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अमेरिका संस्कृत को NASA की भाषा बनाने मे जुटा ।

May 25, 2017

Shanky❤Salty



देवभाषा संस्कृत की गूंज कुछ साल बाद अंतरिक्ष में सुनाई दे सकती है। इसके वैज्ञानिक पहलू का मुरीद हुआ अमेरिका नासा की भाषा बनाने की कसरत में जुटा है। इस प्रोजेक्ट पर भारतीय संस्कृत विद्वानों के इन्कार के बाद अमेरिका अपनी नई पीढ़ी को इस भाषा में पारंगत करने में जुट गया है।

गत दिनों आगरा दौरे पर आए अरविंद फाउंडेशन [इंडियन कल्चर] पांडिचेरी के निदेशक संपदानंद मिश्रा ने ‘जागरण’ से बातचीत में यह रहस्योद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि नासा के वैज्ञानिक रिकब्रिग्स ने 1985 में भारत से संस्कृत के एक हजार प्रकांड विद्वानों को बुलाया था। उन्हें नासा में नौकरी का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने बताया कि संस्कृत ऐसी प्राकृतिक भाषा है, जिसमें सूत्र के रूप में कंप्यूटर के जरिए कोई भी संदेश कम से कम शब्दों में भेजा जा सकता है। विदेशी उपयोग में अपनी भाषा की मदद देने से उन विद्वानों ने इन्कार कर दिया था।
इसके बाद कई अन्य वैज्ञानिक पहलू समझते हुए अमेरिका ने वहां नर्सरी क्लास से ही बच्चों को संस्कृत की शिक्षा शुरू कर दी है। नासा के ‘मिशन संस्कृत’ की पुष्टि उसकी वेबसाइट भी करती है। उसमें स्पष्ट लिखा है कि 20 साल से नासा संस्कृत पर काफी पैसा और मेहनत कर चुकी है। साथ ही इसके कंप्यूटर प्रयोग के लिए सर्वश्रेष्ठभाषा का भी उल्लेख है।
स्पीच थैरेपी : वैज्ञानिकों का मानना है कि संस्कृत पढ़ने से गणित और विज्ञान की शिक्षा में आसानी होती है, क्योंकि इसके पढ़ने से मन में एकाग्रता आती है। वर्णमाला भी वैज्ञानिक है। इसके उच्चारण मात्र से ही गले का स्वर स्पष्ट होता है। रचनात्मक और कल्पना शक्ति को बढ़ावा मिलता है। स्मरण शक्ति के लिए भी संस्कृत काफी कारगर है। मिश्रा ने बताया कि कॉल सेंटर में कार्य करने वाले युवक-युवती भी संस्कृत का उच्चारण करके अपनी वाणी को शुद्ध कर रहे हैं। न्यूज रीडर, फिल्म और थिएटर के आर्टिस्ट के लिए यह एक उपचार साबित हो रहा है। अमेरिका में संस्कृत को स्पीच थेरेपी के रूप में स्वीकृति मिल चुकी है।

Source:-“Jagran”

Author:

I am Ashish Kumar. I am known as Shanky. I was born and brought up in Ramgarh, Jharkhand. I have studied Electronics and Communication Engineering. I have written 6 books. I have come to know so much of my life that life makes me cry as much as death. Have you heard that this world laughs when no one has anything, if someone has everything, this world is longing for what I have, this world. Whatever I am, I belonged to my beloved Mahadev. What should I say about myself? Gradually you will know everything.

11 thoughts on “अमेरिका संस्कृत को NASA की भाषा बनाने मे जुटा ।

  1. Dear Shankysalty, your blog post is very gud keep it up dear & I request you to dear please read the Artificial Intelligence book. In AF book you can learn more things about Sanskrit & computer programming.

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    1. Singh Sir phle to mai aapko bata du ki ye AF koi book ni h AI short form hota h Artificial Intelligence ka☺ or maine AI ka basics or NASA & Jagran ko study krne k baad hi ye blog likhi h………..& Sir thanx for your comment & feedback about my blog. I hope you may like my blog post.

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      1. My dear friend aapka attitude bhaut hi acha lga……….may god bless you my dear……………i hope you can achieve the success as soon as possible.

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  2. हमारे भारतीयों को संस्कृत भाषा सीखने में किसी भी तरह की कठिनाइयाँ नहीं हो सकता क्योंकि तमिल भाषा के सिवा हर एक भारतीय राज्य भाषा संस्कृत से जुड़ी है और उच्चारण भी आसानी से आती है। सौभाग्य की बात यह है कि संस्कृत भारती संस्था इसे एक बेहतर कार्य रूप दे रही है। तमिलनाडु में भी कई लोग इस भाषा को सीखने में उत्सुक हैं।

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    1. जी बिल्कुल!!!!!
      संस्कृत एक सनातन भाषा है।
      कर्नाटक के मत्तुर गाँव में कुल 537 परिवार रहते हैं जो 2864 की जनसँख्या को योगदान देते हैं। 2011 की जनगणना के हिसाब से मत्तुर गाँव में 1454 आदमी और 1410 औरतें रहती हैं और यकीन मानिए, पूरी जनसंख्या रोज़मर्रा के संवाद में संस्कृत का उपयोग करती है। करीब-करीब 600 साल पहले संकेथी ब्राम्हण समुदाय के लोग केरल से आकर इस गाँव में बस गए और तब से लेकर आज तक मत्तुर गाँव को अपना घर मानकर रहते हैं।

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      1. सही कहा। मैं बंगलूरू से मैसूर जाते समय राह में मद्दूर से हमारे यान हुई। वहाँ की मद्दूर वडा बहुत मशहूर है। वह गाँव शिमोगा के पास है।
        आपके ज्ञान पर बधाई हो। 😇👌👍👏💐

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        1. ये तो आपका सौभाग्य है कि आप वैसे गाँव का दर्शन कर पाती है। मुझे तो सोच के हि खुशी होती है कि वो गाँव कितना प्यारा होगा।
          धन्यवाद आपका🙏😊

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          1. जी हाँ। चेन्नै और बंगलूर करीब के हैं और दोनों राजधानी नगर भी हैं। हमारे ज्यादा रिश्तेदार वहाँ होने के नाते दोनों जगहों को अक्सर जाना पड़ता है। वैसे ही एक मौका मिला मद्दूर द्वारा जाने का।सौभाग्य की बात ही है।

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