ीज है
समझाने की नहीं

यार समझता सब कुछ हूँ
पर समझा नहीं पाता
और रही बात समझने की
तो वो जख्म लगने पर
खुद-ब-खुद समझ आ जाती है…

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अकेलापन……!!!!

May 23, 2021

Shanky❤Salty

अकेलापन जैसा कुछ भी नहीं होता है
ग़र अकेलेपन को तुम महसूस करतें हो तो
यकीनन तुमनें खुद का भी साथ छोड़ा ही दिया होगा

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ओ मेरे यारा…..!!!!

May 21, 2021

Shanky❤Salty

तुझे देखने के लिये ही
मंदिरों में भीड़ लगती है
हमनें तो तुझे
हृदय मंदिर में ही देख लिया है ।

तुझे पाने के लिए लोग काबा गये
हमनें तो तुझे इंसानों में ही देख लिया है ।

कहाँ खोजूं मैं तुझे कहाँ तू नहीं है
वो ज़गह ही नहीं है जहाँ तू नहीं है

खाने वाला भी तू खिलाने वाला भी तू
बरसाने वाला भी तू भीगनें वाला भी तू

सुनने वाला भी तू सुनाने वाला भी तू
जीवन देने वाला भी तू लेने वाला भी तू

ओ सुनने वाले ज़रा मुझ पर यूँ रहम अदा फ़रमा दो
इस काया को मिट्टी में मिला कर मुझे खुद में मिला दो…!!

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जिंदगी रेलगाड़ी सी…..!!!!

May 18, 2021

Shanky❤Salty

ये जिंदगी
कुछ रेलगाड़ी सी हो गई है
कि तुम अभी कुछ वक्त -साल
अपनी ही सीट पर बैठे रहो,

तुम बाहर तो देखो
पर तुम बाहर मत निकलो
क्योंकि बाहर करोना जो है,
तुम खाओ, सो, उठो
और फिर खा कर फिर से सो जाओ,

बस जिंदगी रेलगाड़ी सी हो गई है
सब बैठें हैं अपनी-अपनी सीटों पे,
पर एक दुजे से अनजान हैं,


तुम इंतज़ार करो रेल रूकने का
वरना चार जन भी नहीं मिलेंगे
तुम्हारे जनाजे को उठाने के लिए,


बिलख-बिलख रोएगी तुम्हारी जोड़ी
पर जंगल की लकड़ी भी नसीब नहीं होगी
तुम्हें पंच तत्व में विलीन करने को,


तुम घबराओ नहीं
जल्द ही रुक जाएगी ये रेलगाड़ी
ग़र सब्र के साथ तुम बैठोगे अपनी सीटों पे
हाँ टिकट लेना ना भुलना
राम नाम का
नहीं तो कटने में देर ना लगेगी

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गाँठ…….!!!!!

Shanky❤Salty

May 10, 2021

Shanky❤Salty

गाँठ
चाहे मन में हो
या तन में हो

हकीकत में वो जीने नहीं देते हैं
वक्त है खोल दो गांठ
और खुल कर जी लो

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डूबना……!!!!

May 8, 2021

कोई नहीं चाहता

डूबना

पर ध्यान से जो निकला
वो डूब गया

और जो डूबा
वो सब कुछ पा गया…!!

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मान-अपमान…….!!!!

May 6, 2021

Shanky❤Salty

दुनिया अच्छी नहीं लगेगी
ग़र पीछा छुड़ा अपमान से
भागोगे
पीछे मान के

तो हक़ीक़त में
दुनिया अच्छी नहीं लगेगी
मिला ग़र मान थोड़ा कम तो
मन में उदासी छा जाएगी

मिला ग़र अपमान थोड़ा भी तो
मन में क्रोध की जवाला भड़क जाएगी
यार कैसे समझाऊँ मैं
ये मान-अपमान जह़र की पुड़िया है

ग़र इतना समझ जाओगे तो
दुनिया अच्छी लगेगी

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ख़्वाब लिखा है……!!!!

YourQuote.in

April 24, 2021

Shanky❤Salty

हर पन्ने पर ख़्वाब लिखा है
ज़ख़्मों की स्याही से हमनें
एक किताब लिखी है

ज़ालिम ये दुनिया, ज़ालिम ये ज़हान है
सुना था हमनें हर ज़गह

कितने रहमदिल हैं ये पता किया नहीं हमनें
कपड़े मैले ज़रूर हैं
पर दाग़ नहीं है इसमें…!!

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राम……!!!!!

