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दर्द के हर अल्फाज……!!!!

May 27, 2020
Shanky❤Salty
बात है मई 18 की। ऐसा बहुत कम ही होता था कि मुझे जल्दी नींद आ जाए पर उस रात मुझे 9 बजे से ही नींद आ रही थी। पर अफसोस सो नहीं पा रहा था। पता नहीं क्यों???
करीब 12बजे होंगे मेरा मोबाईल वाईबरेट करता है और मैं जैसे ही मोबाईल हाथ में लेता हूँ तो स्तब्ध रह जाता हूँ।
हड़बड़ा कर फोन उठाया
“हैलो….!!!!”
आवाज आती है
“कैसे हो…???”
मैं उससे पूछता हूँ
“सब ठीक तो है”
उधर से आवाज आती है
“मुझे क्या हुआ है”
मैंने कहा उससे
“तो आज अचानक से मुझे कैसे याद किया”
वो कहती है
“मेरी मर्जी, मेरा फोन है”
इतना कह वह जोर से हँसने लगी
मैंने कहा
“वाह जी, मेरा डासलॉग मुझे ही सुना रही हो”
तब वह बहुत ही प्यार से कहती है
“मैं भी तो तुम्हारी ही हुआ करती थी ना कभी, हाँ अब बात नहीं होती है तो इसका मतलब ये नहीं ना कि कोई मेरी जगह ले ले।”
मैं यह शब्द सुन खामोश हो गया।
और काफी देर के लिए चुप हो गया और उसकी साँसों को सुनने लगा।
वह भी चुप थी फिर अचानक से कहती है
“अब बस भी करो मेरी साँसों को सुनना इत्ते दिनों बाद फोन किया है। कर लो न आज पुरी रात मुझसे बात”
मैंने कहा
“तुम्हें कैसे पता मैं साँसें सुन रहा हूँ”
हंसते हुए कहा उसने
“तुम भी ना पागल भुलक्कड़ हो गए हो
जब हम पास होते थे तो मैं तुम्हारे सीने पर सर रख तुम्हारी धड़कन सुना करती थी और जब दूर रह फोन पर बातें किया करते थे तो तुम चुप रह मेरे साँसें सुना करते थे न। बस महसूस किया अब भी तुम वही कर रहे हो। तुम्हें कुछ याद ही नहीं रहता है अब सब भुल गए हो। बादाम खाया करो समझे मोटु। लेकिन अब ये मत कहना की मम्मी मुझे नहीं देती है। यह सब तुम्हारी बहानेबाजी है”
मैंनें कहा
“नहीं कहुंगा यार, पर मुझे बादाम अच्छा ही नहीं लगता है तुम्हें भी पता है खैर छोड़ो ये सब। तुम्हें सब याद है बस मुझे ही भुल बैठी थी”
वह चिल्ला कर कहती है
“कुछ नहीं भुली थी बस वक्त सही नहीं था और तुम्हारी आदत छुड़वानी थी। जो तुम्हें मेरी हो गई थी। अब बताओ भी यार कैसे हो? कहाँ हो? तुम्हारा समोसा खाना कम हुआ या नहीं? मिल्किबार तो छुटी होगी नहीं ये तो दावे के साथ कह सकती हूँ। मुझसे ज्यादा प्यार तुम मिल्किबार से करते थे और आज भी करते होगे ही। हुह😏
तुम्हारी तबीयत कैसी है??? दिल की धड़कन कैसी है? सही हुई या पहले जैसी ही तेज रहती है? देर से अब भी सोते होगे या नींद की दवा ले कर ही सोते हो? तुम्हारा इन्हेलर छुटा या नहीं? खाने में भी वहीं पछत्तर नखड़े होंगे? पानी पीना भूल ही जाते होंगे? यार तुम चुप क्यों हो? कुछ बोलो न मेरा शैंकी? इत्ते दिनों बाद फोन किया है और तुम हो की बोलते ही नहीं।”
