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मनुष्यता की मृत्यु….!!!!

June 04, 2023

Shanky❤Salty

भूर्ण हत्या पे एक चोटा सा कटक्ष लिखूँ तो,
शब्दों के धराती पर खूनी छाप छोड़ दूँ।
ये नज़्म गर्व के साथ, बोल रही है ज़हर।
मनुष्यता की मृत्यु को अंधकार में छोड़ दूँ।

बचपन के खेलों को, मासूमियत को जब मारा,
दरिंदगी ने जीवन का सफ़ाया ले लिया।
रिश्ते और सद्भाव ने चूर-चूर हो गये,
मन में सबको जहर और बैरा ले लिया।

कैसे भूलें इस अपराधी को, इस हत्यारे को,
जो सारे इंसानों के जीवन की वास्तविकता चीन ले।
उसकी आत्मा में क्या बसी है इतनी क्रूरता,
की वो इंसानियत से लिखी हर पुस्तक मिटा ले।

बहुत हुई इस दुनिया में हिंसा की आग,
इस मनुष्यता को फिर से जगा लो अपने भीतर।
एक नया सवेरा जगा दो, अहंकार को मारो,
हर इंसान को इंसान बना दो और प्यार दो बेशुमार।


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Female Foeticide…..!!!!

June 03, 2023

Shanky❤Salty

In shadows cast upon a land so fair,
A sinister tale unfolds, an unspoken despair.
Where innocence crumbles, hopes fade away,
In the heart of darkness, a tragedy holds sway.

A land that cherishes daughters so dear,
Yet plagued by a menace that spreads fear.
A whispered secret, a heinous crime,
Female foeticide, a sin of our time.

In womb’s sanctuary, life’s promise blooms,
A precious soul, destined to break through gloom.
But wicked hands, devoid of remorse,
Snatch away futures, taking a gruesome course.

Oh, daughters of tomorrow, silenced in the womb,
Denied the chance to blossom and bloom.
Your laughter, your dreams, forever denied,
In a world where prejudice and ignorance abide.

Let us rise against this cruel plight,
Unite our voices, kindle a righteous light.
For every girl child, a beacon of hope,
In a world that must embrace, not elope.

Educate, empower, and nurture with care,
Celebrate the daughters, let them dare.
Break the chains that bind, with love and might,
For every girl is a guiding star, shining so bright.

Together we stand, with conviction and grace,
Erasing the stain, leaving no trace.
A pledge to protect, to cherish and adore,
The girl child, our future, forevermore.

Let this poem be a reminder, strong and true,
To fight against a crime that should never accrue.
Female foeticide, let it be no more,
In a world where love and equality soar.

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आग में जलती ये जिंदगी…..!!!!

June 2, 2023

Shanky❤Salty

गरीबी की आग में जलती ये जिंदगी,
हर रोज़ सब्र करती, सदा थकी हारी।
महँगाई के तूफ़ान से घिरी,
भूख और प्यास की रोशनी है खरी।

ढलती रातों में उम्मीद की किरण,
चूर-चूर होती अज्ञानता की शहरी।
पैरों में बंधी है वो कंगाली की जंजीर,
मन में बसी है वो चिंगारी की प्यासी लहरी।

गरीबी की धूप में जलते हैं उम्मीद के दिये,
भरोसे की इक आशा, जीवन की दुर्भाग्य वाणी।
दरिया-ए-ग़रीबी में खो गया है सब कुछ,
इंसानियत की बेमिसाल कहानी।

लेकिन गरीबी के पेड़ उगाएंगे जब,
उन पर छाएंगे विजय के सपने।
संघर्ष से जीना सिखाएगी वो,
हिम्मत और मेहनत के मस्ताने।

गरीबी के संग में चमकेगी सूरज की किरण,
जीवन के क्षणों में रंगींगी छापेगी।
गरीबी के बंधनों को तोड़कर,
ख्वाबों की दुनिया में स्वतंत्रता पाएगी।

गरीबी एक अध्याय है जीवन का,
जो सबको सिखाती है मजबूरी का अर्थ।


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सब संभल जाएगा…!!!!

May 29, 2023

Shanky❤Salty

जब रूह को छू लेता है विरह का आगाज,
धरती पर लहराती है अकेलापन की झाँझ।
जब आँखों के सामने होता है तू दूर,
होता है बेबसियों से भरा ये मन अदूर।

बिना तेरे दिल का ज़ज़्बा थम जाता है,
सपनों की दुनिया में अब सिर्फ ख़्वाब रह जाता है।
महकता है हवाओं में तेरी मुस्कान का गुलाब,
पर बेवजह उड़ता है उड़ जाता है ये ख़्वाब।

तू कहीं और है, मेरी राहों से दूर,
मेरे दिल में जगा है तेरा वीरान है नूर।
ख़्वाबों की खिड़कियों पर आता है तेरा सयाही,
लिखता हूँ मैं शब्दों में तेरी यादों की राही।

एक जुदाई का दर्द छिपा है इस गीत में,
अकेलापन के ख़्वाबों की है ये फ़रियादें।
पर ये लड़ रहा हूँ, ख़ुद से अपने दरियादें,
विरह के आगे जीने की दी है मुकाद्दर की हिदायतें।

ख़त्म होगी एक दिन ये तन्हाई की रातें,
फिर मिलेगी जब तू, बन जाएगा सब बदलती हालतें।
पर जब वो दिन आएगा, मेरे दिल का विरह तू छेड़े,
तभी फूलों की महक, चांद की रौशनी सब लौटेंगे।

विरह की यात्रा में मैं रह रहा हूँ खोया,
अपनी कल्पनाओं के संग खुद को पाया।
प्रतीक्षा के साथ दिल कर रहा है विरह गाना,
चाहत की लहरों में खुद को समा रहा हूँ आपके आगामन की मन्दाना।

तेरे बिना ये दिन सूने, रातें बेबसी में ढली,
तेरी यादों के बंद सितारे रूठे हुए रहे ज़मीन पे।
पर जब तू आएगा, बनेगा आशा का आभास,
फिर ये विरह का मनमोहक अकेलापन चला जाएगा हवासे।

विरह की कठिनाइयों से है मेरा दिल जूझ रहा,
पर यकीन रखता हूँ, तू आएगी, सब संभल जाएगा।


Inspired from this post 👉 प्रेम


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हैप्पी मदर्स डे

May 14, 2023

Shanky❤Salty

“हैप्पी मदर्स डे”
वे लोग भी कह रहें हैं
जिनके मुँह से दिन-रात
दुसरों की माँ के लिए गाली ही निकलती हैं
गज़ब का गिरगिटपना हैं जमाने में


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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ….!!!!

May 13, 2023

Shanky❤Salty

“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ”
फिर उसके पैरों में बेड़ीया डाल उसके ख्वाहिशों का गला दबाओ
घर की लक्षमी कहते हैं उसको
पर धनवान बनने नहीं देते हैं उसको
चाँद सी सुंदर कहते हैं उसको
पर वक्त-बे-वक्त ग्रहण बन, चमकने से रोकते है उसको

कभी उसके चरित्र पर उंगली उठाते हैं
तो कभी आँखों से उसके कपड़े उतारते हैं
सुना था जंगल में दरिंदे जानवर रहते हैं
पर रोड पर ही दरिंदे भेड़ियों को देखा है हमनें

अरे मेरे मौला
कहूँ तो क्या कहूँ मैं
कुछ लोगों की निगाह तो कमाल की पारखी होती है
छाती का नाप भी बता देगें
और वो भी इतना सटीक कि कहने ही क्या

किया है महसूस हमने
सुना है हमनें
कोई कहता है ये आम है, तो कहता है कोई संतरा है ये
छुने की इच्छा होती कई को
सच कहूं तो नोचने कि चाहत होती है उस फल को उनको
चौदह साल का बच्चा भी मेरे जिस्म के लिए भुखा है
साठ साल का बुढ़ऊ भी मेरे साथ सोने के लिए मर रहा है
साथ काम करने वाला भी मुँह से लार टपका रहा है
माना कि छोटे कपड़े पहनती हूँ
पर क्या हिजाब वाले सुरक्षित हैं ? यह सवाल जरा पुछो तो
खैर कमीनों ने तो नवजातों को भी नहीं छोड़ा हैं

यार मैं कोई खिलौना नहीं हूँ
ना ही कोई जिस्म हूँ
मुझमें भी एक जान है
जिसकी जान तुम सब रोज निकालते हो
घुट घुट के जीने पे मुझको क्यो आमादा करते हो
कहाँ सुरक्षित हूँ मैं
“बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ”
पर काहे को?

इन दरिंदों कि दरिंदगी सहने को?
मुझे नहीं लगता है, ये लोग जीने देंगे
खुल के साँस लेने भी देगें
कोई कहता है
चिड़िया होती है लड़कीयाँ
पर पंख नोच दिये जाते है उन चिड़ियों के
मायका कहता है
ये बेटियाँ तो पराई है
ससुराल कहता है
ये पराये घर से आई है

अब मेरा मौला ही बतलाए
आखिर बिटियाँ किस घर के लिये बनाई है



तुम तो फल और फुलों कि रखवाली के लिए
उसमें कीटनाशक डाल कर उस फल-फुल कि गुणवत्ता कम ही कर सकते हो पर कभी कोई कारगार उपाय तो तुमसे होगा ना
बस बैठ ज़माने पे उंगली उठाते फ़िरोगे
“बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ”
फिर दरिंदो को सौंप दो
इस से बेहतर है
पैदा होते ही ज़हर दे दो इन बेटीयों को


भावनाऐं अगर आहत हुई हो तो हमें माफ़ करने के बजाय खुद में बदलाव लाईये।


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The Essence Of My Mother

April 24, 2023

Shanky❤Salty

My another book ‘The Essence of My Mother‘ has been published today. Radha Agarwal, Nidhi Gupta, My Lovely Aunty Dr. Rekha Rani, and the superbly talented Didi Suma Reddy have helped me in completing it. The design of the book has been done by Shreya Paul, which is truly beautiful. In this book, I have written about my life experiences. I have written about solutions to the problems that we face in our daily lives such as anger, depression, an uncontrolled mind, etc. I have included a touch of AI and completed it. I have tried to convey ‘The Essence of My Mother’ by expressing all my feelings.