कौन हैं राम

April 21, 2021

Shanky❤Salty

पाया उसे जाता है राम
जो कहीं खोया है राम
ढूंढा उसे जाता है राम
जो भुलाया है राम
आप कहाँ से आओगे राम
आसमान से टपकोगे राम
या धरती फाड़ आओगे राम
कहीं से नहीं न राम
क्योंकि आप तो हर ज़गह विद्यमान हो राम
चींटी की पुकार हो राम
या मस्जिद कि अज़ान हो राम
आप सब सुनते हो राम
आप तो उर्जा रूप में राम
हर ज़गह हो राम

मैं मर भी नहीं सकता राम
न मैं जी सकता हूँ राम
बस आप में बस सकता हूँ मैं राम
शिव भी मैं ही हूँ राम
शक्ति भी मुझमें ही राम
भक्ति भी मुझमें ही है राम
रावण भी मुझमें ही है राम
मंदिर मूर्ति मस्जिद अज़ान राम
ये सब तो प्रतीक हैं मात्र हैं राम

परछाईं को कोई वास्तविक समझ ले राम
तो यह ना समझी है राम
फ़ोटो को अगर जीवित समझ ले राम
तो क्या करूँ मैं राम
हर किसी की आस्था का प्रणाम है राम
पर आगे भी तो बढ़ना होगा न राम
कब तक तस्वीरों में अटकेगें हम राम
यह संभव नहीं है राम

कि एक ही वक़्त पर हर कोई राम
मंदिर में आपकी पूजा कर सके राम
मस्जिद में बैठ आपको पुकार सके राम
पर यह तो संभव है राम
कि मन मंदिर में बैठ मानस पूजा कर सके राम
शिव रुप में हम शिव की पूजा करेंगे राम
राम रुप में हम राम रस पियेंगे राम
अल्लाह रुप में हम अल्लाह से मिलेंगे राम
हे चिदानंद रुप राम
क्या चढ़ाऊँ मैं तुमको राम

जो सास्वत है राम
उसे कैसे नश्वर अर्पण करूँ मैं राम
चार दीवार के अंदर बैठता हूँ मैं राम
तो चार दीवार ही दिखती है मुझको राम
बाजार में बैठता हूँ मैं राम
तो बाज़ार ही दिखता है मुझको राम
जब राम रुप में बैठता हूँ मैं राम
तो सब राम राम राम ही दिखता है मुझको राम
हद में तुझको ध्याया है राम
तो मानव ही रह गया हूँ मैं राम

बेहद जब तुझको ध्याया है राम
तो तेरा दूत बन कर ही रह गया हूँ मैं राम
अनहद हो कर जब तुझको ध्याया है राम
तो राम रूप में ही ख़ुद को पाया हूँ मैं राम
सब अपने हैं राम
सबके अपने हैं राम
देने में तो आप कंजूसी नहीं करते हो राम
फ़िर हम क्यूँ आपको जपने में कंजूसी कर देते हैं राम
मन नहीं लगता है आपमें हमारा राम
आपको हम ख़ुद से अलग समझते हैं राम

हे राम
अब इच्छा नहीं होती है राम
कि आपको मैं मानव रूप में पूजा करूँ राम
आपको तो आप रूप में ही हो कर पूजना है राम
अब आपको दूध, दही, जल नहीं चढ़ना है राम
आपको तो मन और बुद्धि चढ़ाना है राम
आपको पुष्प और विल्वपत्र क्या चढ़ाऊँ मैं राम
आपको तो सत्व, रज और तम चढ़ाना है राम

आपको क्या भोग लगाऊँ मैं राम
आपको तो प्यार से गले लगाना है राम
क्या दीपक जलाऊँ मैं राम
अब तो आँखों में वो उजाला लाना है राम
जिससे सब कुछ और सबमें राम ही राम दिखे राम
अब क्या कहूँ मैं राम
अब मुझे इससे अधिक कुछ भी नहीं आता है राम
अब मुझे आपको भजना भी नहीं है राम
ना मुख से जपना है राम
ना हाथों से जपना है राम
अब आप हमें भजो न राम
अब हम पायेंगे आपमें ही विश्रा-राम

राम-राम-राम-राम-राम-राम-राम-राम-राम-राम

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ओ राम…….!!!!!

April 18, 2021

Shanky❤Salty

मुस्कुराने की कला सिखाते है राम
ग़म का ज़हर पीना सिखाते है राम
भूत और भविष्य कि गोद त्यागना सिखाते है राम
वर्तमान में बैठना सिखाते हैं राम
काया-माया छोड़ना सिखाते हैं राम

राम होकर राम में जीना सिखाते हैं राम
स्वाद ज़िन्दगी का चखना सिखाते हैं राम

सुनो ना राम
लिखूँ मैं कैसे तुझपे राम
समझते क्यूँ नहीं हो तुम राम
कैसे लिख दूँ मैं तुझपे राम