मैं कहता हूँ
“क्या कहूं पगली बस खुद को यकीन दिला रहा हूँ कि तुम ही हो फोन पर, पर कैसे? और क्युं? मैं तुम्हारे सवालों का जवाब दूं या अपने सवालों का जवाब माँगुं?
मुझे बीच में ही रोकेते हुए
“मेरा बच्चा तुम चुप रहो, मैं सब कुछ कहती हूँ। बस शांति से सुनो जो तुम्हें सबसे अच्छा लगता है।
मैंने बहुत पहले तुम्हारी लिखी किताब ‘यादों के पन्नों से‘ मंगवाई थी पर कभी हिम्मत नहीं हुई उसे पढ़ने की। क्योंकि पता था मुझे मैं जब भी पढ़ुगी खुद को रोक नहीं पाऊंगी तुम्हारे प्रति मेरा प्रेम फिर बाहर आएगा और मैं फिर कमजोर हो जाऊंगी। और हुआ भी एैसा ही। आज सुबह कमरे की सफाई कर रही थी तभी मुझे तुम्हारी किताब नजर आई। और रोक नहीं पाई पढ़ने से खुद को। फिर क्या पढ़ते ही आँखों से आँसू बहने लगे। पहले बहुत गुस्सा आता था जब तुम मरने की बाते करते थे लेकिन आज जब मैंने तुम्हारी लिखी ‘मेरी अंतिम यात्रा‘ को पढ़ा तो खुद पर अफसोस हुआ की मैं बे-वजह तुम पर गुस्सा करती थी। हर एक शब्द सत्य है और अटल सत्य है। जिसे कभी कोई झूठला नहीं सकता। हमें आज नहीं तो कल इसे स्वीकार करना ही होगा तो आज क्यों नहीं? हर एक लाईन तुम्हारी किताब का जबरदस्त है। तुम्हारी किताब मेरी पनीर चिल्ली की तरह है। हर लाईन में कुछ नया है। “
बीच में रोकते हुए
“चुप रहोगी पागल। ये सब मत बोला करो मुझे पसंद नहीं है। गर कोई कमी है तो बोलो उसे सुधारूगा।”
वह कहती है
“नहीं मेरा बच्चा कोई कमी नहीं है। हर चीज पूरी है चाहे वो रोटी हो, या गरीबी हो, या दोस्ती हो या एक कहानी हो। सब सही है। तुम खुद अंदाजा लगा लो मेरे पागल बच्चा मैं पढ़ तुम्हारी किताब को रोक नहीं पाई। अब चलो मुझे जल्दी से बताओ। अपनी तबीयत के बारे में।”
मैंने कहा
“यार तबीयत का क्या है। कभी ठीक रहती है तो कभी नहीं रहती, लेकिन मैं ज्यादा सोचता नहीं हूँ। शरीर है ये सब तो होता ही रहेगा। मेरी लापरवाही जो है। हाँ आज भी मिल्किबार रखता हूँ पर खाता नहीं हूँ क्योंकि डरता हूँ कि कहीं खत्म न हो जाए। रही बात समोसे की तो वो अब भी खाता हूँ लेकिन घर का बाहर का खाना तो छोड़ ही दिया हूँ। घर के खाने से प्यार करने लगा हूँ इसलिए किसी भी चीज को ना कहना ही छोड़ दिया हूँ। और बात धड़कन की तो वो बस की नहीं मेरे। कंट्रोल में ही नहीं रहती मेरे। और इन्हेलर तो छुट ही गया था लेकिन वक्त बे वक्त लेना ही पड़ता है उसे, बाकी सब सही है कोई तकलीफ नहीं है खुश हूँ जो है उसी में। तुम अपना बताओ। खाना खाया या नहीं?”
वह बड़े प्यार से कहती है