This book will open the doors to all ideologies. It should not be viewed through the lens of only one religion, caste, or creed. It should be viewed as universal in nature. Only then will it reveal what this book intends to reveal. If you have infinite problems and want to get rid of them, then read this book once and you will find the solution.
This book is available at a very minimum price. It is cost-to-cost, which is why it will not be available on any e-commerce site. Putting it on an e-commerce site would increase the MRP of the book, which is not right. My motive behind this book is not to make money. Soon, this book will also be available as an e-book on Kindle or Google Play Books at a minimum price. I hope everything goes well for everyone.


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Mental Pollution….!!!!

April 21, 2023

The air we breathe is not always pure,
For the mind can suffer too, of that we’re sure.
A different kind of pollution, yet just as real,
Mental toxicity can make us ill.

Thoughts that poison and ideas that corrode,
Can lead us down a dark and dangerous road.
Negative self-talk and fears that won’t subside,
Can pollute the mind and leave us petrified.

The world bombards us with images and sound,
And it’s hard to keep our equilibrium sound.
Social media, news, and advertising too,
Can make us feel anxious and blue.

Our mental landscape needs tending, just like the Earth,
We must be careful of what we give birth.
To thoughts that bring us down and hold us back,
We must counter them with love and light that never lack.

Cleanse your mind with positivity and grace,
And you’ll find your mental pollution will have no place.
Peace and calm will come with every breath,
As your mind becomes a sanctuary, free from mental death

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असली मज़ा…..!!!!

April 20, 2023

Shanky❤Salty

“ये कैसा है जादू मेरे राम जी का समझ में ना आया”
मेरे जेब में पैसे तो हैं पर स्वास्थ्य इजाज़त नहीं देती है
इस बच्चे का मन तो है खाने का, लेकिन इसकी जेब इजाज़त नहीं देती है

खैर, थोड़ी ही देर समझ में आ गया
‘असली मज़ा खाने में नहीं खिलाने में आता है।

वो कहते हैं ना
‘राग उसी का होता है जो उसे गाना जानता हो,
साज उसी का होता है जो उसे बजाना जानता है।’

बस पैसा भी उसी के पास होता है जो उसका उपयोग करना जानता है।


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My Friend Imrana Didi….!!!!

April 19, 2023

Shanky❤Salty

My friend Imrana Didi, oh so sweet,
But I call her Emmu Didi, a name so neat.
Like tamarind, she’s a little sour and sweet,
But oh so lovely, she’s such a treat.

She never lets me be sad or down,
With her, I never wear a frown.
Always making me laugh and smile,
She makes my life so worthwhile.

Emmu Didi may not be strong in math,
But her knowledge and wit is no less than that.
Her presence of mind is truly amazing,
Her intelligence and wisdom are simply breathtaking.

Thirteen years old and oh so young,
But her kindness and maturity are second to none.
With her by my side, I feel so blessed,
My dear Emmu Didi, I’m forever impressed.

She’s my rock and my constant support,
In times of need, she’s my last resort.
I cherish our friendship every single day,
My friend Imrana Didi, in every single way.

So here’s to you, my dear Emmu Didi,
A friend like you, I’m truly lucky.
May our friendship last a lifetime long,
My dear friend, you are forever strong

In Imrana Didi, I found a true friend,
A bond that will last until the very end.
She’s always there to lend an ear,
A shoulder to cry on, wiping away my tears.

Her laughter is infectious, her smile so bright,
Spreading joy and happiness with all her might.
Emmu Didi, you’re a gem in my life,
A precious gift, a friend so nice.

Thank you for being there through thick and thin,
For all the memories that we have within.
I cherish our moments, both big and small,
My dear Imrana Didi, you mean the world to me after all.


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Pollution….!!!!

April 18, 2023

Shanky❤Salty

Air Pollution
Water Pollution
Soil Pollution
Noise Pollution
Light Pollution
Thermal Pollution
Radioactive Pollution
Visual Pollution
Plastic Pollution
Agricultural Pollution

“There are many ways to protect oneself from pollution, But what about ‘MENTAL POLLUTION’ How can one protect oneself from it?”


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A Father’s Love

April 14, 2023

Shanky❤Salty

A father’s love for his daughter is like no other,
A bond that cannot be broken, not by distance nor time,
A love that’s pure and true, unconditional and divine.

From the moment of her birth, he holds her in his arms,
And promises to love and protect her from all harm,
He watches her grow, with pride and joy in his heart,
Guiding her through life, and helping her chart her path.

He teaches her to be strong, and to never give up,
To face challenges head on, and to always keep hope,
He shows her how to be kind, compassionate, and true,
To treat others with respect, and to always be there for those she loves too.

As she grows into a woman, he marvels at her beauty and grace,
And is filled with pride as he watches her achieve, and embrace,
All the dreams and aspirations, that she’s set out to chase.

And though the years may pass, and life may take them far apart,
Their love will always endure, unbreakable and strong at heart,
For the bond between a daughter and father,
Is a love that lasts forever, and only grows deeper and richer.

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Each Month….!!!!

April 13, 2023

Shanky❤Salty

Each month it comes without fail,
A force that seems to prevail.
The cramps and pain that I endure,
Remind me that it’s all for sure.

The agony can last for days,
Making me feel lost in a haze.
I try to go about my day,
But the pain just won’t go away.

Sometimes it’s sharp, sometimes it’s dull,
But it always takes its toll.
The pain that comes with my cycle,
Can feel like a cruel and endless trial.

But still I soldier on each month,
Knowing that I’ll come out from
The other side, a little stronger,
Ready to face the next one longer.

So to all who share this monthly plight,
Take comfort in the fact we fight,
Against a force that may bring pain,
But will not stop us, once again.


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फ़रियाद…..!!!!

April 10, 2023

Shanky❤Salty

फ़रियाद के जज्बात रोते हैं,
दर्द की अधूरी कहानियाँ होती हैं।
उम्मीदों के अंधेरे से घिरे,
मन के दर्द को सब कुछ भरता हैं।

कुछ रोते हैं बेजान चीजों के लिए,
कुछ रोते हैं जिंदगी की रहगुज़र के लिए।
फ़रियाद अपने अंदर का दर्द निकालती है,
इसे सुनकर हर कोई चुपचाप हो जाता है।

फ़रियाद के आवाज़ उठाने से पहले,
हमारी आंखों में तकलीफ़ छुपी होती है।
पर जब फ़रियाद अपने आप को सुनाती है,
तो हमारी आंखों से भी आंसू निकल आते हैं।

फ़रियाद ने हमें संभाला है,
हमें आगे बढ़ने की ताकत दी है।
जब भी हमारे दिल में कुछ टूटा है,
फ़रियाद हमें समझाती है, सहारा देती है।

फ़रियाद की आवाज़ सबके कानों में गूंजती है,
हर एक फ़रियाद एक अलग कहानी होती है।
जो फ़रियाद को समझते हैं,
वो दुनिया को समझते हैं, समझते हैं।


Inspired from My Lovely Dr. Rekha Sahay Aunty ❤

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औक़ात दिखा जातें हैं…..!!!!

March 20, 2023

Shanky❤Salty

वो लड़की देखने नहीं
खामियाँ निकालने आतें हैं,
पल भर में ही
फुल सी गुड़िया में
लाखों नुक्स निकाल
अपनी औक़ात दिखा जातें हैं


Modified by:- Ziddy Nidhi
Originally written by:- Ashish Kumar

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त्याग…..!!!!!

October 5, 2022

Shanky❤Salty

जागरण
पुरी रात जागना
या अपने आत्मशिव में जागना

बलि
बकरे की, या किसी चिज वस्तु की
या अपने अहमं का बलि देना है

विदाई
क्या माँ हम सबसे विदा लेती है?
मेरी नज़रों में असंभव सा लगता है
हाँ, हम विदा ले सकते हैं
हम जुदा कर सकते हैं अपने मन और बुद्धि को माँ से
लेकिन माँ हमेशा मेरे साथ है और रहेगी
इसके तनिक भी संदेह नहीं है

कुपुत्र का होना संभव है लेकिन कहीं भी कुमाता नहीं होती

राम ने सब कुछ त्याग कर शांति का मार्ग बताया है
पर क्या तनिक भी त्याग है हम में है?
ग़र भुल से कही कुछ त्याग भी दिया
तो सरेआम ढ़िढोरा पीटने की बिमारी भी है
जब तक चित में त्याग नहीं होगा
तब तक चित में शांति नहीं होगी
क्योंकि शांति वही होती है जहां कुछ ना होता है
चाहे वो बाजार हो या हो मन

मेरे राम ने शस्त्र से पहले
शास्त्र उठाया था
तब जाकर शस्त्र का उन्होंने
सही ज्ञान पाया था
युं हीं नहीं राम ने
श्रीराम का ख़िताब पाया था


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बहुत कुछ कहना चाहती हूँ…..!!!!

September 22, 2022

Shanky❤Salty

बहुत कुछ कहना चाहती हूँ
खयालों की मोटरी बाँध चलती हूँ
ह्रदय में एक आस लिए जीती हूँ
यूँ हीं नहीं चलती हूँ
अक्सर थक कर
दिवारों का सहारा ले कर
बैठ जाती हूँ रोना तो चाहती हूँ
पर घूंट कर रह जाती हूँ
साँसें तो चलती है
पर लगता है
ज़िन्दगी थम सी गईं है
बस ह्रदय में एक आस है
पर हकीकत में कोई भी नहीं पास है ग़म के आँसू सुख चुके हैं
मन की प्यास भी
शायद बुझ चुकी हैं
मंज़िल तक तो जाना है
पर रास्ते कब खत्म होगें पता नहीं थक तो गई हूँ
पर जताना नहीं चाहती
कोई समझने को तैयार नहीं
जब कहती हूँ कुछ
तो हर कोई कह जाता है
हाँ मालुम है मुझको सब कुछ
पर मालूम होना ही
सबसे बड़ा ना मालुम होना है कोमल सा दिल था
जिसकी कोमलता को खत्म कर
कठोर कर दिया गया
विसवास के डोर में बाँध कर
फाँसी का फंदा दिखा दिया प्यार दिया या दिया दर्द पता नहीं
पर दिया कुछ तुने यह पता है
शायद वह है अनुभव
अब जादा फरमाइश नहीं है
बस जो होता है
शांति से सह जाती हूँ ना तो हूँ मैं राधा
ना चाहत है मोहन की
हूँ मैं एक इंसान
बस हर किसी से इंसानियत की
उम्मीद लगाए बैठती हूँ


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किस्मत फुटी…..!!!!

