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तुम खुद को मर्द कहते हो….!!!!

June 30, 2020
Shanky❤Salty
सुना है
तुम खुद को मर्द कहते हो?
औरतों के जिस्म का धंधा भी करते हो
छोटे कपड़े न पहनने की नसीहत देते हो
और बुरखे वाली को भी नजरों से नंगा कर देते हो
खुद को खुद्दार कहते हो
फिर दहेज माँग खुद नामर्द क्यों बना देते हो
है जन्मते वे औरत के जिस्म से
फिर होकर बड़े वे फेरते हैं हाथ औरत के जिस्मो पे
और खुद को मर्द कहतें हैं वो…..!!!!
वो बाँझ कहतें हैं औरत को
न होते बच्चे उनके तो
करतें हैं ब्याह एक के बाद एक वो
फिर भी न हुआ बच्चा जो
तो क्यों न कहतें हैं खुद को नामर्द वो?
जब जब उनकी नजरें उठती है
तब तब सामने वाली स्त्री की नजरें झूकती हैं
और वो खुद को मर्द कहते हैं
किया था इन्हीं वक्षस्थल से कभी दुग्धपान
आज घुरते हैं उसके स्तनों को
तुम क्या यह बतलाना चाहते हो
कुत्तों की तरह माँस का टुकड़ा चाहते हो
दो पैरों के बीच को ताड़ कर
वासना की भूख मिटाना चाहते हो
और खुद को मर्द कहते है….!!!!
एक औरत ने तुझको अपनी योनी से जन्म दे, वक्षस्थल से दुध पिला मर्द है बनाया।
आज तूने उसी योनी-वक्ष को देख अपनी काम वासना जागृत कर खुद को सबकी नजरों में ना-मर्द है बनाया।

Published by Anonymous on behalf of Shanky_Salty
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi

Author:

I am Ashish Kumar. I am known as Shanky. I was born and brought up in Ramgarh, Jharkhand. I have studied Electronics and Communication Engineering. I have written 6 books. I have come to know so much of my life that life makes me cry as much as death. Have you heard that this world laughs when no one has anything, if someone has everything, this world is longing for what I have, this world. Whatever I am, I belonged to my beloved Mahadev. What should I say about myself? Gradually you will know everything.

75 thoughts on “तुम खुद को मर्द कहते हो….!!!!

  1. Speechless kar diya tu ne to yaar. Eve teasing ko bakhoobi explain kar diya. Umeed karti hu ki wo log padhe to unki aatma tak pahuche.

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      1. It is impossible to say that there can be any change in them. Because there is no film going on in which the culprit improves in the end. This is real life. People here say something else and do the opposite.
        Yes, they must change. As long as those people do not correct their thinking, then there can be no change in them.

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  2. ऐसे विषयों पर लिखना आसान नही। कलेजा होना चाहिए जिसे आपने दिखाया। बहुत ही खूबसूरत ढंग से लिखा है।बेहतरीन।👌👌

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    1. मुझे तो सबसे ज्यादा कठिनाई हिन्दी के शब्द ढूँढनें में हुए और उससे भी ज्यादा कठिनाई निधि दीदी से सहीं करवाने में। कि क्या सोचेगी वो, शब्द सही है न, कहीं अश्लीलता तो नहीं, क्या इसे पढ़कर किसी कि भावना को छोट न पहुंचे। पर लोगों को अच्छा लगा और सब ने सराहना की जान कर मुझे खुशी हुई। बस एक कमी रह गईं कि मेरे प्यारे सर ने अभी तक इसमे कोई पंक्तियाँ नहीं जोड़ी😅😅

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      1. मैं औरत तुम मर्द,
        मैं कोमल तुम सख्त,
        कई रूप मेरे,
        कई रूप तेरे भी,
        हर रूप में मैं तुझ पर प्यार लुटाती,
        दिल में विद्यमान ममता,करुणा,वात्सल्य के समक्ष
        खुद को भूल जाती,
        जरूरत पड़ी तो कोमलता छोड़ चूड़ियों के बदले
        हाथों में खड्ग सजाती,
        यमराज से छीन
        तेरे प्राण वापस ले आती,
        तुम भी हर रूप में
        मेरे साथ होते,
        अच्छा लगता
        जब तुम
        खुद को मर्द कहते,
        मुझपर हक जताते,
        खुशनसीब समझते खुद को हम,
        तुझे पिता,भाई,पति,बाबा,नाना के रूप में पाकर,
        जीवन एक गाड़ी तो तुम उसकी एक पहिया,
        ना ही मेरे वगैर तेरा और ना ही
        तेरे वगैर मेरा कोई अस्तित्व!
        मगर मैं बहुत दुखी,शर्मिंदा हूँ
        तेरे बनाए इस समाज में,
        कभी सोचकर देखना
        क्या मैं जिंदा हूँ
        तेरे इस समाज में?
        नियम तेरे,
        बोझ बन जाती मैं,
        हुनर लाखों मगर शूली चढ़ जाती मैं,
        तेरे कुकृत्य ऐसे की बाहर निकलना मुश्किल,
        कपड़े पहनूं मगर
        तेरी नजरों से बच पाना मुश्किल,
        भीड़ में रहूं या अकेले में,
        अपनी मर्दानगी
        दिखा ही जाते तुम,
        मैंने त्रिभुवन विजयी रावण को ठुकराया,
        तड़पे तुम ,तड़पी मैं भी,
        कुछ पल अकेली मैं
        अकेले तुम,
        फिर अग्नि परीक्षा सिर्फ मेरे लिए ही क्यों?
        दोनों हाड़ मांस से बने
        फिर लांछन मुझपर ही क्यों?
        मर्जी तेरी जुए में दाव पर चढ़ाते,
        भरी दरबार चीर हरण होता
        तड़पती मैं
        और तुम मौन होकर भी
        मर्द कहे जाते,
        तेरे हर पाप भूल मैं मुस्कुराती,
        एक बिस्तर पर रह,तेरे
        कई जुल्म सहती
        फिर भी साथ निभाती,
        दूल्हा बन कतार में लगे
        पैसों के बल खरीदे जाते,
        बिकते तुम,
        विदा मैं हो जाऊँ,
        पुत्र ना दूँ तो बांझ कहलाऊँ,
        छेड़ता तुम,अपयश मुझपर,
        कुलटा मैं कहलाऊँ,
        वाह रे मर्द!
        तेरी मर्दानगी मैं कितना गिनाऊँ,
        मैं औरत होकर भी मर्दानगी दिखा गई,
        तुम मर्द होकर भी मर्दानगी दिखा ना सके,
        अरे नामर्द! तेरे कुकृत्य कितना गिनाऊँ,
        तुम खुद को राह दिखा ना सके,
        तुम तो मर्द वाक़ई में है
        मगर
        खुद को तुम मर्द बना ना सके।

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    1. नाथ जी से प्रार्थना है कि सबको सद्बुद्धि दे ताकि एैसा कृत रूक जाए🙏
      और दीदी आपका ह्रदय से बहुत बहुत आभार मेरे लेख को पसंद करने के लिए💐😊

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