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तो तुम मुझे याद रखना…..!!!!

April 6, 2020
Shanky❤Salty

Hi everyone! I’m so excited about this post!! Today I am doing a collab with my amazing friend Dr. Sakshi Pal.

बात तुम कहती हो याद रखने की
मैं चाहता हूँ तुझको साथ रखने की
सपनों की मंदाकिनी में जगमगाते रहना चाहती हो
मैं सारे ख्वाबों को सच कर साथ जीना चाहता हूँ
माना कि हंसी तेरी करोड़ों जुगुनुओं सी है
पर सच कहता हूँ दूर होकर मुझसे वो मुरझाए फूलों सी है
है काली घटा तेरी जुल्फों की
बिछड़ने की कल्पना से हो गई है जिन्दगी मेरी घनी काली सी
सब कुछ है याद मुझको
उस उगते चाँद की शीतलता से ले
उगते सुरज की किरण तक
जिन्दगी में तेरे अनगीनत सितारे होंगे
चाहती हो तुम यादों में
पर हकीकत तो ये है
जिंदगी में मैं न होऊगा
अब सुन लो
है मेरी भी चंद चाहतें
न चाहिए तू
और न चाहिए साथ तेरा
बस घाट हो मणिकरनिका का और
रहूँ मैं लकड़ियों के गांठ पर लेटा

Dr. Sakshi Pal Post
Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi

Author:

I am Ashish Kumar. I am known as Shanky. I was born and brought up in Ramgarh, Jharkhand. I have studied Electronics and Communication Engineering. I have written 6 books. I have come to know so much of my life that life makes me cry as much as death. Have you heard that this world laughs when no one has anything, if someone has everything, this world is longing for what I have, this world. Whatever I am, I belonged to my beloved Mahadev. What should I say about myself? Gradually you will know everything.

15 thoughts on “तो तुम मुझे याद रखना…..!!!!

  1. है काली घटा तेरी जुल्फों की
    बिछड़ने की कल्पना से हो गई है जिन्दगी मेरी घनी काली सी
    What a line yaar😍😍😍
    And thank you so much for accepting my humble request 🙏

    Liked by 3 people

  2. सपनों की मंदाकिनी में जगमगाते रहना चाहती हो

    मैं सारे ख्वाबों को सच कर साथ जीना चाहता हूँ

    Beautiful lines…
    Amazing poem.. keep the great work up..

    Liked by 3 people

  3. बहुत ही दर्दभरी रचना।👌👌

    भूले कहाँ की याद करूँ,
    हाँ मौन हूँ,क्या बात करूँ,
    तेरी आँखें नही चाहती देखना,
    फिर कैसे मैं अपनी जजबात कहूँ।
    तेरे सपने कल्पनाओं से परे,
    मेरे ख्वाब बिन तेरे अधजले,
    धूवाँ-धूवाँ रास्ते,
    जहाँ आए तेरे वास्ते,
    तेरे काले घने गेसू या,
    अपनी काली रात कहूँ,
    तेरी आँखें नही चाहती देखना,
    फिर कैसे मैं अपनी जजबात कहूँ।

    Liked by 2 people

  4. अति उत्तम 👌👌👍👍🙏

    छल से हम आये जरूर थे जीवन में आपके,
    पर प्रेम के बंधन में बंध गए है हम ,
    तुम तो मुक्त हो गए स्वयं को सौपकर हमे,
    और जन्म जन्म के दास हो गए है हम ।

    Liked by 2 people

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