September 17, 2022

Shanky❤Salty

दिल उदास रहता है
क्योंकि दिल में चाहत होती है
जहाँ चाहत होती है
वहाँ मेहनत नहीं होती है
और जहां मेहनत नहीं होती है
वहां सच में किस्मत फुटी होती है


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छोटे वस्त्र…..!!!!

September 4, 2022

Shanky❤Salty

स्त्री के छोटे वस्त्र पर उंगली वही उठाते हैं
जो उस स्त्री को अपनी माँ-बहन-बेटी-पत्नी समझते हैं
वर्ना परायों को तो स्त्री निर्वस्त्र ही अच्छी लगती है


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विधवा हूँ मैं…..!!!!

August 31, 2022

Shanky❤Salty

दर्द लिखूँ या लिखूँ मैं अपनी हालात
बेचैनी लिखूँ या लिखूँ मैं वो कसक,
आँखों के काले आँसूं बहे थे
जब तुम मुझे छोड़ गए थे
हाँ तुम्हारे नाम का काजल लगाया था
वो बह गए थे तुम्हारे जाने की खबर से
काँच की चुड़ियाँ जो पहनी थी वो तोड़ दी गई थी
हकीकत में मुझे काँच की तरह तोड़ दिया गया था,
तेरे जाते ही
जलते दीये को राम जी ने बुझा दिया था
मेरा सुहाग उजाड़ दिया था
विधवा नाम मुझको दिया गया
माँग से सिंदूर पोछ दिया गया
जो तेरे नाम के नाम मैं लगाया करती थी,
मैं रोती नहीं क्योंकि आँसू तो सूख गए मेरे
तुम मुझसे रूठे थे या किस्मत मेरी फूटी थी
पता नहीं
पता तो बस इतना है
जीवन मेरा बस अब अकेला है
जीवन साथी ने साथ सदा के लिए छोड़ा है,

दो चिड़ियाँ दिखाई थी तुमनें
और कहा था यह हम दोनों हैं
पर देखो ना वो दोनो तो आज भी साथ है
पर तुम क्यों नहीं हो मेरे साथ
कहाँ उड़ गए तुम?
मेरी नींद तुम उड़ा ले गए
जब से तुम सदा के लिए सोए,

आज भी मुझे याद है
जब से सुहागन हुई थी मैं
कहते थे लोग
निखर गई हूँ मैं
पर तुम्हारे जाते ही बिखर गई हूँ मैं

छन-छन पायल की आवाज से
घर गूंजा करते थे
अब मेरी चीखों की आवाज से
मेरा मन गूंजा करता है
तुम्हारी जान थी ना मैं
आज बेजान हो गई हूँ मैं,

तुम्हारा होना
और तुम्हारा होने में होना
बस दिल को तसल्ली देने वाला है

विधवा हूँ मैं
तिरस्कार की घूंट पीती हूँ मैं
श्रृंगार के नाम पर सिहर जाती हूँ मैं
सहारा नहीं मिलता बस सलाह ही मिलती है
अछुत सा व्यवहार होता है
शुभ कर्मों से हटाया जाता है
विधवा कह कर बुलाया जाता है


कोई झांकने तक नहीं आता है
ना दवा देता है ना देता है जहर
बस ताने ही मिलें हैं
बस तड़पता छोड़ जाता है
तेरे जाते ही घर का चुल्हा बुझ गया था
पर ह्रदय में आग लग गई थी
कहते हैं लोग
मैं तुम्हें खा गई हूँ

रात लम्बी होती है
पर हकीकत तो यह है
मेरी ज़िन्दगी अब विरान हो गई है
मरूस्थल-सी हो गई है
बस काँटें ही रह गए है
फूल तोड़ ले गया कोई
जात मेरी विधवा हो गई,

बैठ चौखट पर तुम्हारा
इंतजार करूँ मैं प्रियतम
आओगे ना तुम अब कभी
पर आए है मेरे आसूं तुम्हारी याद में
ले गए खुशियां तुम मेरी
ले जाते तुम भी मुझको
सती सी जलती मैं भी
चिता के साथ तुम्हारी
ज़िंदगी में नज़रें लग गए मेरी
हँसती खेलती ज़िन्दगी लुट गई मेरी

सूरज की लाली देख मुस्कुराती थी मैं
आँखें अब भी लाल ही रहती हैं मेरी पर मुस्कुराती नहीं हूँ मैं
वो तो बस कहने की बात थी
सात जन्मों के लिए मैं तुम्हारी थी
हकीकत में तो मैं असहाय थी
मेघ भी बरसे
सूरज भी चमके
पर तुम्हारी तुलसी सूखी ही रह गई
तेरे जाने के बाद

तुम्हारे बाग की फूल थी मैं
जो बिखरी पड़ी है
समाज के कुछ कुत्ते नज़र डालते है
तन का सुख देने की बात करते हैं
मेरे मन को कचोटतें हैं
लोग कहते थे
दुख बाँटने से कम होता है
पर मेरा दुख तो एक बहाना है
दरसल उन्हें मेरे साथ बिस्तर पर सोना है
ह्रदय बहुत रोता है मेरा
हाथों में तुम्हारे नाम की मेहेंदी लगाई थी मैंने
मेहेंदी की लाली चली गई
और तुम भी हाथों की लकीरों से चले गए,

इश्क़ मुकम्मल ना हो तो लोग रोते हैं
मरने की बात करते हैं
ज़रा मुझको भी बतलाओ ना
मैं करूँ तो क्या करूँ
ह्रदय तो है पर धड़कन नहीं है
जिस्म तो है पर जान नहीं है
दर्द तो इतना हैं की शब्द नहीं है बयां करने को
भला कोई क्या समझे मेरे दर्द को
मेरी पंक्तियों को वाह वाह कर चले जाएगें
मार्मिक लिख देगें
पर पढ़ न पाएगा दर्द मेरा कोई,

हे कालों के महाकाल
बगीया मेरी उजड़ गई
आज कंठ मेरा फिर से भर गया
समाज की नजरों में
राधा को कृष्ण न मिले
फिर भी कृष्ण राधा के ही कहलाए
दुख मेरा भी पच जाए
यह ज्ञान आप मुझको जल्दी दिलाए


ह्रदय की धड़कन बहुत बढ़ गई थी इसे लिखते
एक पल के लिए मैं इस स्थिति में खो गया था
शब्दों में बयां करना संभव नहीं है
बस मेरे रोम सिहर गए थे पल भर के लिए
गलतीयों के लिए माफी चाहते हैं


Modified by:- Preetii Sharma & Ziddy Nidhi
Originally written by:- Ashish Kumar

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बाप मेरा खुद्दार था…..!!!!

August 23, 2022

Shanky❤Salty

बाप मेरा खुद्दार था
इसलिए मेरे घर का
हाल दुश्वार था
डोली उठ नहीं रही थी
घर में भीख देने के लिए दहेज नहीं था
इसलिए अर्थी मेरी उठ रही है
ना जाने क्यों मेरी अर्थी के पीछे
बारात उमड़ पड़ी हैं


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माँ मेरी अनपढ़ थी……!!!!

August 21, 2022

माँ मेरी अनपढ़ थी
मेरी लाल आँखों को पढ़
हाल जान जाया करती थी
इश्क़ की जब भी बात होती है
ना जाने क्यों माँ ही याद आती है
हाथों की लकीरों में क्या लिखा पता नहीं
ग़र सर पर माँ का हाथ हो तो ज़िन्दगी में कोई शिकवा नहीं
दो वक्त की रोटी तो तुम जरूर कमाओगे
पर माँ के हाथों का प्रेम कहाँ से लाओगे
फुर्सत के दो पल खोज तुम
माँ को फोन घुमाया करो तुम
वर्ना एक दिन ग़र गुम हो गई माँ
तो आँखों में आँसू लिए
सर के सिरहाने तकिये में
माँ के गोद खोजते फिरोगे
ना जाने क्यों माँ का दिल दुखाकर
अपने किस्मत के दरवाजे बंद करते हो
माना कि धन दौलत बहुत है तुम्हारे पास
पर असली संपत्ति माँ को क्यों भूल जाते हो
वक्त है अभी भी
माँ कि ममता और करूणामयी शीतल छाया पाने का
देर मत करना तुम
नहीं तो उसके जाते ही
पल-पल के मोहताज होते फिरोगे


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श्रीकृष्ण जन्मोत्सव…..!!!!

August 18, 2022

Shanky❤Salty

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
पुरे विश्व में बहुत ही प्रेम से
और धुम धाम से
मनाया जा रहा है
हर कोई अपनी भक्ति, प्रेम और माधुर्य
श्रीकृष्ण के समीप रख रहा है
बड़े सुंदर तरीके से मनमोहक तरीके से
मंदिरों को, श्री कृष्ण की मुर्ति को
सजाया जा रहा है
पर इन सब से परे एक सवाल मेरे ह्रदय में है
श्रीकृष्ण कि मुर्ति से इतना प्रेम है
तो फिर श्रीकृष्ण के बनाए हुए इंसान रूपी मुरत से
ईर्ष्या, राग, द्वेष, घृणा क्यों?
श्रीकृष्ण को छप्पन भोग
और बगल में बैठे इंसान को छप्पन गालीयां
श्रीकृष्ण के लिए गुलाब
और बगल में बैठे इंसान को गुलाब के कांटे
सच कहूं तो मुझे लगता हैं
श्रीकृष्ण के फोटो से, मुर्ति से लोग प्रेम बस दिखावे के लिए करते हैं
ग़र कल को गए श्रीकृष्ण हम सबसे माँगना शुरू कर दे
तो उनके समिप हम में से कोई नहीं जाएगा
ये प्रेम ये भक्ति में से हमें स्वार्थ कि दुर्गंध आती है
ह्रदय में जलन भरा है, छल से लिप्त है
कपट का चादर ओढ़ा है
ग़र नहीं तो
यह बात समझ आ जाती
श्रीकृष्ण ने कहा था “हे अर्जुन! मैं समस्त प्राणियों के हृदय में स्थित आत्मा हूँ और मैं ही सभी प्राणियों की उत्पत्ति का कारण हूँ”
फिर भी बगल वाले से घृणा
श्रीकृष्ण को घी मे भोग
और बगल वाले को पानी का प्रसाद
श्रीकृष्ण को काजू, बादम
और बगल वाले को सिर्फ किशमिश
ये कैसी भक्ति हुईं
इतना द्वेष कब तक और किससे
मन कि मैल धो दो
मुख से श्रीकृष्ण कहो या ना कहो
पर ह्रदय से श्रीकृष्ण के सिवा कुछ नहीं कहो
खाओ तो श्रीकृष्ण के लिए
खिलाओ तो श्रीकृष्ण के लिए
उठो तो श्रीकृष्ण के लिए
बैठो तो श्रीकृष्ण के लिए
श्रीकृष्ण को आपके रुपये पैसे
कि जरूरत नहीं है
सब कुछ दीन्हा आपने
भेट करू क्या श्रीनाथ
नमस्कार की भेट धर
जोडू दोनों हाथ

ह्रदय में कृष्ण भी है और कंष भी
बस फर्क इतना है कि हम महत्व किसे कितना देते हैं


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अटलजी…..!!!!

