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ना जाने कैसे…..!!!!

September 18, 2019
Shanky❤Salty
सुनो ना…..!!!!
हाँ,हाँ तुमसे ही कह रहा हूँ
बस दो मिनट लगेंगे
सुन लो ना
फ़िर चले जाना ना
देखो बात एेसी है
कि अब कुछ अच्छा सा नहीं लगता है
एक दिल था ना
हाँ वही दिल
जिसको वक्त और हालात ने तोड़ दिया था
वो भी अब ठीक से काम नहीं कर रहा है
वक़्त-बे-वक़्त धड़कनें तेज़ होने लगती हैं
ना चाहते हुए भी डिप्रेशन दूर करने की गोलियाँ लेने पड़ती है
पर अब तो उन गोलियाँ ने भी मुझ पर अपना असर करना छोड़ा दिया है
ना जाने क्यों ज़िन्दगी मुझसे पल-पल रुठ जाती है
अब तुम आ ही गयी हो तो मुझे मनाने कि कोई युक्ती तो बता दो
थक सा गया हूँ इस ज़िन्दगी से
दिल करता है सब कुछ ख़त्म मैं कर दूँ
पर मैं कायर नहीं ना हूँ
मैं शांति से सोना चाहता हूँ अब
पर तुम तो अच्छे से जानती ही हो ना
नींद और मेरा कोई वास्ता नहीं है बिन दवा के
सुना था “दवा से ज़्यादा दुआ में असर होता है”
पर ज़िन्दगी में ना जाने क्यों बद्दुआ ही मिली
पर अब जो भी हो मुझे निश्चिंत होकर नारायण में सोना है
मैं जानता हूं वो वक़्त कभी लौट नहीं आयेगा
पर मुझे ये ज़रूर बता दो
वो यादें क्यों लौट आती है ???
चलो आती है तो आने दो पर जीने क्यों नहीं देती है ???
लगता है दो मिनट हो गये हैं
तुम्हें भी जल्दी होगी ना
अच्छा कोई नहीं फ़िर कभी
पर याद रखना हारा नहीं हूँ
अभी थक गया हूं सिर्फ़
जल्द ही आऊँगा
ग़म का ज़हर पीता जाऊँगा
और मुस्कराते हुए ज़िन्दगी को लिखता जाऊँगा…!!!

Written by:- Ashish Kumar
Modified by:- A Wonderful Writer Radha Agarwal

Author:

I am Ashish Kumar. I am known as Shanky. I was born and brought up in Ramgarh, Jharkhand. I have studied Electronics and Communication Engineering. I have written 6 books. I have come to know so much of my life that life makes me cry as much as death. Have you heard that this world laughs when no one has anything, if someone has everything, this world is longing for what I have, this world. Whatever I am, I belonged to my beloved Mahadev. What should I say about myself? Gradually you will know everything.

21 thoughts on “ना जाने कैसे…..!!!!

  1. Bahut hi khubsurat kavita likhi hai…….aakhir ye yaaaden kyun nahi jaati!

    टूटा दिल ही सही,
    भुला कुछ भी नहीं,
    यूँ ही हँसते हमें पाओगे,
    तुमने चाहा बहुत,
    हम तड़पते रहें,
    तुमने चाहा बहुत,
    यूँ ही मरते रहें,
    अश्क आँखों में ना पाओगे,
    मैं भी चाहूँ की सबकुछ भुला दूँ,
    यादें तेरी मैं दिल से मिटा दूँ,
    हमने बोला बहुत,
    हाँथ जोड़ा बहुत
    जिद्द पर अब भी अड़ा,
    दिल ये भोला बहुत,
    दर्द है ना समझ पावोगे,
    यूँ ही हँसते हमें पाओगे|

    Liked by 1 person

    1. हर पंक्तियों को मैं महसूस कर सकता हूँ
      आप हर बार मेरे दिल की बातें पढ़ लेते है।

      तुमने चाहा बहुत
      हम तड़पते रहें
      तुमने चाहा बहुत
      यूँ ही मरते रहें
      अश्क आँखों में ना पाओगे

      बिलकुल एैसा ही होता है

      Liked by 1 person

      1. बस दिल में पढ़ते पढ़ते कुछ शब्द आए वो लिख दिया। धन्यवाद आपका। आपकी रचना बहुत ही दर्दभरी होती है।

        Liked by 1 person

        1. आप पर माँ सरस्वती कि बहुत कृपा है। जो भी लिखते है दिल को छुती है। और हर कोई आपके लिखे शब्दों से प्रभावित हो जाता है।😊😊😊😊

          Liked by 2 people

  2. जीवन हमेशा हमें नए अवसर देता है। अवसाद वह जहर है जो हमें इसका आनंद नहीं लेने देता। और आप बिलकुल सही हैं। आखिरी मिनट नहीं लौटा, लेकिन होप हमारे करीब है। यह आंतरिक संवेदनशीलता से भरी एक कविता है, जो हमें खुद को प्रतिबिंबित करती है। मुझे यह बहुत पसंद आया। मेरा सम्मान प्राप्त करें।

    Liked by 1 person

    1. जानकर बहुत खुशी हुईं कि आपको यह पसंद आया। हाँ और ये होप हि है जो हमें जीने का सहारा देती है।
      बहुत बहुत धन्यवाद सर आपका….अपना बहुमूल्य समय देकर इसको पढ़ने के लिए🙏😊😊😇😇

      Liked by 2 people

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