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कौन हैं राम…….!!!!

March 26, 2021
Shanky❤Salty
मैंने एक किताब लिखी है जिसे आप देख महसूस करेंगे की यह किसी विशेष धर्म, संप्रदाय, जाति, मज़हब के लिए है लेकिन ये सत्य नहीं है, यह किताब पूरी मानव जाति के लिए है। इस किताब में राम शब्द का प्रयोग एक उर्जा के तौर पर किया गया है जो हर ज़गह विद्यमान हैं। वह उर्जा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह में भी है और शिवजी में भी है,
जिसे आजकल की साईंस ने भी माना है
“गौड पार्टीकल” के रूप में।
मेरा किताब लिखने का एक ही मकसद है की जाति, मजहब, धर्म, रंग, भेद,…आदि को ख़त्म कर उस एक पर ध्यान देना।
दिखते तो यहाँ पर सब अलग अलग हैं पर हैं तो सब एक ही ना।
फ़िर यह ईर्ष्या राघ द्वेष क्यों और किससे..!!!
राजा हो या रंक असली औकात तो श्मशान में दिख ही जाती है
फ़िर जीते जी यह बाहरी दिखावा क्यों।
कुछ वास्तविकता को मैंने लिखा है जिसे लोग जान कर भी अनजान बनें हैं।
जिस्म और रूह की सत्यता को मैंने स्पष्ट रूप से लिखा है।
राम होकर राम को भजना है।
इस किताब का उद्देश्य अपने भीतर छुपी आत्मचेतना को जगाना है।
किसी भी चीज़ का नशा एक-न-एक दिन उतरना ही उतरना है।
रात को पियो तो सुबह
सुबह को पियो तो रात
उतर ही जाता है।
राम नाम का प्याला पी कर के तो देखो।
राम नाम का नशा कर के तो देखो वचन है मेरा आपको इससे सारी ज़िन्दगी सुधर जाती है
राम जी ही तो सरस्वती जी के रूप में मेरी जिह्वा पर विराजमान हैं
और मेरी कलम को एक नई सोच देते हैं।
मैं उन्ही राम जी के अंश राधा अग्रवाल जी और निधि गुप्ता “जिद्दी” जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिन्होंने मेरे लिखे इस लेख को जो राम जी को समर्पित है
को सही किया है इसे सुंदर बनाया है।
हरिणा पंडया जी और निधि गुप्ता “जिद्दी” ने इस किताब को लिखने में मुझे सहयोग दिया है।
राधा अग्रवाल जी ने मेरी इस किताब का शुद्धिकरण किया है।
सचिन गुरुरानी ने मेरी किताब के लिये डिजाइन तैयार किया है।
मैं इन सभी को तहेदिल से धन्यवाद करता हूँ।

मेरी किताब पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

Author:

I am Ashish Kumar. I am known as Shanky. I was born and brought up in Ramgarh, Jharkhand. I have studied Electronics and Communication Engineering. I have written 6 books. I have come to know so much of my life that life makes me cry as much as death. Have you heard that this world laughs when no one has anything, if someone has everything, this world is longing for what I have, this world. Whatever I am, I belonged to my beloved Mahadev. What should I say about myself? Gradually you will know everything.

12 thoughts on “कौन हैं राम…….!!!!

  1. वाह। बहुत बहुत बधाईयाँ। विलम्ब से बधाई दे पाया उसके लिए दुखी हूँ। शीर्षक बेहतरीन है।

    Liked by 1 person

    1. बधाइयाँ ह्रदय से होती है…..विलंब से नहीं 😅😅
      जब भी हो आपका आशीष इस आशीष को मिलता ही रहेगा 💕😇🤗

      Liked by 1 person

      1. बिल्कुल सही कहा। आशीष सदैव रहेगा मगर उपलब्धि की खुशी बहुत बाद में मिली हमें। निरन्तर आगे बढ़ते रहिये।

        Liked by 1 person

  2. Kein Wort
    kein Buch
    kann die Tiefe
    der Seele
    aller Menschen
    ergründen

    das Leben selbst
    bleibt uns ein Geheimnis

    die Seele redet
    in jedem Menschen
    in seiner Art
    seinem Gewissen entsprechend

    der Hass
    über ihre Herkunft
    über Flüchtlinge
    ihrer Hautfarbe
    den Obdachlosen
    den Hungernden
    den geschändeten Frauen
    und ihren Kindern

    gegen den eigenen Gedanken
    sich gegen sich selbst
    das Urteil fällen

    wenn ein Gefühl
    von Rassenhass
    in uns emporsteigt
    in uns selbst
    sich breit machen will

    ohne auf
    die unteilbare
    Menschenwürde
    von allen Menschen
    zu achten

    wir sind eine Vielfalt von Menschen
    wir sind alle
    aus der Mutter der einen Seele

    ich kann niemand anderen erziehen
    als mich selbst
    tagtäglich das Bessere zu üben

    ich gehe tagtäglich
    im Traum in die Schule der Seele

    zu neuer Einsicht
    zu dem was ich verdorben
    einen neuen Weg einzuschlagen

    die Seele will uns erwecken
    unser Bewusstsein
    uns selbst im Unterbewusstsein
    als den Fremden
    in uns zu beobachten

    wir sind berauscht durch
    unsere Sinne
    noch mehr am hellichten Tag

    als das zu sein
    als das was wir wirklich sind

    wir sind unvollkommene
    verletzliche Wesen

    niemand weiss uns
    uns den anderen
    die wirkliche Wahrheit

    der eigene Geist wird hochmtig
    eine Lehre für den Sinn des Lebens
    unsere Wahrheit für andere in Worte
    mit einer Zunge wie ein Sieb zu kleiden

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