“आज सुबह से नहीं खाई हूँ। दिन भर तेरा ही ख्याल आया है। और बिल्कुल भी भूख नहीं लगी और न पानी पीने कि इच्छा हुई है। बस शाम को मैं पापा से मिल्किबार और लिटिल हर्ट मंगवा। सोचा तुमसे बात कर खाऊंगी। पर अफसोस मिल्किबार नहीं मिला। वैसे मेरा भी सब सही ही है। तुम्हारी बातों मे ही जीती हूँ और जो-जो सिखाया था तुमने वो सब पूरी करने की कोशिश में लगी रहती हूँ। सिर्फ अपने करियर पर ही फोकस है।”
मैंने अचानक से उसको रोका
“सुनो न….एक बात कहनी है”
बहुत ही प्यार से उसने कहा
” बोलो न मेरी जान क्या हुआ”
मैंने कहा
“यार सुसु आई है…..तुम फोन मत रखना मैं तुरंत आता हूँ”
उसने जोर से हँसते हुए कहा
“ठीक है मेरा बच्चा जाओ वैसे भी एक घंटा होने को है फोन खुद ब खुद कट ही जाएगा। तुम जल्दी आओ तब तक मैं पानी भर आती हूँ किचन से और कुछ खाने का भी ले आती हूँ। फिर हम पूरी रात बात करेंगे”
मैंने कहा
“ठीक है जी” कह मैं फोन कट कर टॉयलेट चला गया।
मन में सवालों का बवंडर सा आन पड़ा। क्युं फोन की, क्या काम है उसे, क्या फिर से वह मेरे साथ रिश्ता रखना चाहती है, वगैरा-वगैरह।
अचानक धड़कन तेज हो गईं। कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। मैं चुप होकर डाईंनिग हॉल में ही बैठ गया। ग्लास में पानी ले हजारों सवालों से झूझ रहा था। तभी मन में खयाल आता है “जो होता है होने दो, तुम अपनी ओर से कुछ न करो। गलत तुम करोगे नहीं गलत तुम्हारे साथ होगा नहीं। अपनी मौज में रहो।” ग्लास का पानी खत्म कर कमरे की तरफ बढ़ा और बंद कमरा कर फोन देखा तो 7मिसड कॉल नजर आए। तब तक फिर कॉल आ गया।
जैसे ही फोन उठा “हैलो” बोला।
उधर से गुस्से का बाँध टूट पड़ा।
लगातार 15मिनट तक डाँटना। और कहना
“अब कुछ बोलोगे भी या मुंह ही बंद रखोगे।”
हंसते हुए मैंने कहा “बस हो गया, सबर का बाँध टूट गया तुम्हारा। सुसु कर 2मिनट बैठ पानी क्या पीने लगा तुम से तो रहा ही नहीं गया”
यह बात उसके दिल को मानो जख्मी कर गया हो।
फिर क्या पसर गया एक सन्नाटा, हर वक्त की तरह मैं भी खामोश वह भी खामोश हो एक दूसरे के साँसें सुन रहे थे, हम काफी देर तक ऐसे ही थे।
फिर अचानक से वह कहती है
“सुनो न”
मैंने कहा
“कहो न जी”
वह हँसते हुए कहती है
“चलो न चाँद को देखते है”
कहा मैंने
“जरा ठहरो जी, खिड़की खोल टेबल से सारा सामान हटाने दो। फिर इत्मिनान से बैठेगें।”
वह कहती है
“ठीक है, लेकिन जल्दी”
मैंने कहा
“जल्दी क्या ,कौन सा चाँद भागे जा रहा है”
तब वह मुँह बना कहती है
“अरे नहीं,लेकिन फिर भी तुम्हें तो पता है न मुझमें सबर कितना है।
मैं गुस्से में कहता हूँ
“हाँ- हाँ इसलिए तो मुझे छोड़ गई”
उसने दबी आवज में बोला
“फिर वही बात यार, मैं भुखी हूँ मुझे खिलाओ न अपने हाथो से ताकि मैं तुम्हारी ऊंगलीयों को काट सकुं”