तुझ तक मेरी बुद्धि नहीं पहुँच पाएगी राम
वहां तक शब्द मैं कैसे पहुँचाऊ राम
तुम तो अबाधित हो मेरे राम
शब्दों से कैसे बाँधू मैं तुझको राम

ध्यान में लीन हैं मेरे राम
भूखा नहीं है प्यासा नहीं है मेरा राम
तृप्त है मेरा राम
क्या अर्पण करूँ मैं तुझको राम

कोई धाम नहीं है बिना तेरे मेरे राम
हर एक के अंतःकरण में बसता है मेरा राम
सौगंध तेरी खाता हूँ मैं राम
भर भर प्याला पीता हूँ नाम तेरा मेरे मैं राम

सच कहता हूँ ज़िन्दगी सुधरता है मेरा ओ प्यारे राम
पता नहीं ओ मेरे प्यारे राम
क्यों आँखों से पानी छलकता है राम
जब जब जिक़्र होता तेरा है राम
पावन सा तेरा है नाम राम

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कुछ तो बात है……!!!!

April 15, 2021
Shanky❤Salty

कुछ तो बात है
श्मशानों में इतनी भीड़ क्यों है?
जंगल की लकड़ियाँ क्यों कम पड़ रहीं हैं?

कुछ तो बात है
प्रकृति का ऐसा ही वास्तविक रूप है?
या फिर यह हमारे कर्मों का फलस्वरूप है?

कुछ तो बात है
कहीं पर चुनाव जीतने की होड़ है
तो कहीं पर ज़िंदगी हार रही है

कुछ तो बात है
एक वक्त था जब मन में फासलें थे
अब तो हकीकत में भी फासलें हो गयें हैं

कुछ तो बात है
धन हमनें लाखों – करोड़ों में कमाया
पर हमनें मन से छल – क्रोध को छोड़ नहीं पाया

कुछ तो बात है
खाने को दो रोटी नहीं है
पर अल्लाह के लिए बकरी तैयार रखें हैं

कुछ तो बात है
कुंभ के गंगा में भीड़ तो है
पर ज्ञान की गंगा खाली ही है

कुछ तो बात है
कितनी भयावह परिस्थिति है
कि चार जन भी नहीं मिल रहें
अपने को कंधा देने की खातिर

कुछ तो बात है
जंगल की लकड़ियाँ कम पड़ रहीं हैं
यह रौद्र रूप नहीं है प्रकृति का
है यह केवल चेतावनी
पिछले वर्ष कोरोना करूणा में थी
अबको-रोना ही है
वक्त है संभल जाओ
वरना इससे भी भयावह स्थिति
उतपन्न हो सकती है
खै़र
कुछ तो बात है…….!!!!!!

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Review by Nidhi Gupta……!!!!

April 09, 2021
Shanky❤Salty

इस किताब में हमारे आराध्य रामजी के विषय में विस्तृत रूप से बताया गया है, यह एक कवि और उसके आराध्य के बीच का वार्तालाप है, इसमें कवि का कोमल ह्रदय छलकता है, वह अपने राम जी को हर जगह हर वक़्त पाता है, उसे अपनी मृत्यु की भी चिंता नहीं है क्योंकि वह राम राम करते हुए ही मरना चाहता है, कवि का विश्वास है की राम राम करने से चौरासी योनि का जो चक्र है वह टूट जायेगा और उसे मोक्ष प्राप्त हो जायेगा, कवि ने अपने इस किताब में अपने आराध्य रामजी और खुद को दोस्ताने रिश्ते को भी बतलाया है और एक दास के रिश्ते को भी बताया है। इस किताब को पढ़ने के बाद हमे राम जी के संम्पूर्ण जीवन का ज्ञान हो जाता है, कवि राम मंदिर के कारण हुए राजनीति और दंगा फसाद के कारण बहुत दुखी है, वह राम मंदिर के नाम पर राजनीति करने वाले से बहुत नाराज है। कवि अपने मन की हर एक बात जो वह अपने राम जी से कहना चाहता है उसने अपने इस किताब में खुल कर लिखा है, आप इसे एक संवाद के रूप में जब पढेगें तब आपको यह समझ में आ जायेगा की कवि कितना मासूम है, वह अपनी हर एक बात अपने आराध्य रामजी से कैसे कहता है। कुछ पंक्तियाँ कवि ने कुछ इस तरह से लिखीं हैं जो बहुत ही गहरी हैं। आप सभी को यह किताब अवश्य पढ़ना चाहिए ताकि आपको रामजी के विषय में और भी जानकारी हो।

Book review by Ziddy Nidhi
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Book Review……!!!!!

April 04, 2021
Shanky❤Salty
Harina Pandya has given review of my book “सच या साजिश
👇
I will recommend this book to know about our culture and civilisation..it is not just about one or two concepts..it covers each and every aspect about our saints, religion, society in today’s era, history, lifestyle and much more..book provides detail information about our sanskriti amazingly.
To read my book click here
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होली…….!!!!!