August 16, 2022

Shanky❤Salty

भारत जमीन का टुकड़ा नहीं,
जीता जागता राष्ट्रपुरुष है
और उस राष्ट्रपुरुष के परम स्नेही
सुपुत्र मेरे प्यारे अटलजी है
ठन गई!
मौत से ठन गई!
वास्तविकता में मौत को मात दिया था
स्वतंत्रता दिवस के दिन झुकने न दिया था
मेरे प्यारे अटलजी ने
भारत रत्न से शुशोभित थे
तन था हिन्दू
मन था हिन्दू
जीवन ही था उनका हिन्दू
रग-रग माँ भारती को था समर्पित
आपकी पुण्यतिथि पर लिखूँ तो क्या लिखूँ मैं
हर शब्द आपसे है और आपसे ही हम हैं
करूँ तो क्या समर्पित करूँ मैं आपको
यकीनन आपका शरीर हमारे बीच हैं नहीं
पर आपकी सोच को हमें हर दिल में जिंदा रखना हैं
आपको याद कर आज भी आँखें नम़ हैं
और मेरे ह्रदय में ज्वार उठ आया है
ब्रह्मचर्य का पालन कर
मेरे अटलजी ने किचड़ में कमल खिलाया है


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हर मन तिरंगा हो…..!!!!

August 15, 2022

Shanky❤Salty

15 अगस्त 1947 हमें आजादी मिली थी
और हर साल हम आजादी का पर्व मनाते है
हर घर तिरंगा अभियान हो रहा है
ना जाने कब हर मन तिरंगा होगा
अंग्रेजों से तो आजादी मिल गई
सब खुशीयां मना रहें हैं
ना जाने कब हमें
बलात्कार से आजादी मिलेगी
गरीबी के जकड़न से आजाद होगें
भ्रष्टाचार कि दिमक कब हटेगी
दुख और चिंता के गर्भ से कब आजाद होगें
तिरंगा लहराता है हमारा
बड़ा सुंदर लगता है देश हमारा
ग़र हो उस तिरंगे पे बैठी सोने की चिड़िया
तो क्या खूब होगा नज़ारा
देश सोने की चिड़िया तो है
पर अफ़सोस हम उस चिड़िया को पींजड़ो में कैद रखे हैं
ना जाने कब वो आजाद होगी
हर वक़्त हर पल सरकारों पर उंगली उठाते है
पर क्या हम कभी खुद पर उंगली उठाते हैं
शायद नहीं
क्योंकि हम अपने पर दोष क्यों देखेंगे
वैसे भी बुराईयां दुसरों में दिखती है
खुद में देखने का हिम्मत नहीं है
हम अपने कर्तव्यों का निर्वहन पुरी निष्ठा से शायद ही करते हो
पढ़ाई करते वक्त फाकीबाजी
काम करते वक्त कामचोरी करते हैं
जैसे तैसे नौकरी पाते हैं
फिर अपने कुर्सी पर जम कर केवल पगार पाते हैं
और वक्त-बे-वक्त बस उंगलियाँ उठाते रहते हैं
सच कहूं ग़र मैं
तो मेरी नज़रों में
अपने कर्तव्यों का निर्वहन सही से न करना
देश के साथ गद्दारी है
ग़र सही से पढ़ेगें नहीं तो देश के प्रति क्या सेवा करेंगे
काम में कामचोरी देश के प्रति चोरी
क्या देश का किसान समृद्ध है?
क्या देश का जवान प्रसन्न है?
कह दो ना नहीं है
कब तक यह नौटंकी होगी?
एक दिन का आजादी का पर्व मनाना
और
पुरे वर्ष देश को छती पहूँचाना
वह भी अपने कर्मों से

मेरी नज़रों में यह 15 अगस्त केवल अंग्रेजों से आजादी का पर्व है
दरसल हम सब अभी भी दुख, चिंता, भ्रष्टाचार, गरीबी, व्यभिचार
बलात्कार, शोषण, घृणा, जलन इन सब चिंजों से आज़ाद नहीं हुए है
और ना जाने कब होगें
ह्रदय दुखता है मेरा यह सब देखके इसलिए ना चाहते हुए भी सच को लिख देता हूँ एक उम्मीद लिए कि कास हम सुधर जाए।
खैर छोड़ो हर बार कि तरह आप सभी को भी इस स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ


बड़ी ही मेहनत से इस देश को आजादी मिली है….ज़रा सी मेहनत हम भी कर अपने ह्रदय को राग-द्वेष से आजाद कर सच्चे अमृत महोत्सव का संकल्प पुरा कर सकते है।


Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Ziddy Nidhi

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रक्षाबंधन….!!!!!

August 12, 2022

Shanky❤Salty

यक़ीनन धागे कच्चे हैं
पर रिश्ते बेहद ही मजबूत हैं,
क्योंकि बंधन यह तो
प्रेम और वात्सल्य से,
रक्षा करने के संकल्प से बांधने
का पर्व है रक्षाबंधन,
बहन भाई को, भाई-बहन को
बाप-बेटे को, बेटे बाप को
भाई-भाई को, पड़ोसी-पड़ोसी को
वृक्ष को, प्रकृति को, समाज को
हर कोई हर किसी को
रेशम के धागे बाँधें या ना बाँधें
पर रक्षा करने का संकल्प से जरूर बांधें
क्योंकि जरूरी है समाज को और प्रकृति को
प्रेम और वात्सल्य की
जो जहर मन में भरा है उसे खत्म कर के ही
पर्व मनाना है
खुद के बहन के लिए दुपट्टा हो
और दुसरो की बहन बिना दुपट्टा के हो
यह मुखौटा कब तक…?

यह रक्षाबंधन कुछ बेहद करना है
रक्षा करना ही है तो सबका करना है

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वो कहते है ना…..!!!!

Shanky❤Salty

वो कहते है ना..
“मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है,
जो ना समझे तो पानी है !!”


यार मोती और पानी की बात हीं छोड़ो
ग़र हकीकत में वो समझते इतना
तो आँखों में आँसू ही ना होते।


Written by:- Ashish Kumar
Voiceover by:- Saaera Siddiqui


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दूध का जला……!!!!

July 30, 2022

Shanky❤Salty

सुना है,
बिल्ली दूध का जला
छाछ भी फूँक-फूँक
कर पीती है,
मतलब यही ना
एक बार चोट खाने
पर ज़्यादा संभालकर
चलना चाहिए…!
पर हम तो शायद
उस बिल्ली से भी गए गुजरें हैं
लाख ठोकर खाकर भी नहीं सुधरते हैं
हर पल उन खुशियों से खेलते हैं
जहां ग़म की कतारें हो
बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, गुटखा
छल, कपट, प्रपंच, धोखा
यही सब में अपने आप को लगाए हुए हैं
सुनने में और कहने में बहुत अच्छा लगता है
पर अमल करने में……
खैर छोड़ो कुछ नहीं……!!!!


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किन्नर…..!!!!

किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी

Shanky❤Salty

किन्नर….!
ईश्वर का प्रसाद हूँ मैं
पर लोगों के लिए एक अभिशाप हूँ मैं
माँ बाप का अंश हूँ मैं
पर तिरिस्कार का वंश हूँ मैं
ना महिला ना पुरुष
हाँ किन्नर हूँ मैं
जब जब खुशियां आती हैं
तब तब तालियाँ बजाई जाती हैं
पर मेरे तालियों से लोगों के मुँह बन जाता है
ना जानें क्यों पराया सा व्यवहार होता है,
हूँ तो आखिर इंसान ही ना मैं
लड़कियों सा मन है मेरा
लड़कों सा तन है मेरा
बसते हैं ह्रदय में राम हैं मेरे
फिर भी हर पल हर क्षण तिरस्कार की घूंट ही पीती मैं
तिल तिल कर जीती हूँ मैं
चंद रुपयों के बदले हम आशीर्वाद हैं देतें,
दरसल बात रुपये की नहीं है
बात तो पापी पेट की है
गर मिला होता सम्मान समाज में
या मिला होता सामन अधिकार समाज में
तो शायद आज चंद रुपयों के खातिर अपमान का घूंट ना पीती मैं,
छक्के, बीच वाले, हिजड़े के नाम से ना जानी जाती मैं
ग़र घर में खुशियाँ आती हैं
बिन बुलाए हम चले आते हैं
ना जात देखते हैं ना देखते हैं धर्म
बस तालियां बजा कर अपने मौला से उनकी खुशियों किटी दुआएँ करते हैं
यक़ीनन बद्दुआएं मिलती है मुझको ,पर देती हर पल दुआएँ ही हूँ मैं
आशीष हर किसी को चाहिए हमारी
पर कोई माँ हमें कोख से जन्म देना नहीं चाहती है
कहते है लोग, हूँ मैं विकलांग शरीर से
पर शायद मुझसे घृणा कर अपनी सोच तुम विकलांग कर रहे हो
खैर छोड़ो,,,
ना नर हूँ ना नारी
हूँ मैं संसार में शायद सबसे प्यारी
हाँ मैं किन्नर हूँ…..!!!!!