मैंने चिल्लाते हुए उससे कहा
“खिलौनों से खेला करो,इंसानो से नहीं,मैं इन सब से आगे बढ़ चुका हूँ”
वह भी झुंझलाते हुए बोली
“अब बस भी कर झूठा, आगे बढ़ गया है इसलिए तो यादों के पन्नों को सजाए फिरता है, न खुद चैन से जीता है न मुझे जीने देता है, लाख बार कहीं हूँ शैंकि बड़ा हो जा बड़ा हो जा, लेकिन सुनना ही नहीं है, अब चलो जल्दी से खिला दो न अपनी जान को, भूखी है तेरी किताब कि वजह से, तेरी अंतिम यात्रा पढ़ तेरे पास आई है बस एक रात के लिए वो भी चाँद के साथा………”
कहते कहते उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी। और उसकी आँखों कि बारिश ने मेरे दिल को भीगो दिया।
मैं चुप करा उसे उसके दिल को तसल्ली देते हुए खिलाया। और वही उसकी पुरानी आदत पुरा मुँह भर के खाना और खाते हुए बोलना, और सच्ची पहले की ही तरह इस बार भी मुझे कुछ समझ नहीं आया वो बोल रही है, बस उस पागल की खुशी के लिए हाँ हाँ करता गया।
खाने के बाद पता नहीं क्या हुआ। उसने मुझे गोद में सुलाया और अपनी बातों में मसहुल कर दिया। चाँद देखता रहा और उसकी बातें चुप हो सुनता रहा, ज़िंदगी को जीने का तरीका सीखा रही थी।
अचानक उसने मुझसे पूछा “चाँद दिख रहा है या नहीं?” मैंने कहा “नहीं वो तो थोड़ी देर पहले ही गायब हो गया नहीं दिख रहा है”
गुस्से में वो बोली
“तो बोला क्युं नहीं मुझे, अब उठो टेबल से और छत पे जाओ और देखो चाँद को, तभी बातें करूँगी”
उसकी ये बात सुन के अजीब लगा और कहा मैंने
“अबे पागल औरत, दिमाग सही है न ,मेरी मम्मी टाँग तोड़ देगी और तो और मुझे डर लगता है इसलिए मैं नहीं जाऊंगा”
इतना सुन वो फिर जोर-जोर से हँसने लगी
और कहती है “ठीक है मेरा बच्चा”
फिर हम दोनों भविष्य की बातों में खो गए और पता ही नहीं चला कब सुबह हो गई और चिड़िया की चहचहाहट सुनाई देने लगी दोनों को।
और यह आवाज कानों को तो अच्छा लग रहा था पर दिल को मानो कचोटते जा रहा था। क्योंकि यह आवाज विदाई की बेला पास ला रही थी।
सुबह के सूरज के साथ हम दोनों ही जुदा होने वाले थे।
तभी वह कहती है “चलो न शैंकि, साथ में सूरज देखते हैं “मैंने कहा “कौन सा सूरज, डुबता हुआ सूरज” उसने कहा “नहीं जी उगता हुआ” मैंने कहा “हाँ वही यार डुबता हुआ ही”
इतना सुनते ही उसकी आँखों से आँसू बहने लगे और आवज में फिर से लड़खड़ाहट सुनाई देने लगी।
और कहा उसने
“मेरी जान रोना बंद करो और दर्द के हर अल्फाज को जिंदा रखो
अपनी डायरी मे उन तारीखों के साथ। माना की वो काली कलम तुम्हारे पास नहीं पर फिर भी जो है उसी के सहारे उसे उकेरा करो, चलो चलती हूँ”
और रोते हुए उसने फोन काट कर दिया।
और मैं बे-सुध सा वही टेबल पर पड़ा रहा।