March 28, 2021
Shanky❤Salty
होली हुई या हो गई है
या होनी बाकी है अभी
या हो रही है
ज़रा बतलाओ मुझको,
लकड़ियों के ढ़ेर को जलाया
या होलिका को जलाया
ज़रा बतलाओ मुझको,
पापिन, अविद्या को जलाया
या राघ, द्वेष को जलाया
ज़रा बतलाओ मुझको,
सीमित रह कर होली मनाया
या उस असीमित को पार कर होली मनाया
ज़रा बतलाओ मुझको,
जहाँ आशा जली नहीं
तृष्णा मिटी नहीं
ईष्या की आग मन में लगी
कैसे मनाई फिर होली
ज़रा बतलाओ मुझको,
वक्त बीता और मुख में अग्नि पड़ी
यार कैसे मनी होली
वो रंग ही क्या जो चढ़ कर उतर जाए
लाल से रंगा
पीले से भी रंगा
और हरे से भी रंग लिया
पर वह तो पानी से धुल गया
फिर कैसे मनी होली
ज़रा बतलाओ मुझको,
सुनो ना राम
अरे हाँ श्याम
तुम मुझे अपने ही रंग में रंग दो ना
ज्ञान के रंगों से
माधुर्य के रंगों से
वात्सल्य के रंगों से
चढ़ा दो मुझ पर श्याम ऐसा रंग
जो कभी ना उतरे
अज्ञान मिटा ज्ञान का रंग लगा दो ना
मोहन मुझे अपने ही रंग में रंग दो ना
ये रंग और कहीं नहीं मिलेगा,
जैसे मेहंदी के हरे पत्ते में ही लाली छुपी है
वैसे ही हमारे भीतर ही सब कुछ है
बस यह होली खुद से खेलों
फिर तो हर क्षण होली है

Written by:- Ashish Kumar
My words are incomplete without support of Ziddy Nidhi
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कौन हैं राम…….!!!!

March 26, 2021
Shanky❤Salty
मैंने एक किताब लिखी है जिसे आप देख महसूस करेंगे की यह किसी विशेष धर्म, संप्रदाय, जाति, मज़हब के लिए है लेकिन ये सत्य नहीं है, यह किताब पूरी मानव जाति के लिए है। इस किताब में राम शब्द का प्रयोग एक उर्जा के तौर पर किया गया है जो हर ज़गह विद्यमान हैं। वह उर्जा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह में भी है और शिवजी में भी है,
जिसे आजकल की साईंस ने भी माना है
“गौड पार्टीकल” के रूप में।
मेरा किताब लिखने का एक ही मकसद है की जाति, मजहब, धर्म, रंग, भेद,…आदि को ख़त्म कर उस एक पर ध्यान देना।
दिखते तो यहाँ पर सब अलग अलग हैं पर हैं तो सब एक ही ना।
फ़िर यह ईर्ष्या राघ द्वेष क्यों और किससे..!!!
राजा हो या रंक असली औकात तो श्मशान में दिख ही जाती है
फ़िर जीते जी यह बाहरी दिखावा क्यों।
कुछ वास्तविकता को मैंने लिखा है जिसे लोग जान कर भी अनजान बनें हैं।
जिस्म और रूह की सत्यता को मैंने स्पष्ट रूप से लिखा है।
राम होकर राम को भजना है।
इस किताब का उद्देश्य अपने भीतर छुपी आत्मचेतना को जगाना है।
किसी भी चीज़ का नशा एक-न-एक दिन उतरना ही उतरना है।
रात को पियो तो सुबह
सुबह को पियो तो रात
उतर ही जाता है।
राम नाम का प्याला पी कर के तो देखो।
राम नाम का नशा कर के तो देखो वचन है मेरा आपको इससे सारी ज़िन्दगी सुधर जाती है
राम जी ही तो सरस्वती जी के रूप में मेरी जिह्वा पर विराजमान हैं
और मेरी कलम को एक नई सोच देते हैं।
मैं उन्ही राम जी के अंश राधा अग्रवाल जी और निधि गुप्ता “जिद्दी” जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिन्होंने मेरे लिखे इस लेख को जो राम जी को समर्पित है
को सही किया है इसे सुंदर बनाया है।
हरिणा पंडया जी और निधि गुप्ता “जिद्दी” ने इस किताब को लिखने में मुझे सहयोग दिया है।
राधा अग्रवाल जी ने मेरी इस किताब का शुद्धिकरण किया है।
सचिन गुरुरानी ने मेरी किताब के लिये डिजाइन तैयार किया है।
मैं इन सभी को तहेदिल से धन्यवाद करता हूँ।

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