मालिक
मोहे अगले जन्म ना औरत करना ना मर्द करना
करना मोहे किन्नर ही,
मन में ना तो छल है ना है कपट
है तो बस प्रेम तोहे से पिया


Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Ziddy Nidhi


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जड़ों को काट कर हम फल की उम्मीद कर रहें हैं

July 10, 2022

Shanky❤Salty

संत सताये तीनों जाए तेज़, बल और वंश
ऐसे-ऐसे कई गये, रावण, कौरव, कंस

मुहम्मद इक़बाल मसऊदी की
कुछ पंक्तियाँ याद आ रही हैं
यूनाँ मिस्र रोम सब मिट गए जहां से
बाकी मग़र है अब तक, नामो निशां हमारा
कुछ बात तो है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सिदयों रहा है दुश्मन दौर-ए-जहां हमारा

जड़ों को काट कर हम फल की उम्मीद कर रहें हैं
संतों, महापुरुषों को सता कर विश्व शांति कि उम्मीद कर रहें है
स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों कि डिग्री है ना तुम्हारे पास
फिर क्यों नहीं देश में अमन, चैन, शांति कायम कर पा रहें हो?
छोड़ो हटाओ
खुद को शांत क्यों नहीं कर पा रहें हो
ज़रा-ज़रा सी बात पर तनाव, क्रोध, हिंसा, चिड़चिड़ापन
आखिर क्यों
बहुत पढ़े हो तुम सब ना इसिलिए तो यह हाल है
घर में बात होती नहीं है अपनों से
और सोशलमीडिया पर हज़ारों फॉलोवर्स बना अपनापन दिखा रहें है
कोई पशु से प्रेम कर रहा है तो कोई पौधों से तो कोई चीज़ वस्तुओं से
पर हर पल हर छण मानवता कि हत्या हो रही है
मानवीय मूल्यों का गला घोटा जा रहा है
हम एक दुसरों से प्रेम कब करेंगे
बस स्वार्थ है और स्वार्थ है
ह्रदय में पीड़ा होती है
जब भी संतों का तिरिस्कार देखता हूँ तो
फिर से कहता हूँ
जड़ों को काट कर हम फल की उम्मीद कर रहें हैं
संतों पर अत्याचार कर हम विश्व शांति कि उम्मीद कर रहे हैं
पर एक सवाल जरूर उठता होगा कि आखिर है क्या
इन बाबाजी के पास जो ये विश्व शांति और मानव मात्र के हितैषी है
तो जवाब सिर्फ एक ही है
ज्ञान ज्ञान ज्ञान और सिर्फ ज्ञान
वो भी गीता का ज्ञान
जिससे वो हर एक के भीतर अनहद नाद जगा सकते हैं
पर हम तो जड़ों को काट कर फल की उम्मीद कर रहें हैं
बुराई और दोष हमें बहुत जल्दी दिख जाती है
पर उनका निस्वार्थ सेवा कभी दिख नहीं पाता है
विकास के पथ पर हम नहीं विनाश के पथ पर बढ़ रहें है
मन में जहर है इसलिए तो समाज में भी वही घोल रहें है
ह्रदय में प्रेम नहीं है इसलिए प्रेम की चाहत रखतें है
ग़र है तुम्हारे अंदर करूणा, प्रेम, ममता, माधुर्य तो ज़रा बाँट कर दिखलाओ
पर सच में तुम तो जड़ों को काट कर फल की उम्मीद कर रहें हो
खैर छोड़ों मर्जी तुम्हारी हैं
जैसा करोगे वैसा ही भरोगे


वर्ष 2021 में एक पुस्तक लिखी थी “सच या साजिश ?: संस्कृती पर प्रहार” हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में। वह भी मात्र ₹१-२ के मुल्य पर आशा करता हूँ आप सब पढ़ेंगे और अपना विचार जरूर रखेंगे।


To Read English Version of book click here
To Read Hindi Version of book click here


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जहां चाह हैं वहां मंजिल नहीं है

July 9, 2022

Shanky❤Salty

जहां चाह हैं
वही राह हैं
पर जब तक चाह होगी
तब तक राह रहेगी
मंजिल कभी ना मिलेगी

रहीम साहब कि बात याद आती हैं
चाह गई चिंता मिटी,
मनुआ बेपरवाह।
जिनको कछु नहि चाहिये,
वे साहन के साह

जब चाहत मिटेगी तभी हमें मंजिल मिलेगी
वैसे भी सभी दुखों का द्वारा चाहत ही हैं


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बाँटा ही बाँटा है…..!!!!

July 8, 2022

Shanky❤Salty

एक सृष्टि है
सुंदर-सी प्यारी-सी बेहद खुबसूरत-सी,
जब उस सृष्टि को बाँटा गया
तो बहुत से ग्रह, नक्षत्र, तारे, सितारे हो गए,
उसमें हमारी पृथ्वी हो गई
अब उसे भी महाद्वीपों में बाँट दिया,
महाद्वीपों को देशों में विभाजित कर दिया
देशों को राज्यों में बाँटा गया
राज्यों का जिला में बटवारा हुआ
जिला का अंचल में विभाजन हो गया,
अंचल से प्रखण्ड में
प्रखण्ड से गाँव, गाँव से मुह्ह्ल्ले, कसबे कर के बाँटता गया….
खैर छोड़ों,,,,
यहाँ तक तो थोड़ा ठीक था
जब जन्म हुआ
तो कहाँ जन्म हुआ?
मतलब किस घर में, किस कुल में ,किस धर्म में, किस जात में,
हिन्दू ,मुस्लिम ,सिक्ख, ईसाई कह कर खुद को बाँटें
फिर हिन्दू में भी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र मे बाँटें
मुस्लिम होकर भी शिया ,सुन्नी में खुद को बाँटें,
चलो कोई नहीं,,,,
घर में भी माँ, बाप, भाई, बहन, सगे-संबंधी में भी बटवारा
जमीन का टुकड़ा भी बाँटा
पैसे का बटंवारा किया
यह सोच कर कि बाँटने के बाद वह मेरा होगा
पर हकीकत तो सामने तब आई
जब मृत्यु दरवाजे पे आई
और मुस्कुरा कर कही
“चलो वक्त हो गया है तुम्हारा ,जो है तुम्हारा सब बाँधो और साथ ले चलो”
दो पल रूक देखा मैंने
आखिर बचा ही क्या है मेरा
शुरुआत से अंत तक तो सिर्फ बाँटा ही बाँटा है
भला बाँटने से कोई भी चीज बढ़ती थोड़ी है….?
फिर क्या था
सब कुछ छोड़ जाना पड़ा


रंग तो बेशुमार हैं
और उन बेशुमार रंगों में
रंग सात हैं इंद्रधनुष के
पर हकीक़त तो यह है कि
उस सात रंगों में भी
रंग एक ही है
रंग-ए-सफ़ेद इश्क़ का…

मेरे मौला का…


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One More Book…..!!!!

July 5, 2022

Shanky❤Salty

One more book is done by your blessings & kind support.

First of all, I offer my gratitude by bowing to God. Who inspired me to write. I thank my parents. The existence of this book would have been difficult without his blessings. I am grateful to those writers readers and critic bloggers who helped me to excel in my writing. I would also like to thank Preeti Sharma ji and Radha Agarwal ji. I would like to express my sincere thanks to Sachin Gururani for the help he has given in making the cover of my book. To all those who helped me and did its proof reading and to all those who increased the respect of my creation with their thoughts. Also, a heartfelt thank you to all those who helped me write this book.

In this book I have written my journey. Yes, the final journey has shown the reality of death.

Yes, death!! that death which is known to all, but don’t know when it will come but it won’t kill us. I have written this book like satire in the form of lines after studying & understanding Shrimad Bhagwat Geeta, reading the voices of saints and great men.

What we call the final journey? In fact, is completely different from the point of view of spirituality. We keep the truth under the mask and call the lie as truth. The truth has been written just by removing the veil of that lie.

Hope you all read this book and take your life towards truth.


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कभी सम्मान न मिला मेरी माँ को राम…..!!!

June 28, 2022

Shanky❤ Salty

देखो न राम
कभी सम्मान न मिला राम
आपकी अयोध्या जी में राम
हमारी माँ सीता जी को राम
जनक जी ने कन्या दान किया था राम
शीश झुकाकर दान लिया था दशरथ जी ने राम
फ़िर क्यूँ न मिला हमारी माँ सीता जी को सम्मान राम
षड्यंत्रों का शिकार हो वनवास को गई माँ हमारी राम
अग्नि परीक्षा तक देनी पड़ी हमारी माँ को राम
फिर भी चैन ना मिला आपके अयोध्या वासियों को राम
क्या से क्या कह गए आपको राम
बन कर राजा रामचंद्र जी आप राम
त्यागा हमारी माँ को राम
रखा प्रजा का सम्मान राजा रामचंद्र जी ने राम
हृदय हमारा रो रहा है राम
बन रहा है भव्य मंदिर रामलला का राम
दिलवा दो न सम्मान हमारी माँ को राम
अपने अयोध्या जी में राम
जो प्रेम किया था हमारे प्यारे राम जी ने हमारी माँ से राम
वह दिखला दो राम
सच कहूं राम
कभी सम्मान न मिला राम
आपकी अयोध्या जी में राम
हमारी माँ सीता जी को राम


कौन है राम” पुरी पुस्तक पढ़ने के लिए यहाँ 👉 क्लिक करें


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मोक्ष……!!!!

June 25, 2022

Shanky❤Salty

“मोक्ष”

हम सभी को यह लगता है की “मोक्ष” मृत्यु के बाद ही होता है,
पर मेरी नज़रों में “मोक्ष” तो जीते जी ही हो सकता है,
शायद “मोक्ष” वह स्थिति है
जिसमें कोई भी खुशियाँ हमें खुश कर नहीं सकती है
और कोई भी ग़म हमें शोक में डुबो नहीं सकता है
बस हर पल आनंद ही आनंद
हर क्षण उसी एक की ही अनुभूति होना ही “मोक्ष” है,
“मोक्ष” एक ज्ञान है,
जिस शरीर को हम अपना समझते है क्या वह सदा टिक सकता है…?
बस एक झटके में मिट्टी में मिल जाएगा, आग में राख हो जाएगा,
इसलिए शरीर के मरने से पहले अपने अहम को मार देना चाहिए,
अपने अहंकार को राख कर देना चाहिए
बस यही “मोक्ष” है मेरी नज़रों में


आपकी नज़रों में क्या है “मोक्ष” ?


Written by:- Ashish Kumar

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मेरा ही वंश है……!!!!

