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जिन्दगी कि जंग मौत से…..

April 30, 2018
Shanky❤Salty

मैं भी बिस्तर पर लेटा था
9 घंटे कि मौत से जंग के बाद

मैं कहाँ हूँ?

मेरा गला पीड़ादायक लगता था
मेरा दिल दर्द में चिल्लाता था

मैं चारों ओर देख रहा था

मैं एक सफेद चादर से लिपटा था
जो खुन से चंद मिनटों में लाल हो गया

मुझे स्थानांतरित करने के लिए
मेरे दस्तखत कि जरूरत थी

मुझे मृत्यु का भय था

क्युकिं मौत से जंग अभी अधूरी थी

मेरी ख्वाहिश माँ-पापा को देखने कि थी
मैं शांत होने की कोशिश करता तो
चंद मिनटों में रक्त कि नदियाँ मुँह से शुरू हो जाती

मैं लाचार महसूस कर रहा था
मेरे साथ क्या हुआ था?

मैं अभी भी बिस्तर पर लेटा था
मम्मी-पापा आँखों में आंसु लिए सामने थे

पापा के आँखों से मेरे मौत के नाम का आंसु बह गया था
मैंने हाथ बढ़ाया आखिरी सप्रश के लिए!!!!
तब-तक पापा ने
मेरे मृत्यु के कागज पे दस्तखत कर दिए

मैंनें भी उस कागज पे “DEATH???” लिख दिया
फिर मुझे ऑपरेशन कक्ष में स्थानांतरित किया गया

एक कैमरा नाक मे डाल दिया
और लाइव अॉपरेशन सुरू किया
दर्द ने मुझे अपनी बाँहों मे जकड़ लिया

मेरी आँखे बंद हो रही थी
शायद मैं मृत्यु के गोद में था

ह्रदय कि गति अधिकतम 147bpm हो गई थी
और न्यूनतम 27bpm
मृत्यु गले लगाने को बेताब थी
क्युकिं किसी अपने ने मेरे मरने कि दुअा कि थी

पर मौत को मात देना मेरे नसीब में है
क्युकिं मेरी किस्मत में

  • मम्मी का विश्वास
  • पापा का प्यार मे रोना
  • दीदी का रोते हुए राखी बांधना
  • दोस्तों की दुआ
  • ईश्वर के सामने मेरी सलामतगी के लिए उपवास रखना
  • डॉक्टरों की मेहनत
  • नर्सों की सेवा

4दिन वेंटीलेटर पे मौत से जंग
5दिन आईसीयू में जिंदा लास बन के रहना

मुझसे मिलने को बेताब हर कोई था

या

मेरी मौत कि खबर जानने को बेचैन

मैं 4913 में बेजान सा पड़ा हुआ
मैं यहाँ क्यों हूँ?

क्युकिं मै चल नहीं सकता था
बोल नहीं सकता था
खा नहीं सकता था
मेरे हाथ ने भी अपनी शक्ति खो दि थी

सिर्फ

देख सकता
सुन सकता
और जैसे-तैसे अपनी पिड़ा को सफेद कागज पे लिख देता

मैनें ज़ोर से आवज निकाला
मम्मी दौड़ के आई
मेरे दिल पे हाथ रखी
मेरा ह्रदय जोर से धड़क रहा था
शायद मृत्यु दस्तक दे रही थी
मेरा शरीर दुख़ रहा है
मुझे याद है

मैं एक बिस्तर पर मौत को मात देे लेटा था
पर रक्त अभी भी हर सुबह मेरे मुँह से आता था
सायद मैं उसे पसंद था

मुझे याद है
21दिन कि ये अस्पताल कि बदनाम कहानी
और खून कि नदियाँ
मुझे याद है कि मैं दर्द में था …..
अपनो से मिलने को बेताब था क्युकिं जिन्दगी अभी अधूरी है……..

Author:

I am Ashish Kumar. I am known as Shanky. I was born and brought up in Ramgarh, Jharkhand. I have studied Electronics and Communication Engineering. I have written 6 books. I have come to know so much of my life that life makes me cry as much as death. Have you heard that this world laughs when no one has anything, if someone has everything, this world is longing for what I have, this world. Whatever I am, I belonged to my beloved Mahadev. What should I say about myself? Gradually you will know everything.

25 thoughts on “जिन्दगी कि जंग मौत से…..

      1. बहुत ही भयावह है।रोंगटे खड़े हो गए पढ़कर।ऊपरवाले को बहुत बहुत धन्यवाद की आप हमारे बीच हैं अपनी आपबीती सुनाने को।

        Liked by 1 person

        1. ईश्वर का आशीर्वाद और आप लोगों का प्यार जब साथ हो तो हमें कुछ नहीं हो सकता ☺

          Liked by 1 person

  1. “बदनाम कहानी” मत कहो जिन्दगी में ग़म कि बादल छाई है लेकिन बादल छटेगा और खुशियों कि धूप आएँगी।

    Liked by 1 person

  2. Qismat badaldi vekhi main
    Ehhe jag badalda vekheya
    Main badalde vekhe apne
    Main Rabb badalda vekheya
    👆 this song is dedicated for my dear shanky😜😜

    Liked by 1 person

    1. आप सभी कि दुआओं ने और भोलेनाथ कि कृपा ने सब कुछ ठीक कर दिया। मौत गले लगाने को बेताब थी पर भोलेनाथ ने लगा लिया🙏😊

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