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आखिर क्या है ? वैलेंटाइन डे का वास्तविक इतिहास।

18th February 2017

मित्रो यूरोप (और अमेरिका) का समाज जो है वो रखैलों (Kept) में विश्वासकरताहै पत्नियों में नहीं,। यूरोप और अमेरिका में आपको शायद ही ऐसा कोई पुरुष या महिला मिले जिसकी एक शादी हुई हो, जिनका एक पुरुष से या एक स्त्री से सम्बन्ध रहा हो और ये एक दो नहीं हजारों साल की परम्परा है उनके यहाँ |

आपने एक शब्द सुना होगा “Live in Relationship” ये शब्द आज कल हमारेदेश में भी नव-अिभजात्य वर्ग में चलरहा है, इसका मतलब होता है कि “बिना शादी के पती-पत्नी की तरह से रहना”| तो उनके यहाँ, मतलब यूरोप और अमेरिका में ये परंपरा आज भी चलती है,

खुद प्लेटो (एक यूरोपीय दार्शनिक) का एक स्त्री से सम्बन्ध नहीं रहा,

प्लेटोने लिखा है कि “मेरा 20-22 स्त्रीयों से सम्बन्ध रहा है” अरस्तु भी यही कहताहै, देकातेर् भी यही कहता है, और रूसो ने तो अपनी आत्मकथा में लिखा है कि “एक स्त्री के साथ रहना, ये तोकभी संभव ही नहीं हो सकता, It’s Highly Impossible” | तो वहां एक पत्नि जैसा कुछ होता नहीं |

इन सभी महान दार्शनिकों का तो कहना है कि “स्त्री में तो आत्मा ही नहींहोती” “स्त्री तो मेज और कुर्सी के समान हैं, जब पुराने से मन भर गया तोपुराना हटा के नया ले आये ” | तो बीच-बीच में यूरोप में कुछ-कुछ ऐसेलोग निकले जिन्होंने इन बातों का विरोध किया और इन रहन-सहन की व्यवस्थाओं पर कड़ी टिप्पणी की |

उन कुछ लोगों में से एक ऐसे ही यूरोपियन व्यक्ति थे जो आज से लगभग 1500 साल पहले पैदा हुए, उनका नाम था– वैलेंटाइन | और ये कहानी है 478 AD (after death) की, यानि ईशा की मृत्यु के बाद |

उस वैलेंटाइन नाम के महापुरुष का कहना था कि “हम लोग (यूरोप के लोग) जोशारीरिक सम्बन्ध रखते हैं कुत्तों की तरह से, जानवरों की तरह से, ये अच्छानहीं है, इससे सेक्स-जनित रोग (veneral disease) होते हैं, इनको सुधारो, एक पति-एक पत्नी के साथ रहो, विवाह कर के रहो, शारीरिक संबंधो को उसके बाद ही शुरू करो” ऐसी-ऐसी बातें वो करते थे और वो वैलेंटाइन महाशय उन सभी लोगों को येसब सिखाते थे, बताते थे, जो उनके पासआते थे, रोज उनका भाषण यही चलता था रोम में घूम-घूम कर |

संयोग से वो चर्च के पादरी हो गए तो चर्च में आने वाले हर व्यक्ति को यहीबताते थे, तो लोग उनसे पूछते थे कि ये वायरस आप में कहाँ से घुस गया, येतोहमारे यूरोप में कहीं नहीं है, तो वोकहते थे कि “आजकल मैं भारतीय सभ्यताऔर दशर्न का अध्ययन कर रहा हूँ, और मुझे लगता है कि वो परफेक्ट है, और इसिलए मैं चाहता हूँ कि आप लोग इसे मानो”, तो कुछ लोग उनकी बात को मानते थे, तो जो लोग उनकी बात को मानते थे, उनकी शादियाँ वो चर्च में कराते थे और एक-दो नहीं उन्होंने सैकड़ों शादियाँ करवाई थी |

जिस समय वैलेंटाइन हुए, उस समय रोम का राजा था क्लौड़ीयस, क्लौड़ीयस नेकहा कि “ये जो आदमी है-वैलेंटाइन, ये हमारे यूरोप की परंपरा को बिगाड़रहा है, हम बिना शादी के रहने वाले लोग हैं, मौज-मजे में डूबे रहने वाले लोग हैं, और ये शादियाँ करवाता फ़िर रहा है, ये तो अपसंस्कृति फैला रहा है, हमारी संस्कृति को नष्ट कर रहा है”, तो क्लौड़ीयस ने आदेश दियाकि “जाओ वैलेंटाइन को पकड़ के लाओ “, तो उसके सैनिक वैलेंटाइन को पकड़के ले आये |