June 19, 2022

Shanky❤Salty

श्रीमद् भगवद्गीता

मूल श्लोकः
ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः।
मनःषष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति।।15.7।।
(अध्याय १५,श्लोक ७)

श्रीकृष्ण ने कहा है ये श्रीमद्भागवत में
ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः
मेरा ही वंश है सभी जीवों में।
मस्जिद के अजान में कृष्ण ही है ना?
मंदिर के आरती में भी कृष्ण ही है ना?
उस ब्राह्मण पंडित में भी कृष्ण ही है ना?
उस चमार जूता सिलने वाले में भी कृष्ण ही है ना?
ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः
अजान कानों में चुभती थी।
मंदिर के घंटों से सिर दर्द होता था।
पंडित ठग लगता था।
चमार से घृणा होती थी।
पडोसी से परेशानी होती थी।
ऊँचे जाति से जलन होती थी।
नीची जाति से परेशानी होती थी।
मन में दो की भावना थी।
सच कहूं, तो गीता की पंक्तियाँ ना पता थी।
खैर छोड़ो, मैंने बतला दिया ना।
अब कृष्ण ही कृष्ण देखो।
भरोसा है ना? कृष्ण पर? श्रीमद्भागवत पे?
ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः
ना करो राग, ना करो द्वेष, ना करो घृणा
गाड़ी में बैठ गए तो गाड़ी नहीं ना हो गए?
गाड़ी पुरानी होती है तो कबाड़ में चली जाती है
शरीर भी पुराना होगा तो शमशान चला जाएगा।
डरते क्यों हो?

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ।।२३।।४

आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं
न आग उसे जला सकती है
न पानी उसे भिगो सकता है
न हवा उसे सुखा सकती है

सब ने कहा है। मेरे कृष्ण ने कहा – बस भरोसा कर जीवन में अपनाना होगा
वो साहिब मेरा एक है, कृष्ण के सिवा है ही क्या दुसरा?
लिखने वाला भी वही है, और पढ़ने वाला भी वही है

है ना?
निसंदेह बोलो हाँ 😊


Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- My Lovely Rekha Aunty


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क्षमा चाहता हूँ….!!!!

June 09, 2022

Shanky❤Salty

मेरी लिखने का उद्देश्य किसी की भी भावनाओं को चोट पहुँचाना नहीं होता है पर मेरे लिखे व्यंग्य, पंक्तियों से बहुत से लोगों के बीच गलतफहमियां उत्पन्न हो रही है इसलिए अबसे मैं सिर्फ और सिर्फ अपनी डायरी में ही लिखुँगा और किताबों में ही मेरी लेखनी मिलेगी। और कहीं भी नहीं।
यह एक अकेला अब थक गया है
कोई भी साथी ने हाथ न बढ़या है
बस ताने और दो बातों ने मेरे दिल को बहुत जख्मी किया है
जितना वक्त मुझे सुनाने में लगाते हो
ग़र उसका कुछ वक्त मुझे ज़रा सा सुनने में लगा देते ना
तो शायद यह फैसला हम कभी ना लेते
यक़ीनन मैं बिना लिखें नहीं रह सकता हूँ
पर अब तुम्हें बिना मुझको पढ़ें रहना ही होगा
वैसे भी जिसे तुम शैंकी समझ रहे हो ना
उसकी आयु कुछ पल कि ही है
अंतिम यात्रा के साथ सब कुछ थम जाएगा


पढ़ूंगा सबको पर कहूंगा कुछ नहीं
बाँध मुट्ठी मैं आया था खोल मुट्ठी मैं जाऊंगा
बस अब मुस्कुरा कर मैं आप सबो को हाथ जोड़ क्षमा चाहता हूँ
और अलविदा कहता हूँ


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हाल क्या पुछते हो…..!!!!

June 09, 2022

Shanky❤Salty

हाल क्या पुछते हो जनाब
बेहाल है या खुशहाल है
ग़र पता नहीं
तो यार क्यों पता नहीं
खै़र छोड़ों
हम है राम जी के और राम जी हमारे
इतना ध्यान रखा करो
ग़र हो तुम भी राम जी के
तो साथ मेरे रहा करो
वर्ना तुम मेरा राम राम स्वीकार करो


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माँगना….!!!!

June 4, 2022

Shanky❤Salty

आज सुबह जल्दी उठा था मैं
नहा-धोकर रामजी की पुजा कर बैठ अख़बार पढ़ रहा था
कि तभी एक फोन आया और कुछ काम से बाहर जाना हुआ मेरा
काम खत्म कर घर आ ही रहा था की
रास्ते पर शनि मंदिर पर नज़र पड़ गईं,
सोचा, चलो हो आते हैं
सालों बाद आज शानि मंदिर में प्रवेश कर ही रहा था की तभी
बाहर मुझे कुछ भिखारी दिखे,
बड़े ही मासुमियत से कहे रहे थे वे
कुछ दे दो मालिक भगवान भला करेगें आपका
इतने में ही किसी सज्जन व्यक्ति ने तड़ाक से कह दिया
मेहनत-वेहनत करो यार ,क्या भीखा माँगते रहते हो
और इतना कह अंदर मंदिर चल दिए,
मैं भी पीछे-पीछे गया उनके,
उनको देख मैं दंग रह गया
हाथ फैला कर कह रहे थे शनि महाराज से
बिटिया की शादी नहीं हो रही है ज़रा कुछ करो महाराज,
बेटा का नौकरी जल्दी हो जाए शनि महाराज कृपा करो,
मेरे धंधे में बरकत दो महाराज बरकत दो
इतना कह हाथ जोड़ लिए और शनि महराज के पाँव पर गिर गए
फिर उठ कहते है
ऊँ शनैश्चराय नमः ऊँ शनैश्चराय नमः ऊँ शनैश्चराय नमः
फिर प्रणाम कर मंदिर से बाहर आयें
और भिखारियों को दो-दो रूपये के सिक्के देकर मेहनत करने की नसीहत दे चलते बने,
यह देख मैं हसता हुआ मंदिर के अंदर गया तो देखा
शनि महाराज जी भी मुस्कुरा रहे थे और शायद कह रहें हों
धन्य हो, हे मानव ! तुम-री लीला
तुमनें इतनी जल्दी रंग बदला
की गिरगिट भी तुझको देख अपनी हरकत भुला


Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Ziddy Nidhi


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बुराईयां…..!!!!

June 03, 2022

Shanky❤Salty

समाज की बुराईयां हर किसी को दिख जाती हैं
पर कम्बख्त उसे दूर करने के बजाए
उसी सामाज में बैठ, उसी समाज की बुराई करते हैं

वो कहते हैं ना,,,,,
मौला-मौला लाख पुकारे पर मौला हाथ ना आए,
पानी-पानी रटतें-रटतें प्यास ही मर जाए,
एक चिंगारी लब पर रख लो लब फौरन जल जाए,,,,,,

ग़र चाहते हैं हम हकीकत में बदलाव
तो खुद से शुरूआत हम क्यों न करते हैं?
काम न करने वाला मुरख बस बुराईयां ही ढूंढता रह जाता है


Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Ziddy Nidhi


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ख़बरें….!!!!

May 30, 2022

Shanky❤Salty

अख़बारों पर ख़बरें छपती हैं
पर हालतें नहीं छपती हैं
अख़बार बेचने वालों की……

खुश-खबरी छपी,
गमों की ख़बरें भी छपीं,

और फिर दो रूपये में अख़बार बिकी
या फिर ज़िन्दगी बिकी
अख़बार बेचने वालों की……

Modified by:- Nidhi Gupta
Originally written by:- Ashish Kumar

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यादें…..!!!!

May 10, 2022

Shanky❤Salty

परिस्थिति अनुकूल हो तो सब आजु-बाजू ही नज़र आते है
पर जब परिस्थिति विकट हो तो निकट नज़र कोई नहीं आता है
परेशान था मैं, कुछ अनुकूल ना था
हाँ मेरा व्यवहार भी कुछ पल के लिए प्रतिकूल था
कमरे कि बिखरी चीजों में तुम्हें खोजता था
यकिनन मेरे पैर अब लड़खडाते है
आँखों से भी कम नजर आता है
धड़कनों का तो तुम्हें पता ही है
लिखना तो छूट रहा है अब
हर किसी से मेरा रिश्ता टूट रहा है अब
ऊंगली मुझको नहीं उठानी है
वक्त, हालात और तुम पर
हाँ गलती मेरी ही है और गलत भी मैं ही हूँ
लगाम मेरी नहीं थी ज़ुबां पर
इसलिए तो हर कोई ख़फ़ा है मुझ पर
क्या लेकर आया था मैं
और लेकर क्या जाऊँगा मैं
चार दिन की ही है ज़िन्दगी
ना तो भीड़ साथ जाएगी
और ना ही तुम
ठीक है मेरी आवाज अच्छी थी
मेरी कुछ हरकतेें अच्छी थी
हाँ यार वो सब था
पर अब नहीं
खैर छोड़ों ये सब बातें
स्वास्थ्य तो जा ही रहा है
साथ ही धन दौलत भी
अब तो मैं चलता हूँ
हो सके तो तुम आ जाना
ग़र नहीं
तो अंतिम यात्रा कि ख़बर मिल ही जाएगी
हाथ जोड़कर ही कहता हूँ
साँसें है तब तक ही साथ रहो ना
साँस रूकते ही मैं यादें बन तुम्हारे साथ रह लूंगा ना


Modified by:- Preetii Sharma
Originally written by:- Ashish Kumar

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दो लेखक…..!!!!

