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एक काँच का गुलदस्ता…..!!!!

February 5, 2019

Shanky❤Salty

एक काँच का गुलदस्ता था
बड़ा ही मजबूत सा था
देख हर कोई उसकी तारीफ करता था
उस गुलदस्ते में कुछ फूल थे भरे
बहुत ही प्यारे प्यारे से
परन्तु एक दिन कुछ ऐसा हुआ वह काँच का गुलदस्ता गिर पड़ा नीचे
परन्तु कैसे गिरा???
किसने गिराया????
कब गिराया????
क्यों गिराया????
खबर ही नहीं हुआ किसी को
वो काँच का गुलदस्ता टूट चुका था
बिखर चुके थे उसके सारे फूल
मैं परेशान सा हो गया
मैं बेचैन सा हो गया
मैं उन टुकड़ों को समेटने की कोशिश करता रहा
किन्तु वह और बिखर जाते थे
मैं रोने सा लगा था
महादेव को याद करने लगा था
हिम्मत दिया था भोलेनाथ जी ने मुझे
मैं फिर से कोशिश करने लगा
जैसे-जैसे मैं उन काँच के टुकड़ों को समेटता
आँखों से आँसू बहने लगते
पर इन सब की परवाह किये बगैर
मैं उन टुकड़ों को समेटता था
वक्त लगा पर लगभग समेट ही लिया था
फिर बैठा मैं उन सब को जोड़ने की खातिर
मेरे हाथों में जख्म हो चुके थे
रक्त बहने लगे थे
जैसे ही मैंने आखिरी टुकड़े को उठाया था
पता नहीं कैसे वो काँच का गुलदस्ता फिर टूट गया
और बहुत दुर तक बिखर गया
मैं रोता रहा चिल्लाता रहा
पर कोई न आया
लगता था मेरी ज़िंदगी टूट गई है
सब कुछ छुट गया है
मैं खुद से रुठ गया हूँ
मैं दोस्तों के पास भी गया
पर कुछ न हुआ
मैं दारू वाले के पास भी गया
पर कुछ न हुआ
मैं नाथ जी के सामने रोता रहा
फिर भी कुछ न हुआ
धड़कने तेज होती गई
पर उपाय कुछ न सुझा
कैसे जोडू उन बिखरे टुकड़ों को
समझ न आया
एक रात एक नास्तिक आए
मुझको चुप कराया
उम्मीद का किरण दिखाया
महादेव पर विश्वास दिलाया
सब कुछ छोड़
निश्चिंत हो जाने का पाठ पढ़ाया
फिर मुझको प्यार से सुलाया
सुबह कि किरण के साथ
बिन बाँसुरी कृष्ण आए है
मेरे आँखों में फिर से आँसू आए है
ये क्या
बिन बाँसुरी कृष्ण ने ये कैसी धुन है बजाई
मेरे काँच के गुलदस्ते को पल भर में जोड़ है दिखाई
उसमें फिर से फुल है सजाई
मैं क्या कहूं
नाथ जी कि लीला देख मेरे आँखों में फिर से आँसू है आईं

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Great Writer Ziddy Nidhi

Author:

I am Ashish Kumar. I am known as Shanky. I was born and brought up in Ramgarh, Jharkhand. I have studied Electronics and Communication Engineering. I have written 6 books. I have come to know so much of my life that life makes me cry as much as death. Have you heard that this world laughs when no one has anything, if someone has everything, this world is longing for what I have, this world. Whatever I am, I belonged to my beloved Mahadev. What should I say about myself? Gradually you will know everything.

22 thoughts on “एक काँच का गुलदस्ता…..!!!!

  1. Bina sir-pair ki kavita h. Stranger’s to smjh hi ni payege but is guldaste ki asli story jisne jani h unke liye teri ye writing gazab h. Speechless kr diya tune shanky. Hr ek word ka mtlb h wo v baut khas. Salute h dost tujhe.

    Liked by 2 people

  2. Bahut kuchh kahti sundar kavita……..ese kahi aur bhi padhaa hai….shayad your quote par …..

    ये जीवन एक गुलदस्ता सा,थी महक समेंटे फूलों की,
    एक चोट लगा और टूट गया|
    की जतन बहुत फिर जुड़ जाए,
    हर फूल दुबारा खिल जाए,
    जो तोड़ा वो भी मिल जाए,
    पर ख्वाब स्वयं से रूठ गया,
    ये जीवन भी गुलदस्ता सा,थी महक समेंटे फूलों की,
    एक चोट लगा और टूट गया|

    Liked by 1 person

    1. आप सब समझ जाते हो सर
      सच्चे वाले लेखक हो आप
      आप सिर्फ लिखते ही नहीं
      मुझको पढ़ मेरी भावनाओं को छु देते हो🙏

      Liked by 1 person

      1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका। वैसे आपके शब्दों ने कुछ लिखने को प्रेरित किया और पद बन गया।

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  3. जीवन को एक हजार टुकड़ों में भी विभाजित किया जा सकता है क्योंकि हम नहीं जानते कि कैसे जीना है। प्रश्न यह जानना है कि टुकड़ों को एक साथ कैसे ठीक किया जाए और इसे अच्छी तरह से करने के लिए फिर से प्रयास करें। आपकी कविता दुर्जेय है। जीवन का प्रतिबिंब। आपका सप्ताह शुभ हो

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