क्लौड़ीयस ने वैलेंटाइन से कहा कि “ये तुम क्या गलत काम कर रहे हो ? तुम अधर्म र्फैला रहे हो, अपसंस्कृति ला रहे हो” तो वैलेंटाइन ने कहा कि “मुझे लगता है कि ये ठीक है” , क्लौड़ीयस ने उसकी एक बात न सुनी और उसने वैलेंटाइन कोफाँसी की सजा दे दी, आरोप क्या था किवो बच्चों की शादियाँ कराते थे, मतलब शादी करना जुर्म था|

क्लौड़ीयस ने उन सभी बच्चों को बुलाया, जिनकी शादी वैलेंटाइन नेकरवाई थी और उन सभी के सामने वैलेंटाइन को 14 फ़रवरी 498 ईःवी कोफाँसी दे दिया गया |पता नहीं आप में से कितने लोगों को मालूम है कि पूरे यूरोप में 1950 ईःवी तकखुले मैदान में, सावर्जानिक तौर पर फाँसी देने की परंपरा थी |

तो जिन बच्चोंने वैलेंटाइन के कहने पर शादी की थीवो बहुत दुखी हुए और उन सब ने उसवैलेंटाइन की दुखद याद में 14 फ़रवरी को वैलेंटाइन डे मनाना शुरू किया तो उसदिन से यूरोप में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है | मतलब ये हुआ कि वैलेंटाइन, जो कि यूरोप में शादियाँकरवाते फ़िरते थे, चूकी राजा ने उनको फाँसी की सजा दे दी, तो उनकी याद में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है| ये था वैलेंटाइन डे का इतिहास और इसके पीछे का आधार |

अब यही वैलेंटाइन डे भारत आ गया है जहाँ शादी होना एकदम सामान्य बात हैयहाँ तो कोई बिना शादी के घूमता हो तो अद्भुत या अचरज लगे लेकिन यूरोप में शादी होना ही सबसे असामान्य बातहै | अब ये वैलेंटाइन डे हमारे स्कूलों में कॉलजों में आ गया है औरबड़े धूम-धाम से मनाया जा रहा है औरहमारे यहाँ के लड़के-लड़िकयां बिनासोचे-समझे एक दुसरे को वैलेंटाइन डे का कार्ड दे रहे हैं|

और जो कार्ड होता है उसमे लिखा होता है ” Would You Be My Valentine” जिसका मतलब होता है “क्या आप मुझसे शादी करेंगे” | मतलबतो किसी को मालूम होता नहीं है,वो समझते हैं कि जिससे हम प्यार करते हैं उन्हें ये कार्ड देना चाहिए तो वो इसी कार्ड को अपने मम्मी-पापा को भी दे देते हैं, दादा-दादी को भी दे देते हैं और एक दो नहीं दस-बीस लोगों को ये ही कार्ड वो दे देते हैं |

मित्रो जब बिना सोचे समझे नकल की जाती है तो ये ही होता है ।और इस धंधे में बड़ी-बड़ी कंपिनयाँ लग गयी हैं जिनको कार्ड बेचना है, जिनकोगिफ्ट बेचना है, जिनको चाकलेट बेचनीहैं और टेलीविजन चैनल वालों ने इसकाधुआधार प्रचार कर दिया | सब बातें छोड़िए मित्रो पिछले वर्ष online एक website ने मात्र वैलेंटाईन डे पर डेड लाख अधिक कंडोम की बिक्री की , सोचिए पूरे देश मे ये आंकड़ा क्या रहा होगा । वास्तव मे ये विदेशी त्योहार हमे किस और धकेल रहे है आप अनुमान लगा लीजिये ,ऐसे त्योहारों से भारत का भविष्य क्या होगा ।

ये सब लिखने के पीछे का उद्देँशय यही है कि नक़ल आप करें तो उसमे अकल भी लगा लिया करें | उनके यहाँ साधारणतया शादियाँ नहीं होती है और जो शादी करते हैं वो वैलेंटाइन डे मनाते हैं और लेकिन हम भारत में क्यों ??

ShankySalty

Author:

I am Ashish Kumar. I am known as Shanky. I was born and brought up in Ramgarh, Jharkhand. I have studied Electronics and Communication Engineering. I have written 6 books. I have come to know so much of my life that life makes me cry as much as death. Have you heard that this world laughs when no one has anything, if someone has everything, this world is longing for what I have, this world. Whatever I am, I belonged to my beloved Mahadev. What should I say about myself? Gradually you will know everything.

3 thoughts on “आखिर क्या है ? वैलेंटाइन डे का वास्तविक इतिहास।

    1. बधाई के लिए धन्यवाद पर दुख होता है कि यह संदेश केवल यही तक सिमट के रह जाता है। लोग इसे अपनाते नहीं है।😳

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