Written by:- Ashish Kumar
My words are incomplete without support of Ziddy Nidhi

Author:

I am Ashish Kumar. I am known as Shanky. I was born and brought up in Ramgarh, Jharkhand. I have studied Electronics and Communication Engineering. I have written 6 books. I have come to know so much of my life that life makes me cry as much as death. Have you heard that this world laughs when no one has anything, if someone has everything, this world is longing for what I have, this world. Whatever I am, I belonged to my beloved Mahadev. What should I say about myself? Gradually you will know everything.

33 thoughts on “दर्द के हर अल्फाज……!!!!

  1. I know “wo” kaun h but itne dino baad v sirf khane ki baat kiye tum dono. Apne doubt clear ni kiye? Khair jo v ho tum dono ki jodi sbse best h. Maine life mei aise couple ni dhekhe h. Or hope dhekhu v na. Itne bade pagal ho dono ki kya mai bolu😂
    Ye conversation is blog ki best post h🙏
    Rahi baat teri Antim Yatra ki to use maine v feel kiya h😳

    Liked by 5 people

    1. Kya clear kruga dost??? Na wo mere cntrl mei hai na mai uske. Both are independent.
      Yaar simply tujhe chocolate milaa hai khaa lo or wrapper fek do…..ab uske wrapper ko padhoge, ingredients check kroge, cost analysis kroge, uspe hue research report padhoge??? Pagaal hoo kyaa yaar😂😂😂😂😂
      Kahaa na maine “tum kuch na kro….jo hota hai hone do….bs apni maujjj mei rhoo”
      Jite ji saaamil kraa diya na tujhe apni antim yatra mei😅😅

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  2. छोड़कर जानेवाले कभी याद नही करते
    और जो भूल से भी याद कर ले
    फिर इसका मतलब है कि उसने भुला ही नही।

    कुछ तो मजबूरियां रही होंगी,
    यूँ ही लोग बेवफा नही होते।

    Liked by 5 people

    1. यही तो इश्क है जनाब
      वफा का स्वाद चखाता है
      और बे-वफा का भी
      सच कहूं तो
      साला से इश्क बहुत तड़पाता है
      🙊🙊🙈🙈🙈

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        1. क्या करू सर
          सब से खुशियों को छोड़ा है, तब से वह खुद-ब-खुद चली आ रही है। और उन खुशियों में एक कारण आप भी हो “अफसाने तेरे पन्नों में’
          😄😄😄😄😄

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  3. वैसे जो भी हो—जबरदस्त कहानी एक उपन्यास कि तरह चलती हुई। जिसमें दर्द,उम्मीद की किरण जिंदा और सारी बातों के बीच मुख्य बात का शून्य होना टीसता है।
    कुछ तो सुखद होना चाहिए।

    या तो जोड़ लो,या तो छोड़ दो,
    दिल कोई खिलौना तो नही,
    जब मर्जी रिस्ता जोड़ लो।

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    1. बस इसी बात पर चिल्ला देता हूँ अक्सर मैं

      “खिलौनों से खेला करो,इंसानो से नहीं”

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  4. आज फोन प्रियजन के साथ संचार के लिए आवश्यक हो गया है। मैंने आपकी चैट का आनंद लिया है किसी ऐसे व्यक्ति के प्रति आपकी प्रेम की भावनाओं का स्पष्ट संकेत जो आपके साथ नहीं है। छंदों में, एक संवाद जो उसकी भावनाओं को समझाता है, जिसे किसी भी तरह से भुलाया नहीं जाता है, फिर भी उसे बहुत प्यार से याद करता है।
    मुझे खुशी है कि मैंने आपको पढ़ा
    चिली (दक्षिण अमेरिका) से बधाई
    मैनुएल

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        1. आपके प्यार भरे शब्दों की वजह से ही मैं लिख पाता हूं। पुनः आपका बहुत-बहुत धन्यवाद अपना बहुमूल्य समय देने के लिए💐😊

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  5. Mai hr ek words ko feel kr skti hu. Because ye real emotions h. Tumhare naam k baad sirf usi ka naam hoga or kisi ka v ni. Mn krta h tuje padhti hi rahu. Tum chup mt rho likhte jao.

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