May 1, 2022

Shanky❤Salty

दो दोस्त मिलते हैं तो क्या होता है?
चुगली होती है तीसरे की 😆
पर जब दो लेखक मिलते है तो सिर्फ
किताबों कि ही बात होती है
चाहे वो मंजुर नियाज़ी साहब की हो
या हो कबीर जी की बातें
नालंदा विश्वविद्यालय की बातें हो
या हो मगध विश्वविद्यालय की बातें
राम जी की भी बातें और अल्लाह की बातें भी
केदारनाथ की बातें और अमरकंटक के नर्मदा की भी बातें……
बातें है खत्म कहाँ होती है……?
जब निकलती है तो बहुत दुर तक जाती,
उम्र में तो हम माँ बेटे जैसे हैं
हकीकत में खून का रिश्ता नहीं,
पर हाँ हैं तो हम दोनों ही उसी ब्रह्म के संतान…….
कहतीं तो वो मुझको बेटा है
और मैं उन्हें आण्टी
कुछ लोग कहते हैं वो आण्टी नहीं माँ जैसी लगती हैं
तो कुछ कहते किसी जन्म की माँ जरूर होगीं वो मेरी,
पर जो भी हों, हैं तो मेरी सबसे प्यारी आण्टी जी,
हर रिश्ते में स्वार्थ देखा
पर यहाँ सिर्फ निस्वार्थ और निश्छल प्रेम ही छलकता देखा है,
दोनों के उम्र में इतना फर्क है और मिले भी पहली बार हैं
पर अपनापन सा महसूस होता है
पता ही न चला वक्त कब बित गया,
कुछ मिठाईयाँ और चॉकलेट ही लेकर गया
और आपने भी कुछ पैसे दिये
पर वह सब तो वक्त के साथ खत्म हो जाएगा
लेकिन आपका वात्सल्य और माधुर्य प्रेम
तो मेरे साथ आशीर्वाद बन कर भी हमेशा रहेगा
चाय तो जल्दी पीता नहीं था
पर आपके साथ चाय पर चर्चा भी हो गई
पेट भरा था फिर भी
आपके साथ खाना खाने की किस्मत राम जी ने लिख ही दिया था…….
बात तो हुई हरिणा दीदी के बारे में, मधुसूदन अंकल, कुमूद दीदी,
निधि दीदी, प्रीति, वर्मा अंकल, पदमा-राजेश आण्टी की बातें
राम जी की भी बातें, हरि नारायण की भी बातें हुई
शंकर से नर्मदा का कंकर तक
मृत्यु से मोक्ष तक
जीवन से जीवन जीने की कला तक
बस माँ भवानी की कृपा हम दोनों पर बनी रहें
सच में आपसे मिलकर जितनी खुशी हुई
उतनी खुशी और कभी किसी से भी मिलकर नहीं हुई थी
आप स्वस्थ रहे और हमेशा लिखते रहें


Modified by:- Nidhi Gupta & Preetii Sharma
Originally written by:- Ashish Kumar


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हनुमान चालीसा…..!!!!

April 24, 2022

Shanky❤Salty

हनुमान चालीसा हर किसी को पढ़ना है
किसी को घर में
तो किसी को रोड़ पर
तो किसी को मस्जिदों के सामने
तो किसी को मंदिरों में
इसके घर के बाहर
तो उसके घर के बाहर
बड़ी बड़ी रैलियाँ निकालनी है
पर किसी को भी
हनुमान जी की तरह
वाणी में विनय नहीं रखना है
ह्रदय में धैर्य नहीं रखना है
सदाचार रख नहीं सकते
ब्रह्माचर्य का तो नामों निशान नहींं है
है तो है
बस
चित में राग और द्वैष
खैर छोड़ो
हनुमान चालीसा हर किसी को पढ़ना है


Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Ziddy Nidhi

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नादानी….!!!!

April 20, 2022

Shanky❤Salty

मंदिर गए थे कुछ लोग
हाँ भीख माँगने ही
देखा था मैंने उन्हें
माना कि हाथ में कटोरा ना था
पर नियत में भीख ही थी
अमर होने कि भीख माँग रहे थे
यह देख राम जी मुस्कुरा रहे थे
और मुस्कुराए भी तो क्यों नहीं
राम जी ने ही तो द्वापर युग में
कृष्ण रूप में आकर मानव मात्र के लिए
जब गीता का ज्ञान दिया अर्जुन को
तो उन्होंने स्पष्ट कहा था

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ॥

अर्थ है:
आत्मा को
न शस्त्र काट सकते हैं,
न आग उसे जला सकती है।
न पानी उसे भिगो सकता है,
न हवा उसे सूखा सकती है।

स्पष्ट है, तुम तो हमेशा से ही अमर हो फ़िर भी कटोरा लेकर भीख क्यों? अज्ञान से या नासमझी से या मुर्खता से?

जब माँग रहे हो राम जी से तो राम जी को माँगो ना। यह चिटपुटिया चीजें क्यों माँगोंगे?

हाथ पर गीता रख कसमें नहीं खानी चाहिए। हाथ में गीता लेकर उसको पढ़ना चाहिए।

गाड़ी में बैठ गए तो गाड़ी नहीं बन जायेंगे। घर में बैठ गए तो घर नहीं बन जायेंगे।
मेहेंदी का पत्ता दिखता हरा है पर वास्तविक में तो लाल है।
कब पहचानोगे अपनी लाली को??? अपनी यात्रा को सच में अंतिम कर लो नहीं तो जिसे अंतिम यात्रा कहते हो ना दरसल हकीकत में वो अंतिम होती नहीं।


Modified by:- Preeti Sharma
Inspired by:- Sonali
Originally written by:- Ashish Kumar


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Suggestion…..!!!!

April 18, 2022

Shanky❤Salty

Hello my lovely Readers & Writers,

Hope you are not fine😁
If you are fine then
I’m sure you all forgot me😅
Btw, come to the point.
I’m planning for my 11th book named as
“My Last Journey”
Totally based on death.
How we welcome
A newborn body
To
The last farewell of a body.

Because without your support
My words are incomplete.
So I request you to all
Please give your valuable
Suggestion about the topic in this form
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तुम मिलो या ना मिलो…..!!!!

March 21, 2022

Shanky❤Salty

तुम मिलो या ना मिलो
पर तुझे पाया है तो पाया है मैंने,
ना तो इश्क़ की बात करेंगे
और ना ही इबादत की,
हम बात करेंगे तो
सिर्फ और सिर्फ तेरी ही बातें

ग़र मिल जाते तुम
तो फ़िदा ना होते हम,
ये अल्फ़ाज़ तुम्हारें ना होते
जो हम आज लिख रहें हैं,
आँखों से आँसू युंही न छलकते,
तुझको ही पुकारूँ,
ग़र मिल जाते तुम
तो फ़िर किसपे हम मरते


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हो ली……!!!!

March 17, 2022

Shanky❤Salty

होलिका में लकड़ी जलेगी
फेरे लेतें फिरोगें
पर हमारा अहम कब जलेगा….?
राम जी के लिए मन का मनका कब फिरेगा…?
पापिन, अविद्या कब मिटेगी….?
अहंकार को राख होते कब देखेंगे….?
होली में लाल हो या हो पीली
हम उसी रंग में रंग जाते हैं
वो कहते हैं
लाल ना रंगु ना रंगु पीली
पीया मोहे अपने ही रंग में रंग दो ना
रंग दो ना….
सच में राम जी
ज्ञान के रंग में रंग दो ना
ऐसा रंग में रंग दो जिससे
सब कुछ राम राम राम राम ही दिखे
नहीं देखना है मुझको
जात, धर्म, मजहब, रंग भेद की मूरत
ऐसा रंग दो कि वो रंग कभी उतरे ना
यह होली आपके साथ होली राम जी
आपके साथ हो’ली’ राम जी

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शादी…..!!!!

March 13, 2022

Shanky❤Salty

मकसद उनका सुंदर सुशील बहु घर लाना नहीं होता
बल्कि नोटों से भरी सुटकेस, गहने घर लाना ही होता है

पाल पोस कर वो बेटे नहीं बकरे तैयार करते है
जिन्हें वो शादी के नाम पर बेच देते है


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Poem on Friends

Shanky❤Salty

मेरी एक दोस्त है,
नाम है उसका रिया
है तो मेरी सबसे अच्छी दोस्त
लेकिन Attitude है उसके
अंदर बहोत।
फिर भी जैसी भी है,
अच्छी है मेरी दोस्त।
चलो चलते है दुसरे दोस्त पर
नाम है उसका Samar
वो है मेरे क्लास का मोनीटर
सब पर रोब जमाता है,
आता है कुछ भी नहीं फिर भी,
अपने आप को smart समझता है
जब क्लास में टीजर नहीं हो
वो भी Attitude दीखता है।
लेकिन फिर भी,
मेरा सच्च दोस्त कहलाता है।
अब आता है तीसरा मित्र
उसका नाम है Shanky
मैं उसे चिढ़ाती हूँ snaky-snaky-snaky
जब भी उससे बातें करू
मुझे परेशान करता है,
है मेरा सबसे प्यारा दोस्त।
दीदी दीदी बुलाता है।
~ Imrana!

Thanks For Reading

A Lovely poem written by my Cute-cum-Funny Imrana Didi✨❤
Please give your views in the comment box about this poem.

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क्या वो भीड़ साथ निभाएगी?

March 9, 2022

Shanky❤Salty

बैठा हूँ भीड़ में ही
पर रूठी है भीड़ मुझसे
किरदार हज़ारों हैं
पर ख़ामोशी नहीं मुझमें
बस मौन हूँ मैं
हस हस कर ज़िन्दगी काट रहे हैं वो
आखिर कब तक हम
भीड़ में जियेगें

यात्रा तो अकेले ही करनी है
बेशक अंतिम यात्रा में भीड़ तो होगी
पर केवल शमशान तक ही
उसके आगे की यात्रा में
क्या वो भीड़ साथ निभाएगी???


Modified by:- Ziddy Nidhi

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धन्यवाद सदाशिव शंभू…..!!!!

March 02, 2022

Shanky❤Salty

धन्यवाद सदाशिव शंभू

रूपये, पैसे, धन, दौलत, दिमाग खर्च कर के वो नहीं मिल सकता है जो आपने महाशिवरात्रि की रात्रि में दिया है। धन्यवाद सदाशिव शंभू धन्यवाद🙏💕

चारों प्रहर में पुजा हुई आपकी
दुध से, दही से, धी से, मधु से
विल्वप्रत्र से, जल से, चंदन से
पर शंभो यह चिज, वस्तु
आपके शिवलिंग स्वरूप में टिक न सकी
पुष्प मुरझा गए, दुध, दही, जल तो बह गए
जो भी अर्पण की सब उतर गया शंभू
बस आप थे, हैं और सदा रहेंगे
ठीक वैसे ही हम भी है शंभू
गाड़ी में बैठ गए तो खुद को गाड़ी नहीं मानते हैं
घर में रहते हैं तो खुद को घर नहीं मानते हैं
जग को देखा था अब तक शंभो
पर आपने तो उसे ही दिखा दिया जिससे सारा जग है
सुख-दुख सपना है केवल शंभू ही अपना है
ना तो अन्न लिया ना लिया जल
पर शंभू ने जो दिया है उसे शब्दों में बयां करना संभव नहीं है
तृप्त कर अनहद नाद दिया है

✨धन्यवाद सदाशिव शंभू धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद सदाशिव शंभू✨

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नशा……!!!!

March 1, 2022

Shanky❤Salty

देखा है मैंने
भाँग पीने से
नशा चढ़ता है
ठीक उसी प्रकार
तेरा नाम मेरे अंतः में बसता है
पर तेरी सौगंध खा कहता हूँ मैं
भोले बाबा के नाम से ही सारी ज़िंदगी सुधरता है

रुद्राष्टकम अर्थ सहीत

https://drive.google.com/file/d/18XiGiZGHuchPbKAms6dcw08QAzRvAP_Y/view?usp=drivesdk

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इस महाशिवरात्रि……!!!!

February 27, 2022

Shanky❤Salty

शिवरात्रि सोने का नहीं
जागने का दिन है
अपने आत्मज्ञान को
जागाने का दिन है
अपने शिव स्वरूप में
विश्रांति पाने की रात्रि है

उपवास करने का दिन है
पर भूखे नहीं मरना है
शरीर से कुछ भी
न खाओ-पीयो
पर अपनी आत्मा को
राम रस-शिव रस से
तृप्त कर दो
सुंदर श्रृष्टि को देखते हो
पर यह श्रृष्टि जिससे है
उसको क्यों नहीं देखते हो

मेहंदी के पत्ते भी खुद को
हरा ही समझते है
उन्हें भी अपनी लाली का
अंदाज़ा नहीं है
तुम भी
चीज, वस्तु, रूपये, पैसे में
खुशियाँ ढूढ़ते हो
तुम्हें भी अपनी शक्तियों का
अंदाज़ा नहीं है

कब तक खुद को
खुशियों और ग़म की
जंजीरों से बाँधें रखोगे
खुद को शरीर समझ कर
कब तक जुल्म ढहाओगे
हिंदू मुसलमान समझ कर
कब तक झोपड़ियों में रहोगे

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र, सिया, सुन्नी समझ कर
कब तक खुद को ठगोगे
गोरे काले भी तो समझते हो ना
आखिर कब तक
राजा हो या रंक असली औकात
तो शमशान में दिख ही जाती है

इस महाशिवरात्रि शिवजी पर दूध, घी, जल, बेलपत्र, फूल, फल चढ़ा कर पुजा करो या ना करो
पर अपने आत्म स्वरूप से उस आत्म शिव की पूजा जरूर से जरूर करना।

भोले बाबा कहते हो उन्हें
तो वो कहीं हिमालय पर, गुफाओं में, मंदिरों में, मस्जिदों में तुम्हें मिलें या ना मिलें मुझे पता नहीं है। पर तुम्हारे भीतर वो तुम को जरूर से जरूर मिलेगें।
बस करबद्ध प्रार्थना है सबसे इस महाशिवरात्रि अपने अंतःकरण में अपने भीतर अपने आप से मिल कर देखों। मेरा वादा है आप सबसे फ़िर कुछ भी देखने को बाकी नहीं रह जाएगा।


नाहं वसामि वैकुण्ठे योगिनां हृदये न च
मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद।।


Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal

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चिंता…..!!!!!

February 21, 2022

Shanky❤Salty

ज़िंदगी भी अब मुझको व्यर्थ सी लगती है
खुद का अस्तित्व ढुँढनें में मुझको असमर्थ सी महसूस होती है
मेरी हर कोशिश ना जाने क्यों व्यर्थ सी होती है
हर पल लोग खफा हो जाते है
हर जगह हम असफल हो जाते है
आँखे बंद करते हीं आँखों से आँसु बह जाते है
इंसानियत पल-दो-पल मिटता जाता है
एक-दुजे से इंसान जलता ही जाता है
मुट्ठी में रेत की तरह समय बितता जाता है
अर्थ कि चिंता कर मनुष्य एक दिन अर्थी पर लेट ही जाता है


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अमृत…….!!!!

February 20, 2022

Shanky❤Salty

अमृत

है तलाश सबको अमृत की
ऐसी चीज़ जिसे खा-पीकर
अमर हो जाना है

पर कमबख़्त उन्हें कैसे समझाऊँ मैं
कि दुनिया में ऐसी कोई चीज़ ही नहीं
जो तुम्हें मार सके
तुम तो सदा ही अमर-चैतन्य हो

बस ज़रूरत है तो तुम्हें उस आत्मज्ञान रूपी अमृत की


शुरू करो जश्न कि तैयारी…..आ रही है महाशिवरात्रि


Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal

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आँसू या मोती…….!!!!

February 18, 2022

Shanky❤Salty

वो कहते है ना..
“मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है,
जो ना समझे तो पानी है !!”

यार मोती और पानी की बात हीं छोड़ो
ग़र हकीकत में वो समझते इतना
तो आँखों में आँसू ही ना होते।


Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal

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गिरने ना दो……!!!!

December 25, 2021

Shanky❤Salty

चीज़, वस्तु, रुपए, पैसे गिर जाए तो हम उसे दुबारा उठा सकते है
लेकिन अगर हमारा चरित्र गिर जाए तो उसे हम कभी दुबारा उठा नहीं पाएँगे


अटल जी के चरणों में ये पंक्तियाँ समर्पित है

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यह तो माँ है, माँ….!!!!

December 14, 2021

Shanky❤Salty

गीता
यह तो माँ है, माँ!
शरीर रूपी माँ नहीं
आत्म रूपी माँ है
ज्ञान रूपी माँ है


थके, हारे, गिरे हुए को उठाती है
बिछड़ों को मिलाती है
भयभीत को निर्भय,
निर्भय को नि:शंक
नि:शंक को निर्द्वन्द्व
बनाकर
नारायण से मिला के
जीते जी मुक्ति का साक्षात्कार कराती है
मेरी माँ “गीता”

ऐसा पढ़ा है मैंने,,
श्री कृष्ण के मुख से निकली है “गीता”
श्री विष्णु का ह्रदय है “गीता”


परन्तु, वास्तव में
“गीता” तो किसी मजहब, पंथ, समुदाय, जाती, धर्म, विषेश का नहीं है
बल्कि यह तो जीवन जीने की कला है
जिस तरह रोता हुआ बच्चा
माँ की गोद में आकर चुप हो जाता है
वैसे ही “गीता” माँ को पढ़ कर
हर बच्चा, बुढ़ा, जावन अपने आप को निश्चित कर सकता है


578 भाषाओं में “गीता” का अनुवाद को चुका है जिसका भी मन है पढ़ने को वो
किसी भी भाषा में “गीता” को पढ़ सकता है
मैं आज “गीता जयंती” पर शुभकामनाएं क्या दुंगा आप सब को…….बस करबद्ध प्रार्थना है 24 घंटे में से मात्र 24 ससेकेंड “गीता” रूपी माँ के गोद में बिताए। मैं तो इतना विश्वास से कह सकता हूँ कि विश्व में “गीता” के समान कोई दूसरा ग्रंथ नहीं है

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Ziddy Nidhi

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हाँ मैं लड़की हूँ…..!!!!!

December 11, 2021

Shanky❤Salty

हाँ मैं लड़की हूँ!

मेरे चरित्र पर उँगली उठाए जाते हैं
आँखों से मेरे कपड़े भी उतारे जाते हैं
मैं जंगल में जितना जानवरों से नहीं डरती
उतना तो रोड़ पर घुमते मानव रूपी दरिन्दों से हूँ डरती


मेरे सीने को देख
कभी किसी ने आम कहा,
तो किसी ने संतरा कहा,
किसी ने उसे छुना चाहा,
तो किसी ने उसे नोचना चाहा,
सड़ जाते मेरे ये दो फल
तो अच्छा होता
हर किसी को चाहिए होता है यह फल


सोशल मीडिया में अपने मेसेजस चेक करो
तो जितने भी अंजान मेसेज हैं
उन सब को उतसुकता है
मेरे जिस्म का नाप जानने की
कितने बड़े है मेरे फल?
उम्र क्या है मेरी?
साथ चलोगी तुम मेरे?
मेरे साथ सोउगी?
मैं तुम्हें खुश कर दूंगा
कितना लोगी?
कितने यार है तेरे?
हर पल चिंतित रहती हूँ मैं


हाँ मैं लड़की हूँ!


किसे अपनी व्यथा सुनाऊँ?
अपने दोस्तों से कहती हूँ
तो उन्हें मुझसे ज्यादा
इस तरह के मेसेजस और कमेंटस आतें हैं


चौदह साल का लड़का भी पीछे पड़ा है
साठ साल का बुढ़ा भी साथ सोने के लिए मर रहा है
साथ काम करने वाला बंदा भी मौके के फिराक में बैठा पड़ा है


हाँ मैं लड़की हूँ!


माना कि गलती मेरी थी
छोटे कपड़े मैंने पहने थे
पर उनका क्या
जिन्होंने हिजाब पहनना था?
तुमने तो अपनी आग में नवजातों को भी नहीं छोड़ा था


कहूँ तो क्या कहूँ मैं
लिखूँ तो क्या लिखूँ मैं
स्तन ही तो था
जिससे दुध निकलता था
ऐसा दुध
जिसे न तो गरम करना पड़े और न ठंडा
जैसा है वैसा ही अमृत तुल्य है
उस स्तन से निकल दुध को पीकर तुम बड़े हुए थे
और आज उस स्तन को ही नोचने पर आदम हुए हो?


हाँ मैं लड़की हूँ!


नहीं, नहीं
मैं तो खिलौना हूँ
मेरे जिस्म को नोचना दरिंदो का काम
मेरी आत्मा के मसलना अपनों का काम


एक महिला को स्तन कैंसर हुआ था
उन्होंने राम जी को धन्यवाद देते हुए
शर्म के दो पहाड़” कविता लिख दी थी
कहा था उन्होनें “अब तुम पहाड़ पर उंगलियाँ नहीं चढ़ा पाओगे,
जिस पहाड़ से दूध की धार बहती थी
अब वहाँ से मवाद बहतें हैं,
अब पहाड़ के जगह समतल मैदान बचें हैं।”


दरिंदों ने दर्द इतना दिया की अब वे दर्द में भी खुश है।


हाँ मैं लड़की हूँ!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- Ziddy Nidhi